अपनी संपत्ति की घोषणा करेंगे संपादक!

संपादकों द्वारा अपनी सम्पत्ति की घोषणा के बारे में एडिटर्स गिल्ड की 24 दिसम्बर को होने वाली बैठक में चर्चा की जाएगी. एडिटर्स गिल्ड के अध्यक्ष राजदीप सरदेसाई ने यह बात कही है. कॉरपोरेट लॉबियिस्ट नीरा राडिया के कुछ सीनियर जर्नलिस्‍टों के साथ हुई बातचीत के बाद कुछ पत्रकारों ने इस मुद्दे को उठाया था. पत्रकारिता के मूल्यों पर एडिटर्स गिल्ड, द प्रेस एसोसिएशन, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और इंडियन वुमेंस प्रेस कोर्प्स द्वारा आयोजित बैठक में इस पर गरमा गरम बहस भी हुआ, जिसके बाद अगली बैठक में इस मुद्दे को उठाने की बात सामने आई.

वीर, बरखा, राजदीप, प्रभु अपनी संपत्ति बताएं

: लोकतंत्र के चौथे खंभे (पत्रकारिता) को सूचना के अधिकार के दायरे में लाने के संदर्भ में आरटीआई एक्टिविस्ट अफरोज आलम साहिल का एक खुला पत्र : सेवा में, महोदय, मैं अफ़रोज़ आलम साहिल। पत्रकार होने के साथ-साथ एक आरटीआई एक्टिविस्ट भी हूं। मैं कुछ कहना-मांगना चाहता हूं। मेरी मांग है कि लोकतंत्र के चौथे खंभे यानी मीडिया को सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के दायरे में लाया जाए। लोकतंत्र के पहले तीनों खंभे सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के दायरे में आते हैं। यह कानून कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका तीनों पर लागू होता है। इसका मक़सद साफ है कि लोकतंत्र को मज़बूत किया जा सके।