बाल अधिकार सुरक्षा आयोग अधिनियम 2005 के अनुसार उत्तर प्रदेश में राज्य बाल आयोग नहीं बनने के सम्बन्ध में सामाजिक कार्यकर्त्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा दायर पीआईएल में इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच ने अत्यंत ही सख्त रूख लेते हुए प्रमुख सचिव, समाज कल्याण सदाकांत को तलब किया.
प्रमुख सचिव ने हाई कोर्ट को आश्वासन दिया कि एक माह के अंदर राज्य बाल आयोग का गठन कर दिया जाएगा. जस्टिस उमा नाथ सिंह और जस्टिस डॉ सतीश चंद्र की बेंच ने प्रमुख सचिव को यह भी आदेशित किया कि इस सम्बन्ध में राज्य सरकार द्वारा बनाए जा रहे नियम के ड्राफ्ट कोर्ट के सामने प्रस्तुत किये जाएँगे. कोर्ट ने अगली सुनवाई 22 अप्रैल को नियत करते हुए सदाकांत को पुनः कोर्ट के सामने पेश हो कर प्रगति से अवगत कराने को कहा है.
इस अधिनियम की धारा 17 में प्रत्येक राज्य में एक बाल आयाग बनाए जाने की बात कही गयी है. इसके अलावा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 44 में भी प्रावधान है कि बाल यौन शोषण तथा बच्चों को पोर्नोग्राफी में प्रयोग किये जाने पर अंकुश लगाए जाने के कार्यों का पर्यवेक्षण राज्य बाल आयोग द्वारा किया जाएगा.
बहुत सारे राज्यों में इस तरह के आयोग गठित किये जा चुके हैं लेकिन उत्तर प्रदेश में बाल आयोग अब तक गठित नहीं किया गया है. अतः ठाकुर ने इस पीआईएल में यूपी में भी तत्काल बाल आयोग गठित किये जाने की मांग की है.





