Pankaj Chaturvedi : तो क्या बम और बंदूक दिल्ली पुलिस की ही है… दिल्ली पुलिस ने तुर्रा मारा कि होली से पहले दिल्ली को दहला देने की साजशि बेनकाब हो गई है। असल में पुलिस की झूठी कहानी का सिरा खुलता जा रहा है और बेनकाब हो रहा है कि दिल्ली पुलिस ने अपने पास से असलहा रख कर एक ऐसे व्यक्ति को पकड़ लिया जो अपनी गलतियां मान कर देश की मुख्य धारा में लौटना चाह रहा था। यह बात लिायकत के परिवार, कश्मीर पुलिस, एसएसबी जो नेपाल के सौनोली बार्डर पर तैनात है , को पता था कि लियाकत अपने पूरे परिवार के साथ मुल्क लौटना चाहता है।
वह एसएसबी को सूचित कर आया था और वहीं से पुलिस ने पूरी झूठी कहानी गढी. कुपवाडा जिले के लालापोरा गांव का लियाकत शाह 1997 से गायब था। रिकार्ड में है कि वह सीमा पार चला गया था और हिजबुल के साथ जुड गया था। उसकी एक पत्नी व दो बच्चे कुपवाड़ा में रहते हैं जबकि उसने उस पार दूसरी शादी कर ली थी। बडे जतन से उसके परिवार ने कश्मीर पुलिस से यह आश्वासन लिया था कि सरकार की घर वापसी योजना के तहत उसे वापस बुलाया जाए। पूरा गांव उसके इंतजार में था। सभी को खबर थी।
हमारे बयान वीर व झूठी कहानी गढने में माहिर दिल्ली पुलिस ने उसे हमला करने वाला उग्रवादी बना दिया। इस तरह ना तो हम आतंकवाद की कमर तोड़ पा रहे हैं और ना ही भटके लोगों को सुधरने का अवसर दे कर समस्या को कम करने का प्रयास। इस तरह की फर्जी कार्यवाही करने वाले पुलिस वालों के खिलाफ देश द्रोह का मुकदमा कायम होना चाहिए। मैं चाहता हूं कि इस बारे में गृह मंत्री व अन्य आला अफसरों को दरखास्त भेजी जाए। सभी लेाग अपने अपने स्तर पर इस फर्जीवाड़े पर विरोध दर्ज कराएं। इंहडियन एक्सप्रेस ने तो इस मसले पर विस्तार से लिखा है… इसे भी पढें…
http://www.indianexpress.com/news/delhi-cops-fidayeen-is-exmilitant-travelling-with-family/1092252/0
वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार पंकज चतुर्वेदी के फेसबुक वॉल से.





