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काटजू जैसे लोग न्याय को बेमानी करने की कोशिश कर रहे

Mukesh Kumar : संजय दत्त को अभी सज़ा सुनाई ही गई है कि एक पूरा समुदाय उन्हें माफ़ी दिलवाने की कोशिशों में जुट गया है। इसमें राजनीति और फिल्मी दुनिया से जुड़े लोग तो हैं ही, काटजू साहब जैसे कानूनदाँ भी हैं जो सीधे-सीधे राज्यपाल से गुहार लगा रहे हैं। मीडिया तो ख़ैर संजू बाबा के लिए हमदर्दी जुटाने में लगा ही हुआ है। सवाल उठता है कि क्यों मिलना चाहिए उन्हें माफ़ी? क्या उन्होंने अपराध नहीं किया है और जो अपराध किया है क्या वह मामूली है या इसलिए उन्हें बख्श दिया जाना चाहिए कि उनकी शादी हो गई है और तीन बच्चे हैं?

Mukesh Kumar : संजय दत्त को अभी सज़ा सुनाई ही गई है कि एक पूरा समुदाय उन्हें माफ़ी दिलवाने की कोशिशों में जुट गया है। इसमें राजनीति और फिल्मी दुनिया से जुड़े लोग तो हैं ही, काटजू साहब जैसे कानूनदाँ भी हैं जो सीधे-सीधे राज्यपाल से गुहार लगा रहे हैं। मीडिया तो ख़ैर संजू बाबा के लिए हमदर्दी जुटाने में लगा ही हुआ है। सवाल उठता है कि क्यों मिलना चाहिए उन्हें माफ़ी? क्या उन्होंने अपराध नहीं किया है और जो अपराध किया है क्या वह मामूली है या इसलिए उन्हें बख्श दिया जाना चाहिए कि उनकी शादी हो गई है और तीन बच्चे हैं?

क्या ये आधार बनाया जा सकता है कि डेढ़ साल की जेल वे काट चुके हैं और बीस साल अपराधी होने की यातना भुगत रहे हैं? अगर उनके प्रति हमदर्दी और नरमी के लिए ये आधार बताए जा रहे हैं तो फिर दूसरे मामलों में उन पर गौर क्यों नहीं किया जाना चाहिए? क्या इसलिए कि वे संजय दत्त हैं…जाने-माने अभिनेता हैं….उनके शुभचिंतकों की लंबी कतार है और सत्ता तथा शासन में उनके ढेर सारे पैरोकार हैं? सब जानते है कि इन्हीं वजहों से वे टाडा के आरोपों से मुक्त हुए और उन्हें सज़ा भी कम मिली है….मगर ये भी उन्हें मंज़ूर नहीं है। चलिए अदालत ने तो फिर भी एक हद तक न्याय कर दिया है, मगर अब उसे बेमानी करने की कोशिशें की जा रही हैं। ये एक बड़ा गुनाह है और इसमें वे तमाम लोग शामिल माने जाएंगे जो संजय दत्त की सज़ा कम या ख़त्म करवाने के अभियान में साझीदार होंगे।

उपरोक्त टिप्पणी वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार ने फेसबुक पर प्रकाशित की है. मुकेश कुमार जाने-माने पत्रकार हैं. कई चैनलों के संस्थापक संपादक रह चुके हैं. मुकेश कुमार का मीडिया पर नियमित स्तंभ प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका हंस में प्रकाशित होता है.

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