टेलीविजन न्यूज चैनलों की भाषा पर सिलसिलेवार और गंभीर तरीके से लिखी गई एक किताब का विमोचन टेलीविजन और प्रिंट जगत के आठ संपादकों ने किया। टीवी के वरिष्ठ पत्रकार और IBN7 में कार्यरत एसोसिएट एक्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर हरीश चंद्र बर्णवाल की किताब “टेलीविजन की भाषा” का विमोचन समारोह 8 अक्टूबर को दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित किया गया।
किताब के लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि भारत सरकार में संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला रहे, वहीं टेलीविजन की कई दिग्गज हस्तियां इसमें शरीक हुईं। इसमें IBN नेटवर्क के एडिटर इन चीफ राजदीप सरदेसाई, आज तक के न्यूज डायरेक्टर कमर वाहिद नकवी, इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर विनोद कापड़ी, IBN7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष, जी न्यूज के एडिटर सतीश के सिंह, न्यूज 24 के मैनेजिंग एडिटर अजित अंजुम न सिर्फ इसमें शामिल हुए बल्कि हरीश बर्णवाल की किताब को लेकर अपने विचार भी रखे। हरीश बर्णवाल की किताब “टेलीविजन की भाषा” के ऊपर हुई परिचर्चा में दैनिक भास्कर के ग्रुप एडिटर श्रवण गर्ग और पायनियर के संपादक और मैनेजिंग डायरेक्टर चंदन मित्रा भी शामिल हुए।
हरीश चंद्र बर्णवाल की किताब “टेलीविजन की भाषा” के बारे में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा कि इससे टेलीविजन के विद्यार्थियों को ही नहीं बल्कि पेशेवर पत्रकारों को भी फायदा होगा। शुक्ला ने कहा कि देश भर में मीडिया के संस्थान भले ही बढ़ गए हों…. लेकिन उस तरह से किताबें अब तक नहीं लिखी जा सकी हैं। केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला के मुताबिक इस कमी की पूर्ति हरीश बर्णवाल की ये किताब करेगी। दिग्गज पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने किताब के बारे में बताया कि जब ये किताब उन्होंने पढ़ना शुरू किया तो उन्हें बेहद फायदा मिला क्योंकि खुद उनकी भी हिन्दी काफी कमजोर है।
राजदीप के मुताबिक मीडिया से जुड़े हर शख्स को ये किताब जरूर पढ़नी चाहिए। आज तक के न्यूज डायरेक्टर कमर वाहिद नकवी ने भी किताब की तारीफ करते हए कहा कि हरीश बर्णवाल ने इस किताब के माध्यम से जो ईमानदार कोशिश की है… उससे मीडिया में काम कर रहे लोगों को भरपूर फायदा होगा। नकवी ने किताब में दिए गए तमाम उदाहरणों की चर्चा करते हुए कहा कि मीडिया के विद्यार्थियों के लिए इस समय इस तरह की बेहद जरूरत थी। वहीं IBN7 के मैनेजिंग एडिटर ने लेखक की मेहनत की तारीफ की कि मीडिया में व्यस्त समय होने के बावजूद लेखक पिछले 8-9 साल से इस लेखन काम में जुटे रहे।
जी न्यूज के संपादक सतीश के सिंह ने किताब के बहाने टेलीविजन न्यूज चैनलों की भाषा पर सवाल भी उठाए और सार्थक बहस की शुरुआत करने की कोशिश की। वहीं इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर विनोद कापड़ी ने एसपी सिंह को याद करते हुए कहा कि टीवी की भाषा जितनी सरल हो, उतना बेहतर है। न्यूज24 के मैनेजिंग एडिटर अजित अंजुम ने भी हरीश बर्णवाल की किताब को लेकर शुरू हुई इस सार्थक परिचर्चा में भाग लेते हुए कहा कि भाषा को लेकर टीवी पत्रकारों को बेहद संयमित होने की जरूरत है।
इस परिचर्चा में टीवी इंडस्ट्री के अलावा प्रिंट के भी दिग्गज संपादकों ने हिस्सा लिया। सांसद और पायनियर के संपादक चंदन मित्रा ने किताब की तारीफ करते हुए कहा कि आज भाषा का स्वरूप जिस तरह से बिगड़ता जा रहा है, उसे बचाने में इस किताब से काफी मदद मिलेगी। मित्रा ने कहा कि जिस तरह से हम हिन्दी भाषा को छोड़कर दूसरी भाषाओं के शब्द लेते जा रहे हैं, उससे बचना चाहिए। विमोचन समारोह में बोलते हुए दैनिक भास्कर के ग्रुप एडिटर श्रवण गर्ग ने भी माना कि न्यूज चैनलों की भाषा में बेहद सुधार की जरूरत है।




कार्यक्रम के आखिर में लेखक हरीश चंद्र बर्णवाल ने सबका आभार जताया और बताया कि इस किताब को लिखने में कम से कम 8 साल का वक्त लगा है। लेखक के मुताबिक इतना लंबा वक्त लगाने का एक ही मकसद था कि न सिर्फ मीडिया के विद्यार्थियों को इसका फायदा मिले, बल्कि वो टीवी मीडिया में आने से पहले ही स्क्रिप्टिंग और भाषा को लेकर बारीक से बारीक चीजों के बारे में समझ सकें। यही नहीं जिस तरह से एक मंच पर टीवी और प्रिंट जगत के दिग्गज संपादक जमा हुए, लेखक के मुताबिक टीवी पत्रकारिता की भाषा को लेकर उनका एक बड़ा सपना पूरा हुआ। प्रेस रिलीज












संजय कुमार सिंह
October 9, 2011 at 8:19 am
इस पुस्तक के लोकार्पण समारोह के बारे में यशवंत पहले ही लिख चुके थे इस खबर से सिर्फ एक नई बात पता चली कि आठ संपादकों को क्यों बुलाया गया था। जो लिखा है उसे पढ़ते हुए यही लगा कि कोई भी पुस्तक को पढ़ने का समय नहीं निकाल पाया। आखिर में जब यह पता चला कि यह विज्ञप्ति है तो लगा कि विज्ञप्ति बनाने वाले ने भी पुस्तक पढ़कर कुछ लिखने की जरूरत नहीं समझी। ऐसे ही चलती रहेगी हिन्दी और हिन्दी वालों की दुनिया। जय हो।
PRAYAG PANDE
October 9, 2011 at 10:56 am
Congratulations HARISH bhai ! .aapke athak prayason se kitab main sanklit gyan pung ka labh uttarakhand ke patrkar bhaiyon ko bhi mil sake kuchh esa bhi jatan karane ki kirpa kijiyega.
kumarkalpit
October 9, 2011 at 9:11 pm
SAMAROH ME SAHARA SE PRINT AUR TV SE KISEE KO NAHEE BBLAYA GYA., JABKI YAH RASTRIYA ISTAR KA AKHBAR AUR CHAINAL HONE KA DAWA KARTA HAI. LAGTA HAI KI MEDIA JAGAT ME ISE KOI GHASH NAHEE DALTA 🙂
BALCHANWA
October 10, 2011 at 3:59 am
टेलीविजन की भाषा खराब करने वाले आठो गुनहगार एक साथ, एक ही मंच पर, चोर-चोर मौसेरे भाई…देख लो भाई। हा…हा…हा…कोई ये बताता है कि दुनिया खत्म होने वाली है…तो कोई ये बताता है कि स्वर्ग की सीढ़ी कहां है…अब ये बता रहे हैं कि भाषा कैसी होनी चाहिए…मानसिक जुगाली के लिए मंच ढूंढ ही लेते हैं ये लोग…और लेखर बेचारा इनके बीच दुबका हुआ है…हिंदी की तरह…उम्मीद है विचार व्यक्त करने वाले किताब पढ़कर अपनी भाषा दुरुस्त करेंगे…सधन्यवाद। बलचनवा। …