जागरण ने भी माना उसके मऊ कार्यालय में सब कुछ ठीक नहीं!

: आर्थिक गड़बडि़यों के चलते अखबार का काम भी होने लगा प्रभावित : भाई यशवंत जी! यह कहावत कि गेहूं की खेती से धान की उपज नहीं लिया जा सकता, दैनिक जागरण को इसका लग रहा है कि एहसास होने लगा है। 15 अक्टूबर को दैनिक जागरण के पेज नंबर 4 पर एक सूचना प्रकाशित कर यह स्वीकार कर लिया है कि उसके मऊ दफ्तर में अपराधों को अंजाम दिया जाता है।

क्‍या जागरण के पत्रकारों की कलई खोलने पर ‘सजा’ का प्रावधान है?

भाई यशवंत जी! मऊ के दैनिक जागरण कार्यालय के लोगों के द्वारा यहां के आला अफसरों से बीते दो सालों तक मऊ महोत्सव के नाम पर जिलाधिकारियों को पटाकर नगरवासियों से जमकर कमाई की जाती रही। जिलाधिकारी के नाम पर धौंस जमाकर लोगों से पैसे वसूल कर बिनय जायसवाल आदि ने मऊ महोत्सव के नाम पर खूब लूटे। उस समय तब मैं वाराणसी के आज अखबार का जिले में संवाददाता हुआ करता था।

”जागरण के पत्रकारों की करतूत सार्वजनिक करना पाप लगने लगा है”

भाई यशवंत जी, दैनिक जागरण के लोगों द्वारा गुरुवार को मेरे तथा चार माह पुराना हो चले दैनिक ब्रहमखोज के खिलाफ कापीराइट एक्ट के तहत मुकदमा करने की मंशा को पूरा कर लिया गया। मजे की बात यह रही कि इस प्राथमिकी को जिले के कथित ब्‍यूरोचीफ ने दर्ज कराई है। आप को बताते चले कि समाज में व्याप्त कुरीतियों अंधविश्वासों के प्रति समाज में जागृति के लिए अखबार के माध्यम से जनसेवा के लिए उतरना अब कष्ट का एहसास दिलाने लगा है।

”दैनिक जागरण वाले मुझे फंसाने की कोशिश में लग गए हैं”

: पुलिस भी बड़े अखबार के दबाव में : भाई यशवंत जी, मैं ने दैनिक जागरण में काम करते हुए अपराधियों को संरक्षित करने वाले पत्रकारों की करतूत को अपने अखबार ब्रह्मखोज में प्रकाशित कर पत्रकारिता पर लगाए जा रहे धब्बे को सार्वजनिक क्या किया कि दैनिक जागरण वाले मेरे खिलाफ मुकदमे खड़े करवाने में लग गए हैं।

ब्रह्मानंद पांडेय बने ब्रह्मलेखनी के संपादक

: बरेली से आगरा भेजे गए सुधांशु : ब्रह्मानंद पांडेय दूसरे संस्‍थानों की नौकरी करने के बाद अब खुद अखबार का प्रकाशन करने जा रहे हैं. लखनऊ से प्रकाशित होने वाले चार पेज के दैनिक ब्रह्मलेखनी का प्रकाशन अब वे मऊ से करेंगे. उन्‍हें मऊ का स्‍थानीय संपादक-प्रकाशक बनाया गया है. इस अखबार के संपादक बीरेंद्र मिश्रा हैं तथा इसकी मालकिन मीनक्षी मिश्रा हैं.