अब ईटीवी के पत्रकार भी होंगे एपीओ

लगता है स्ट्रिंगर के तौर पर काम करने वाले लोगों को अब और भी कड़ी परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ेगा! वैसे भी स्ट्रिंगर के तौर पर काम करने वालों की हालत बहुत ख़राब है. स्ट्रिंगर अपनी पीड़ा किसको कहे कुछ समझ में नहीं आता है, क्योंकि उसकी कोई सुनने वाला ही नहीं है. खास बात तो ये है कि स्ट्रिंगर चैनल के रीढ़ की हड्डी होता है. बदकिस्मती से रीढ़ की हड्डी शरीर के पीछे ही होती है और ऐसी ही स्थिति आज स्ट्रिंगरों की है.