दैनिक जागरण के बाद अब अमर उजाला ने भी सहारा श्री सुब्रत राय की सुपौत्री रोशना के अन्नप्रासन की एक रिपोर्ट छपी है. फोटो समेत छपी यह रिपोर्ट पूर्ण रूप से विज्ञापन और पेड न्यूज है. कल दैनिक जागरण ने पेड न्यूज छापी थी, आज अमर उजाला ने पेड न्यूज प्रकाशित की है. लेकिन इस की खास बात यह है कि इसमें कहीं भी विज्ञापन या पेड न्यूज नहीं लिखा गया है. इसमें भी पार्टी में आने वाली हस्तियों की फोटो कैप्शन के साथ प्रकाशित की गई है.
इस पार्टी में तमाम नेताओं-अभिनेताओं-खिलाडि़यों के साथ पीसीआई के अध्यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू भी पहुंचे हैं, जिनकी तस्वीर भी छापी गई है. यही काटजू हैं जो पेड न्यूज की खिलाफत मौका देखकर करते रहते हैं, पर क्या काटजू इस तरह की पेड न्यूज के खिलाफ भी कुछ बोलेंगे? सहारा समूह अन्नप्रासन के बहाने अपने ब्रांडिंग में जुटा हुआ है, जो सेबी से झटका खाने के बाद खतम हो चुकी है. संजय दत्त की माफी की वकालत करने वाले पीसीआई अध्यक्ष जस्टिस काटजू क्या पत्रकारिता को भ्रष्ट बनाने वाले इन समूहों के खिलाफ भी कुछ बोलेंगे?
वैसे संभावना कम ही है कि सहारा के इस पेड न्यूज के बारे में जस्टिस काटजू कुछ बालेंगे. एलिट वर्ग के पोषक माने जाने वाले काटजू पत्रकारों के लिए न्यूनतम डिग्री तय करने के तो हिमायती हैं, परन्तु अखबार मालिकों और पेड न्यूज करने वालों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलने में उन्हें हिचक होती है. सवाल यही है कि अगर सहारा समूह के विज्ञापन या पेड न्यूज इन अखबारों में प्रकाशित हो रहे हैं तो फिर कहीं पर इम्पैक्ट या विज्ञापन लिखने में क्या बुराई थी. जाहिर है कि ऐसे मामलों में आने वाले पैसे बिना लिखा-पढ़ी के कमाया जा सकता है.






