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दुख-दर्द

भास्‍कर की नई रीत : किसी परिजन के मरने पर पहले अवकाश लें फिर अर्थी को कंधा दें!

: डेस्‍क हेड के चलते इंसानियत शर्मसार : दैनिक भास्‍कर, जो अपने आप को भारत का सबसे बड़ा मीडिया समूह कहता है तथा अपने कर्मचारियों के लिए हमेशा कुछ न कुछ नए आयाम लेकर आता है, में हाल ही में एक घटना को लेकर जो कुछ हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार तो किया ही, मानवीयता को भी कहीं का नहीं छोड़ा.

: डेस्‍क हेड के चलते इंसानियत शर्मसार : दैनिक भास्‍कर, जो अपने आप को भारत का सबसे बड़ा मीडिया समूह कहता है तथा अपने कर्मचारियों के लिए हमेशा कुछ न कुछ नए आयाम लेकर आता है, में हाल ही में एक घटना को लेकर जो कुछ हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार तो किया ही, मानवीयता को भी कहीं का नहीं छोड़ा.

बात दैनिक भास्‍कर, इंदौर के साल भर पहले लांच हुए खंडवा संस्‍करण की है. वहां पर कार्य करने वाले साथी के दादाजी का आकस्मिक निधन हो गया था. चूंकि वो साथी पहले से ही चार दिन के अवकाश पर था. अपने बीमार दादाजी का हालचाल लेने ही घर गया हुआ था. उसी दौरान उसके दादाजी का निधन हो गया. उसने फोन से डेस्‍क हेड को इस दुखद घटना से अवगत करा दिया. साथ ही अवकाश मांगते हुए कहा कि वह रस्‍म पगड़ी पूरी होने के बाद आएगा. परन्‍तु सातवें या आठवें दिन उस साथी के पास डेस्‍क हेड का एसएमएस आता है कि आप जब भी ऑफिस आएं अपने दादाजी का मृत्‍यु प्रमाण पत्र साथ में लाएं.

करीब 13 दिन बाद जब वह साथी ऑफिस आया और अपने दादाजी का मृत्‍यु प्रमाण पत्र डेस्‍क हेड के सामने पेश किया. इसके बाद साथी को एचआर डिपार्टमेंट में भेज दिया गया, परन्‍तु जब वेतन की बात आई तो उसका 11 दिन का वेतन काट दिया गया. जब उसने एचआर से बात की तो पता चला कि उसका अवकाश डेस्‍क हेड द्वारा अनुमोदित ही नहीं किया गया था. उधर, डेस्‍क हेड कहते हैं कि आपको पूर्व में सूचना देनी चाहिए थी.

अब यह कहां तक न्‍याय संगत है कि जिसके परिवार में कोई दुखद घटना हो जाए तो अर्थी छोड़कर पहले संस्‍थान में अवकाश की अर्जी देने जाएगा और उसके बाद अर्थी को कंधा देगा. इसके पहले भी खंडवा कार्यालय में दो-तीन साथी के परिवार में ऐसी आकस्मिक घटना घटित हुई थी, परन्‍तु उनसे आज तक मृत्‍यु प्रमाण पत्र नहीं मांगा गया. इस पूरे प्रकरण को लेकर स्‍थानीय समाचार संपादक चुप्‍पी साधे हुए हैं. क्‍या भविष्‍य में भास्‍कर कर्मियों को मृत्‍यु प्रमाण पत्र पेश करना होगा?

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

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0 Comments

  1. Rishi Naagar

    October 21, 2011 at 7:42 pm

    laanat hai, shame shame!

  2. vikas

    October 21, 2011 at 4:43 pm

    रमेश चंद्र अग्रवाल …आक् थू….।।।

  3. adarsh prakash singh

    October 21, 2011 at 4:55 pm

    aise logo se puchana chahiye ki manviyata nam ki koi chese inke sansthan me hai ya nahi. sarmnak hai yah ravaiya.
    adarsh prakash singh

  4. abhishek verma

    November 1, 2011 at 10:10 pm

    aise desk head ko to ispost se hatadena chahia ….. jarur ye desk head ke sathbhi aisa hi huahoga is liya usne bhi apnesathike sath aisa kiya…

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