अवैध खनन के संचालकों से पैसे लेकर गुटों में बंट चुके हैं पत्रकार!

विकासनगर (देहरादून)। पत्रकारिता के क्षेत्र में विकासनगर में इन दिनों काफी हलचल मची हुई है। यमुना नदी में खनन के लिए आवंटित पट्टों के संचालकों से पैसे लेने को लेकर पत्रकार अलग अलग गुटों में बंट चुके हैं। आए दिन पैसे नहीं मिलने पर पत्रकार एक दूसरे के उपर टीका टिप्पणी और गाली गलौच करते नजर आ रहे हैं।
 
हैरान करने बाली बात यह है कि कुछ पत्रकार लिस्ट बनाकर एक नेशनल न्यूज चैनल के नाम पर भी संचालकों से पैसे ले रहे हैं। जबकि इस नेशनल न्यूज चैनल द्वारा पछवादून क्षेत्र में कोई भी संवाददाता तैनात नहीं किया गया है। संचालक पैसों का यह बंटवारा पत्रकारों के बैनर के अनुसार निर्धारित कर रहे हैं। बड़े समाचार पत्रों को बड़ी रकम, छोटों को छोटी रकम दी जा रही है। पत्रकार बनकर दलाल की भूमिका निभाने वाले ये व्यक्ति खनन संचालकों को लिस्ट मुहैया करा रहे हैं। जिसके आधार पर संचालक पत्रकारों को रकम उपलब्ध करा रहे हैं।
 
कुछ संस्थानों के पत्रकारों को यह रकम नहीं मिल रही है। यह रकम बीच के दलाल पत्रकार हजम कर जा रहे हैं। इसके बाद पत्रकार पैसे को लेकर आपस में दोषा रोपण कर रहे हैं। नौबत लड़ाई झगड़े में भी तब्दील हो रही है। सम्मानित समाचार पत्रों और इलेक्ट्रानिक चैनलों के संचालकों से अनुरोध है कि वह इस मामले में एक गोपनीय जांच कराकर अपने अपने प्रतिष्ठानों की छवि को बचा सकते हैं।
 
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

सपा जिलाध्यक्ष ने खबर छापने के लिए दिए अजमेर के पत्रकारों को मोबाइल फोन

हमेशा की तरह पूरे 36-48 घंटे इंतजार किया कि किसी का तो जमीर जागेगा और शायद 'भड़ास' पर यह खबर पढ़ने को मिलेगी। जब देखा 'भड़ास' पर इस खबर की एक लाइन नहीं है, फिर तय किया, चलो इस बार भी अपन ही खबर भेजें। तो हुआ यूं कि आन-बान-शान के लिए जाने वाले राजस्थान के मेरे शहर 'अजमेर शरीफ' के पत्रकारों ने कल फिर एक गुल खिला दिया।

समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष हेमंत जैन से एक छोटा सा तोहफा, 'मोबाइल फोन' लेकर उसकी दो से चार कॉलम की खबर छापी। सपा जिलाध्यक्ष हेमंत जैन पर भगवानगंज क्षेत्र में एक दलित की जमीन पर कब्जा करने का आरोप है। दलितों के विरोध के चलते रामगंज थाना पुलिस को इस मामले में हेमंत जैन और उसके साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना पड़ा।

पिछले दिनों जब अजमेर के पुलिस अधीक्षक राजेश मीणा को थानेदारों से मंथली लेने के आरोप में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने रंगे हाथों दबोचा तो यह खुलासा हुआ कि सपा जिलाध्यक्ष जैन ने एसपी मीणा के दलाल रामदेव ठठेरा और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल तथा रामगंज थानाधिकारी कुशाल चौरड़िया से पैसे की सांठ-गांठ कर अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को रफा-दफा करवा दिया। ब्यूरो ने इस पर एसपी मीणा, दलाल रामदेव, एएसपी सोनवाल, थानाधिकारी चौरड़िया और सपा जिलाध्यक्ष जैन के खिलाफ नया मुकदमा दर्ज कर उसकी जांच शुरू कर दी।

जब देखा कि ब्यूरो अपनी जांच किए जा रहा है तो मंगलवार को हेमंत जैन ने एक प्रेस कॉंफ्रेंस बुलाई। पत्रकारों के सामने सफाई दी, सारा मामला झूठा है, अगर खत्म नही किया गया तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निवास के बाहर धरना दूंगा। खबर छापने की खातिर एक रेस्टॉरेंट में शानदार नाश्ता करवाया गया और मोबाइल फोन उपहार में दिया गया। अगले दिन अखबारों में दो से चार कॉलम तक की खबर थी।

बेचारे पत्रकारो के साथ गड़बड़ कर दी राजस्थान पत्रिका ने, खबर तो छापी पर यह भी लिख दिया कि हेमंत जैन ने मीडिया मैनेज करने के लिए पत्रकारों को मोबाइल फोन बांटे। साथ ही स्पष्ट कर दिया, पत्रिका रिपोर्टर ने यह प्रलोभन स्वीकार नहीं किया। जानकारी के मुताबिक प्रेस कॉंफ्रेंस में कुल पंद्रह पत्रकारों और फोटोग्राफरों ने सहर्ष यह सम्मान स्वीकार किया। पत्रिका की खबर से बौखलाए खबरनवीस अब मोबाइल फोन को घटिया तो बता ही रहे हैं साथ ही अपनी खुन्नस निकाल रहे हैं कि पत्रिका वाला कौन सा दूध का धुला है, नाश्ता तो उसने भी किया है, नाश्ता परोसने की बात भी तो लिखता, क्या वह प्रलोभन नहीं है? इधर एक नई जानकारी आ रही है, हेमंत जैन को मीडिया मैनेज करने का यह आइडिया एक पत्रकार ने ही दिया था। जैन ने उस पत्रकार को ही इस मैनेजमेंट का ठेका दे दिया था। पत्रकार महोदय ने अपना तगड़ा मैनेजमेंट दिखाया और जैन से मंहगे दाम लेकर अपने साथियों को सस्ते किस्म के मोबाइल उपकरण बंटवा दिए।

मालूम हो कि पहले कभी डायरी पेन तक सीमित रहने वाले अजमेर शहर में गाहे बगाहे खबरों के लिए पत्रकारो को उपहार देने की चर्चाए गरम रहने लगी है। एक जैन मुनि की प्रेस कॉंफ्रेंस में पत्रकारों को चांदी के सिक्के बांटे गए थे तो विधायक अनिता भदेल ने नगर परिषद सभापति रहने के दौरान अटैचिया बांटी थी। अजमेर डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी तो कई दफा घी के पैकेट बांट चुके हैं। कई दफा तो रिपोर्टर ने एक-एक उपहार अपने चीफ रिपोर्टर और संपादक के नाम पर भी ले लिया। कुछ ईमानदारी की मिसाल बने रहे और अपना उपहार किसी और जगह पहुंचा देते जहां से बाद में ले लेते। सन् 1997 में जब यह दौर जोर पकड़ने लगा, दैनिक भास्कर, अजमेर के संपादक डॉ. रमेश अग्रवाल ने बाकायदा खबर प्रकाशित कर खबरें छापने के नाम पर या प्रेस वार्ता में भास्कर के पत्रकार और फोटोग्राफरों के उपहार नहीं लेने की घोषणा की थी।

उपहारों को लेकर पत्रकारों की कई बार किरकिरी भी हुई है। देहली गेट पर एक  समाज की धर्मशाला में बुलाई गई पत्रकार वार्ता में लंच का भी न्यौता दिया गया था। लंच के नाम पर सबको एक लंगर में बैठा दिया गया और बाद में एक कमरे के फर्श पर बहुत सारे शर्ट पीस का ढेर लगा दिया गया। जिसे जो पसंद है ले लो भाई कहते ही सारे पत्रकार कपड़ो के ढेर पर टूट पडे़ और अपनी पसंद का कमीज का कपड़ा लेकर ही वहां से हिले।

अजमेर से राजेंद्र हाड़ा की रिपोर्ट. राजेंद्र जी से संपर्क  09549155160 या 09829270160 या rajendara_hada@yahoo.co.in के जरिए कर सकते हैं. राजेंद्र हाड़ा करीब दो दशक तक सक्रिय पत्रकारिता में रहे. अब पूर्णकालिक वकील हैं. यदा-कदा लेखन भी करते हैं. लॉ और जर्नलिज्म के स्टूडेंट्स को पढ़ा भी रहे हैं. राजेंद्र हाड़ा की अन्य रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- भड़ास पर राजेंद्र हाड़ा

लो, एनडीटीवी भी करने लगा पेड न्यूज!

: 40 करोड़ रुपये लेकर साक्षी टीवी के जरिए भ्रष्टाचारी रेड्डी को बचाने में जुटा एनडीटीवी प्रबंधन? : भड़ास4मीडिया के एक पाठक ने बड़ा महत्वपूर्ण सवाल उठाया है. उन्होंने जो पत्र भेजा है, वह पेड न्यूज के बारे में बड़े फलक पर सोचने को मजबूर करता है. चुनाव आयोग कहता है कि पेड न्यूज सही नहीं है. न्यूज चैनलों को चुनाव से महीनों पहले पेड न्यूज और राजनीतिक विज्ञापन दिखाने पर रोक है. लेकिन अगर कोई बड़ा नेता पेड न्यूज वाला पैसा व विज्ञापन का पैसा किसी दूसरे को देने की जगह खुद का ही चैनल खोल ले और जमकर अपनी मार्केटिंग करने लगे तो भला कोई क्या कर लेगा.

और ऐसा हो भी रहा है. दक्षिण भारत में जो साक्षी टीवी है, उसके बारे में सब जानते हैं कि यह वाईएस जगन मोहन रेड्डी का है. इनके पिता सीएम थे जिनकी जहाज हादसे में मौत हो गई. वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने साक्षी टीवी को चला पाने में असफलता के कारण इसको एडिटोरियली चलाने का जिम्मा एनडीटीवी को सौंप दिया है. इसके लिए एनडीटीवी को 40 करोड़ रुपये दिए गए हैं. अब एनडीटीवी प्रबंधन साक्षी टीवी के कंटेंट को देख रहा है. सीबीआई ने रेड्डी के पास अस्सी करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति के बारे में खुलासा कर चार्जशीट दायर करने की बात कही है तो आंध्र प्रदेश की लोकल मीडिया ने इस मुद्दे के जरिए रेड्डी को घेरने का काम शुरू कर दिया है. ऐसे में एनडीटीवी के एडिटोरियल नेतृत्व वाली साक्षी टीवी की टीम ने अब लोकल मीडिया के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है. जाहिर है, इसका मकसद भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे अपने मालिक व नेता रेड्डी को बचाना है. तो, क्या यह पेड न्यूज नहीं हुआ? यह तो बहुत बड़े लेवल का पेड न्यूज है और इसे बड़ी सफाई से अंजाम दे रहा है एनडीटीवी. वही एनडीटीवी जो अपनी सादगी और ईमानदारी के गुन गाते नहीं थकता. उस एनडीटीवी ने 40 करोड़ रुपये लेकर अपना ईमान बेच दिया है. भड़ास4मीडिया के पास जो पत्र आया है, वह इस प्रकार है–

killing Journalism

Marriage of SakshiTV and NDTV killing Journalism There is a lot of hue and cry on paid news. Press council banned paid news and stopped political advertising 6 months prior to the election. But what if a politician himself launches a newspaper or News TV station? He will propagate his party and himself 24/7. Is this not paid news? Our respected regulatory bodies do not have answer for this. Should we allow these media organizations function at the election hour propagating the owner-politicians and their respective political parties? No one has answer to this. Y.S. Jagan Mohan Reddy, President of YSR Congress Party has launched a newspaper and News TV channel in the State of Andhra Pradesh. He spent crores of rupees to start SakshiTV to support his activities. After an year of the launch he found out that he failed to run the channel and handed over the editorial responsibility to NDTV. NDTV got Rs. 40 Crores in this deal. Now CBI found out that there is illegal wealth to the tune of Rs. 80,000 crores with Jagan Mohan Reddy. CBI filed charge sheet on Jagan Mohan Reddy and started raiding his properties. Local media started covering this. NDTV lead editorial team of SakshiTv started attacking local media. It named Eenadu, Andhrajyothy and TV9 as corrupt channels and warned them not to telecast news of CBI raids on Jagan. One can understand the fate of the news channel started by a black money politician. But an organization like NDTV which always talks about the ethics in the media supporting this kind of activity is surprising. Values in the media up for sale for mere Rs. 40 Crores?