हिन्दुस्तान व जागरण ने छोटी खबर को बनाया बड़ी

मेरठ में हिन्दुओं और मुसलमानों का अनुपात लगभग 60-40 का है। अस्सी के दशक में मेरठ ‘दंगों का शहर’ नाम से कुख्यात हो गया था। लेकिन बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद जब उत्तर प्रदेश के कई शहर साम्प्रदायिक हिंसा से जल रहे थे, तब मेरठ ने शांत रह कर पूरे प्रदेश में एक मिसाल पेश की थी। उसके बाद यह संवेदनशील कहा जाने वाला शहर किसी बड़े दंगे की आग में नहीं जला।