न्‍यूज चैनलों पर ‘सेंसरशिप’ की तैयारी मे जुट रहे हैं नौकरशाह

: कुछ भी दिखाने वाले न्यूज चैनलों के संपादक भी जब एनबीए और बीईए में पद पाए हैं तो आत्‍ममंथन कैसे : सरकार की नई गाइडलाइंस में इमरजेंसी की महक : यूपी चुनाव से पहले गाइडलाइन तैयार करने की जल्‍दी : न्यूज चैनलों पर नकेल कसने के लिये सरकार ने अपनी पहल तेज कर दी है।

न्यूज चैनलों का भाषा प्रयोग

: तकनीकी विस्तार ने हिन्दी की सीमा तोड़ी : पत्रकारिता में जिस तरह कन्टेंट को ही किंग माना जाता है। ठीक उसी तरह टीवी में विजुअल को कभी भाषा की दरकार होती नहीं है। लेकिन जब दौर चौबीस घंटे और सातों दिन न्यूज चैनल चलने का हो तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर भाषा हो कैसी? क्योंकि भाषा अगर तकनीक के पीछे चली तो फिर सरोकार खत्म होता दिखेगा और अगर भाषा तकनीक से इतनी आगे निकल गयी कि उसके सरोकार तकनीक को ही खारिज करते दिखे तो फिर खबरें किसी अखबार या साहित्य के लपेटे में आते दिखेंगे।

सूचना और तकनीक से आगे थी एसपी की पत्रकारिता

पुण्‍य प्रसून : एसपी की पुण्यतिथि पर : जब सड़क के आंदोलन सरकार को चेता रहे हों और सरकार संसद की दुहाई दे कर सामानांतर सत्ता खड़ी ना हो, इसका रोना रो रही है तब लोकतंत्र के चौथे पाये की भूमिका क्या हो। यह सवाल अगर चौदह बरस पहले कोई एसपी सिंह से पूछता, तो जवाब यही आता कि इसमें खबर कहां है।