जगजीत सिंह बरास्ते अमिताभ

मैं जिस अमिताभ की बात कर रहा हूं वह बच्चन नहीं, बल्कि अपने शुक्ला जी हैं। कॉलेज में अपन से एक साल सीनियर। मोटे तब भी थे पर थोड़े कम थे। अब लंबाई-चौड़ाई कदरन एक जैसी होगी क्योंकि खाने-पीने के इंतिहाई शौकीन हैं। अपने दुबे जी खुले आम मुर्गे की टांग उड़ाते थे और कोई उनके ब्राह्मण होने का हवाला देता था तो कहते थे कि हां ‘ब्राह्मण तो हूं पर रावण के कुल का’ और जय लंकेश के नारे के साथ पुनः मुर्ग-भोज में जुट जाते थे।

अन्ना हजारे, रामदेव व कांग्रेस- (दो)

दिनेश चौधरी: बाबा यदि अन्ना की शरण लें तो कैसा हो? : राजीव दीक्षित के संबंध में मैं फिलहाल उन्हीं प्रसंगों की चर्चा करना चाहता हूं, जिनका संबंध बाबा रामदेव से है। इसे आप काव्यात्मक न्याय या “पोयेटिक जस्टिस” कह सकते हैं कि सब कुछ होते हुए भी अहंकार के जिस दुर्गुण के कारण राजीव को बाबा की शरण में जाना पड़ा, आज बाबा भी उसी वजह से दुर्दशा के दिन देख रहे हैं।