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दैनिक जागरण, मेरठ के न्यूजरूम में सीनियरों में गाली गलौज

: कानाफूसी : दैनिक जागरण, मेरठ के न्यूजरूम में वरिष्ठों के बीच बुधवार को जमकर गाली-गलौच हुई। मौका था न्यूजरूम की पाक्षिक बैठक का। इस बार विषय रखा गया था कि उत्तर प्रदेश का बंटवारा क्यों किया जाए? पक्ष और विपक्ष की टीमों के बीच तीखी बहस हुई। तभी निदेशक तरुण गुप्ता, महाप्रबंधक अखिल भटनागर, प्रबंधक आदित्य शर्मा आदि बैठक में आ गए तो माहौल सामान्य हो गया। निदेशक 15 मिनट बाद बैठक से चले गए तो इनपुट प्रभारी महेश रस्तोगी संपादकीय प्रभारी मनोज झा के निर्देश पर विभिन्न संस्करणों में प्रकाशित गलतियों को अखबार उठा-उठाकर गिनाने लगे। ये सारे अखबार डाक संस्करणों के थे।

: कानाफूसी : दैनिक जागरण, मेरठ के न्यूजरूम में वरिष्ठों के बीच बुधवार को जमकर गाली-गलौच हुई। मौका था न्यूजरूम की पाक्षिक बैठक का। इस बार विषय रखा गया था कि उत्तर प्रदेश का बंटवारा क्यों किया जाए? पक्ष और विपक्ष की टीमों के बीच तीखी बहस हुई। तभी निदेशक तरुण गुप्ता, महाप्रबंधक अखिल भटनागर, प्रबंधक आदित्य शर्मा आदि बैठक में आ गए तो माहौल सामान्य हो गया। निदेशक 15 मिनट बाद बैठक से चले गए तो इनपुट प्रभारी महेश रस्तोगी संपादकीय प्रभारी मनोज झा के निर्देश पर विभिन्न संस्करणों में प्रकाशित गलतियों को अखबार उठा-उठाकर गिनाने लगे। ये सारे अखबार डाक संस्करणों के थे।

प्रादेशिक प्रभारी सौरभ शर्मा इस पर बिफर गए और बोले कि आज से प्रादेशिक के लोग इनपुट-आउटपुट की गलतियों का अलग से रजिस्टर बनाएंगे। इसी बीच फोटोग्राफर मदन मौर्य ने सौरभ पर कटाक्ष किया कि रविवार के बागपत संस्करण में मुजफ्फरनगर के चरथावल कस्बे की खबर पेज-3 पर लीड लगी है। इस पर एक डेस्क इंचार्ज प्रवीण रंजन ने मामले को तूल देते हुए मनोज झा से भरी मीटिंग में पूछा कि इस गलती पर क्या कार्रवाई हुई? बस फिर क्या था सौरभ और प्रवीण के मध्य न्यूजरूम में खूब गाली गलौज और असभ्य भाषा का इस्तेमाल किया गया। एक घंटे तक हंगामा चला और प्रबंधन के लोग तमाशा देखते रहे।

बागपत में चरथावल की खबर लीड छापने पर सौरभ से जवाब तलब हुआ और वेतन काटा गया, जबकि अनुशासनहीनता पर प्रवीण रंजन को चेतावनी देते हुए वेतन काटा गया। दरअसल, जिस दिन यह गलती हुई उस दिन आउटपुट डेस्क का प्रभार सौरभ शर्मा देख रहे थे और आउटपुट प्रभारी रमेश विश्वकर्मा इन दिनों नोएडा में ट्रेनिंग ले रहे हैं। लगातार ऐसे माहौल के चलते न्यूजरूम में चर्चाएं होने लगी हैं कि इससे बढ़िया तो राजवीर सिंह का ही जमाना था। भले ही वह बदतमीजी से बोलते थे लेकिन अखबार में इतनी गलतियां तो नहीं जाती थीं। वैसे यह दैनिक जागरण, मेरठ का दुर्भाग्य ही है कि बुद्धि से पैदल लोग व्यवस्था चला रहे हैं और काम करने वाले लोगों को मानसिक बीमार करार दिया जा रहा है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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