”उनके साथ ऐसे काम करना जैसे मेरे साथ हो”

मैं सीएनईबी से जुड़ा ही था कि एक दिन मैं अपने बड़े भाई और पिता तुल्य आदरणीय पंकज शुक्ला जी से बात करते-करते जब सीएनईबी के रिसेप्शन पर आया तो वहां पर मेरी पंकज जी ने आलोक जी से मुलाकात कराई, तब उन्होंने कहा इटावा के पास बसे नगला तोर का मैं भी रहने वाला हूँ और एक लम्बे समय से उनका परिवार मध्य प्रदेश के भिण्ड में रह रहा है. उसके कुछ समय बाद एक दिन उनका फोन आया नीरज मैं कल सुबह शताब्दी से इटावा आ रहा हूँ, मुझे भिण्ड जाना है.