यूपी में 26 आईपीएस भी बदले, जकी अहमद बने आईजी पीटीएस मेरठ

आईएएस अफसरों को बदले जाने के साथ 26 आईपीएस अधिकारी भी इधर से उधर किए गए हैं. गाजीपुर, गोरखपुर, आगरा, झांसी समेत कई जिलों में बदलाव हुए हैं. शासन ने प्रदेश में कानून व्‍यवस्‍था को चुस्‍त दुरुस्‍त करने के लिए ये बदलाव किए हैं. इन बदलावों में पुलिस अधीक्षक महोबा अब्‍दुल हमीद को पुलिस अधीक्षक शामली, पुलिस अधीक्षक कासगंज सुभाष सिंह बघेल को एसपी अमरोहा, पुलिस अधीक्षक शामली राजेंद्र प्रसाद पाण्‍डेय को पुलिस अधीक्षक कासगंज बनाया गया है.

हरदोई एसपी राकेश शंकर पांडेय को पुलिस अधीक्षक जालौन, जालौन के एसपी वीके दीक्षित को एसपी महोबा, अमरोहा में तैनात श्रीमती अपर्णा को मुरादाबाद में 9वीं वाहिनी पीएसी का सेनानायक बना दिया गया है. श्रीमती बीन को सेनानायक 9वीं पीएसी मुरादाबाद से डीजीपी कार्यालय, बब्लू कुमार को डीएसपी झांसी से पुलिस अधीक्षक गाजीपुर (ग्रामीण), मुनिराज जी को डीएसपी गाजियाबाद से पुलिस अधीक्षक शाहजहांपुर (ग्रामीण), दिनेश कुमार को एएसपी आगरा से पुलिस अधीक्षक झांसी (ग्रामीण) बना दिया गया है.  

शिवासिम्मी चनन्पा को एएसपी गौतमबुद्ध नगर से एसपी गोरखपुर(ग्रामीण), अनीस अंसारी को डीएसपी लखनऊ से पुलिस अधीक्षक सहारनपुर (नगर), पवन कुमार को डीएसपी अलीगढ़ से पुलिस अधीक्षक आगरा नगर, अजय कुमार साहनी को डीएसपी कानपुर नगर से पुलिस अधीक्षक बुलंदशहर, राहुल कुमार को डीएसपी मेरठ से पुलिस अधीक्षक कानपुर नगर पूर्वी, केशव चौधरी को डीएसपी मुरादाबाद से पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ ग्रामीण, अतुल शर्मा को डीएसपी वाराणसी से पुलिस अधीक्षक बरेली ग्रामीण, अजय कुमार को एएसपी फैजाबाद से अपर पुलिस अधीक्षक लखनऊ पश्चिम के रूप में नई तैनाती दी गई है.

हबीबुल हसन को एएसपी लखनऊ से एएसपी ट्रांस गोमती लखनऊ, मनीराम को एएसपी यातायात कानपुर से अपर पुलिस अधीक्षक यातायात लखनऊ, अष्टभुजा प्रसाद सिंह को एएसपी सीतापुर से एएसपी सचिवालय सुरक्षा, रवींद्र सिंह को एएसपी एटीएस लखनऊ से एएसपी अपराध लखनऊ, सौमित्र यादव को एएसपी खीरी से अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, नित्यानंद रा को एएसपी लखनऊ से पीआरओ डीजीपी, जय प्रकाश सिंह को एएसपी रेलवे लखनऊ से डीजीपी के उप सहायक लखनऊ तथा जकी अहमद को डीआइजी मेरठ रेंज से आईजी पीटीएस मेरठ बना दिया गया है.

यूपी के 26 आईएएस अधिकारियों को मिली नई तैनाती

लखनऊ : प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को फिर से प्रशासनिक जिम्‍मेदारियों में फेरबदल करते हुए 26 आईएएस अधिकारियों को नई तैनाती प्रदान की. कौशांबी, हाथरस, अम्बेडकर नगर और गाजीपुर के डीएम भी बदल दिए गए हैं. सत्येंद्र सिंह को निदेशक पंचायती राज से डीएम कौशाम्बी, संयुक्ता समद्दर को डीएम हाथरस से प्रतीक्षारत, अनिल राज कुमार को विशेष सचिव ग्राम्य विकास को हाथरस, प्रभुनारायण सिंह को डीएम गाजीपुर से प्रतीक्षारत, चंद्रपाल सिंह विशेष सचिव चिकित्सा से डीएम गाजीपुर, सौरभ बाबू को प्रतीक्षारत से राहत आयुक्त, आदर्श सिंह को प्रतीक्षारत विशेष सचिव परिवहन बनाया गया है.

सुश्री चैत्री बी को प्रतीक्षारत से विशेष सचिव मा.शि, पंकज यादव को प्रतीक्षारत से डीएम अम्बेडकर नगर, चंद्रकांत पांडेय को प्रतीक्षारत से विशेष सचिव वित्त, लाल बिहारी को प्रतीक्षारत से वि. सचिव पिछड़ा वर्ग, श्रीमती रितु माहेश्र्वरी को विशेष सचिव सिंचाई निदेशक से प्रशासन स्वास्थ्य सेवाएं, एमकेएस सुंदरम को डीएम जीबी नगर से सचिव लोक निर्माण, अजय शुक्ला को प्रतीक्षारत से वि.सचिव लोकनिर्माण, मनीष चौहान को प्रतीक्षारत से वि. सचिव लोकनिर्माण, एएन सिंह को विशेष सचिव वित्त से सचिव वित्त, प्रमोद कुमार उपाध्याय को अपर आयुक्त झांसी से सचिव भाषा, वीरेंद्र प्रताप सिंह को नियंत्रक बांटमाप से सचिव खाद्य एवं रसद, रमेश चंद्र मिश्र को सीईओ खादी ग्रामोद्योग से सचिव एवं सीईओ ग्रामोद्योग, विनय प्रिय दुबे को विशेष सचिव होमगार्ड से सचिव होमगार्ड, शिवनंदन प्रसाद को विशेष सचिव कर एवं निबंधन से सचिव वाणिज्य कर विभाग, देवी शंकर शर्मा को विशेष सचिव कर निबंधन से सचिव श्रम एवं सेवायोजन, चंद्र प्रकाश द्वितीय को विशेष सचिव राज्यपाल से सचिव राज्यपाल, बृज किशोर सिंह को अपर आयुक्त इलाहाबाद से सदस्य न्यायिक राजस्व परिषद इलाहाबाद, मुकेश मित्तल को विशेष सचिव वित्त से सचिव वित्त, बीबी सिंह को संयुक्त सचिव लोकसेवा आयोग से सचिव लोकसेवा आयोग बनाया गया है.

बलात्कारी पुलिस अधिकारी को राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजने की घोषणा

Himanshu Kumar : छत्तीसगढ़ के एक और बलात्कारी पुलिस अधिकारी को राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजने की घोषणा करी गई है. इस बलात्कारी पुलिस अधिकारी का नाम है एसआरपी कल्लूरी. लेधा नामक एक आदिवासी महिला के साथ कल्लूरी और उसके सिपाहियों ने एक माह तक बलात्कार किया था. कल्लूरी साहब ने लेधा के गुप्तांगों में मिर्चें भर दी थीं. लेधा ने जिला जज के सामने अपने बयान में यह सब दर्ज करवाया था. लेकिन कल्लूरी ने पीड़ित महिला लेधा और उसके परिवार पर दबाव बनाना शुरू किया तो मानवाधिकार कार्यकर्ता उस बलात्कार के मामले को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में ले गये.

पुलिस अधिकारी कल्लूरी ने पीड़ित महिला के परिवार का अपहरण कर लिया. पीड़ित महिला लेधा ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में कहा कि मैं बलात्कार का अपना केस वापिस लेना चाहती हूं. हाई कोर्ट के जज ने पूछ कि तुम केस क्यों वापिस लेना चाहती हो लेधा? लेधा ने हाथ जोड़ कर रोते रोते कहा- आप मुझ से यह मत पूछिए. जज साहब ने मामला ख़ारिज कर दिया. अब भारत राष्ट्र बलात्कार करने वाले उन कल्लूरी साहब को सम्मान दे रहा है.

सभी देश प्रेमी सज्जनों से प्रार्थना है कि वे लेधा के विरुद्ध और कल्लूरी साहब के सम्मान में अपना सिर फख्र से ऊंचा कर लें. और हां, आदिवासी महिला लेधा की लड़ाई में उसका साथ देने वाले वकील और सामाजिक कार्यकर्ता श्री अमरनाथ पाण्डेय के ऊपर तेरह फर्जी मामले बना दिये हैं. अमरनाथ पाण्डेय साहब के छोटे भाई को हत्या के एक फर्जी मामले में फंसा कर उम्र कैद भी करवा दी गई है. कुछ समय पहले तक लेधा एक चाय की दूकान पर बर्तन मांजती थी. आजकल लेधा का पता ही नहीं चल रहा है.

अरे छोड़िये भी लेधा को. इस देश को लेधा की नहीं, कल्लूरी साहब की ज़रूरत है. कल्लोरी साहब के दम पर ही ज़मीने छीनी जा सकती हैं. ज़मीने छीन कर ही अमीर उस पर अपने उद्योग लगा सकते हैं.  आपको और आपके बच्चों को उन्ही उद्योगों में नौकरी मिलेगी, तभी आप शोपिंग माल में जा सकते हैं, कार खरीद सकते हैं, ऐश कर सकते हैं.

देखिये कल्लूरी साहब आपके लिये वहाँ कितनी मेहनत कर रहे हैं. लेधा से आपको क्या मिलेगा? चिल्ला चिल्ला कर अपना मूंह दुखाओगे बस. चिदम्बरम, मोदी, अंकित गर्ग और कल्लूरी इस देश के विकास के नए और सफल प्रयोग हैं. क्या फायदा भगत सिंह गांधी अम्बेडकर की और समता समाजवाद और न्याय की बकवास करने की? विश्वशक्ति भारत के गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर आप सब को बधाइयां.

हिमांशु कुमार के फेसबुक वॉल से.

उस झूठे और करप्ट आईजी की फर्जी प्रेस रिलीज को किसी पत्रकार ने नहीं छापा

Himanshu Kumar : जब हम दंतेवाड़ा में काम करते थे तब एक बार वहाँ एक आई जी साहब की नियुक्ति हुई. एक बार उन्होंने पत्रकारों को अपने आफिस में बुलाया. अपने एक पत्रकार मित्र के साथ मैं भी वहाँ चला गया. आईजी साहब के कार्यालय में एक आदिवासी लड़का जिसकी उम्र करीब सोलह साल की होगी और साथ में एक आदिवासी लड़की जिसकी उम्र करीब पन्द्रह की रही होगी, सहमे हुए बैठे थे. दोनों ने नक्सलियों वाली एकदम नई हरी वर्दी पहनी हुई थी. मुझे शक हुआ कि जंगल से आने वाले नक्सली के पास एकदम नए साफ़ कपडे कहाँ से आये?

आईजी साहब ने सभी पत्रकारों से इन दोनों का परिचय करवाया और बताया कि ये लड़का लड़की दोनों खूंखार नक्सली कमांडर हैं और इन्होंने आज ही पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है. आत्म समर्पण के बाद इन्होंने दंतेश्वरी माता के मंदिर में शपथ ली है कि ये लोग अब से कभी देशद्रोहियों का साथ नहीं देंगे.

इसके बाद आईजी साहब ने एक लिखा हुआ प्रेस स्टेटमेंट सभी को बाँट दिया. आईजी साहब ने कहा कि इन दोनों पूर्व नक्सलियों की सुरक्षा के लिहाज़ से पत्रकारों को इनसे कुछ पूछने की इजाज़त नहीं दी जा सकती. और अब आप लोग जा सकते हैं. उन्होंने सभी पत्रकारों से कहा कि इस खबर को प्रमुखता से छापा जाए. सभी पत्रकार उठ कर बाहर आने लगे. मैंने कहा कि एक मिनट रुकिए. सब खड़े रहे. मैंने कहा साहब मुझे बस एक बात पूछनी है. आईजी साहब ने कुछ क्षण सोचा और फिर उन्होंने मुझे बस एक बात पूछने की इजाजत दे दी. मैंने बस्तर की आदिवासी बोली में पूछा 'इव घिसिड मीकिन बेनूर इत्तौर' अर्थात यह कपडे तुम्हें किसने दिये? लड़का तो घबरा गया पर लड़की ने भोलेपन से आईजी साहब की तरफ आँखें घुमा कर कहाँ 'वेर साहब इत्तौर' अर्थात इस साहब ने दी. मैंने कहा बस साहब मुझे अब और कुछ नहीं पूछना है. इसके बाद हम सभी लोग आईजी साहब के आफिस से बाहर आ गये .

दंतेवाड़ा के किसी पत्रकार को तो गोंडी आती नहीं थी. मैंने बाहर आकर सभी पत्रकारों से कहा कि भाइयों इन तथाकथित आत्मसमर्पित नक्सलियों का तो कहना है कि यह वर्दी तो उन्हें पुलिस ने बनवा कर पहनाई है. इसलिए पुलिस के दावे पर कैसे विश्वास किया जाय? इसके बाद किसी भी पत्रकार ने आत्मसमर्पण वाली वह खबर नहीं छापी.

बाद में वो आईजी साहब भ्रष्टाचार के मामले में काफी चर्चित हुए. निलम्बित भी हुए. उनके बारे में कहा जाता था कि वह अक्सर नकली आत्मसमर्पण करवाते थे, और सरकार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिये जो पैसा भेजती थी वह आई जी साहब हड़प लेते थे. शुभ्रांशु चौधरी ने अभी अपनी नई किताब 'उसका नाम वासु था' में इन्ही आई जी साहब की ईमानदारी के कसीदे काढे हैं और अपने एक काल्पनिक नक्सली पात्र के मूंह से आईजी साहब की ईमानदारी की प्रशंसा करवाई है.

मुझे ठीक से तो नहीं पता की शुभ्रांशु ने आईजी साहब को अपने काल्पनिक नक्सली पात्र से क्यों क्लीन चिट दिलवाई है. लेकिन परिस्थिगत साक्ष्य यह कहते हैं की चूंकि शुभ्रांशु ने यह किताब भोपाल में बैठ कर लिखी थी. और यह वाले आई जी साहब भी भोपाल में ही रहते हैं. किताब लिखते समय अपने तथ्यों को क्रोस चेक करने के लिए शुभ्रांशु को उनके पास जाना पड़ता होगा. इस दोस्ती क्या फायदा आई जी साहब ने उठा लिया. शुभ्रांशु को भी इसमें क्या नुकसान होना था. दो वाक्य लिखने में कौन से हाथ दुखे जाते हैं.

इस किताब में एक जगह लेखक ने लिखा है की सिंगारम गाँव में जो उन्नीस आदिवासी मरे गए थे वे निर्दोष आदिवासी नहीं थे क्योंकि उनमे से सीते नामकी लडकी तो हत्याकांड के मुख्य आरोपी एसपीओ मडकम मुद्राज की पूर्व सहायक थी और यह मद्कम मुद्राज पहले नक्सली था और उस हत्या के समय सीते दरअसल आदिवासियों की मीटिंग कर रही थी .

इस हत्याकांड का मुकदमा हम लोग अभी भी छत्तीसगढ़ के हाई कोर्ट में लड़ रहे हैं . असल में एसपीओ मडकं मुद्राज और उसके साथियों ने गाँव पर हमला बोल कर उन्नीस आदिवासियों को मार डाला था। मरे गए आदिवासियों में चार लडकियां भी थीं .चारों लड़कियों के साथ बलात्कार भी किया गया था. यहाँ शुभ्रांशु कहना चाहते हैं की देखो मार डाली गयी वह लडकी निर्दोष नहीं थी क्योंकि वह तो नक्सलियों की मीटिंग कर रही थी .इस प्रकार का लेखन तो दंतेवाडा के सस्ते पत्रकार भी एसपी से पैसे खाकर नहीं करते परन्तु शुभ्रांशु ने इस किताब के द्वारा सरकार की सारी क्रूर हरकतों को सही ठहराने की भी शरारत पूर्ण कोशिश की है.

इसी प्रकार से एक अन्य जगह पर लेखक ने लिखा है कि गांधीवादी लोगों ने (वह गांधीवादी मैं ही हूँ ) सलवा जुडूम द्वारा जला दिये गये नेन्द्रा नामक गाँव को दोबारा बसाया था . वहां का पूर्व सरपच तमैय्या असल में पहले नक्सलियों के साथ मिल कर एर्राबोर बाज़ार लूटने की वारदात में शामिल था , और इसलिए वह डेढ़ साल जेल में भी रहा . लेखक के अनुसार यह बात तमैय्या ने लेखक को कभी नहीं बताई हांलाकि वह उसके गाँव में उसके साथ कई दिन तक रहा .

हम नेन्द्रा गाँव के आदिवासियों को आंध्र प्रदेश और बस्तर के जंगलों से वापिस लाये थे और दोबारा उनके गाँव में बसाया था. और हमने सरकार को चुनौती दी थी कि अगर सरकार इन आदिवासियों को मारना चाहती है तो सरकार को पहले हमारी हत्या करनी पड़ेगी . सब जानते हैं की नेन्द्रा गाँव में आदिवासियों को सलवा जुडूम और सरकार के ज़ुल्मों से बचाने के लिए किये गए हमारे मानव कवच के प्रयोग से सरकार की कितनी थू थू हुई थी. इसलिए शुभ्रांशु इस किताब के माध्यम से यह कहने की कोशिश करना चाह रहे हैं की देखो गांधीवादी लोग भी असल में नक्सलियों की रक्षा कर रहे थे. इस तरह की मनगढ़ंत बातों से किसको फायदा होगा सभी जानते है.

इस किताब के द्वारा दरअसल शुभ्रांशु ने सरकार के मूंह पर लगे सारे कीचड़ को धोने की कोशिश करी है . और उन सारे लोगों की विश्वसनीयता पर कीचड उछाला है जिनसे सरकार को परेशानी हो रही है . उदहारण के लिये इस किताब में बिनायक सेन के बारे में जो भी लिखा गया है वह तो हूँ- बहु पुलिस की कहानी है. और यह कहानी तो रोज़ छत्तीसगढ़ के अखबारों में छपती थी . इसको जानने के लिये किसी नक्सली से मिलने की ज़रूरत थोड़े ही है . यह कहानी तो रायपुर को कोई भी पुलिस वाला एक डोसा खाकर आपको आराम से सुना देता. जहां तक नक्सलियों का सवाल है हमने भी नक्सली देखे हैं . लेकिन कोई भी नक्सली कभी अपने साथ करने वाले लोगों की सूची किसी पत्रकार को नहीं देता .लेकिन शुभ्रांशु की किताब तो कमाल है, उसमे नक्सली खुद हवाई जहाज में बैठ कर दिल्ली आकर रेस्टोरेन्ट में बैठ कर डोसा खाते हुए अपने साथियों की लिस्ट दिल्ली में रहने वाले शुभ्रांशु नामक एक पत्रकार को बताते हैं .

दूसरी एक समझने वाली बात. शुभ्रांशु सीजी नेट नामक एक इंटरनेट ग्रूप चलाते हैं . उस ग्रूप पर शुभ्रांशु की मदद से बिनायक सेन की रिहाई के लिये ज़ोरदार अभियान चलाया गया. अगर शुभ्रांशु को बिनायक के जेल जाते ही पता चल गया था कि बिनायक नक्सलियों के पत्रवाहक (कूरियर) हैं तो उसी समय शुभ्रांशु को उस अभियान से अपने सी जी नेट को अलग कर लेना चाहिये था .लेकिन अब जाकर शुभ्रांशु चौधरी का ह्रदय परिवर्तन कैसे हो गया? छत्तीसगढ़ में सब जानते हैं कि आजकल शुभ्रांशु चौधरी जी रमन सिंह के साथ मंच साझा करने लगे हैं और अब अचानक शुभ्रांशु को ख्याल आया है कि अरे मुझे तो एक नक्सली ने यह कहा था कि बिनायक सेन तो हमारे कूरियर हैं. और छात्तिसगढ़ में काम कर रहे गांधीवादी भी दरअसल नक्सलियों की रक्षा करने में लगे थे.

इस सब को लिखने से ना तो बस्तर की जनता का फायदा होगा. ना देश में नक्सलवाद को समझना चाह रहे लोगों को इस से कोई नई जानकारी मिलेगी. हाँ पुलिस और छत्तीसगढ़ सरकार के कई मूर्खतापूर्ण दावे जो वह मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के बारे में करती थी कि यह लोग तो नक्सलियों के लिये काम करते हैं उन्हें सच साबित करने की नाकाम कोशिश इस किताब में की गयी है.

हिमांशु कुमार के फेसबुक वॉल से.

वर्दी पहने एसएसपी ने सबके सामने सपा महासचिव रामगोपाल यादव का चरण स्पर्श किया

समाजवादी पार्टी के महासचिव और राज्यसभा के सांसद रामगोपाल यादव के एटा में हो रहे एक कार्यक्रम में कुछ ऐसा दिखा जो चौंकाने वाला था। ड्यूटी पर तैनात एसएसपी अजय मोहन शर्मा कार्यक्रम में नेताजी के पैर छूते नजर आए। दरअसल, रामगोपाल यादव इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे और सपा नेताओं में उनके पैर छूने की होड़ मची हुई थी। लगे हाथों एसएसपी साहब ने भी रामगोपाल यादव के पैर छू लिए।

एसएसपी अजय मोहन शर्मा से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह पैर छूने के लिए नहीं बल्कि सुरक्षा कारणों से नीचे झुके थे। इससे पहले मायावती भी इस मामले को लेकर सुर्खियों में रह चुकी है। अपने मुख्यमंत्री काल के दौरान जब वह औरैया पहुंची और हेलीकॉप्टर से नीचे उतरीं तो उनकी विशेष सुरक्षा में लगे अधिकारी ने तुरंत अपनी जेब से रूमाल निकाला और मैडम माया के श्रीचरणों की सफाई करने लगा। वहां एकत्रित हजारों की भीड़ ने इस दृश्य को नंगी आंखों से देखा था।

इस प्रकरण पर फेसबुक पर भी बहस शुरू हो चुकी है…

Amitabh Agnihotri : उत्तर प्रदेश में एटा में SSP ने अपनी पूरी वर्दी में सपा महासचिव रामगोपाल यादव के चरण छू लिए …… वो भी सार्वजानिक रूप से ….. अब इन कप्तान साहब का क्या किया जाना चाहिए ???

    Vinay Vishwakarma safed kurte ke saamene khaki ka surrender
 
    Aryan Yadav sir…krne ka toh bht kuch man krta h bt kr hm toh "sayad" kuch nahi skte h….bs 8 baje aap is mudde ko jhoro choro pr udhana………netao ki bolti bnd kr dena aap….!
 
    Vinay Vishwakarma khakee vardi ke liye ….. naki kar dariya mein daal
   
    Rajaram Legha amitabh ji ye to hamesha hi hota h esne sarvjnik kar liya to kya huaa
    
    Chaitanya Alok समाजवादी पार्टी के गुंडा मोर्चा का अध्यक्ष पद के बारे में क्या ख्याल है ?
     
    Prashant Bhandari jisne apni laaj sharam bech di hy uska kuch nahi kiya ja sakta.
     
    Pankaj Bajpai Naukri bachani jo hai
     
    Bhuvnesh Ojha ghoos de ke bharti hua hoga sala"
     
    Vinod Bansal हम और आप कर ही क्या सकते हैं……??????…..सिवाय मन मसोज कर रह जाने के….
     
    Anugrah Mishra ये कहाँ नहीं होता ? आज के ज्यादातर प्रशासनिक अधिकारी (खासकर पुलिस वाले) नेताओं की चाटूकारिता करने के लिए इससे भी ज्यादा गिरने को तैयार है
     
    Nitin Srivastava suspension
     
    Anil Sharma आप और हम तो सिर्फ विवाद के लिए टेबल सजा सकते हैं बाकी तो अब इसका हिसाब-किताब रामगोपाल ही करेंगे शायद इन जनाब को एस एस पी से एस ही बना दिया जाये.. हमारे यहाँ कम से कम राजनीती में तो चाटुकारिता जग जाहिर है सर…..
     
    Anil Sharma Yahi kahenge bs ki "JEETE RAHO"…
     
    Lalit Bajpai public me ye krta hai toh akele me kya krta hoga.
     
    Gajendra Rawat sabhi kar rahe hai police wale ko bhi maal chahiye or har ek ko . police wale ki photo aa gayi hogi bakiyon ki bhi aa jayegi
     
    Nitin Srivastava waise sir shayad DGP sahab Iski Bhi Pehle C.D maangenege fir Shayad Koi Kryawahi kare ya na kare yeh to Akhilesh sarkar he batayegi
     
    Pawan Pandey in logo ko khaki pahene ka koi haq nahi hai..lanat hai in logo par ,
     
    Yogesh Mandhani barkhaast, aur kya….. lekin jiske pair chuye hai uske ashirwad ke aage hum kya kar sakte hai…. Up ke logo ne chuna hai to wo bhugtenge….
     
    Digvijay Mishra Ye koi nai baat nahi hai sir aisi kai ghatna vns, alld, snb, mzp me bhi ho chuki hain
     
    Shashidhar Pathak Maf kar diya jana chahiye. yeh badalte jamane ke dastoor ho gaye hain. samaj ka status symbol badal gaya hai. bachpan me dadi hume kaptan, kalektar aur lat sahab banatee thi lekin ab dadiyon ko bachcho ko neta, thkedar aur gunda banane ki duaaiyen deni hogi. kaptan sahab bhi ab kaptani nahi balki naukari kar rahe hain. aisa isliye hua hai ki hamane assembly aur parliament me gajab ke manniya bhejana shuroo kar diya hai.
     
    Kumud Singh क्‍या गलत किया राजाबहादुर की नौकरी ही तो करते हैं ये एसपी लोग। नौकरों की जगह चरण में ही है।
     
    Saurabh Awasthi ye un kuch logo me se hai.jinhe ye lagta hai,ki 5 year ke liye.ye he hamare mai baap hain .shayd isliye hi ye khaki ki maryada bhool kar .sattadhari dall ke talwe chatne lagte hai.
     
    Madhurendra Kumar Captan ke haath me cup thama ke chai parosne ke liye taan dena chahiye . Ssp se badhiya chai pilane ka kaam karega .
     
    Mukesh Prasad iss skikhsha/gyan ka koi laabh nahi………….
    
    Ahmad Nadeem is SSPne to sirf pair chua lekin mayawati ke to sandil ko apne rumal se saaf kia tha ek IAS ne sabke samne to unka kya kia gaya bhai ?? YE UP HAI SAB CHALTA HAI
     
    Manoj Kumar sir ase officers ko u.p se bahar kar dena chahiye
     
    Shashank Agnihotri ab ye IPS oficers are behaving in this manner than we can guess about the middle level bureaucracy what they are doing?it is a truly awkward example of Indain bureaucracy mannerism nowadays.Hats off in shitful manner.
     
    Arvind K Singh अमिताभ भाई…यह तो परंपराओं का खेल है…लखनऊ हवाई अड्डे पर एक डीएसपी ने अपनी रुमाल से बहन जी यानी तबकी मुख्यमंत्री मायावती के जूतों को अपने रुमाल से साफ किया था…नौकरशाही तो अब दो राजनीतिक धाराओं में बंट गयी है…और जो उस धारा के नेता है वह मठाधीश की तरह बन गए हैं ऐसे में सार्वजनिक तौर पर पैर छूने में भी अब संकोच नहीं कर रहे हैं…पहले जब अशोक सिंघल और गिरिराज किशोर से लेकर बाबा संन्यासियों के पैर छूते थे अफसर तो फिर उसे धरम करम से जोड़ दिया जाता था…
     
    Sheetala Singh kya kahenge sir…sab bhool gaye hain…chaatukaarita me….
 
    Anil Gaur Amitabh ji -Positive side ye hai , jo kiya sarvajanik roop sey kiya.
 
    Rahul Sharma सर ये पंक्झूतियां समर्पित है एसएसपी एटा को को झूठ न कहने वाले आज बुद्धिमान होते हैं,
    ये वक्त जो है सिर्फ और सिर्फ चापलूसों का ।
   
    Niraj Pandey in chapluson ko police se nikal kar samajwadi party me samil kar dena chahiye
    
    Anuraag Muskaan इन्हे अब झुके ही रहने दिया जाए… बाकी काम स्वतः ही हो जाएगा
     
    पुष्यमित्र उपाध्याय dhanya ho
     
    Ranvijai Singh ye aage neta banega.
     
    Prabhat Dangwal sab promotion ka chakkar hai sir ji
    
    Manish Mishra Sir, pradesh me rah kar bachchon ko surakshit rakhne ke atirikt roji roti ko dekhte huye sahab ne sheesh navaya hoga. lekin hai sharmnak
     
    Santosh Katiyar SSP ji bhi chah rahe honge chori kerne ki permission. Q ki samajwadi neta kah he chuke hai chori ker sakte hai officer.
     
    Armaan Asif Iqbal s.s.p full form is service for samajwadi party..
     
    Asrar Khan विनोद जी मुझे नहीं लगता कि सरकारी डियूटी पर रहते हुए पैर छू लेना कोई अपराध है यह तो हिंदू धर्म में आम बात है जो हर हिंदू को संस्कार में मिलता है ..लिहाजा किसी भी अपने से बड़े या श्रेष्ठ अथवा उपियोगी व्यक्ति का पैर छू लेना एक तरह से आदत में शुमार है …/ चिंता का विषय तो ए है कि दिल्ली से सटे इलाकों में सरकारी पार्कों में मंदिर ईदगाह और दुसरे धार्मिक स्थल बनाए जा रहे हैं जो एक तरह से जमीन कब्जा करने के लिए किये जा रहे हैं …उसके खिलाफ कोई नहीं बोल रहा है …..
     
    Prabhat Dangwal sir neta ji loot lenge jameen usse badiya hai ki upar wale ke liye kuch bana diya jae
     
    Sandeep Gupta सर जी आप भी जानते हो 9 वाँ का हाँजी भी तो है।8 तो अपने आप हो जायेँगे।
    
    Asrar Khan प्रभात जी मेरी समझ से सरकारी पार्क की जमीन को कोई भी नेता हाथ लगाने वाला नहीं है …किसी नेता के अंदर न इतनी हिम्मात है और न ही ऐसा कोई प्रचलन है …बल्कि इस तरह के गलत काम केवल धर्म के नाम पर किये जा रहे हैं भले ही उसके पीछे नेता और आफीसर तथा जनता भी हो …/ नई आबादियों में सरकार को धर्म स्थलों के लिए जमीन मुहैय्या करानी चाहिए वरना इसी तरह के अवैध कब्जे होंगे …
    
    Sachin Kumar Jain सम्मान और क्या!
    
    Shiri Krishan Sharma unhone apne kiye sabhi galat karyo ka clearance le liya hae aor promotion ki application pero ke jarie khopadi me dal di hae ……mahadust officer hoga ……agnihotri ji …unhe I.G. bana diya jae .

पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री के फेसबुक वॉल से.