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इलाहाबाद

वाह रे यूपी पुलिस : रेप के आरोपी का शांतिभंग में कर दिया चालान

इलाहाबाद। यूपी सरकार की छीछालेदर कराने में पुलिस का सबसे बड़ा योगदान है। अखिलेश सरकार जो कुछ अच्छा भी करना चाहती है, उन अच्छाइयों पर पुलिसिया करतूत भारी पड़ जाती है। कभी दुराचार पीड़िता महिला से एसपी रैंक सरीखे अफसर का यह कहना कि इतनी पुरानी औरत से कौन दुष्‍कर्म करेगा भला, कभी इलाहाबाद के सिविल लाइंस में सीओ पर नशेड़ियों का हमला, उस पर हमराहियों समेत अन्य पुलिस अफसरों का तमाशबीन बने रहना। तमाम उदाहरण हैं-हरि अनंत, हरि कथा अनंता जैसा मामला है।

इलाहाबाद। यूपी सरकार की छीछालेदर कराने में पुलिस का सबसे बड़ा योगदान है। अखिलेश सरकार जो कुछ अच्छा भी करना चाहती है, उन अच्छाइयों पर पुलिसिया करतूत भारी पड़ जाती है। कभी दुराचार पीड़िता महिला से एसपी रैंक सरीखे अफसर का यह कहना कि इतनी पुरानी औरत से कौन दुष्‍कर्म करेगा भला, कभी इलाहाबाद के सिविल लाइंस में सीओ पर नशेड़ियों का हमला, उस पर हमराहियों समेत अन्य पुलिस अफसरों का तमाशबीन बने रहना। तमाम उदाहरण हैं-हरि अनंत, हरि कथा अनंता जैसा मामला है।

पुलिस करतूत का ताजा मामला उसी प्रतापगढ़ जनपद का है जहां दो महीने पहले कुंडा में हमराहियों के लचर रवैये से डिप्टी एसपी जियाउल हक जैसे ईमानदार पुलिस अफसर को जान से हाथ धोना पड़ा था। जियाउल हक के परिजनों से मिलने देवरिया गए सीएम अखिलेश को तगड़े जनाक्रोश का सामना करना पड़ा था। सीएम को पिछले रास्ते से ले जाना पड़ा और प्रदेश के पुलिस मुखिया को वहां की जनता ने चूड़िया भेंट कर उसे पहन लेने की सलाह दी थी। इतना ही नहीं, विरोध में नारे गूंजे थे-डीजीपी आराम करो, चूड़िया पहनो डांस करो। इन सब घटनाओं से प्रदेश सरकार ने कोई नसीहत नहीं लिया। जनता का गुस्सा भले ही सीएम अखिलेश को न दिखता हो पर उनके पिताश्री व राजनीति के मंझे खिलाड़ी मुलायम सिंह को इसका अहसास हो गया है। वे नाहक ही नहीं बार-बार अखिलेश को सुधार की चेतावनी दे रहे हैं।

खैर, अब आते हैं पुलिस के नई करतूत पर। कन्धई थाना क्षेत्र के पूरे चिरंजू महेशपुर गांव में 23 मार्च की शाम घर से शौच के लिए गई दस वर्षीय एक बालिका को एक वहशी ने दबोच लिया। चीख पुकार करने पर ग्रामीण जुटने लगे। ग्रामीणों को आता देख वहशी मौके से फरार हो गया। जाते-जाते बालिका को मुंह बंद न रखने पर जान से मार डालने की धमकी भी दे गया। डरी सहमी बालिका ने परिजनों को घटना के बारे में जानकारी दी। बालिका के पिता ने कंधई थाने पहुंचकर पुलिस को तहरीर दी। पुलिस ने आरोपी के घर दबिश देकर उसे हिरासत में ले लिया। थाने में बालिका के परिजनों पर समझौते का दबाव डाला जाने लगा। बात न बनने पर पुलिस ने दुराचार के आरोपी को शांतिभंग के आरोप में चालान कर दिया।

उधर, एसओ परमेंद्र सिंह के बयान पर गौर करिए। उनका कहना है कि दोनों पक्षों को थाने बुलाकर झगड़ा न करने की हिदायत दी गई है। सूबे में कानून व्यवस्था चलाने वाली ‘खाकी’ की कार्यप्रणाली से बदरंग हो रही तस्वीर का यह एक हिस्सा भर है, जो किसी को भी विचलित कर सकता है। पता नहीं शासन-प्रशासन की ओहदेदार कुर्सी पर बैठे लोगों को यह क्यों नहीं दिख रहा है।

इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.

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