प्रेस क्लब आफ इंडिया जो राष्ट्रपति भवन और संसद से बेहद नजदीक है, इनके बीच की दूरी करीब दो किलोमीटर के आसपास होगी, वहां राष्ट्रीय स्वाभिमान का इस तरह अपमान किया जाता है जैसे यह कोई मुद्दा या मसला ही न हो. अगर प्रेस क्लब आफ इंडिया में यह सब कुछ इतनी आसानी से हो सकता है तो फिर राष्ट्रपति भवन और संसद को कैसे सुरक्षित मान लिया जाए.
दूसरी बार यह हुआ है कि कुछ अराजक तत्वों ने प्रेस क्लब में घुसकर दारू पीने के बाद वहां खड़ी ब्रह्मोस मिसाइल की प्रतिकृति को नष्ट कर दिया. मिसाइल को तोड़कर फेंक दिया गया. यह घटना कल रात में हुई है. कल ही प्रेस क्लब आफ इंडिया का चुनाव भी था. अभी नई टीम गठित नहीं हुई है क्योंकि नतीजे कल सोमवार को घोषित होंगे. मतलब, प्रेस क्लब के संचालन का पूरा जिम्मा अभी जिस टीम के पास है, वही टीम इस राष्ट्रीय अपमान के लिए जिम्मेदार मानी जाएगी. इनके राजकाज में पहले भी एक बार यह सब हो चुका है और बताया जा रहा है कि जिन लोगों ने यह सब किया वह प्रेस क्लब पदाधिकारियों के नजदीकी लोग थे, इसलिए उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया और न ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई. उनके बढ़े हौसले के कारण फिर यह घटना घटित हो चुकी है.



आखिर कोई कैसे मान ले कि प्रेस क्लब में बैठा पत्रकार सुरक्षित है. दारू के अड्डे के रूप में कुख्यात प्रेस क्लब आफ इंडिया की छवि सुधारने की बहुत कोशिश हुई लेकिन हर बार यह होता है कि जो लोग जीत कर आते हैं वे थोड़े समय बाद प्रेस क्लब से खुद को सिंचित करने लगते हैं और प्रेस क्लब को उसके हाल पर छोड़ देते हैं. अगर प्रेस क्लब पदाधिकारियों में थोड़ी भी शर्म बाकी हो तो वे इस घटना के असल दोषियों का नाम-पता सार्वजनिक करेंगे और प्रेस क्लब के हर कोने में सीसीटीवी कैमरा लगवाएंगे ताकि हर एक की गतिविधि पर कोई केंद्रीय रूप से नजर रख सके.





