संजय शुक्ला हिंदुस्तान अखबार के वाइस प्रेसीडेंट यानि वीपी हैं. मार्केटिंग-विज्ञापन का काम देखते हैं. उन्हें पहले यूपी, फिर बिहार और फिर पंजाब भेजा गया. इन प्रदेशों में जा-जा कर इन्होंने पहला काम किया जमे-जमाए लोगों को उखाड़ना. यूपी में जब राजनीति चरम पर हो गई और कामकाज की जगह गुटबाजी ने सिर उठा लिया तो संजय शुक्ला को मैनेजमेंट ने बिहार भेज दिया.
बिहार में भी वही कहानी दुहराने पर संजय शुक्ला पंजाब भेजे गए. पंजाब में भी हटाओ, उखाड़ो, भगाओ और अपने आदमी लाओ की राजनीति तेज हुई तो अब संजय शुक्ला को दिल्ली बुला लिया गया है. उनके विरोधी गुट के लोगों का कहना है कि संजय शुक्ला की विदाई जल्द होने वाली है क्योंकि वे हर जगह फेल साबित हुए. उन्होंने काम कम, राजनीति ज्यादा किया. काम करने वालों को परेशान किया और अपने गुट के लोगों को फिट करने की राजनीति करते रहे. इस कारण कंपनी को काफी नुकसान उठाना पड़ा.
देखना है कि संजय शुक्ला के लिए उनके विरोधियों की बददुवाएं कितने काम की होती हैं. संजय शुक्ला दैनिक जागरण, मेरठ और देहरादून में भी काम कर चुके हैं. मीडिया से पहले वे एक जीरोक्स कंपनी में काम करते थे. (कानाफूसी)





