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तानाशाही : पत्रकार हित में लड़ रहे मिथिलेश को जागरण ने बाहर किया

पत्रकार भले ही जगह-जगह लात घूंसे खाते रहे। पुलिस की लाठियां सहते रहें पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान बन चुके समाचार पत्र को कोई फर्क नहीं पड़ता। समाचार पत्रों के मालिकान अपने सहयोगियों की कोई मदद नहीं करते हैं। यदि कोई पत्रकार अपने साथियों की मदद भी करना चाहता है तो उसी के ऊपर कार्रवाई हो जाती है। ऐसा ही एक वाकया हुआ भदोही में जहां अपने साथी पत्रकार कि पिटाई के विरोध में हुए आन्दोलन में शामिल हुए दैनिक जागरण के चीफ रिपोर्टर को बहार का रास्ता दिखा दिया गया। वैसे माने तो वे जागरण के भदोही ब्यूरो कार्यालय में चल गुटबंदी के शिकार बन गए हैं।

पत्रकार भले ही जगह-जगह लात घूंसे खाते रहे। पुलिस की लाठियां सहते रहें पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान बन चुके समाचार पत्र को कोई फर्क नहीं पड़ता। समाचार पत्रों के मालिकान अपने सहयोगियों की कोई मदद नहीं करते हैं। यदि कोई पत्रकार अपने साथियों की मदद भी करना चाहता है तो उसी के ऊपर कार्रवाई हो जाती है। ऐसा ही एक वाकया हुआ भदोही में जहां अपने साथी पत्रकार कि पिटाई के विरोध में हुए आन्दोलन में शामिल हुए दैनिक जागरण के चीफ रिपोर्टर को बहार का रास्ता दिखा दिया गया। वैसे माने तो वे जागरण के भदोही ब्यूरो कार्यालय में चल गुटबंदी के शिकार बन गए हैं।

बता दे की मिथिलेश द्विवेदी भदोही के उन पत्रकारों में हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी का लोहा कई बार मनवाया है। जेल में हुयी कैदी की पिटाई का मामला हो चाहे मुंबई की डिंपल मिश्र का मामला। उन्होंने अपनी लेखनी का जादू दिखाकर दोनों मामलो को राष्ट्रीय स्तर तक का काम किया है। श्री द्विवेदी उन पत्रकारों में जाने जाते हैं जिन्होंने कभी भी अन्याय के सामने कभी घुटने नहीं टेके। करीब ७ साल तक अपनी सेवा अमर उजाला को देने के बाद पिछले सात सालों से जागरण को सेवा देते आ रहे हैं।

गुरुवार को दैनिक जागरण के जिला विज्ञापन प्रभारी होरीलाल यादव की भदोही के अज़ीमुल्ला चौराहे पर भदोही कोतवाल संजय नाथ तिवारी ने उनकी सिर्फ इसलिए बेरहमी से पिटाई कर दी थी, क्योंकि वे कोतवाल के सामने कुर्सी पर बैठने की जुर्रत कर दी थी। इसी मामले को लेकर जनपद के पत्रकारों में प्रशासन के प्रति गुस्सा व्याप्त था, लिहाजा जनपद के पत्रकार इकट्ठा हुए और दुर्गागंज त्रिमुहानी पर जाम लगाकर आन्दोलन शुरू कर दिया। इसी बीच मिथिलेश द्विवेदी के खिलाफ राजनीति शुरू हो गयी। वाराणसी कार्यालय से उनके पास फ़ोन आया कि आन्दोलन समाप्त कर दो।

मिथिलेश ने कहा कि यहाँ पर जनपद के सभी पत्रकार इकट्ठे हैं। मैं अकेले कोई निर्णय नहीं ले सकता। यह बात विरोधी गुट को रास नहीं आई। जब इस बातचीत के बाद वे कार्यालय पहुंचे तो उन्हें घर जाने को कह दिया गया। हालाँकि धरना प्रदर्शन में जागरण के रविन्द्र पाण्डे, कैसर परवेज़, सलीम खान भी मौजूद थे, पर मिथिलेश को क्यों हटाया गया। इस बात को लेकर बस यही चर्चा है कि वे कभी अपने सीनियर की मांग ईमानदारी के चलते पूरी नहीं कर पाते थे। इसी वजह से उनके पीछे कार्यालय के लोग पड़े थे और विरोधियो को मौका मिल ही गया। हालाँकि मिथिलेश द्विवेदी ने कहा है कि वे सम्मान और स्वाभिमान से कोई समझौता नहीं करेंगे और पत्रकार हित के लिए सदैव संघर्षरत रहेंगे।

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