वैसे भी जिस बंदे के बदन पर खाकी होती है, उसके हाव-भाव-ताव सब अलग होते हैं. जनता उनके लिए कीड़े-मकोड़े से ज्यादा नहीं होती. खाकी बदन पर चढ़ते ही ये खुद को कानून से ऊपर समझने लगते हैं और आईपीसी की धाराओं को अपनी रखैल. जब जैसा चाहा वैसा किया, फिर कानून की कमजोरी का फायदा उठाते हुए बच निकले. आज गाजीपुर जिले के बिरना थाने क्षेत्र में हुई घटना भी ऐसे ही एक पुलिस वाले की गुंडई तथा कानून से खुद को ऊपर समझने की मानसिकता का परिचायक है.
इस दारोगा का नाम है रणजीत राय. युवा है, जोश है, पर होश में कभी नहीं रहता है. यह खुद को दंबग का सलमान खान समझता है और जनता को भेड़-बकरी. पिस्टल दिखाने और चलाने का इसे बहुत ज्यादा ही शौक है. अब आते हैं कानून के इस दबंग के चलते बिगड़ी कानून-व्यवस्था की कहानी पर. जो बात थोड़ी समझदारी और नरमी से सलट सकती थी, वह इस दारोगा की दबंगई के चलते हादसा बन गई. घटना बन गई. पर इसका कुछ बिगड़ेगा इसकी उम्मीद ना के बराबर है. क्यों कि यह दबंग अपने अफसरों का काफी चहेता है. हां, जो घायल हुए हैं, जिनका बिगड़ा है वो अपने बारे में सोचे, अपना सोचे.
अब आते हैं मूल घटना पर. गाजीपुर जिले के बिरना थाना क्षेत्र का कबूतरी गांव. यहां के एक स्कूल के प्रबंधक तथा पेशे से शिक्षक धर्मेंद्र बिंद, उनकी लाश उनके ही स्कूल में फंदे से लटकी मिलती है. पुलिस को सूचना दी जाती है. शाम की घटना है, पर पुलिस रात को पहुंचती है. पहुंचते ही धर्मेंद्र की मौत को आत्म हत्या घोषित कर देती है. अब जब खाकी वालों ने आत्महत्या घोषित कर दिया तो फिर यह हत्या या कोई संदिग्ध मौत कैसे हो सकती है. आखिर इनके मुंह से निकले वाक्य खुद कानून जो बन जाते हैं. परिजन-ग्रामीण कहते हैं कि धर्मेंद्र की हत्या हुई है. वो मुकदमा दर्ज करने की बात करते हैं, पोस्टमार्टम कराने की बात करते हैं. पर जब खाकी ने एक बार कह दिया कि आत्महत्या तो फिर किसी और जांच का सवाल ही कहां रह जाता है.
धर्मेंद्र के परिजन और ग्रामीण अपना विरोध जताते हैं. सुबह वे थाने के सामने पहुंचकर सड़क पर बैठ जाते हैं तथा उनकी मांग होती है कि मामला दर्ज कर जांच की जाए. अगर एक तरीके से देखा जाए तो किसी की मौत पर उसके परिजनों को शक है तो पुलिस को इसकी जांच करनी चाहिए, पर इन खाकी वाले दबंगों की कही बात पत्थर की लकीर बन जाती है. बिरना पुलिस मुकदमा लिखने और जांच करने को तैयार नहीं हुई. ग्रामीण भी मौके पर जमे रहे. इस बीच इस जाम-प्रदर्शन की सूचना जिले के आला हाकिमों को दी जाती है. आला हाकिम अपने प्रिय दबंग दारोगा और जंगीपुर थाने के थानाध्यक्ष रणजीत राय तथा मरहद थाने के थानेदार को मौके पर पहुंचने को कहती है.
मरदह थानाध्यक्ष मौके पर पहुंच जाते हैं. अब बारी आती है दबंग थानाध्यक्ष रणजीत राय की. यह दबंग स्टाइल में अपनी सरकारी जीप धरनारत ग्रामीणों की भीड़ में घुसा देता हैं. भगदड़ मचती है. कुछ लोग घायल होते हैं. कुछ को चोट लगती है. इसके बाद यह दारोगा ग्रामीणों की मां-बहन करता है तथा पिस्टल हाथ में लहराने लगता है. इस अमानवीय व्यवहार के बाद जनता भड़क जाती है और पुलिस विरोधी नारे लगाने लगती है. इसके बाद भी रणजीत राय का मन नहीं भरता है. वो पिस्टल लेकर भीड़ को दौड़ा लेता है. इसके साथ कुछ पुलिसकर्मी लाठीचार्ज कर देते हैं. फिर भीड़ उग्र हो जाती है और पथराव शुरू कर देती है. तब यह दबंग अपने सिपाहियों के साथ वापस भागता है. थाने में आकर घुस जाता है.
उग्र भीड़ अब अनियंत्रित हो जाती है. कई वाहनों को तोड़ने-फोड़ने के बाद थाना परिसर में रखे गए पुराने वाहनों को आग लगा देती है. थाने की चहारदीवारी तोड़ डालती है. फिर मामला और बिगड़ जाता है और पुलिस गोलियां चलाती है, जिसमें कम से कम पांच ग्रामीणों को छर्रा लगता है तथा कई गिर-पड़कर घायल हो जाते हैं. सूचना पाकर एसपी, डीआईजी तथा आईजी भी मौके पर पहुंच गए. इन वरिष्ठ अधिकारियों ने पूछताछ के बाद घटना की मजिस्ट्रेटियल जांच की घोषणा किया है. मौके पर पहुंचे सांसद राधामोहन सिंह ने पुलिस की लापरवाही बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की.
उल्लेखनीय है कि पूरे मामले को बिगाड़ने वाले यह दारोगा नंदगंज थाने में तैनाती के दौरान भी नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए महिलाओं को कई घंटे थाने पर बैठाए रखा था, जिसमें इसे लाइन हाजिर भी किया गया था.रणजीत राय को हाथ में पिस्टल लेकर लोगों को डराने का शौक है. इसे इसमें बहुत मजा आता है. कई बार पिस्टल लहराकर यह अपने इस शौक का सार्वजनिक प्रदर्शन कर चुका है. बीते 25 मई को भी जंगीपुर थाना क्षेत्र में एक सड़क हादसे के बाद प्रदर्शन कर रहे लोगों पहले लाठियों से पिटवाया. जब ग्रामीण भी विरोध करने लगे तो इस दारोगा ने हाथों में पिस्टल लेकर प्रदर्शनकारियों पर टूट पड़ा था.












दिनेश
October 22, 2011 at 12:34 pm
यशवंत भाई, खबर चाहे जो हो इस हेडिंग को देखकर एक लतीफा याद आ गया:
लंबी खबरों से परेशान एक संपादक ने संवाददाता को कहा, “खबरे बहुत विस्तार से भेजने की जरूरत नही होती। बहुत-सी बातें पाठक खुद समझ जाते हैं।
अगली बार संवाददाता ने खबर कुछ यूं भेजी:
“शहर के सबसे बड़े पेट्रोल पंप की टंकी में पेट्रोल है या नहीं यह देखने के लिये कर्मचारी ने माचिस की तीली जलायी। पेट्रोल था । उम्र 50 बरस।”
amarjeet kaur
September 21, 2014 at 8:10 pm
apne power ka galat istemal karke logo ko pareshan karte h
amarjeet kaur
September 21, 2014 at 8:10 pm
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