तंत्र-मंत्र, मारण, तारण समेत कई तरह के जाप, महाजाप, श्राप आदि कराने वाले स्वतंत्र मिश्रा पर संतोषी माता की अदभुत कृपा है. अपने सीनियर का क्रेडिट कार्ड चोरी करके उससे भरपूर खरीदारी करने और सुबूतों-साक्ष्यों के जरिए पकड़े जाने के बाद भी उनका बाल तक बांका नहीं हो सका है. सुब्रत राय ने भी उन्हें अभयदान दे दिया है. उन्होंने इसे निजी मामला बताकर इगनोर कर दिया है.
मतलब ये कि आप संस्थान की चोरी न करें, बाकी चाहें किसी का कुछ भी उड़ा दें, छेड़ दें, छीन लें… ये सारा निजी मामला माना जाता है सहारा में. हालांकि इसी सहारा में ऐसी भी नजीर है कि दो चार सौ रुपये के इधर उधर के लिए रेजीडेंट एडिटर्स तक की नौकरी चली गई. पर स्वतंत्र मिश्रा अपवाद हैं क्योंकि वह सहारा मीडिया के चार पांच सेनापतियों में से एक प्रमुख सेनापति हैं.
चौबीस हजार करोड़ रुपये के घनचक्कर में फंसे सहारा समूह के लिए भला डेढ़ लाख रुपये की चोरी से की गई खरीदारी क्या मामला हो सकता है. इस तरह की चोरी के लिए सहारा समूह अपने प्रमुख सेनापतियों में से एक को किनारे नहीं करना चाहता. इसी कारण सुब्रत राय ने पूरी मेहरबानी दिखाई और स्वतंत्र मिश्रा को अभयदान दे दिया. कल स्वतंत्र मिश्रा सहारा नोएडा के आफिस में सुब्रत राय के पिताजी की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में सहारा मीडिया हेड संदीप वाधवा के साथ आए और वाधवा के अनुरोध पर सुब्रत राय के पिताजी के बारे में दो शब्द बोले. उनको बोलते देख सहारा कर्मियों में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गई. पर कहा जाता है न कि, समरथ को नहीं दोष गुसाईं.





