Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

जानिए कैसे दिल्‍ली, मुंबई, कोलकाता में पत्रकारिता करने वाला इंटरनेशनल एडिटर बन गया

कॉलेज से निकलकर सीधे पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने वाला दक्षिण भारत के एक छोटे से अखबार का पत्रकार एक दिन टाइम जैसी मशहूर पत्रिका का इंटरनेशनल एडिटर बन जाएगा, यह शायद उसने भी नहीं सोचा होगा। लेकिन काम के प्रति उसकी निष्ठा ही थी कि वह टाइम के अस्सी वर्षों के इतिहास में पहला गैर अमेरिकी संपादक है। जी हां, भारत के तेजस्वी पत्रकार बॉबी घोष न सिर्फ इस शिखर पर पहुंचे हैं, बल्कि टाइम को नई ऊंचाई तक पहुंचाने की चुनौती भी उन्होंने स्वीकारी है।

कॉलेज से निकलकर सीधे पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने वाला दक्षिण भारत के एक छोटे से अखबार का पत्रकार एक दिन टाइम जैसी मशहूर पत्रिका का इंटरनेशनल एडिटर बन जाएगा, यह शायद उसने भी नहीं सोचा होगा। लेकिन काम के प्रति उसकी निष्ठा ही थी कि वह टाइम के अस्सी वर्षों के इतिहास में पहला गैर अमेरिकी संपादक है। जी हां, भारत के तेजस्वी पत्रकार बॉबी घोष न सिर्फ इस शिखर पर पहुंचे हैं, बल्कि टाइम को नई ऊंचाई तक पहुंचाने की चुनौती भी उन्होंने स्वीकारी है।

बॉबी ने डेक्कन क्रॉनिकल से करियर की शुरुआत कर आज वह मुकाम हासिल किया है, जो किसी भी पत्रकार का सपना हो सकता है। व्यक्तिगत जीवन में बेहद सरल बॉबी घोष ने भारत में दस वर्षों तक कोलकाता, दिल्ली और मुंबई में पत्रकारिता की। फिर 1995 में वह दो वर्षों के लिए हांगकांग में फॉर ईस्टर्न इकोनॉमिक रिव्यू से जुड़े रहे।

उसके बाद वह 1998 में टाइम से जुड़े। टाइम एशिया से सीनियर एडिटर के रूप में जुड़ने के साथ ही उन्होंने टाइम डॉट कॉम में सब-कांटिनेंटल ड्रिफ्ट नामक कॉलम लिखना शुरू किया। और फिर 2007 में वह लंदन चले गए, जहां टाइम यूरोप के लिए काम करना शुरू किया। वहां उन्होंने टाइम्स ग्लोबल एडवाइजर नामक यात्रा परिशिष्ट की शुरुआत की और यूरोपीय सामाजिक प्रवृत्तियों तथा मध्य-पूर्व की राजनीति पर लिखा।

फिर इराक-अमेरिका के युद्ध के समय वह बगदाद में करीब पांच वर्षों तक टाइम के ब्यूरो चीफ रहे, जहां उन्होंने लाइफ इन हेल (नरक में जिंदगी) एवं शिया बनाम सुन्नी जैसी अद्भुत कवर स्टोरी कीं। वहां उन्होंने न केवल खुद पूरी निर्भीकता से साथ अपने पत्रकारीय कर्तव्यों को निभाया, बल्कि बगदाद ब्यूरो में काम करने वाले तमाम सहयोगियों के अभिभावक बनकर रहे।

उन्होंने फिदायीन आतंकियों के साथ-साथ राजनीतिक हस्तियों के ऊपर भी काफी लिखा। बगदाद ही नहीं, फलस्तीन एवं कश्मीर जैसे अशांत इलाकों से भी उन्होंने रिपोर्टिंग की है। उनकी दिलचस्पी की व्यापकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि खेल जगत के लियो मेस्सी से लेकर बॉलीवुड सितारे आमिर खान और मिस्र के राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी जैसी हस्तियों तक पर बेबाकी से उन्होंने कलम चलाई है। तमाम उम्र चुनौतियों से जूझने वाले बॉबी के लिए टाइम को सफलता के नए शिखर पर ले जाना एक बड़ी चुनौती होगा। (अमर उजाला)

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...