हंस ने हिंदी के इतिहास को पालने-पोसने का काम किया है : नामवर सिंह

हिंदी के वरिष्‍ठ आलोचक नामवर सिंह ने कहा कि ‘हंस’ के जरिए इसके संपादक राजेंद्र यादव ने हिंदी के इतिहास को बनाने के साथ-साथ उसे पालने-पोसने का काम भी किया है. सिंह हंसाक्षर ट्रस्‍ट और ऐवाने गालिब की ओर से ‘हंस’ पत्रिका के पचीस साल पूरे होने पर रविवार को आयोजित रजत जयंती समारोह में ‘साहित्यिक पत्रकारिता और हंस’ पर बोल रहे थे.

हंस के पच्‍चीस साल : युवा होते विमर्शों का एक सफर

राजेंद्र यादव के संपादन में जनचेतना की प्रगतिशील पत्रिका हंस प्रकाशन के पच्चीस वर्ष पूरे कर चुकी है। हिंदी समाज ही नहीं, पूरे देश और देश की तमाम भाषाओं के लिए यह एक गौरवपूर्ण घटना है। हंस का प्रकाशन सबसे पहले 1930 में मुंशी प्रेमचंद ने शुरू किया था। हंस के शैशव काल से ही प्रेमचंद के अलावा महात्मा गांधी, राजगोपालाचारी, कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी, काका कालेलकर आदि विभूतियों के नाम उससे जुड़े रहे।