Braj Bhushan Dubey : जवान बेटे के लाश की आरती पिता कर रहा था… वह भी गा गाकर। धन्य हैं बाबा हरदेव जी महाराज। सम्मानित साथियों। मेरे एक सहयोगी हरिवंश गौतम (अविवाहित युवा) का देहान्त ब्लड कैंसर के कारण हो गया। हम सभी दर्जनो मित्रों ने उन्हें ब्लड दिया। हरिवंश की चिता गाजीपुर के श्मशानघाट पर सजा दी गयी। हरिवंश के पिता, चाचा, परिवार, तथा निरंकारी मिशन के लोग थाली में आरती सजाकर पार्थिव शरीर/चेहरे के पास सस्वर आरती करना शुरू किये। मुझे आरती में गाये भजन का स्मरण नहीं हो पा रहा है किन्तु भाव यही था कि मेरा दिया हुआ था इसे मैने बुला लिया। आया है सो जायेगा। आदि आदि।
उस आरती के बाद हरिवंश के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी गयी। मैं यह सब देखकर हतप्रभ था। सीख, उपदेश व सान्तवना तो सभी देते हैं किन्तु जिसका जवान बेटा मरा हो और पिता लाश पर आरती करके धैर्य को कायम रखे, शायद ही देखने को मिले। वे लोग निरंकारी मिशन से जुडे हैं जिनके गुरू हैं पूज्य बाबा हरदेव सिंह जी महाराज। प्यार से बोलो धन निंरंकार जी। एक तूं ही निरंकार। उल्लेखनीय है कि हरिवंश गौतम उच्च शिक्षा प्राप्त थे। वे इलेक्टानिक चैनल में काम करते थे। कैन्सर होने के बाद वे साहस के साथ कई वर्ष तक लडते रहे। गरीबी के कारण हम लोग उचित इलाज भी नहीं करा पाये। वे अनुसूचित जाति से सम्बन्ध रखते थे। उनका घर गाजीपुर जनपद के नसीरपुर ग्राम में था।
गाजीपुर के सामाजिक कार्यकर्ता और नेता ब्रज भूषण दुबे के वॉल से.





