भोगवादी जीवन से उबे आदमी की आवारगी (भाग छह)

‘मुझे प्यार, पैसा या नाम मत दो, अगर कुछ दे सकते हो तो सत्य दो। (मैकेंडलेस के पास मिली हेनरी डेविड थोरो की किताब लाइफ इन दी वुड्स में यह पंक्ति जिस पृष्ठ पर था, उसके ऊपर में मैकेंडलेस ने बड़े अक्षरों में लिखा था ‘सत्य’)। क्योंकि बच्चे निश्छल होते हैं  इसलिए उन्हें न्याय से प्यार होता है, और चुंकि  हममें से अधिकांश दुष्ट  और कपटी होते हैं, इसलिए हमें दया की जरूरत होती है। -जी के चेस्टरटन।

भोगवादी जीवन से उबे आदमी की आवारगी (भाग पांच)

यह सही  है कि कई रचनात्मक लोग जीवन में टिकाऊ रिश्ते नहीं बना पाते। और कुछ तो एकदम अकेले रहते हैं। यह भी सच है कि कुछ मामलों में किसी बड़े मानसिक दुख को झेलने  के बाद किसी व्यक्ति के अंदर रचनात्मकता फूट पड़े।  लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह किसी मानसिक बिमारी के कारण है। किसी से व्यवहार न  रखने वाले बच्चे को अगर  वैसे ही विकसित होने दिया जाय तो वह अपने जीवन में किसी नए अर्थ की खोज को अपनी सबसे बड़ी जरूरत मानता है, जो किसी रिश्ते पर निर्भर नहीं करता। (एंथनी स्टोर, सोलिट्यूड: ए रिटर्न टू सेल्फ किताब से उद्धृत)

भोगवादी जीवन से उबे आदमी की आवारगी (भाग चार)

मैकेंडलेस का कैमरा जब काम करने लायक नहीं रहा तो तस्वीर खींचने का काम तो बंद हुआ ही, उसने अपनी डायरी लिखनी भी बंद कर दी। फिर अलास्का पहुंचने पर ही उसने फिर से लिखना शुरू किया। इसलिए मई 1992 में लास वेगास छोड़ने के बाद वह कहां-कहां गया, इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।