ललकरले रह…बहुत बढ़िया तहार कविता आइल बा…

Hareprakash Upadhyay :  जनार्दन मिश्र का कविता संकलन पढ़ रहा हूँ- 'मेरी एक सौ एक कविताएं'। वे बहुत आत्मीय कवि हैं। समकालीन कविता के चर्चित हस्ताक्षर। आरा में रहते हैं। प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े हैं। मैं जब इंटर में पढ़ रहा था और कविताएं लिखनी-पढ़नी शुरू की थी, तब से उन्हें जानता-पढ़ता रहा हूँ। उन दिनों जब कहीं किसी गुमनाम पत्रिका (नामचीन पत्रिकाएं छापती ही नहीं थीं) में मेरी कविता देख लेते, तो कहीं मिलते दूर से ललकारते हुए उत्साहवर्द्धन करते…. ''ललकरले रह…बहुत बढ़िया तहार कविता आइल बा…।''