कहिन काव्यमंच के नजरबट्टू बेचैनियां समेटकर सारे जहान की, जब कुछ न बन सका तो मुझे कवि बना दिया। वैसे तो यह हर कवि का आत्मकथ्य है, जो... bhadas4media.comNovember 13, 2010