कमलेश महज खेल रिपोर्टर ही नहीं थे

पदमपतिजीकुछ अन्यान्य कारणों से इधर लगभग दो महीनों से लेखन पर विराम सा लगा हुआ था पर 13 दिसंबर को वरिष्ठ पत्रकार साथी कमलेश थपलियाल के निधन की सूचना ने मुझे हिला कर रख दिया और स्वाभाविक `श्मशान दर्शन’ दीवार पर नजर आने लगा. सचमुच, मृत्यु अंत नहीं है बल्कि मृत्यु जीवन समीकरण का अंतिम कोष्ठक है.

हिंदी खेल पत्रकारिता का एक स्‍तंभ ढह गया

: खेल पत्रकार कमलेश थपलियाल के निधन पर शोकसभा : जन जागरण मीडिया मंच के सदस्यों ने रेड फाइल कार्यालय में पत्रकार कमलेश थपलियाल के निधन पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया. मीडिया मंच के महासचिव रिजवान चंचल ने वरिष्‍ठ पत्रकार थपलियाल के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि इधर लगभग दो महीनों से लेखन पर विराम सा लगा हुआ था, पर 13 दिसंबर को वरिष्ठ पत्रकार साथी कमलेश थपलियाल के निधन की सूचना ने मुझे हिला कर रख दिया और स्वाभाविक शमशान का दर्शन होने लगा. सचमुच, मृत्यु अंत नहीं है बल्कि मृत्यु जीवन समीकरण का अंतिम कोष्ठक है. जिसके बाद किसी व्यक्ति को मरणोपरांत समाज विवेचित करता है, समीकरण के बीच छोड़े गए अंकों का योग-वियोग, गुणा-भाग और शेष क्या है.