रोहित पांडेय दरअसल शहीद हुए हैं

: पूर्वांचल में जागरण, हिंदुस्‍तान के सामंती जनरल चूस रहे हैं पत्रकारों का खून : रोहित पांडेय को यह दुनिया छोड़े 13 दिन हो गए हैं। इन दिनों में तमाम व्यस्तताओं की वजह से रोहित के बारे में कुछ लिख नहीं पाया। पर जब भी घर में अकेला होता, ऐसा लगता जैसे रोहित सामने आकर खड़े हो गए हों। कभी हाथ ऊपर उठाए किसी बात पर बहस करते दिखते, कभी अटल बिहारी वाजपेयी के बोलने की नकल करते। उनकी बिंदास और बेबाक बातें सामने घूमती रहतीं। इन सब वजहों से मुझे एक तरह से बेचैनी सी होने लगी। ऐसा लगा कि रोहित के बारे में वह सब कुछ लिखना चाहिए जो जानता हूं।