यशवंत सर नमस्ते.. सर मैं आपको ये बहुत परेशान होकर खत लिख रही हूं. मैंने जिस दिन से …… चैनल ज्वाइन किया, यहां पर कार्यरत सीनियर बहुत परेशान कर रहे हैं. मुझे पहले मौसम की एंकरिंग दी गई, अब मुझे न्यूज की एंकरिंग के लिए ….. सर परेशान कर रहे हैं. रोज मुझे साथ घूमने के लिए परेशान कर रहे हैं. अब क्या करूं. समझ भी नहीं आ रहा है. मीडिया में जाब भी आसानी से नहीं मिलती है. मीडिया में …. सर की वजह से महिलाओं का काम करना कठिन हो रहा है. मुझे आप जैसे लोगों की मदद चाहिए. plz ये खबर प्रकाशित करें, परंतु मेरा नाम न लिखें. मेरा करियर खराब हो जाएगा. इसके अलावा ….. चैनल में और भी लोग हैं…
एक महिला पत्रकार
नए लांच हुए एक चैनल में कार्यरत
(चैनल का नाम, महिला पत्रकार का नाम और परेशान करने वाले वरिष्ठ पत्रकारों का नाम हटा दिया गया है ताकि किसी की पहचान उजागर न हो. ऐसा महिला पत्रकार के अनुरोध पर किया गया है.)
उपरोक्त पत्र पर भड़ास के एडिटर यशवंत द्वारा महिला पत्रकार को भेजा गया जवाब…
आप अपनी सीमारेखा खुद तय करें और उसके प्रति अपने वरिष्ठों-कनिष्ठों को सावधान कर दें. जो लक्ष्मण रेखा पार करे, उसे तुरंत दो झापड़, कंटाप, लाफा, लप्पड़ दे दो. करियर की चिंता मत करो. अगर तुमने लप्पड़ लगा दिया तो तुम्हारी आगे की नौकरी की गारंटी मैं देता हूं. बाकी, तुम्हारे जैसी ढेरों लड़कियां हैं जो करियर के चक्कर में अपना ईमान और जीवन खराब कर लेती हैं. करियर कोई अलग-थलग चीज नहीं है.
अगर तुम्हारे भीतर खुद के प्रति अभिमान, प्यार और ईमानदारी बाकी है तो तुम करियर व जाब की चिंता छोड़ दो, खुद के प्रति निष्ठावान रहो. जो तुम्हारे जीवन से खेले, तुम उसके गले से खेल जाओ और मौका मिलते ही दबा दो. देखना, सब ठीक हो जाएगा. पूरा मामला विस्तार से बताओ तो समझ में आएगा कि हुआ क्या है और इसमें क्या किया जा सकता है. पर एक चीज ध्यान रखना, जीवन में 'नहीं' कहना और 'मना' करना जरूर सीख लो, वरना हर कोई तुम्हारा हर मोड़ पर शोषण करेगा.
आभार
यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया





