Vivek Singh : एक समय काटजू साहब कहा करते थे कि मीडिया हमेशा फिल्म वालों की खबर देने में लगी है, और ये साहब तो खुद ही एक फिल्मस्टार की सजा को माफ़ करवाने की मुहिम में लग गए, अरे काटजू साहब कुछ तो शर्म करिए कितने लोग जेलों में बंद पड़े हैं क्यूंकि उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही है और आप हैं की जिसे सजा मिल गयी उस माफ़ी देने की बात कर रहे है क्यूंकि वो अमीरजादा है, क्या ऐसे ही अब देश का हर बड़ा आदमी बड़े आदमी की मदद करेगा साहब?
Mayank Saxena : तो क्या इस से अंदाज़ा लगाया जाए कि एक जज के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में काटजू किस आधार पर फैसले करते रहे होंगे…?
Ravindra Ranjan : बस अब कुछ 'भारत रत्न' टाइप का मांग लो भाई लोगों, इतनी 'महान' शख्सियत के लिए इत्ता तो बनता है…
Abhishek Upadhyay : प्रियंका चोपड़ा का ह्दय बुरी तरह से विचलित है। बिपाशा बसु तो लग रहा है कि बस अब रो ही देंगी। करन जौहर ने तो कीर्तिमान कायम कर दिया है, कहते हैं कि दुनिया में अब तक जितने भी इंसान देखे हैं, संजय दत्त उनमें सबसे अच्छे इंसान हैं। अरशद वारसी भीतर तक स्तब्ध हैं, समझ नहीं पा रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने ये क्या कर दिया? ……………. बहुत लंबी कतार है, संजू बाबा के लिए आंसू बहाने वालों की। बड़े नामी चेहरे हैं। ऑडी और बीएमडब्ल्यू में समाए थुलथुल शरीर हैं। विदेशी मदिरा से कुल्ला करती अमीर बाप की बिगड़ी औलादें हैं। प्लास्टिक सर्जरी से नाक और ओंठ के उठान का कोण तय करती खूबसूरत अभिनेत्रियां हैं। मालबरो के धुएं का छल्ला बनाकर ट्वीटर की नथ उतारते नई पुरानी पीढ़ी के नायक हैं। सब स्तब्ध हैं। लगभग मरे जा रहे हैं, संजू बाबा के लिए। उस बिगड़ैल अमीरजादे के लिए, जो मुंबई धमाके में शामिल दाऊद और अनीस के गुर्गों से एके 56 लेकर बैठा था। जो मुंबई धमाकों के बाद भी इसी एके 56 को संभाले अट्टहास कर रहा था और उस अट्टहास से धमाके में मारे गए लोगों की अर्थियां संभालने वालों के कान झनझना उठे थे। अब तक पूरे देश को धमाके के आरोपियों का नाम मालूम था। बावजूद ये "सबसे अच्छा और सच्चा इंसान" उन्हीं दरिंदों के साथ बैठा वक्त के गम गलत कर रहा था। शायद हमारी आपकी मां जैसे शक्ल वाली कोई आम सी औरत उस वक्त मुंबई के किसी कब्रिस्तान की किसी मजार पर अपनी वल्दियत का फातिहा पढ़ रही थी, जब ये बिगड़ैल अमीरजादा दाउद के गुर्गों को एके 56 ठिकाने लगाने की सुपारी दे रहा था। अजीब कानून है इस देश का। सीबीआई भी देश के इस "सबसे अच्छे और सच्चे इंसान" से गजब की सहानभूति रखती थी। टाडा हटाने के फैसले के खिलाफ अपील ही नहीं की। अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी आर्म्स एक्ट के केस में छह साल की सजा घटाकर पांच साल कर दी। संजय दत्त हम वाकई दुखी हैं कि आप जैसे "महान इंसान" को ये पांच साल की सजा क्यूं दे दी गई। इससे अच्छा तो था कि मुंबई धमाके में मारे गए "बेचारों" के परिवार वालों को ही उम्र भर के लिए मुंबई की आर्थर रोड जेल में ठूंस देना चाहिए था । प्रियंका चोपड़ा, बिपाशा बसु, करन जौहर और अरशद वारसी की खुशी के लिए क्या हम इतना भी नहीं कर सकते?
विवेक सिंह, मयंक सक्सेना, रवींद्र रंजन और अभिषेक उपाध्याय के फेसबुक वॉल से.





