पेड न्‍यूज नहीं ये सुपारी पत्रकारिता है

सुपारी पत्रकारिता के लिए भारत को या भारतीय पत्रकारिता को विशेष रूप से लज्जित करने की आवश्यकता नहीं है। यह केवल भारत में ही नहीं पनप रही बल्कि विश्व के अन्य देशों में भी अलग अलग नामों से मौजूद है। कहीं इसे रेड पॉकेट जर्नलिज्‍म तो कहीं व्हाइट एनवेलप जर्नलिज्‍म कहते हैं। यह वाक्य है भोपाल के संभाग आयुक्त मनोज श्रीवास्तव के। वे भोपाल के शहीद भवन में वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन द्वारा आयोजित परिचर्चा में बोल रहे थे।