भोगवादी जीवन से उबे आदमी की आवारगी (भाग छह)

‘मुझे प्यार, पैसा या नाम मत दो, अगर कुछ दे सकते हो तो सत्य दो। (मैकेंडलेस के पास मिली हेनरी डेविड थोरो की किताब लाइफ इन दी वुड्स में यह पंक्ति जिस पृष्ठ पर था, उसके ऊपर में मैकेंडलेस ने बड़े अक्षरों में लिखा था ‘सत्य’)। क्योंकि बच्चे निश्छल होते हैं  इसलिए उन्हें न्याय से प्यार होता है, और चुंकि  हममें से अधिकांश दुष्ट  और कपटी होते हैं, इसलिए हमें दया की जरूरत होती है। -जी के चेस्टरटन।

 

उस वक्त अचानक सबकुछ बदल जाता है। हमारी आवाज और नैतिक  सोच। समझ में नहीं आता  कि क्या सोचा जाय और किसकी  बात सुनी जाय। अचानक ऐसा  लगता है जैसे हम किसी बच्चे  की तरह चलना सीख रहे थे कि अचानक सहारा छूट गया  और अब खुद ही चलना सीखना  पड़ेगा। आसपास कोई ऐसा  नजर नहीं आता- ना परिवार का कोई और ना ही दुनिया में कोई अपना, जिसके विचारों को सम्मान के साथ स्वीकार किया जाय।

ऐसे ही अकेले  हो गए इंसान के मन में आता  है कि वह अपना जीवन, सत्य या सौंदर्य को समर्पित होकर जीए, जिसके लिए आदमी के द्वारा शासित दुनिया में कोई  जगह नहीं है। उसके बाद  जीवन का कोई ऐसा उद्देश्य समझ में आने लगता है जिसे अपना अंतिम ध्येय बनाकर  जीने की इच्छा जगती है और वह दुनिया, जिसमें हम अब तक जी रहे थे, कहीं दूर पीछे छूट जाता है। (बोरिस पास्तरनाक की पुस्तक डॉक्टर जिवागो की इन पंक्तियों को क्रिस मैकेंडलेस ने चिह्नित कर रखा था और उसके बगल में उसने लिखा था, ‘जीवन में उद्देश्य की जरूरत’)

नीले रंग  के स्लीपिंग बैग, जिसे मैकेंडलेस की मां ने उसके लिए सीया था, में उसकी लाश को मिले सात सप्ताह से ज्यादा बीत चुके थे। उसके पिता वाल्ट मैकेंडलेस मैरीलैंड के अपने घर की खिड़की पर खड़े-खड़े, सामने चेसपीक खाड़ी की तरफ सूनी आंखों से एकटक देखते हुए कह रहे थे,” कितनी अजीब बात है कि जिस बच्चे के अंदर इतनी करुणा भरी थी उसी ने अपने मां-बाप को जीवन भर इतना दर्द दिया।“ चेसपीक के समुद्री किनारे पर मैरीलैंड में वाल्ट मैकेंडलेस का बिना किसी दाग-धब्बे का, सुंदर, सजा हुआ सुव्यवस्थित घर था। जमीन से लेकर छत तक, हर जगह की खिड़कियों से चेसपीक खाड़ी के दूर तक फैले सौंदर्य को देखा जा सकता था। उसके डाइनिंग रूम में चार बड़े पोस्टर बोर्ड पर क्रिस मैकेंडलेस की बहुत सारी तस्वीरें लगी थीं, वे तस्वीरें भी जो उसने अपनी आवारगी के दौरान लिए थे। उसकी मां बिली ने उन तस्वीरों को दिखाते हुए एक की तरफ इशारा किया जिसमें एक बच्चा घोड़े पर बैठा था, वह पीले रंग के बरसाती कोट पहने आठ साल का मैकेंडलेस था, जो अपने हाईस्कूल के पहले ट्रिप पर गया था। एक तस्वीर में वह अपने परिवार के आसपास घूमते हुए शरारत भरी हरकतें कर रहा था, उसे देखते हुए वाल्ट ने दुख में डूबी आवाज में कहा,”जैसे अन्य बच्चे किसी का साथ खोजते हैं, क्रिस का वैसा स्वभाव न होना मुझे सबसे ज्यादा मुश्किल भरी बात लगती थी। मैंने अन्य बच्चों से ज्यादा समय क्रिस को दिया था। भले ही वह हमें परेशान कर देता था, लेकिन उसका साथ रहना अच्छा लगता था।“

वाल्ट मैकेंडलेस ने घर में पहने जाने वाले कपड़े पहन रखे थे, उसमें भी वह प्रभावशाली व्यक्तित्व के लग रहे थे। वह पेशे से विज्ञान के एक बेहद रहस्यमय क्षेत्र से जुड़े थे- सिंथेटिक एपरचर रडार (Synthetic Aperture Radar or SAR) अतिउच्च तकनीक को विकसित करनेवालों में उनका नाम था। यह यंत्र 1978 के एक बड़े अमेरिकी अंतरिक्ष मिशन में एक उपग्रह सीसेट(Seaset) के साथ धरती की कक्षा में स्थापित किया जाना था। नासा में इस सीसेट उपग्रह के प्रोजेक्ट मैनेजर थे, वाल्ट मैकेंडलेस। इस तरह के शक्तिशाली पद पर काम करने के कारण वाल्ट के स्वभाव में था हर चीज पर नियंत्रण करना। हलांकि वे नम्र आवाज में बात करते थे, लेकिन उनके अंदर में भरी इनर्जी का आवेग बाहर दिखती थी। यही इनर्जी, निस्संदेह वाल्ट ने अनुवांशिक तौर से अपने बेटे क्रिस मैकेंडलेस को दिया था।

जब वाल्ट  बोलते थे तो लोग उनकी बात  सुनते थे। किसी बात का उनको बुरा लगता था तो उनकी आंखे छोटी हो जाती और जुबान रूक जाती थी। उनके परिवार के लोगों के अनुसार वाल्ट का कभी भी फूट पड़नेवाला गुस्सा कुछ सालों से अहिंसक हो चला था। 1990 में क्रिस के गायब होने के बाद उनके भीतर बहुत बदलाव आ गया था। बेटे के इस तरह से घर छोड़कर जाने ने उनको हिलाकर रख दिया था। उनके व्यक्तित्व की कोमलता वाला स्वभाव अब उभर कर सामने आया था।

वाल्ट बचपन में बहुत गरीब था। कोलोराडो शहर के स्कूल में पढते हुए उसने वहां विश्विद्यालय में स्कॉलरशिप पायी थी।  कॉलेज में पढ़ाई के दौरान  के खर्चे के लिए वह पार्ट  टाइम नौकरी करता था। उसने मार्चुरी(शवदाह घर) में  काम किया था लेकिन सबसे ज्यादा पैसा उसने चार्ली नोवाक  के रॉक बैंड के साथ पियानो बजाते हुए कमाया। वाल्ट  बहुत बढिया संगीतकार था। 1957 में सोवियत संघ ने जब स्पूतनिक 1 को अंतरिक्ष में  छोड़ा तब पूरा अमेरिका भय के माहौल में जीने लगा। इस राष्ट्रीय भय के दबाब में आकर सरकार ने अरबों डॉलर वहां के एयरोस्पेस उद्योग में झोंकना शुरू किया। यह वाल्ट के लिए अच्छा अवसर लेकर आया, जो तब तक शादी करके एक बच्चे का बाप बन चुका था। उसने एक एयरक्राफ्ट कंपनी में नौकरी कर ली जिसने उसे तीन साल के लिए टक्सोन भेजा। उसने एंटीना सिद्धांत में एरिजोना विश्वविद्यालय से अपनी मास्टर डिग्री पूरी की। अपनी थीसिस पूरी करने के बाद उसे कैलिफोर्निया में एक बड़े अंतरिक्ष मिशन में भेज दिया गया।

टोरेंस  शहर में उसने एक बड़ा बंगला  खरीदा। बहुत मेहनती होने के कारण जल्दी-जल्दी प्रोमोशन पाने लगा। वाल्ट मैकैंडलेस को इस बीबी से पांच बच्चे हुए। वाल्ट तब तक चांद पर उतरने वाले अंतरिक्ष यान सर्वेयर 1 का टेस्ट डायरेक्टर हो चुका था। उसके सितारे बुलंद थे। 1965 में उसकी शादी टूट गई और बीबी मार्सिया उससे अलग हो गई। वाल्ट ने अपनी सेक्रेटरी के साथ प्रेम करना शुरू कर दिया जिसका नाम बिली जॉनसन था। बिली ने 12 फरवरी 1968 को एक बच्चे को जन्म दिया, जिसका नाम रखा गया क्रिस्टोफर जॉनसन मैकेंडलेस। वाल्ट ने एक गिटार खरीदकर बिली को दिया जिसे बजाकर वह बच्चे को खुश किया करती थी। यही गिटार 22 साल बाद नेशनल पार्क सर्विस के रेंजरों को लेक मीड इलाके में पड़े लावारिश डॉटसन कार की पिछली सीट पर पड़ा मिला था।

क्रिस मैकेंडलेस ने अपनी प्रतिभा बचपन से ही दिखानी शुरू कर दी थी। जब वह दो साल का था तब वह एक आधी रात को बिना किसी को जगाए पड़ोसी के घर में चुपके से घुसकर चाकलेट का डब्बा चुरा लाया था। जब तीसरी क्लास में था तब उसके एक टेस्ट में बहुत ज्यादा अंक आने के बाद उसे अतिप्रतिभाशाली बच्चों के लिए चलने वाले क्लास में भेज दिया गया।

बिली ने याद करते हुए बताया, “ क्रिस इस बात से खुश नहीं था क्योंकि उसे अब और ज्यादा होमवर्क करना पड़ता था। इसलिए वह उस क्लास से निकलने की कोशिश में लग गया। उसने वहां के शिक्षकों और प्रधानाध्यापक को यह समझाने की कोशिश की कि टेस्ट में उसको नंबर देने में कोई गलती हुई है, वह उस अतिप्रतिभाशालियों के लिए अलग से चलने वाले क्लास के लायक नहीं है।“

क्रिस से तीन साल छोटी बहन कैरीन  ने बताया,” वह हमेंशा अपने आप में खोया रहता था। वह असामाजिक नहीं था, उसके कई दोस्त थे और हर कोई उसे पसंद भी करता था। लेकिन वह अकेले ही घंटों रह सकता था। उसे किसी खिलौने या दोस्त की जरूरत नहीं थी।“

जब क्रिस छह साल का था तब वाल्ट नासा (NASA, अमेरिकी अंतरिक्ष संगठन) में चला आया और एरिजोना के अन्नाडेल में उसने एक मकान खरीदा। वहां चार साल बाद उसने नासा की नौकरी छोड़कर अपने घर में ही एक कंसल्टिंग फर्म शुरू किया, जिसमें बिली उसकी बिजनेस पार्टनर थी। वाल्ट को अपने पहली बीबी के परिवार को भी पैसा देना पड़ता था। इसलिए, ज्यादा से ज्यादा पैसा बनाने के लिए वाल्ट और बिली ने दिन-रात काम करना शुरू किया।

कैरीन ने बताया,” मम्मी पापा घंटों काम करते रहते थे। मैं और क्रिस जब सुबह को जागते थे तब भी उन दोनों को काम करते पाते थे, जब स्कूल से लौट कर आते थे तब भी और रात में सोने जाते थे तब भी दोनों को बदहवाश होकर काम करते, हम दोनों देखते थे। उन्होंने बहुत पैसा कमाया।“

लेकिन इस तरह से दिन-रात काम करने के कारण वाल्ट और बिली दोनों  मानसिक तनाव के शिकार रहने लगे और उनके बीच झगड़ों का दौर शुरू हो चुका था। वे बातों-बातों में एक दूसरे को तलाक की धमकी भी देते थे। कैरीन ने इस बारे में कहा,” मैं और क्रिस ये सब देखा करते थे और इन सब कारणों से हम दोनों के बीच भावनात्मक लगाव और ज्यादा बढ गया था। लेकिन हमारा परिवार एक दूसरे के साथ कभी-कभी अच्छा वक्त भी गुजारता था। हम सब सप्ताह के छुट्टियों वाले दिन ट्रिप पर निकल जाते थे, बड़े झीलों से लेकर नीले पहाड़ों की तरफ। क्रिस को इन ट्रिपों से बहुत प्यार था। हमारे परिवार को शुरू से ही आवारगी का शौक था और इसको क्रिस ने बचपन ही से सीखा था।“

इन्हीं  ट्रिपों के दौरान यह परिवार मिशीगन के पहाड़ों की तरफ  चला जाता था, जहां क्रिस  की मां बिली का घर था। बिली के पिता हलांकि ट्रक ड्राईवर  थे लेकिन एक नौकरी पर ज्यादा दिन नहीं टिकते थे। वाल्ट  ने उनके बारे में बताया,” बिली के पिता समाज में फिट नहीं हो पाते थे। उनका स्वभाव क्रिस जैसा ही था।“ बिली के पिता लॉरेन जॉनसन जिद्दी और स्वप्नशील स्वभाव के थे। उन्होंने खुद से संगीत और कविता सीखी थी। पहाड़ में रहने वाले जंगली जानवरों से उनको बहुत प्रेम था। बिली ने अपने पिता के बारे में बताया,” उनको जानवरों की सेवा में मजा आता था। कहीं किसी जानवर को फंसा या घायल पाते तो अपने घर लाते और उसके स्वस्थ होने के बाद फिर से उसे जंगल में छोड़ आते। उनके ट्रक के नीचे एक बार एक हिरण दबकर मर गयी। वे बहुत दुखी हुए। उसके बच्चे को उसने घर लाकर अपने बच्चे की तरह पाला-पोषा। अपने परिवार को पालने के लिए लॉरेन जॉनसन ने कई काम किये। मुर्गियां पालीं, अस्तबल बनाकर घोड़ों को बेचा। लेकिन परिवार का ज्यादातर खाना शिकार से आता था।

बिली ने बताया, “मेरे पिता को जानवरों को मारने में दया आती थी और जब भी वे किसी हिरण को मारते थे तो रोते थे। लेकिन हमें खिलाने के लिए उनको ऐसा करना पड़ना था। साथ ही, उनको शिकार करने आने वालों के लिए गाईड का भी काम किया करते थे, जिसके कारण उनको और भी कष्ट होता था। शहर से आनेवाले लोग बड़े गाड़ियों में आते थे और पापा को उनको दिन भर जंगल में घुमाना पड़ता था। पापा को उनसे वादा करना पड़ता था कि वे उनको हिरण का शिकार करवाएंगे। लेकिन वे शिकारी इतना शराब पिए हुए रहते थे उनका निशाना चूक जाता था। आखिर में उनको खुद ही हिरण को गोली मारनी पड़ती थी। उनको इस बात से घृणा थी।“

लॉरेन जॉनसन  और क्रिस मैकेंडलेस दोनों को एक-दूसरे से बहुत प्यार था। उस बूढे का जंगल से और बियाबानों की घुमक्कड़ी से प्रेम ने उस बच्चे पर बहुत प्रभाव डाला था। जब क्रिस आठ साल का था तब वाल्ट उसे ओल्ड रैग के पहाड़ की चोटी की चढ़ाई करने ले गया था। तीन दिन के इस ट्रिप में क्रिस अपने बैग को खुद ही ढोता रहा। उसके बाद तो दोनों बाप-बेटे हर साल उस पहाड़ की चढाई करने जाते थे। जब क्रिस थोड़ा और बड़ा हुआ तो वाल्ट पूरे परिवार के साथ कोलोराडो की रॉकी माउंटेन नेशनल पार्क की सबसे ऊंची चोटी(14256 फीट) पर चढाई के लिए गया। इस ट्रिप के बारे में वाल्ट ने बताया,” तेरह हजार फीट चढने के बाद मैं बहुत थक गया और मैंने वापस लौटने का फैसला किया क्योंकि आगे की चढाई और भी खतरनाक थी। लेकिन क्रिस चोटी तक जाना चाहता था। लेकिन मैं नहीं माना और वह रास्ते भर इस बात की शिकायत करता रहा। उस समय वह बारह साल का था, अगर वह चौदह या उससे ऊपर का होता तो शायद मुझे छोड़कर आगे चोटी की तरफ बढ जाता। वह बचपन से ही निडर किस्म का था और अपने आसपास के खतरों की बिल्कुल परवाह नहीं करता था।“

क्रिस को जिस काम में मन लगता उसमें वह बहुत ऊंची सफलता के साथ काम करता था। उसे स्कूल में हमेंशा ही अच्छे अंक मिले। एक बार जब उसे फिजिक्स में कम अंक मिले तो वाल्ट और बिली उसके शिक्षक से मिलने गए। शिक्षक ने बताया कि लगभग दौ सौ बच्चों को उसने लैब रिपोर्ट बनाने के लिए एक तयशुदा फार्मेट दिया था लेकिन इस नियम को क्रिस ने मूर्खतापूर्ण माना और अपना रिपोर्ट किसी और फार्मेट में बनाकर दिया, इसलिए उसे कम अंक दिए गए।

क्रिस और उसकी बहन कैरीन, दोनों ने अपने पिता से संगीत की प्रतिभा  पायी थी। क्रिस गिटार, पियानो और फ्रेंच हार्न बजाता  था। वाल्ट ने उसके बारे में बताया,”उसको इतनी कम उम्र में ये सब बजाते देखकर मुझे आश्चर्य होता था। मैं जब पियानो बजाता था तो वह अच्छी आवाज में गाता था। वह किसी पेशेवर गायकों जैसी सुरीला था। क्रिस एक बैंड अमेरिकन युनिवर्सिटी सिम्फनी में फ्रेंच हार्न बजाया करता था लेकिन उसने बैंड लीडर के द्वारा कुछ नियम बनाये जाने के बाद, उसका विरोध करते हुए बैंड छोड़ दिया।“

लेकिन उसकी बहन कैरीन का कहना कुछ  और ही था,” मेरे भाई के बैंड छोड़ने के पीछे का कारण मैं थी। मैं क्रिस की तरह फ्रेंच हार्न बजाना चाहती थी और वही एक ऐसी चीज थी जिसमें मैं क्रिस से बेहतर थी। मैं अभी-अभी बैंड में शामिल हुई थी और वह सीनियर था। उससे बेहतर बजाने के कारण मुझे बैंड में आगे के बैंच पर जगह मिली थी औऱ क्रिस को मुझसे पीछे बैठना बर्दाश्त नहीं हुआ।“

लेकिन संगीत  की इस प्रतिस्पर्धी भावना  ने क्रिस और कैरीन के रिश्ते को नुकसान नहीं पहुंचाया था।  वे दोनों अन्नाडेल में  अपने घर पर घंटों एक दूसरे  के साथ खेलते हुए बिताते थे। कैरीन ने याद करते हुए कहा,”वह मेरे साथ बहुत अच्छा व्यवहार करता था और मुझे लेकर काफी प्रोटेक्टिव था। जब गली में मेरे साथ चलता था तो मेरा हाथ पकड़े रहता था। जब वह जूनियर हाईस्कूल में था तब मैं ग्रेड स्कूल में पढ रही थी। उसकी छुट्टी मुझसे पहले हो जाती थी लेकिन वह घर साथ जाने के लिए मेरा इंतजार करता था।“

क्रिस ने अपनी मां अपनी से गहरी काली आंखे पायी थी। वह शरीर से मजबूत था लेकिनछोटे कद का था इसलिए स्कूलों के ग्रुप फोटो में हमेंशा आगे खड़ा रहता था। उसने कई खेलों में अपना हाथ आजमाया लेकिन किसी में भी पारंगत होने का धैर्य उसमें नहीं था। कोलोराडो में एक बार बर्फ पर स्कीईंग करने के लिए जाने के बाद फिर वहां लौटकर नहीं गया। वाल्ट ने उसे गोल्फ सिखाने की लेकिन उसे ज्यादा दिन तक झेल नहीं पाया।

वाल्ट ने इस बारे में बताया,”क्रिस अतिप्रतिभाशाली था। लेकिन जैसे ही कोई उसकी प्रतिभा को निखारने की कोशिश में उसे कोई गाइड करता, तो एक अजनबी सी दीवार उसका रास्ता रोक देती थी। क्रिस किसी प्रकार के निर्देश का घोर विरोध करता था। मैं रैकेटबॉल (एक खेल) का अच्छा खेलाड़ी था। मैंने उसे इस खेल को तब से सिखाना शुरू किया जब वह ग्यारह साल का था। जब वह पंद्रह साल का हुआ उसके बाद मुझे इस खेल में मात देने लगा। वह बहुत तेज और ताकत से खेलता था। उसके खेलने में कुछ कमियों के बारे में जब मैंने उसे बताया तो उसने मेरी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया। एक बार एक पैंतीस साल का बहुत अनुभवी खिलाड़ी एक टूर्नामेंट खेलने के लिए उसका टेस्ट ले रहा था। क्रिस अच्छा खेल रहा था लेकिन जैसे ही टेस्ट लेने वाले ने उसके खेल की एक कमी गिनाई, क्रिस ने वहीं उस टेस्ट को छोड़ दिया।“

रणनीति  बनाकर खेलना क्रिस ने सीखा ही नहीं था। वह एक ही तरीका जानता था, भरपूर  ताकत लगाकर सीधे-सीधे खेलना। उसका ऐसा स्वभाव तब से हो गया था जबसे उसने लम्बी  दौड़ प्रतियोगिता में भाग  लेना शुरू किया। उसके अंदर एक एथलीट था। वह जब दस बरस  का था तब पहली पहली बार दस किलोमीटर के रोड रेस में  भाग लिया था और लगभग एक हजार आदमियों को पीछे छोड़ते हुए  इस बच्चे ने 69 वां स्थान  पाया था। थोड़ा बड़ा होने तक वह इस क्षेत्र के लंबी रेस के टॉप धावकों में से एक था।

जब क्रिस  बारह साल का था तब वाल्ट  और बिली ने कैरीन के लिए  एक पपी(पिल्ला) खरीदा था। क्रिस उस पिल्ले को रोज अपने साथ सुबह ले जाता और उसके साथ दौड़ लगाता। कैरीन ने इस घटना को याद करते हुए कहा,”पपी हलांकि मेरे लिए खरीदा गया था लेकिन क्रिस से उसको अलग करना नामुमकिन था। पपी बहुत तेज दौड़ता था और जब भी दोनों साथ दौड़ते, वह क्रिस को हर बार हरा देता था। बहुत कोशिश करने के बाद जिस दिन पहली बार क्रिस ने उस पपी को दौड़ में हराया था उस दिन वह काफी उत्साहित और खुश था। वह दिन भर खुशी के मारे-मारे रोते-रोते चिल्लाया था ‘मैंने उसे हरा दिया’।

वर्जीनिया को फेयरफॉक्स में एक प्रतिष्ठित स्कूल, डब्ल्यू टी वुडसन हाईस्कूल में एथलीट टीम का कैप्टन क्रिस मैकेंडलेस था। उस टीम में रहे गोर्डी ने उसे याद करते हुए बताया,”क्रिस ने हम सबके लिए एक अभ्यास प्लान किया था जिसका नाम उसने दिया था-रोड वैरियर्स(सड़क के योद्धा)। उसके साथ हम सब एक लंबे और कठिन दौड़ पर निकलते थे। वह हमें जानबूझकर जंगलों, खेतों और अनजाने रास्तों पर दौड़ाते हुए ले जाता था और हम रास्ता भूल जाते थे। इन सबके पीछे एक ही उद्देश्य था- किसी अंजान जगह की तलाश। जब हम थक जाते तो धीरे-धीरे दौड़ने लगते और किसी पहचान वाले सड़क पर नजर पड़ते ही फिर तेजी से अपने घर की तरफ दौड़ने लगते थे। क्रिस इसी तरह से पूरी जिंदगी जीता रहा।“ मैकेंडलेस ने दौड़ को अध्यात्मिक कसरत के रूप में लिया था, यह आवारगी उसके लिए धर्म की तरह थी। उसके टीम के एक और सदस्य इरिक ने बताया,” क्रिस दौड़ने के इस अध्यात्मिक महत्व का बयान कर हमें मोटिवेट किया करता था। वह हमें इस दुनिया की बुरी ताकतों के बारे में बताकर कहता था कि हम ये सोचें कि इन बुरी ताकतों के विरूद्ध दौड़ लगा रहे थे, वो बुरी ताकतें जो हमारे अंदर की अच्छाईयों की राह में दीवार बनकर खड़ी थी। वह कहता कि “अच्छा सोचना मन पर निर्भर है और इसके लिए हमें अपनी सारी उर्जा लगा देनी चाहिए।“ एक हाईस्कूल के बच्चे के मुंह से इतनी बड़ी बातें सुनकर हम उसके प्रभाव में चले आते थे।“ लेकिन मैकेंडलेस के लिए दौड़ना सिर्फ अध्यात्मिक बात नहीं था, प्रतियोगिता भी था और वह जीतने के लिए दौड़ता था। उसकी टीम में रह चुकी मैकेंडलेस की दोस्त मैक्सी ग्लिमर ने बताया,”वह अपने दौड़ने को लेकर काफी गंभीर था। मैं उसे दौड़ते देखा करती थी। वह हमेंशा बेहतर करने की कोशिश करता और उस वक्त काफी दुखी होता था जब वह अपनी आशा के अनुसार प्रदर्शन नहीं करता था। जब वह किसी रेस में अच्छा नहीं करता था तो अपने लिए हिंसक हो जाता था। वह किसी से इसके बारे में बात नहीं करता था। अगर मैं उसे समझाने की कोशिश करती तो और गुस्सा होकर मेरी तरफ से ध्यान हटा लेता था। उसने अपनी निराशा को अपना लिया था। कहीं अकेले में जाकर वह खुद को पीटता था।“

ग्लिमर  ने आगे कहा,” वह सिर्फ दौड़ को लेकर ही संजीदा नहीं था। हर काम में उसका रवैया इसी तरह का था। हाईस्कूल में कोई बहुत मेहनत का काम नहीं करना चाहता लेकिन वह करता था और मैं भी करती थी, इसलिए हम दोनों अच्छे दोस्त थे। ब्रेक के दौरान हम दोनों साथ बिस्किट खाते और जीवन के बारे में, दुनिया के बारे में बहुत सारी गंभीर बातें करते। मैं ब्लैक नस्ल की हूं और मुझे ये कभी समझ में नहीं आया कि लोग नस्ली भेदभाव क्यूं रखते हैं। क्रिस मुझसे ऐसी ही विषयों पर बात किया करता था। वह यह सब समझ सकता था और उसके अंदर भी इसी तरह के प्रश्न रहते थे। मैं उसे बहुत पसंद करती थी। वह बहुत अच्छा था।“

मैकेंडलेस जीवन के इस भेदभाव और असमानता को दिल पर लेता था। वुडसन हाईस्कूल में ही एक बार वह दक्षिण अफ्रीका में हो रहे रंगभेद को लेकर पागल सा हो गया था। वह इस बारे में दोस्तों से दक्षिण अफ्रीका में हथियारों की स्मगलिंग कर वहां चल रहे रंगभेद विरोधी आंदोलन में साथ देने के बारे में गंभीरता से बातें किया करता था। उसके दोस्त इरिक ने उस वाकये को याद करते हुए कहा,”इस बारे में एक बार उससे मेरी बात हुई थी। क्रिस को सिस्टम के साथ चलना पसंद नहीं था, वह लाईन में इंतजार करते हुए नहीं रूक सकता था। वह कहा करता,”हम पैसा जमा करके दक्षिण अफ्रीका चाहें तो अभी जा सकते हैं। सिर्फ ये तय करो` कि जाना है कि नहीं।“ मैं उसका विरोध करते हुए कहता कि हम अभी बच्चे थे और वहां जाकर कुछ खास नहीं कर सकते थे। लेकिन उससे तर्क करना बहुत मुश्किल था। वह सीधे जबाब देता, ’मुझे लगता है कि तुम सही या गलत की कोई परवाह ही नहीं करते हो’।”

सप्ताह  की छुट्टियों में जहां उसके दोस्त शराब के बार  में जाने की कोशिशों में  लगे रहते थे, वहीं वाशिंगटन की बदनाम गलियों में वेश्याओं और बेघरों से बातें करने, उसके लिए खाना खरीदने और उनको जीवन सुधारने की सलाह देने में बिताता था। क्रिस  की मां बिली ने बताया,”क्रिस यह समझ नहीं पाता था कि उसके देश में इतने लोगों को भूखा क्यों छोड़ दिया जाता था। वह इस समस्या के बारे में घंटों सोचा करता था।“ एक बार क्रिस एक बेघर आदमी को चुपके से, अन्नाडेल के घर लाकर अपने गाड़ी के ट्रेलर में रहने के लिए जगह दिया और वाल्ट या बिली को कभी पता नहीं चला कि उनके यहां कोई रहता था।‘

एक बार  क्रिस अपने दोस्त इरिक के घर गया और उससे कहीं चलने को कहा। उस घटना को याद करते हुए इरिक ने कहा,” वह शुक्रवार की रात थी और मुझे लगा कि वह मुझे जार्जटाउन की पार्टी में ले जा रहा था। लेकिन वह मुझे फोर्टीन्थ स्टेट की बदनाम गलियों में लेकर चला गया। उसने मुझसे कहा,”इरिक, हम जिन बातों को किताब में पढते हैं उसे हम तब तक नहीं समझ सकते जब तक उसे देख और जी न लें। आज की रात हम उन्हीं बातों को देखने और जीने आए हैं।“ अगले कुछ घंटो तक हम वहां दलालों, शराबियों और गंदे जीवन जीनेवालों के बीच रहे। मुझे बहुत डर लग रहा था। जब शाम घिर आई तब क्रिस ने पूछा कि मेरे पास कितने पैसे थे। मेरे पास पांच डॉलर और क्रिस के पास दस थे। उसने मुझे गाड़ी में गैस भरवाने भेज दिया और खुद खाना खरीदने चल पड़ा। वह अपने साथ हैमबर्गर का एक बड़ा झोला लेकर लौटा और हमदोनों उसे फूटपाथ पर सोये दुर्गंध से भरे लोगों को बांटने लगे। यह रात मेरे लिए अद्भुत थी। लेकिन क्रिस ने इस तरह के काम कई बार किए थे।“

जब वह हाईस्कूल में था तब ही उसने आगे पढने के लिए कॉलेज  जाने से मना कर दिया था।  जब वाल्ट और बिली ने उससे कहा कि उसे अपने जीवन में  अच्छे कैरियर को पाने के लिए  कॉलेज डिग्री की जरूरत  थी तो क्रिस का कहना था कि कैरियर बीसवीं शताब्दी में  गढा गया निरर्थक सा काम  था, जिसका उसके जीवन में  कोई महत्व नहीं था। उसने कहा कि वह बिना किसी कैरियर के जी सकता था। वाल्ट ने आगे उसके बारे में बताया,”हम उसकी बातों को सुनकर तनाव में आ गए। बिली और मैं दोनों ही गरीब परिवार से आए थे। कॉलेज की डिग्री को हम इतने हल्के से नहीं लेते थे और फिर हम अपने बच्चों को पढाने के लिए ही ती इतने मेहनत से पैसा कमा रहे थे। बिली ने क्रिस को अपने पास बिठाया और कहा,”क्रिस, अगर तुम सचमुच दुनिया के लिए कुछ बेहतर करना चाहते हो तो सबसे पहले अपने जीवन को बेहतर बनाओ। कॉलेज जाओ, कानून की डिग्री लो और उसके बाद तुम अपना असर लोगों पर छोड़ पाओगे।“

उसके दोस्त  इरिक ने इस बारे में कहा,“ क्रिस कॉलेज में बेहतर ग्रेड से पास हुआ और अपने मां-बाप को शिकायत करने का कोई मौका नहीं दिया। उसे कोई समस्या नहीं हुई क्योंकि वह अपने जीवन में इस तरह की सफलता प्राप्त करता आया था। उसके मां-बाप उससे अपनी बात मनवाने में सफल रहे इसलिए तो आगे की पढाई के लिए वह इमोरी यूनिवर्सिटी जानेवाला था, हलांकि यह सब उसकी नजर में बकबास और निरर्थक था।“

यह आश्चर्यजनक था कि जिस क्रिस ने कई मौकों  पर अपने मां-बाप की बातों  पर ध्यान नहीं दिया था, वह कॉलेज की पढाई करने की बात  पर उनके दबाब में आ गया  था। लेकिन ऐसे उदाहरण हैं जिससे क्रिस का अपने मां-बाप के साथ संबंधों  में विरोधाभाष प्रकट  होता था। उसकी दोस्त ग्लिमर उससे मिलती तो उसके सामने  वह अपने मां-बाप का चरित्र चित्रण तानाशाह के रूप  में करता था जबकि अपने पुरूष  दोस्तों से उसने इस तरह  की कोई बात कभी नहीं की।  इरिक ने इस बात पर रौशनी  डालते हुए बताया,” मैं समझता था कि उसके मां-बाप बहुत अच्छे थे। बिल्कुल हमारे या किसी अन्य के मां-बाप की तरह। क्रिस को किसी का आदेश पसंद नहीं था। मैं समझता हूं कि वह किसी भी मां-बाप से नाखुश ही रहता। उसे मां-बाप नाम के जीव के विचार से ही समस्या थी।“

मैकेंडलेस का व्यक्तित्व बहुत जटिल था। वह बहुत अकेला भी था लेकिन किसी समूह के साथ भी उतनी ही खुशी के साथ रहता था। वह एक्सट्रीमिस्ट था। अपनी विकसित सामाजिक चेतना के बावजूद वह ऐसा नहीं था जिसे मजाक पसंद ना हो। वह मजाकिया भी था।

मैकेंडलेस के जीवन की सबसे पेचीदा पक्ष था- पैसों के बारे में उसके विचार और भावनाएं। वाल्ट और बिली ने गरीबी के दिन देखे थे। इसलिए वे पैसे न होने का दर्द अच्छी तरह जानते थे और बहुत संघर्ष के बाद उन्होंने पैसा कमाया था और उनको उन पैसों से आनंद उठाने में कुछ भी गलत नहीं दिखता था। बिली ने इस बात पर जोर देकर कहा,” हमने बहुत मेहनत से काम किया। जब हमारे बच्चे छोटे थे तब से ही पाई-पाई बचाकर हमने भविष्य को बेहतर बनाया।“ जब भविष्य बेहतर हुआ तब भी वाल्ट और बिली ने उन पैसों को दिखावे में खर्च नहीं किया। अच्छे कपड़े, बिली के लिए कुछ गहने, एक कार, समुद्र किनारे घर और एक नाव खरीदा। अपने बच्चों को वे यूरोप घूमाने ले गए। बिली ने यह स्वीकार किया कि क्रिस को यह सब करना अच्छा नहीं लगता था। उसका बेटा क्रिस मैकेंडलेस जो टाल्सटॉय का भक्त था, पैसों को बहुत बुरी चीज मानता था। उसे वह आत्मा को भ्रष्ट कर देनेवाला शैतान मानता था। यह बहुत बिडंबना भरी बात थी क्योंकि क्रिस एक पूंजीवादी माहौल में पैदा हुआ प्राणी था। बिली ने उसे याद करते हुए कहा,”वह जन्म से ही उद्योग करने लगा था।“ उसकी बहन कैरीन ने बताया,”वह आठ साल का था जब उसने अपने सब्जियों की खेती की थी और अन्नाडेल में ठेले पर लेकर घर-घर जाकर इस छोटे बच्चे ने उसे बेचा था। ऐसे भोले चेहरे वाले बच्चे को देखकर कौन सब्जियां खरीदने से खुद को रोक सकता था। यह बात क्रिस अच्छी तरह जानता था। जब वह घर लौटता तो ठेला खाली रहता और उसके जेब में पैसे भरे रहते।“

जब वह बारह साल का था तब उसने फोटोकॉपी करने का धंधा करना शुरू किया। घरों से फोटोकॉपी के लिए पेपर लेना और फिर उसे फोटोकॉपी सहित वापस देकर पैसा ले आना उसका काम था। वह अपने मां-बाप के ऑफिस में फोटोकॉपी करता था और इसके लिए कम रेट पर पैसे चुकाता था जबकि अपने ग्राहकों से वह दो सेंट प्रति कॉपी के हिसाब से वसूलता था जो उस जगह के बाजार से सस्ता था। उसने काफी मुनाफा कमाया।

1985 में  वुडसन हाईस्कूल में पढते  हुए उसने एक लोकल बिल्डिंग कान्ट्रेक्टर के पास सेल्समेन की नौकरी करनी शुरू की और इतना सफल हुआ कि उसके अंदर उसी स्कूल के आधे दर्जन लड़के काम करने लगे। उसके बैंक एकाउंट में सात हजार डॉलर जमा हो गए। उसी पैसे से उसने अपनी सेकेंडहेंड डॉटसन कार खरीदी थी। क्रिस ने इतना बेहतरीन काम किया था कि 1986 में हाईस्कूल की पढाई खत्म होते वक्त उस बिल्डर ने वाल्ट मैकेंडलेस को फोन कर कहा कि वह क्रिस की आगे की पढाई का खर्च खुद उठाएगा अगर वह क्रिस को अन्नाडेल में ही रोक ले, इमोरी विश्वविद्यालय न जाने दे ताकि वह काम भी करता रहे और पढाई भी।

वाल्ट ने उस वाकये को याद करते हुए  कहा,”जब मैंने क्रिस को उसके बॉस द्वारा दिए गए ऑफर के बारे में बताया तो उसने सुनते ही इंकार कर दिया। उसने बॉस को बता दिया कि उसे अपने और कई काम अभी करने हैं।“ जैसे ही हाईस्कूल की पढाई खत्म हुई, क्रिस ने अपने नए खरीदे हुए सेकेंडहेंड डॉटसन कार से पूरी गर्मी देश भर में घूमने की घोषणा कर दी। किसी को यह पता नहीं था कि यह यात्रा आगे चलकर पूरे महादेश की साहस भरी आवारगी का रूप ले लेगी। ना ही उसके परिवार में कोई यह देख पाया कि इस यात्रा में खोजी मैकेंडलेस को कुछ ऐसी चीजें मिलेंगी जो उसको अपने अंदर डूबने और सबसे दूर जाने को प्रेरित करेगी, साथ ही जो उनसे प्यार करते थे उनको उलझनें, गलतफहमियां और दुख देकर जाएगी।

1986 के बसंत में वाल्ट और बिली सप्ताह की छुट्टी में क्रिस के हाईस्कूल की पढाई पूरी होने के बाद उसके लिए एक छोटी पार्टी रखी। उसी आसपास में 10 जून को वाल्ट का जन्मदिन भी था। उस पार्टी में क्रिस ने अपने पिता वाल्ट को तोहफा दिया, एक महंगा टेलीस्कोप।

क्रिस की बहन कैरीन ने बताया,”मुझे याद है, जब क्रिस ने पापा को वह टेलीस्कोप दिया था तब मैं वहीं बैठी थी। क्रिस ने थोड़ी शराब पी थी और उसी में वह होश खो बैठा था। वह बहुत भावुक हो उठा। वह रोने लगा था। उसने किसी तरह अपने आंसुओं को रोका और पापा से कहा कि हलांकि उसके और पापा के बीच सालों से कुछ मतभेद रहे थे, फिर भी पापा ने जितना कुछ उसके लिए किया है और जितना संघर्ष किया है, उसके लिए वह अपने दिल में बहुत सम्मान की भावना ऱखता है। उसने बहुत ही लम्बी और भावपूर्ण बातें कही थी। सभी भावुक हो गए थे। उसके बाद वह अपने ट्रिप पर चला गया था।“

वाल्ट और बिली, मैकेंडलेस को जाने से नहीं रोक सके। हलांकि वाल्ट ने अपना क्रेडिट कार्ड देने में सफलता पायी और उससे वादा लिया कि तीन दिन पर वह फोन किया करेगा। वाल्ट ने उस पल को याद करते हुए कहा,”जब वह जा रहा था तो हमारे हृदय में बहुत कष्ट हो रहा था। लेकिन हम उसे जाने से रोक नहीं पाए।“ हाईस्कूल पास करने के बाद के इस आवारगी में क्रिस अपनी डॉटसन कार लेकर दक्षिण की ओर गया उसके बाद पश्चिम में टेक्सास के मैदानों से होते हुए न्यू मैक्सिको और एरिजोना पहुंचा। फिर उसके बाद प्रशांत महासागर के किनारे की तरफ वह घूमा। शुरू में उसने अपने पिता की बातों का सम्मान करते हुए नियमित फोन किया लेकिन उसके बाद गरमी का मौसम बीतते-बीतते उसने फोन करना धीरे-धीरे कम कर दिया और पतझड़ में इमोरी युनिवर्सिटी में अपने नए कॉलेज की पढाई के शुरू होने से ठीक दो दिन पहले घर वापस लौटा, तब उसकी दाढ़ी के साथ बाल भी बड़े हो गए थे और तीस पौंड घटे वजन के साथ शरीर दुबला हो चला था।

कैरीन ने कहा,”जैसे ही मैंने सुना कि वह घर आया है तो मैं उसके कमरे की तरफ दौड़ी। वह अपने कमरे में सोया था और शरीर से बहुत कमजोर लग रहा था। वह सलीब पर टंगे ईसा जैसा दुबला दिख रहा था। जब मां ने देखा कि उसका वजन बहुत घट गया था, वह बहुत दुखी हुई। उसने पागलों की तरह खाना बनाना शुरू कर दिया ताकि उसे जल्दी से मोटा किया जा सके।“

अपने ट्रिप  के आखिरी दिनों में क्रिस  मोजेव के रेगिस्तान में  खो गया था और वहां शरीर में  पानी की कमी हो जाने से मरते-मरते बचा था। उसके मां-बाप  ने जब उसके साथ हुई इस अनहोनी के बारे में सुना तो वह सावधान हुए थे लेकिन नहीं जानते थे क्रिस को आगे भविष्य में इस तरह के खतरे ना उठाने के लिए कैसे कहा जाय़।

वाल्ट ने उस समय के मैकेंडलेस के मनोदशा के बारे में बताया,” क्रिस ने अब तक कई सारे काम सफलता के साथ किए थे इसलिए उसे अपने ऊपर अति आत्मविश्वास हो चला था। अगर उससे कुछ भी कहा जाता तो वह विनम्रतापूर्वक सुन लेता था और वही करता था जो वह चाहता था। इसलिए उस वक्त मैंने उससे कुछ नहीं कहा। मैं उसके साथ टेनिस खेला करता था और इस दरम्यान हम दोनों के बीच बातें भी होती थी। इसी तरह एक दिन मैंने उसके द्वारा जानबूझकर उठाए गए उस खतरे के बारे में बात की। मैं तब तक समझ चुका था इस बारे में क्रिस से सीधे ये कहने से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा कि आगे से ऐसा खतरा मत उठाना। इसलिए मैंने यही बात कुछ अलग तरीके से कही। मैंने कहा कि उसके इन ट्रिपों पर मुझे कोई ऐतराज नहीं था लेकिन वह थोड़ी सी सावधानी बरतकर चले और वह जहां जाय उसके बारे में हमें बताता रहे।“ वाल्ट की बातों को सुनकर क्रिस गुस्सा हो गया और वाल्ट के इन बातों का उल्टा असर ये पड़ा कि आगे से क्रिस ने उनसे अपने योजनाओं के बारे में बातें करनी बंद कर दी।

उसकी मां  बिली ने बताया,” क्रिस को लगता था कि हम मूर्ख थे जो उसकी इतनी चिन्ता कर रहे थे। अपने ट्रिप के दौरान उसने कहीं से एक छुरा और रायफल पाया था। जब हम उसे कॉलेज छोड़ने अटलांटा जा रहे थे तो वह दोनों चीजें अपने साथ ले गया था। वाल्ट ने हंसते हुए उस घटना को याद किया,” हम जब उसे छोड़ने हॉस्टल जा रहे थे तब हमने सोचा था कि उसके रूममेट के मां-बाप भी वहां होंगे लेकिन वहां सिर्फ उसका रूममेट था। उस कमरे में मैकेंडलेस अपने छुरा और रायफल के साथ अंदर गया। और जानते हैं क्या हुआ? नब्बे दिन बाद उसका रूममेट कॉलेज छोड़कर जा चुका था और मैकेंडलेस तब तक कॉलेज के प्रतिभाशाली छात्रों में गिना जाने लगा था।“

वाल्ट और बिली को तब जाकर और भी आश्चर्य  हुआ जब उन्होनें देखा कि इमोरी  विश्वविद्यालय के जीवन में  मैंकेंडलस को मजा आ रहा था। क्रिस अब क्लीन शेव्ड, छोटे बाल के साथ उसी लूक में फिर आ गया था जैसा कि वह हाईस्कूल के दौरान था। उसने अपने स्कूल के अखबार में लिखना शुरू कर दिया। ग्रेजुएशन के बाद लॉ की पढाई करने के बारे में वह बड़े उत्साह के साथ बात करता था। अगली गर्मी में छुट्टियों में वह अपने घर अन्नाडेल लौटा और अपने पिता की कम्पनी में वह कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर विकसित करने लगा। उसने एक सॉफ्टवेयर बनाया जिसके बारे में वाल्ट ने बताया,” वह प्रोग्राम अभी भी बढ़िया काम करता है और उसकी कई कॉपी हमने बेची भी। लेकिन जब मैंने उस सॉफ्टवेयर के बारे में पूछा कि उसने इसे कैसे बनाया और यह इतना अच्छा कैसे काम करता था तो उसने रहस्य बताने से इंकार करते हुए कहा कि मुझे सिर्फ उस सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से मतलब रखना चाहिए। इस बात से मुझे गुस्सा आया। क्योंकि वह सीआईए एजेंट जैसी बड़ी चीज बनने की योग्यता रखता था। लेकिन क्रिस ऐसा ही था और हर चीज के बारे में उसका ऐसा ही रवैया था।“

क्रिस के व्यक्तित्व के कई पहलुओं से उसके मां-बाप परेशान रहते थे। हलांकि क्रिस बहुत उदार और दूसरों का खयाल रखनेवाला था। साथ ही, एक काम को लगातार पागल होकर करना, धैर्य न होना, सिर्फ अपने बात पर अडिग रहना ऐसे गुण थे जो उसके कॉलेज के दिनों में और बढते ही गए थे। उसके दोस्त इरिक ने कहा,”मैं क्रिस के साथ एक पार्टी में गया था। क्रिस बदल सा गया था। वह अन्तर्मुखी के साथ-साथ बहुत शान्त हो चुका था। जब मैंन उसे कहा कि मैं उसे देखकर खुश था तो उसने इस औपचारिकता पर नाराजगी भरे आवाज में बोला कि ऐसी बातें तो सब कहते थे। उससे बात करना बहुत मुश्किल हो रहा था। उसका अपना अध्ययन ही ऐसा विषय था जिसपर वह रुचि के साथ बात करता था। इमोरी विश्वविद्यालय का माहौल बहुत ही सामाजिक है, लेकिन क्रिस उन सबसे कटकर जीवन जी रहा था। वह अपने आपको दोस्तों से दूर होकर खुद में ज्यादा मगन रहता था।“

अगली गर्मी  छुट्टियों में क्रिस  फिर से घर अन्नाडेल आया  और उसने डोमिनो कंपनी में  पिज्जा बेचने का काम शुरू कर दिया। कैरीन ने उसे  याद करते हुए कहा,” उसे यह सब करने में कोई परेशानी नहीं होती थी। उसने बहुत पैसा कमाया। वह हर रात घर आकर पैसे को जोड़ा करता था। वह इस बात की भी परवाह नहीं करता था कि वह इतना काम करके थक गया होगा। वह टेबल पर बैठकर हिसाब लगाता था कि उसने कितने पिज्जे बेचे, उसने आनेजाने में कितना गैस खर्च किया और डोमिनो ने उसे कितना पैसा चुकाया, उसने शाम तक कितना मुनाफा कमाया और अपनी कमाई को पिछले दिनों की कमाई से तुलना किया करता था। उसने हर चीज का बारीकी से हिसाब रखा और मुझे दिखाया कि वह यह बिजनेस कैसे करता था। उसके लिए पैसा मायने नहीं रखता था, बस ये मायने रखता था वह इसे कितना ज्यादा से ज्यादा कमा सकता था। उसके लिए पैसा कमाना एक गेम की तरह था जिसमें वह ज्यादा से ज्यादा स्कोर करना चाहता था।“

क्रिस का अपने मां-बाप के साथ संबंध  उस गरमी तक और भी खराब हो गया  था और वाल्ट या बिली को इसका कारण समझ में नहीं आता  था। बिली ने इस बारे बताया,”वह हम दोनो के साथ सही व्यवहार नहीं कर रहा था। वह अपनी योजनाओं के बारे में हमसे कुछ नहीं बताता था और ज्यादा से ज्यादा समय अपने अंदर खोया रहता था।“

क्रिस का यह गुस्सा औऱ नाराजगी हाईस्कूल के बाद किये गए ट्रिप के बाद और बढ गया था। अपने डॉटसन कार से की गई उस आवारगी के दौरान क्रिस उस इलाके  में गया था जहां उसका बचपन गुजरा था। वहां जाकर उसे अपने परिवार के पुराने दोस्तों से मुलाकात कर अपने पिता की पहली शादी और तलाक से जुड़े कई बातें जानने का उसे मौका मिला, जिसके बारे में उसे पहले मालूम नहीं था।

वाल्ट अपनी पहली पत्नी मार्सिया से अलग नहीं रह रहा था। बिली के साथ उसका प्रेम परवान चढने के बाद और उससे क्रिस के पैदा होने बहुत दिनों बाद तक वाल्ट मार्सिया के पास जाता रहा था और उसी दरम्यान क्रिस जब दो साल का था, मार्सिया ने वाल्ट के एक और बच्चे को जन्म दिया था। वाल्ट चुपके से अपने दोनों औरतों के साथ संबंध को जी रहा था। इन सब बातों को छुपाने के लिए वाल्ट ने बिली और सबसे झूठ बोला था। वाल्ट की इस दोहरी जिंदगी के बारे में जब क्रिस को पता चला तो उसके मन को गहरे जख्म लगे। इस घटना ने सबको दुख दिया था।

संयोग से वाल्ट, बिली और उसके बच्चों, क्रिस और कैरीन के साथ वह जगह छोड़ दिया। उसके बाद मार्सिया के साथ उसका तलाक और बिली के साथ उसकी शादी को कानूनी रूप दिया गया। वाल्ट और बिली ने पिछली जिंदगी की सारी समस्याएं भुलाकर नयी जिंदगी जीनी शुरू कर दी। उसके बाद दो दशक बीत चुके थे। अपराधबोध, जख्म और कलह जैसी बातें बहुत पीछे छूट चुकी थी और ऐसा लग रहा था जैसे तूफान शांत हो चुका था। लेकिन तभी 1986 में क्रिस फिर से उसी पुराने जगह जाकर उस दुखदायी घटना के बारे में सबकुछ मालूम कर आया और तूफान फिर से अस्तित्व में आ गया।

कैरीन ने बताया,”क्रिस चिंतनशील था। अगर कोई बात उसे अंदर ही अंदर खाती रहती थी तो उसे वह किसी को बताता नहीं था। वह उसपर और सोचता चला जाता था और उसके अंदर वो दुखदायी भावनाएं बढती चली जाती थी।“

ऐसा ही कुछ  क्रिस के साथ तब हुआ जब वह अपने ट्रिप के दौरान  अपने पिता के दोहरे जीवन के रहस्य को जानकर लौटा था।  बच्चों के बारे में देखा गया  है कि कभी-कभी अपने मां-बाप  के गुनाहों पर कड़े फैसले  लेते हैं और उनको कभी माफ  नहीं कर पाते। क्रिस ने भी यही किया था। क्रिस  नैतिक विचारों को जीता था और उन्हीं मुश्किल पैमाने पर रखकर अपने आसपास की दुनिया के बारे में सोचता था, जहां उन नैतिकताओं का घोर अभाव था।

लेकिन क्रिस  खुद उन नैतिक पैमानों  को बहुत बार नजरअंदाज कर देता था। वह एक ऐसे आदमी का बहुत दिनों तक प्रशंसक रहा  जो शराबी होने के साथ-साथ  अपनी गर्लफ्रैंड को खूब पीटता  था, जबकि क्रिस को ये बातें  मालूम थी। उसने अपने प्रिय  साहित्यिक जीनियसों, जैक  लंडन और टाल्सटॉय की बड़ी-बड़ी कमियों को भी नजरअंदाज कर दिया था। टाल्सटॉय अपनी किताबों  में सेलीबेसी(ब्रह्मचर्य) की वकालत करने के बावजूद अपनी जवानी में बहुत बड़ा सेक्सुअल एडवेंचरर था। उसने तेरह बच्चे पैदा किए थे और उनमें से कुछ बच्चे उस दौरान पैदा हुए थे जब सेक्स के विरुद्ध लिखी गई उसकी एक किताब छपने जा रही थी। लेकिन अन्य सामान्य लोगों की तरह क्रिस भी लेखकों या कलाकारों को उसके काम के कारण सम्मान करता था, उनके जीवन से उसे कोई मतलब नहीं था, यही उदार सोच उसने अपने पिता के मामले में नहीं अपनायी थी।

जब भी वाल्ट मैकेंडलेस अपने बच्चे क्रिस या कैरीन को कुछ भी समझाता या डांटता तो तुरंत क्रिस अपने पिता के जीवन के उन काले तथ्यों को बताना शुरू करता और उसे पाखंडी कहता। जैसे-जैसे समय बीता, क्रिस का यह खुद को सही ठहराने वाली प्रवृति बढती चली गई और अब उसपर काबू पाना मुश्किल था। क्रिस अपने मां-बाप को धोखेबाजी के लिए माफ करने को कतई तैयार नहीं था। उसने कैरीन और अन्य लोगों से कहा,” उन दोनों के इस धोखे ने उसके पूरे बचपन को झूठी कहानी सा बना दिया है।“

उसने धीरे-धीरे अपने गुस्से को शांत रहकर या रिश्तों में दूरी बनाकर अभिव्यक्ति देने लगा। 1988 तक आते-आते उसका अपने मां-बाप के प्रति रवैया ज्यादा कठोर हो गया और बढते-बढते उसका गुस्सा अब वह दुनिया में हो रहे अन्याय के प्रति दुखी रहने में बदल गया। बिली ने बताया,”क्रिस इमोरी विश्वविद्यालय में पढ रहे धनाढ्य बच्चों की आलोचना करता था।“ उसने नस्लीय समस्या, दुनिया के भूख और धन के असमान वितरण जैसे मुद्दे पर बोलना शुरू कर दिया। अपनी भोग और पैसे के प्रति उसके इस वैराग्य के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि वह उदारवादी था। वास्तव में वह अमेरिकन डेमोक्रेटिक पार्टी का आलोचक था और रोनाल्ड रीगन की नीतियों का समर्थक था। उसने अपने कॉलेज में रिपब्लिकन क्लब भी बना रखा था। लेकिन उसका यह रवैया भी शायद इस कारण था क्योंकि रिपब्लिकन की नीतियों में व्यक्ति के जीवन में राज्य का हस्तक्षेप कम था। मैकेंडलेस के प्रिय लेखक थोरो ने ‘सिविल डिसओबिडिएंस’ में लिखाः ‘वह राज्य सबसे अच्छा है जो सबसे कम शासन करता है।‘

क्रिस ने इमोरी युनिवर्सिटी के अखबार  ‘इमोरी ह्वील’ में कई विचार लिखे। तब से आधा दशक बीतने के बाद भी उन विचारों को पढकर क्रिस के उन भावनात्मक उग्रता का पता चलता है। उस अखबार का संपादक मोरिस ने बताया,”क्रिस के लेखन में भावनात्मक आवेग रहता था।“आगे मैकेंडलेस में यह आवेग बढता ही गया। 1989 के बसंत की छुट्टियों में मैकेंडलेस फिर एक बार बिना किसी तैयारी के अपनी डॉटसन कार लेकर लंबे ट्रिप पर गया। वाल्ट ने क्रिस के उस ट्रिप के बारे में बताया,”पूरी गर्मी उसने हमें सिर्फ दो पोस्टकार्ड लिखा। पहले पोस्टकार्ड में उसने लिखा’ग्वाटेमाला जा रहा हूं’। यह पढकर मुझे भारी चिंता हुई कि कहीं वह अलगाववादियों का साथ तो देने नहीं जा रहा। उसे वे लोग दीवार से ख़ड़ा करके गोली मार देते। फिर गर्मी के अंत में दूसरे पोस्टकार्ड में लिखा’कल फेयरबैंक से घर लौट जाऊंगा’। उसने दक्षिण जाने का इरादा बीच में छोड़ उत्तर में अलास्का की तरफ मुड़ गया था।‘

उत्तर की ओर अलास्का के धूल भरे  हाइवे पर यह उसकी पहली यात्रा थी। वह सिर्फ कुछ दिन वहां रूका और कॉलेज क्लास शुरू होने से पहले वापस लौट आया। उस यात्रा में धरती की विशालता, ग्लेशियर का सौंदर्य और आर्कटिक के आकाश ने उसपर गहरा प्रभाव छोड़ा था। वहां से इमोरी लौटने के बाद उसने हॉस्टल छोड़ दिया और उसने एक कमरा किराये पर लेकर, उसमें साधुओं सा जीवन जीने लगा। उसके बाद वह क्लास में कम जाने लगा। लाईब्रेरी की चाभी उसे एक प्रोफेसर ने दे रखी थी जिसमें वह घंटों पढता रहता था। उसके हाईस्कूल के एक दोस्त एंडी ने दो साल बाद क्रिस को उसी लाईब्रेरी में देखा जबकि वह भी इमोरी विश्वविद्यालय में ही पढता था। क्रिस ने अजनबीपन से उससे कुछ मिनट बातें की और फिर पढने में डूब गया।

क्रिस ने उस साल शायद ही कभी अपने मां-बाप से संवाद किया था। उसने फोन नहीं रखा था, इसलिए उसके मां-बाप भी उससे संपर्क नहीं कर पाते थे। वाल्ट और बिली अपने बेटे से भावनात्मक दूरी होने के बाद दुखी रहने लगे थे। बिली ने क्रिस को एक पत्र लिखाः ‘तुम हम सबको बिल्कुल भूल गए हो जो तुमसे इतना प्यार करते हैं। जो भी तुम कर रहे हो, जिसके साथ भी तुम रह रहे हो, क्या तुम्हारी नजर में वह ठीक है?’ क्रिस की नजर में यह पत्र उसके जीवन में हस्तक्षेप की कोशिश थी और उसने अपनी बहन कैरीन से कहा,”क्या मतलब है यह लिखने का कि मैं किसी के साथ रहा हूं। मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि वे सोचते हैं कि मैं होमोसेक्सुअल हूं। वे ऐसा सोच भी कैसे सकते हैं। कितनी बचपना भरी बातें हैं ये।“

1990 के बसंत  में जब वाल्ट, बिली और  कैरीन; मैकेंडलेस के ग्रेजुएशन डिग्री प्रदान किए जाने वाले सामारोह में गए थे तब वह खुश दिख रहा था। अपनी डिग्री लेने जाते समय मैकेंडलेस को उन्होंने मुस्कुराते देखा था। वहीं पर उसने अपने अगले लंबे ट्रिप के बारे में बताया था और कहा था कि उस आवारगी से पहले वह अन्नाडेल में उन सबसे मिलने आएगा। उसके कुछ दिन बाद उसने अपना सारा पैसा भूख से लड़ने वाली संस्था ऑक्सफेम(OXFAM) को दे दिया, अपने डॉटसन कार में सामान भरा और उनके जीवन से निकल गया। उसके बाद उसने अपने मां-बाप से कोई संपर्क नहीं किया यहां तक कि कैरीन से भी नहीं जिसका वह इतना खयाल रखता था।

कैरीन ने कहा,”उसके इस तरह रिश्ता तोड़ लेने से हम सब दुखी थी। मां और पापा तो दुखी के साथ गुस्सा भी थे। लेकिन मैं जानती थी कि वह जहां था, खुश था और अपनी आजादी को ज्यादा से ज्यादा पाना चाहता था। वह जानता था कि अगर मुझे चिट्ठी लिखता या फोन करता तो सबको उसके बारे में पता चल जाता और मां, पापा उसे वापस लाने वहां पहुंच जाते।“ वाल्ट ने कैरीन के इस बात से सहमति जताई।

जैसे-जैसे महीने बीतते गए, क्रिस  की ओर से कोई संवाद नहीं आया और घर में चिंता बढ गई। बिली हर रोज अपने दरवाजे पर क्रिस के लिए एक नोट(Note) चिपकाकर जाती थी। बिली ने बताया,”जब भी हम बाहर जाते और रास्ते में किसी आवारे को देखते उसका चेहरा हमें क्रिस की तरह नजर आता था और हम गाड़ी मोड़कर उसे पास से देखने आते थे। बहुत दुखदायी समय था। ठंड और तूफान वाली रातें बहुत डरावनी लगती थी। मन में खयाल आता था कि पता नहीं क्रिस कहां होगा, इस ठंड में उसके पास गर्म कपड़े होंगे कि नहीं, या कहीं वह घायल और अकेला न हो।“

जुलाई 1992, क्रिस के अटलांटा छोड़ने के ठीक दो साल बाद, चेस्पीक  के समुद्री किनारे के उस मकान में आधी रात को अचानक  बिली उठ बैठी, उसने वाल्ट  को जगाया। उसने जोर देकर कहा,”क्रिस मुझे बुला रहा है। मैं सपना नहीं देख रही। सच कह रही हूं। मैंने उसकी आवाज सुनी है। वह मुझे पुकार रहा है, ‘मां, मेरी मदद करो।‘ लेकिन मैं उसकी मदद नहीं कर सकती क्योंकि मैं नहीं जानती कि वह कहां था।“

इस धरती की सरजमीं मेरे वजूद का एक हिस्सा है। जो रास्ता मुझे पहाड़ियों और निचले मैदानों की ओर जितना ले गई, उतना ही मुझे अपने आत्मा के अंदर भी ले गई। आवारगी में जिन जगहों से मैं गुजर रहा, उसे पढ और सोच रहा था, वह एक खोज था जिसने मेरी आत्मा को इस सरजमीं से जोड़ा। एक समय ऐसा आया जब मैं और मेरी सरजमीं, दोनों मेरे अंदर एक हो गए। उसके बाद मेरी आवारगी का रूप बदल गया। मैंने पढने और सोचने से होने वाले तनाव को छोड़कर सीधे घूमना शुरू किया, बिना पीछे मुड़कर देखे हुए। मैं कहां हूं, क्या हूं; यह सब तय करना मैंने इन पगडंडियों पर छोड़ दिया। ये पहाड़ें, वो छायेदार जगहें, बर्फीली वादियां खुद-ब-खुद बयां कर देंगी कि मैं कहां हूं। फिर उसके बाद सारी दुनिया मुझे खोजती रहे अगर खोज सकती है तो। (जॉन हैन्स, की किताब दी स्टार्स, दी स्नो, दी फायरःट्वेंटी फाइव इयर्स इन दी नार्दर्न विल्डरनेस से उद्धृत)

वर्जीनिया बीच पर क्रिस मैकेंडलेस की बहन के घर में दो तस्वीरें हैः एक में क्रिस के बचपन की तस्वीर और दूसरे में सतरह बरस का क्रिस, कैरीन के साथ। कैरीन उन दोनों तस्वीरों के देखकर बोली,” कितने आश्चर्य की बात है कि दोनों तस्वीरों के बीच दस बरस का फासला है लेकिन दोनों में क्रिस का हाव-भाव एक जैसा है।“ कैरीन ठीक कह रही थी। दोनों तस्वीर में क्रिस लेंस की तरफ तनावग्रस्त और अनिच्छा भाव से देख रहा है, जैसे लग रहा है कि उसे किसी ने गहरे चिंतन के बीच में ही टोक दिया और वह कैमरे के सामने खड़े होकर समय गंवाने को लेकर गुस्सा है।

उस घर में वहीं बैठा पपी(पिल्ला) अब तेरह साल जवान कुत्ता हो चुका था जिसे कैरीन के लिए  बचपन में वाल्ट लाया था और जिससे क्रिस को काफी लगाव था। कैरीन ने कहा,”क्रिस को जानवरों से बहुत प्यार था। जिस साल वह गायब हुआ था, वह अपने साथ इस कुत्ते को भी ले जाना चाहता था। इमोरी से ग्रेजुएशन के बाद उसने मां और पापा से इस बारे में पूछा था लेकिन दोनों ने मना कर दिया क्योंकि एक कार के नीचे आ जाने के कारण कुत्ते का पैर जख्मी था और उसका इलाज चल रहा था। लेकिन अपने फैसले पर अब वह पछता रहे हैं। अगर क्रिस इस कुत्ते को अपने साथ ले जाता तो शायद वह इतना खतरा नहीं उठा पाता। क्रिस को भले अपनी जान प्यारी नहीं थी लेकिन वह इस कुत्ते की जान को कभी खतरे में नहीं पड़ने देता।“

कैरीन अपने भाई क्रिस के जितनी ही लंबी हैं-पांच फीट आठ ईंच  की, और चेहरा भी लगभग क्रिस  से मिलता जुलता है इसलिए  लोग पूछ बैठते हैं कि दोनों जुड़वे तो नहीं।  क्रिस की तरह ही कैरीन  भी अपने मां-बाप से लड़ती  रहती थी। लेकिन दोनों  के गुण जितने मिलते थे उससे ज्यादा दोनों एक दूसरे से भिन्न प्रकृति के थे। क्रिस के गायब हो जाने के बाद कैरीन ने अपने मां-बाप को बहुत संभाला और अब अपने रिश्ते को वो बहुत अच्छा कहती हैं। उसे समूह में आनंद आता है जबकि क्रिस को अकेलापन में ज्यादा पसंद था। हलांकि क्रिस की तरह वह भी नस्लभेद और सामाजिक अन्याय की विरोधी हैं लेकिन पैसे से उसका कोई बैर नहीं है। कैरीन बोली,“हमेंशा मां-पापा को दिन रात व्यस्त देखकर अच्छा नहीं लगता था लेकिन मैं भी आज वही कर रही हूं जो वे कर रहे थे। क्रिस मेरे कैपिटलिस्ट मानसिकता का मजाक उड़ाता था।“ इन सबके बावजूद क्रिस और कैरीन के बीच भावनात्मक जुड़ाव गहरा था। क्रिस ने एक बार कैरीन को लिखा,”मैं तुमसे अपने मन की बात कहता सुनता हूं क्योंकि दुनिया में एक तुम ही हो जो मुझे समझती हो।“

क्रिस के मरने के दस महीने बाद भी कैरीन उस दुख से उबरी नहीं है। “मैं तकरीबन रोज रो देती हूं उसे याद करके। अक्सर जब भी मैं अकेले कार से जा रही होती हूं तब खुद को उसे याद करने से रोक नहीं पाती और टूट सी जाती हूं।“

17 सितम्बर  की शाम को वह अपने  कुत्ते को नहला रही  थी तभी उसका पति फिश  घर पहुंचा। उसे इतनी  जल्दी शाम को ऑफिस से  लौटा देखकर कैरीन को  आश्चर्य हुआ क्योंकि  वह देर रात तक वहां  काम करता रहता था। “वह कुछ ज्यादा ही मजाकिया व्यवहार कर रहा था लेकिन उसके चेहरा आतंकित सा लग रहा था। वह अंदर गया, फिर बाहर आया और कुत्ते को नहलाने में मेरी मदद करने लगा। मैं समझ गयी कि कुछ गलत हो चुका है क्योंकि वह कुत्ते को कभी नहीं नहलाता था। उसने कहा कि वह कुछ बात करना चाहता था। मैं उसके साथ अंदर गयी। फिश वहां सर झुकाए उदास बैठा था। वह दिल पे चोट खाये आदमी जैसा लग रहा था। मैंने कहा कि लगता है कि ऑफिस में किसी ने उसे मजाक में झूठ कह दिया कि मैं किसी और के साथ बाहर कहीं थी। मेरे इतना कहते ही वह हंसने लगा,”क्या किसी के पास इतना फालतू समय है कि वह तुम्हें दे।“ उसने मेरी तरफ देखा, उसकी आंखें लाल थी।“

फिश ने कहा,”तुम्हारा भाई मर गया।“ फिश को ये समाचार क्रिस के सौतेले बड़े भाई सैम मैकेंडलेस ने दी थी। कैरीन की आंखे भर आयीं और उसके सामने अंधेरा सा छाने लगा। कैरीन रो पड़ी,”नहीं, क्रिस मरा नहीं है।“ वह इतनी जार-जार रो रही थी कि फिश को लगा कि कहीं पड़ोसी ये सोचकर पुलिस को ना बुला ले कि वह उसे पीट रहा था। कैरीन, कॉउच पर बैठी-बैठी लगातार रोए जा रही थी और जब फिश ने उसे सहारा देने की कोशिश की तो उसने उसे धक्का देकर कहा कि वह उसे अकेला छोड़ दे। अगले पांच घंटे तक वह इसी तरह पागल होकर रोती रही। लेकिन रात 11 बजे तक वह थोड़ी शांत हुई। उसने कुछ कपड़े बैग में रखे, फिश के साथ कार में बैठी और अपने मां-बाप के पास चेस्पीक समुद्री किनारे की तरफ चल पड़ी जो वहां चार घंटे की दूरी पर था।

रास्ते  में कैरीन ने एक चर्च देखकर  फिश को गाड़ी रोकने को कहा। “मैं चर्च के अंदर गई और एक घंटे तक अंदर बैठी रही। मैं ईश्वर से कुछ जबाब चाहती थी। लेकिन मुझे कोई जबाब नहीं मिला।“

हलांकि  फेयरबैंक पुलिस को क्रिस  के सौतेले भाई सैम ने यह पुष्टि कर दिया था कि अलास्का  में जिस आवारे की मौत  हुई, वह उसका भाई था। लेकिन  वहां के जांचकर्ता अभी  क्रिस के दांतों के रेकार्ड  से मिलान करने में लगे  थे, उसके बाद ही कुछ कहने को तैयार थे। बिली ने तब तक लाश की तस्वीर पर नजर  नहीं डाली जब तक कि एक दिन  बाद यह साबित नहीं हो गया  कि सुषाना नदी के पास के बस में मिली लाश उसके बेटे की ही थी।

अगले दिन  कैरीन और सैम फेयरबैंक प्लेन से गए, क्रिस का अवशेष  लाने के लिए। वहां उसे क्रिस  का वह सारा सामान दिया गया  जो वहां मिला थाःउसका रायफल, दूरबीन, रोनाल्ड फ्रांज द्वारा दिया गया फिशिंग रॉड, जेन  द्वारा दिया छुरा, पौधों को जानकारी देने वाला किताब, उसकी डायरी, कैमरा और पांच फिल्म रोल। उसके चौबीस  घंटे बाद दोनों एंकरेज गए जहां साइंटिफिक क्राइम डिटेक्शन लेबोरेटरी द्वारा पोस्टमार्टम के बाद क्रिस  को जलाया गया था। एक प्लास्टिक  बॉक्स में क्रिस के राख  कैरीन को दिया गया।

कैरीन ने उस पल को याद करते हुए कहा, “वह बॉक्स बहुत बड़ा था। उस पर क्रिस का नाम गलत लिखा था। क्रिस्टोफर आर मैकेंडलेस। जबकि आर (R) की जगह जे (J) होना चाहिए था। एक क्षण के लिए मन में खयाल आया कि यह क्रिस नहीं कोई और है। मैं पागल हो गई थी। क्रिस मेरे इस पागलपन को नहीं समझ पाता। वह इसका मजाक उड़ाता।“

उसके बाद  वे सारे सामान के साथ मैरीलैंड, वाल्ट और बिली के पास लौट आए। लौटते समय फ्लाईट में कैरीन के सामने एयर होस्टेस ने जो-जो खाने का सामान रखा, वह उसे खाती गई। कैरीन ने कहा,”उस फ्लाईट में जो भी खाने का सामान था, वह बेहद घटिया किस्म का था लेकिन मैं उसे फेंक नहीं सकी ये यादकर कि मेरा भाई भूख से मर गया था।“ उसके एक सप्ताह बाद तक कैरीन को लगता रहा कि उसका भूख मर सा गया था और उसका वजन दस पाउंड कम हो चुका था, दोस्तों ने सोचा कि कहीं उसे एनेराक्सिया (एक मानसिक बिमारी जिसमें आदमी खुद को जानबूझकर भूखा रखता है) तो नहीं हो गया।

मैरीलैंड में बिली खाना त्याग चुकी थी। जब तक वह फिर से उसके खाने की इच्छा जगी तब तक उसका भी वजन आठ पौंड कम हो चुका था। उधर वाल्ट अचानक खूब खाने लगा और उसका वजन आठ पौंड बढ गया। एक महीने बाद खाने के टेबल पर बिली उन तस्वीरों को देख रही थी जिसमें क्रिस के आखिरी दिन कैद थे। वह जैसे-जैसे तस्वीर देखती जा रही थी, वैसे-वैसे टूटकर रोती जा रही थी; वह एक मां का रोना था जिसने अपना बेटा खो दिया था और यह इतनी बड़ी क्षति थी जिसे मापने के लिए मन के पास पैमाना नहीं था। उस दर्द की ऊंचाई और गहराई को करीब से देखने पर लगता था कि इतना गहरी और ऊंची शायद ही धरती पर कोई चीज थी जिसे देखने के लिए आदमी जान का खतरा उठाता था। क्रिस की मां बिली अपने आंसुओं को रोकने की कोशिश करते हुए बोल पड़ी,”मुझे बिल्कुल समझ में नहीं आता कि उसने इस तरह से जान जोखिम में क्यूं डाला। मैं बिल्कुल समझ नहीं पाती।“

अमेरिका के भोगवादी जीवन से ऊबे क्रिस्टोफर ने खुद को जानने के लिए आवारगी का रास्ता चुना। सारे पैसे दानकर, परिचय-पत्र फेंककर और परिवार को बिना कुछ बताए उसने गुमनामी-घुमक्कड़ी का जीवन जीना शुरू किया। दो साल बाद वह अलास्का के निर्जन इलाके में जाकर रहना शुरू कर दिया। वहां जीवन की विपरीत परिस्थितियों से लड़ते हुए जीवन की खोज जारी रखी। वह ऐसा क्यों बना… अलास्का में उसके साथ क्या हुआ.. यह सब-कुछ जॉन क्राउकर नाम के पत्रकार ने बहुत शोध के बाद अपने किताब ‘Into the wild’ में लिखा। सीन पेन ने इसी नाम से एक बेहतरीन फिल्म बनाई जो विश्व के सौ महान सिनेमा में गिनी जाती है। Into the wild’ का हिंदी में अनुवाद कर रहे हैं युवा पत्रकार राजीव कुमार सिंह। इसका पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा और पांचवां पार्ट आप लोग पढ़ चुके हैं। ये था छठवां पार्ट। राजीव ने इस उपन्यास का अनुवाद करके पत्रकारिता क्षेत्र में दस्तक दी है। उनके अनुवाद में कई कमियां-गल्तियां हैं, ऐसा उनका कहना है। पर इसे एक युवा पत्रकार का शुरुआती गंभीर प्रयास मानते हुए कमियों की अनदेखा की जाए, ऐसा वह अनुरोध करते हैं। राजीव की इच्छा है कि उनके परिचय में लिखा जाए- एक बेरोजगार पत्रकार जिसे एक अदद नौकरी की तलाश है। राजीव से संपर्क rajeevsinghemail@gmail.com के जरिए किया जा सकता है। -एडिटर, भड़ास4मीडिया

भोगवादी जीवन से उबे आदमी की आवारगी (भाग पांच)

यह सही  है कि कई रचनात्मक लोग जीवन में टिकाऊ रिश्ते नहीं बना पाते। और कुछ तो एकदम अकेले रहते हैं। यह भी सच है कि कुछ मामलों में किसी बड़े मानसिक दुख को झेलने  के बाद किसी व्यक्ति के अंदर रचनात्मकता फूट पड़े।  लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह किसी मानसिक बिमारी के कारण है। किसी से व्यवहार न  रखने वाले बच्चे को अगर  वैसे ही विकसित होने दिया जाय तो वह अपने जीवन में किसी नए अर्थ की खोज को अपनी सबसे बड़ी जरूरत मानता है, जो किसी रिश्ते पर निर्भर नहीं करता। (एंथनी स्टोर, सोलिट्यूड: ए रिटर्न टू सेल्फ किताब से उद्धृत)

 

बड़ा सा ग्रीन एलीवेटर ‘जॉन डीरे 8020’, तिरछे पड़ते शाम की रौशनी में साउथ डाकोटा के आधे कटे खेत में अपने पहिए पर चुपचाप खड़ा था। उस मशीन के मुंह से वायन वेस्टरबर्ग का जूता बाहर झांक रहा था जो ऐसा लग रहा था जैसे कोई विशाल मशीनी सांप अपना भोजन धीरे-धीरे निगल रहा हो। “मुझे कमबख्त टूल दो, दोगे क्या?” मशीन के अंदर से गुस्सा भरे आवाज में वह बोल रहा था। “या तुम सब अपने जेब में हाथ डाले, बिना काम के ही व्यस्त हो।“ कुछ दिनों के अंदर ही मशीन तीसरी बार खराब हुआ था और वेस्टरबर्ग बहुत कोशिश कर रहा था कि रात गिरने से पहले वह उसे ठीक कर ले। एक घंटे बाद जब वह बाहर निकला तो वह ग्रीज और अनाज के छिलके में सना हुआ था। मशीन ठीक हो चुका था।

“गुस्से में बोलने के लिए माफी चाहता हूं।“ वेस्टरबर्ग ने माफी मांगते हुए कहा। “हम सब दिन के 18 घंटे काम करते हैं। मैं थोड़ा चिड़चिड़ा होने लगा हूं। वैसे भी इस सीजन में हमें आने में थोड़ी देर हो गई और हमारे पास आदमियों की भी कमी है। हम एलेक्स के वापस आने का इंतजार कर रहे थे ताकि वो हमारे साथ काम करे।“

अलास्का में मैकेंडलेस की लाश को मिले पचास दिन बीत चुके थे। सात महीने पहले, मार्च की एक सर्द दोपहरी को मैकेंडलेस कार्थेज पहुंचा और वह काम करने को तैयार था। एलेक्स ने वेस्टरबर्ग को बताया कि वह 15 अप्रील तक उसके पास काम करेगा ताकि कुछ पैसे जमा हो जाय। एलेक्स को अलास्का जाने के लिए कुछ गर्म कपड़ों के साथ अन्य सामान की जरूरत थी। कार्थेज के उस चार सप्ताह के दौरान मैकेंडलेस ने काफी मेहनत से काम किया। गंदगी के बीच लगातार ऐसे-ऐसे काम किए जिसे कोई नहीं करना चाहता था। गंदे स्टोरहाउस को साफ करना, कीटाणुनाशक का छिड़काव, पेंट करने के साथ-साथ और भी काम उसने किए। मैकेंडलेस को थोड़ा और बेहतर काम देने के लिए वेस्टरबर्ग ने उसे फ्रांट इंड लोडर(खेती में काम आनेवाला एक विशेष ट्रैक्टर) चलाना सिखाया। वेस्टरबर्ग ने बताया, “एलेक्स मशीनों के बीच नहीं रहा था, इसलिए उसका क्लच और लीवरों के बीच उलझ कर काम करना काफी हास्यास्पद सा लगता था। वह निश्चित तौर पर मशीनी दिमाग का नहीं था।“

वेस्टरबर्ग  ने कहा, “ऐसा नहीं था कि वह किसी और दुनिया का था। लेकिन  एलेक्स के सोचने में कहीं न कहीं कुछ कमी थी। मुझे याद है कि एक बार मैं उसके किचन में गया था तो वहां बहुत तेज दुर्गंध था।  मैंने माईक्रोवेव ओवेन खोलकर  देखा तो उसके सतह पर खराब हो चुके तेल का परत जमा  था। एलेक्स उसी ओवेन में  खाना बनाता था और उसे कभी  नहीं लगा कि उस तेल को धूप  लगाकर सुखा देना चाहिए। ऐसा  नहीं था कि वह आलसी था। एलेक्स हमेंशा चीजों को साफ और व्यवस्थित रखता था। फिर भी उसने उस सड़े हुए तेल पर ध्यान नहीं दिया था।“

जब मैकेंडलेस बसंत में कार्थेज पहुंचा था तो वेस्टरबर्ग ने उसे अपनी गर्लफ्रेंड गेली बोराह से मिलवाया था, जो छोटे कद की दर्द भरी आंखों और लंबे बालों वाली नाजुक सी औरत थी। वह 35 साल की विडो, दो बच्चों की मां थी। जैसे ही वह मैकेंडलेस से मिली, उससे काफी घुल-मिल गई। बोराह ने मैकेंडलेस के बारे में बताया, “वह पहली नजर में शर्मीला सा था। वह कुछ ऐसे रहता था जैसे उसे लोगों के बीच रहने में परेशानी होती थी। मैंने देखा था कि वह हमेंशा अपने साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहता था। हम एलेक्स को रोज रात खाने पे अपने घर बुलाते थे। वह बहुत खाता था। कभी अपने प्लेट में खाना नहीं छोड़ता था। वह खाना भी अच्छा बना लेता था। वह चावल बहुत खाता था। कहा करता था कि वह 25 पौंड चावल के सहारे पूरे महीने खा सकता है। एलेक्स जब मुझसे मिलता था तो बहुत सारी बातें करता था। गंभीर बातें। कुछ चीजें उसे अंदर ही अंदर खाती रहती थी। वह अपने परिवार से दूर रहता था। उसने मुझे सिर्फ अपनी बहन के बारे में बताया, जिससे उसको काफी लगाव था।”

वेस्टरबर्ग  अपनी तरफ से उसके परिवार की समस्या में कोई रुचि नहीं लेता था। उसने कहा, “अगर एलेक्स यहां रहता तो मैं उसे कहता कि वह क्यों अपने मां-बाप से बात नहीं करता, क्यों उन्हें बेकार समझता है। मेरे पास तो एक ऐसा लड़का भी काम करता था जिसके मां-बाप थे ही नहीं, फिर भी वह मां-बाप के बारे में कभी बुरा नहीं बोलता था। जितना एलेक्स ने नहीं देखा होगा उससे कहीं ज्यादा तो मुझे मां-बाप ने झेलाया था। मुझे लगता है कि कुछ ऐसी बात उसके औऱ उसके बाप के बीच में हो गई थी, जो उसके दिमाग में बैठ गया था और वह उससे मुक्त नहीं हो पा रहा था।“

वेस्टरबर्ग  ने क्रिस और उसके पिता वाल्ट  के रिश्ते के बारे में जो भी कहा था, वह एक व्यावहारिक दिमाग का सटीक बयान था।  दोनों बाप-बेटे जिद्दी थे।  वाल्ट का बच्चों को नियंत्रित  करने के लिए किया गया अतिशय  व्यवहार और मैकेंडलेस की स्वच्छंद प्रवृति के बीच कभी सामंजस्य हो ही नहीं सकता था। वाल्ट के अनुसार काम करते हुए क्रिस अपने स्कूल और कॉलेज में बेहतरीन अंकों से पास हुआ था लेकिन क्रिस का गुस्सा अंदर ही अंदर बढ रहा था। उसे मां-बाप के सोच में हिपोक्रेसी दिखी और शर्तों पर दिए गए प्यार ने उसको आतंकित किया। उसने गहराई से सोचने पर पाया कि उसके पिता में नैतिक खामियां थी। क्रिस विद्रोही हो गया। गायब होने से पहले उसने अपने मां-बाप के व्यवहार के बारे में शिकायत करते हुए कैरीन से कहा, “ उनका व्यवहार अतार्किक, दमनकारी, असम्मानजनक और अपमानित करने वाला है जो अब मेरे सहन करने की सीमा को पार कर चुका है। वे मेरी भावनाओं को नहीं समझते हैं इसलिए ग्रेजुएशन के कुछ महीने बाद तक मैं उन्हें इस मुगालते में रखना चाहता हूं कि उनकी सोच ही ठीक है और हमारे रिश्ते स्थिर हैं। जब सही समय आएगा तो मैं अचानक उन्हें अपने जीवन से निकाल फेंकूंगा। मैं उनको बेटे के रुप में तलाक दे दूंगा और जब तक जिंदा रहूंगा, इन मूर्खों से बात नहीं करुंगा। एक बार जाऊंगा तो फिर कभी लौटकर नहीं आउंगा।“

वेस्टरबर्ग  ने ये महसूस किया था कि एलेक्स का अपने मां-बाप के साथ और उसके साथ व्यवहार, दोनों  में काफी विरोधाभाष था।  यहां पर वह मिलनसार था और एक साथ कई लोगों को खुश  रखता था। जब वह साउथ डाकोटा लौटकर आया तो चिट्ठियां  उसका इंतजार कर रही थी।  वे उनलोगों की चिट्ठियां  थीं जो उनसे आवारगी की राह  पर मिले थे। वेस्टरबर्ग याद  करते हुए कहते हैं, “उनमें से एक चिट्ठी उस लड़की की थी जिसे मैकेंडलेस से प्यार हो गया था। जिससे वह टिम्बक्टू जैसी जगह, निलांद कैम्पग्राउंड में मिला था।“ एलेक्स ने वेस्टरबर्ग और बोराह को कभी भी अपने किसी रोमांटिक संबंध के बारे में नहीं बताया था। “उसने कभी किसी गर्लफ्रैंड के बारे में नहीं बताया था। हां, वह यह जरूर कहा करता था कि एक दिन वह शादी करके परिवार बसाना चाहेगा। उसने किसी संबंध को हल्के में नहीं लिया था। वह ऐसा नहीं था जो किसी भी लड़की के साथ सो जाय़। ”

ब्रह्मचर्य (सेलीबेसी) और नैतिक शुद्धता पर मैकेंडलेस ऊंचे विचार रखता था। थोरो की एक किताब की इन पंक्तियों को मैकेंडलेस ने कलम से घेरा थाः- ‘ब्रह्मचर्य से आदमी का जीवन खिलता है। जीनियस, हीरोईज्म, पवित्र आत्मा और इस तरह की चीजें इसके बाद ही मिलती हैं।‘

अमेरिकन सेक्स को लेकर पागल रहते हैं। जब कोई आम नौजवान इस मांसल सुख से दूर जाने की कोशिश करता है, तब वे उसे देखकर अंदर से हिल जाते हैं और नाक-भौं सिकोड़ते हैं। उसे संदेह की नजर से देखा जाता है। मैकेंडलेस के चरित्र में सेक्स को लेकर जिस तरह इन्नोसेंसी थी, उस तरह के चरित्र वाले मशहूर लोगों की अमेरिकी समाज में प्रशंसा होती थी, लेकिन उनके बीच में कोई ऐसा आदमी हो तो यही अमेरिकी उसकी निंदा करते थे।

मैकेंडलेस का सेक्स के प्रति रवैया उन लोगों से मिलता जुलता था, जिनके अंदर आवारगी के लिए जुनून था- जैसे थोरो(जिंदगी भर कुंवारे रहे), प्रकृतिवादी जॉन म्यूर और न जाने ऐसे कितने गुमनाम धार्मिक, खोजी, साहसिक और समाज में मिसफिट लोग। मैकेंडलेस के अंदर ऐसी कई जिज्ञासाएं थी, जिसकी तलाश में वह सेक्स को भूल सा गया था। उसकी जिज्ञासाओं का, मानवीय संपर्क समाधान नहीं कर सकता था। इसलिए, वह अलास्का की ओर भाग चला था। मैकेंडलेस ने वेस्टरबर्ग और बोराह को यह भरोसा दिया था कि जब उसकी अलास्का यात्रा पूरी हो जाएगी तो वह साउथ डाकोटा फिर आएगा। उसके बाद क्या करेगा, यह आगे की परिस्थिति पर निर्भर करेगा।

वेस्टरबर्ग  ने बताया,” मुझे लगा कि अलास्का उसकी आखिरी और बड़ी साहसिक आवारगी थी और उसके बाद वह कहीं किसी जगह घर बसा लेगा। मैकेंडलेस कहता था कि वह अपनी इस आवारगी के अनुभवों को लेकर एक किताब लिखेगा। उसको कार्थेज में रहना अच्छा लगा था। वह बहुत ज्यादा पढा-लिखा था, इसलिए कोई नहीं यह कह सकता था कि वह इस तरह मेरे पास बाकी जिंदगी खेतों में ग्रीन एलीवेटर चलाते हुए गुजारता। लेकिन, वह अलास्का से मेरे पास वापस जरूर लौटकर आता, यहां एलीवेटर चलाकर मेरी मदद करता और आगे की जिंदगी की तैयारी करता।“

1992 के बसंत  में मैकेंडलेस की नजर सिर्फ और सिर्फ अलास्का जाने पर टिकी थी। जहां कहीं मौका पाता वह अपने अलास्का ट्रिप के बारे में बात करना शुरू कर देता। उसने आसपास रह रहे अनुभवी शिकारियों से जानवरों के शिकार, उसके चीर-फाड़ और मांस को सुरक्षित रखने के उपाय के बारे में जानकारी प्राप्त की। बोराह उसे गर्म कपड़े खरीदने के लिए मिशेल शहर ले गई थी। अप्रील 1992 के बीच में वेस्टरबर्ग ने मैकेंडलेस को एक-दो सप्ताह रूक जाने को कहा क्योंकि काम करने के लिए उसके पास आदमियों की कमी थी और वह खुद बहुत व्यस्त था। लेकिन, मैकेंडलेस ने उसकी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया।

वेस्टरबर्ग  ने दुखी स्वर में बताया,”एक बार एलेक्स के दिमाग में जो बात आ जाती थी, उसे कोई नहीं बदल सकता था। मैंने उसे यहां तक कहा कि दस दिन रूक जाओ, मैं तुम्हें फेयरबैंक जाने के लिए प्लेन का टिकट कटा दूंगा और अप्रील के आखिर तक तुम अलास्का में रहोगे लेकिन मैकेंडलेस ने मना कर दिया। उसने कहा कि वह उत्तर की तरफ पैदल ही आवारगी करेगा। प्लेन से जाना खुद को धोखा देने जैसा होगा। यह उसके पूरे यात्रा का मकसद ही चौपट कर देगा।“

मैकेंडलेस के कार्थेज छोड़ने के दो दिन पहले, वेस्टरबर्ग की मां मैरी वेस्टरबर्ग ने अपने घर उसे खाने पर बुलाय़ा। इस बारे में वेस्टरबर्ग ने बताया,”मां को मेरे यहां काम करने वाले किसी आदमी से मिलने में कोई रुचि नहीं थी और वह एलेक्स से मिलने के लिए भी उत्साहित नहीं थी। लेकिन, मैं उसे बार-बार कहता कि इस बच्चे से एक बार मिल लो और उसने एक दिन मैकेंडलेस को खाने पर बुलाया। दोनों मिलते ही बातें करने लगे और उनकी बातें पांच घंटे तक लगातार चलती रही।“

जहां बैठकर  मैकेंडलेस ने मैरी वेस्टरबर्ग के साथ खाना खाया था, उसी जगह बैठी मैरी ने उस रात को याद करते हुए कहा, “ एलेक्स के अंदर कुछ खास था जो किसी को भी उसकी तरफ खींचता था। एलेक्स मुझे अपने उम्र से कहीं ज्यादा परिपक्व लगा। मैंने जो कुछ भी कहा, वह जिज्ञासा से उस विषय में और पूछता रहा। उसे ज्ञान की बहुत ज्यादा भूख थी। हम सबके जीवन जीने के तौर-तरीके से अलग वह अपने विचारों और विश्वासों के साथ जीना चाहता था। हम घंटों किताबों के बारे में बातें करते रहे। कार्थेज में बहुत कम लोग किताबों के बारे में बातें करना पसंद करते हैं। मैं नहीं चाहती थी कि वह रात खत्म हो। मैं अगली बार उसके कार्थेज में लौटकर आने की राह देख रही थी। मैं उसे कभी नहीं भूला पायी। मैं उसके चेहरे को हमेंशा याद करती रही। मैंने तो एलेक्स के साथ सिर्फ कुछ घंटे बिताए थे और मुझे उसकी मौत पर कितना गहरा दुख हो रहा है।“

कार्थेज की आखिरी रात को वेस्टरबर्ग और उसके आदमियों के साथ  कैबरेट में मैकेंडलेस ने जमके पार्टी की। पार्टी में खूब ह्विस्की बहा। सभी तब आश्चर्यचकित रह गए जब मैकेंडलेस बैठकर पियानों पर मधुर धुनें बजाने लगा। ऐसा नहीं था कि वह शराब के नशे में आकर अपने अंदर छुपी प्रतिभा से सबको मुग्ध कर रहा था। उस पल को याद कर वेस्टरबर्ग की प्रेमिका बोराह बोली,”एलेक्स सच में पियानो बहुत अच्छे से बजाना जानता था। हम सब तो खो गए थे उसके धुनों में।“

15 अप्रील 1992 की सुबह सभी मैकेंडलेस को अलविदा कहने के लिए एलीवेटर के पास जमा हुए। मैकेंडलेस का बैग काफी भारी था। उसके जूते में लगभग एक हजार डॉलर ठूसा हुआ था। उसने वेस्टरबर्ग के पास अपनी डायरी और फोटो एलबम सुरक्षित रहने के लिए रख गया और उसे अपने द्वारा रोनाल्ड फ्रांज के यहां बनाया गया चमड़े का बेल्ट दिया।

वेस्टरबर्ग  ने बताया, “एलेक्स कैबरेट के बार में बैठकर घंटो उस बेल्ट को निहारा करता था। जैसे कि वह किसी गुप्त चित्रात्मक भाषा को पढने की कोशिश कर रहा हो। उस बेल्ट पर उकेरी गई हर तस्वीर के पीछे एक लंबी कहानी छुपी हुई थी।“

जाते समय  जब मैकेंडलेस बोराह के गले लगकर उसे अलविदा कह रहा था तब बोराह ने उसके आंखों में आंसू देखे थे। “मैं उसके आंखों में आंसू देखकर डर गई थी। वह बहुत ज्यादा दिनों के लिए के लिए नहीं जा रहा था लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे वह किसी खतरनाक मिशन पर जा रहा था और वह जानता था कि वह वापस जिंदा नहीं भी लौट सकता था। तभी से मेरे मन में आशंका भरी भावनाएं आती रहती थी कि शायद हम एलेक्स से दुबारा नहीं मिल सकेंगे।“

वेस्टरबर्ग  का एक आदमी रॉड वुल्फ, ट्रैक्टर पर सुरजमुखी लादकर साउथ डाकोटा के एन्डरलिन शहर जा रहा था। उसने मैकेंडलेस को इंटरस्टेट 94 तक ट्रैक्टर से छोड़ दिया। उसने बताया,”मैं जब उसे अलविदा कह रहा था तब उसके कंधे से लटक रहे चाकू के देखकर मुझे लगा कि रास्ते में उसे शायद ही कोई लिफ्ट देगा। फिर भी, मैंने मैकेंडलेस से कुछ नहीं कहा। उससे हाथ मिलाया, गुड लक कहा और चिट्ठी लिखने की याद दिलाई।“

मैकेंडलेस ने एक सप्ताह बाद वेस्टरबर्ग को एक छोटी सी चिट्ठी लिखी, जिसपर मोन्टाना के डाक का मुहर लगा थाः-18 अप्रील को मैं एक मालगाड़ी से ह्वाईटफिश पहुंचा। यहां पर मेरा अच्छा समय बीत रहा है। मैं आज बॉर्डर कूदकर अलास्का की तरफ उत्तर दिशा में चल पड़ूंगा। सबको मेरा प्यार।अपना खयाल रखना। एलेक्स।

उसके बाद, मई के शुरूआती दिनों में  वेस्टरबर्ग को दूसरा पोस्टकार्ड मिला, अलास्का से भेजा हुआ, जिसपर ध्रुव पर रहने वाले भालू का फोटो था। इस पर 27 अप्रील, 1992 का डाकमुहर था और उस पोस्टकार्ड पर लिखा था- फेयरबैंक से सबको सलाम करता हूं। यह अंतिम चिट्ठी है शायद। मैं यहां दो दिन पहले पहुंचा हूं। युकोन क्षेत्र से गाड़ी पकड़ने में काफी परेशानी हुई। लेकिन, मैं किसी तरह यहां पहुंच ही गया। मुझे लिखी गई हर चिट्ठी को, भेजनेवाले के पते पर वापस भेज देना। मुझे यहां से वापस लौटने में शायद ज्यादा दिन लग जाय। अगर इस साहसिक यात्रा में मेरी जान चली जाती है और अगर तुम मेरी आवाज फिर से न सुन पाओ, उससे पहले मैं तुमको बताना चाहता हूं कि वेस्टरबर्ग तुम महान आदमी हो। अब मैं अपनी आवारगी पर निकलता हूं। एलेक्स।

उसी तारीख  को मैकेंडलेस ने जेन और बॉब को भी इसी संदेश का एक पत्र भेजा, जिसमें लिखा थाः-

मित्रों,

यह मेरी आखिरी चिट्ठी है। मैं अब अपनी आवारगी और आदिम जीवन जीने की तरफ बढ रहा हूं। अपना खयाल रखना। तुम सबसे मुलाकात बहुत यादगार रहा। एलेक्स।

हालांकि  रचनात्मक प्रतिभावाले लोगों में यह स्वभाव होता है कि वो किसी भी चीज को बहुत गहराई से जीने लगते हैं, जिसके कारण उनके अंदर कोई खास अन्तर्ज्ञान पैदा होता है। लेकिन जो अपने गमों और मानसिक जख्मों से कुछ रचनात्मक चीज नहीं निकाल पाते, उनके लिए जीवन जीने का यह तरीका ज्यादा दिन नहीं टिकता। (थियोडोर रोसजाक, की किताब ‘इन सर्च ऑफ मिराक्युलस’ से उद्धृत)

अमेरिका में एक परम्परा है- अपने मानसिक जख्मों के इलाज के लिए आवारगी करो, धर्म बदल लो, कहीं आराम करो या और कोई तरीका अपनाओ। और, हेमिंग्वे की कहानी की तरह, अगर जख्म बहुत बुरा न हो तो यह बहुत ही उपयोगी चीज है। – एडवर्ड होगलैंड

जब मैकेंडलेस की लाश अलास्का में रहस्यमय परिस्थितियों में मिलने की खबर वहां के मीडिया में छपी तब बहुत सारे लोगों ने यही निष्कर्ष निकाला कि लड़के का दिमाग खराब था। इस बारे में स्टोरी जब आउटसाइड मैगजीन में छपी तो मैकेंडलेस की निंदा में लिखे गए पाठकों के पत्रों का अंबार लग गया। सबने मैकेंडलेस को मूर्ख कहा और उसकी मौत को बेकार की खबर। साथ ही, स्टोरी के लेखक पर भी मैकेंडलेस की मौत को बढा-चढाकर पेश करने का आरोप लगाया। सबसे ज्यादा नकारात्मक प्रतिक्रिया अलास्का के पाठकों ने लिखी। स्टेम्पेड ट्रेल के पास के कस्बे हिली से एक पाठक ने लिखा, “मैकेंडलेस इस स्टोरी में एक आत्मकेंद्रित चरित्र है।“ इस बारे में एक अन्य पत्रकार का विचार था,”क्रिस मैकेंडलेस की जीने की शैली और आवारगी के सिद्धांत में कुछ भी सकारात्मक बात नहीं है। बिना किसी तैयारी के बर्फीले बियाबान में जाना और वहां मौत के अनुभवों के बीच जीने से कोई अच्छा आदमी नहीं बन जाता।“ एक पाठक ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए लिखा, “क्यूं कोई इस दुनिया को छोड़कर कहीं और जाकर जीने का प्रयास करता है? क्यूं कोई बेटा अपने मां-बाप को इतना ज्यादा दुख देता है?“

सबसे कटु आलोचना का पत्र आर्कटिक सर्किल से उत्तर में कोबुक नदी के पास के एक गांव एंबलर से आया, निक जेम्स का, जिसने लिखा-

‘मैं पिछले पंद्रह साल से ऐसे कई मैकेंडलेस जैसे लोगों को देख रहा हूं, सबकी एक ही कहानी हैः आदर्शवादी, उर्जा और उत्साह से भरे युवा, जिसने खुद अपनी क्षमताओं का गलत आकलन किया, देश की जिंदगी को कमतर समझा और आखिर में मुसीबतों के शिकार हुए। मैकेंडलेस इन सब से अलग नहीं था, सिवाय इसके कि वह वहां जाकर मर गया और मीडिया में हर जगह उसकी चर्चा हुई। जब मैं उसके मां-बाप के बारे में सोचता हूं, तो मैकेंडलेस के प्रति मेरी अंदर कोई सहानुभूति नहीं बचती। उस पर मैकेंडलेस का सन्यासीपन और साहित्य लिखने जैसी बातें उसका गुनाह कम नहीं करती बल्कि और बढा देती है। मैकेंडलेस की डायरी, पोस्टकार्ड या नोट्स में लिखी भाषा एक औसत आदमी के लेखनी जैसी है, जैसे किसी हाईस्कूल के बच्चे की भाषा।‘

अलास्का के लोगों के लिए मैकेंडलेस एक साधारण, अपरिपक्व नौजवान था जो अपने प्रश्नों के उत्तर के खोज में बिना किसी तैयारी के बियाबान उजाड़ में चला गया, जहां उसे सिर्फ मच्छड़ और अकेली मौत मिली। उनकी नजर में ऐसे दर्जनों लोग इसी तरह अलास्का के बीहड़ में जाते हैं और उधर ही गायब हो जाते हैं। उनमें से कुछ लोगों की यादें आज भी अलास्का के वासियों में ताजा हैं।

1970 में  तनाना गांव से एक ऐसा  ही संस्कृतिविरोधी आदर्शवादी  नौजवान गुजरा था जिसका  कहना था कि अब वह बाकी  की जिंदगी प्रकृति के  साथ संवाद करने में  बिताएगा। उसी जाड़े के बीच में उसका सारा सामान- दो रायफल, कैंप लगाने का सामान, एक अबूझ इकोलोजिकल थ्योरी और सत्य एवं सौंदर्य के बारे में तर्क से परे भाषणनुमा लिखी बातों वाली डायरी- टोफ्टी के एक खाली केबिन में मिला, जिसमें हवाओं द्वारा उड़ाकर लाया गया बर्फ भरा था। उस नौजवान का कहीं कुछ पता नहीं चला।

उसके कुछ  साल बाद  वियतनाम का एक आदमी ब्लैक नदी के किनारे एक झोपड़ी बनाकर दुनिया से दूर जाकर रहने लगा। फरवरी के अंत तक उसके पास भोजन खत्म हो चुका था और वह भूख से मर गया, लेकिन उसने कहीं से भोजन पाने की कोई कोशिश नहीं की जबकि वहां से सिर्फ तीन मील दूर उसे खाना मिल सकता था। इसी तरह के मौत के बारे में एडवार्ड होगलैंड लिखते हैं- अकेलेपन पर प्रयोग के लिए अलास्का, दुनिया में बेहतर जगह नहीं है।

1981 में  प्रिंस विलियम साउन्ड  के समुद्री किनारे चलते  हुए मैं (जॉन क्राउकर) एक सनकी जीनियस से मिला था। मछली मारने के बोट पर नौकरी की तलाश में मैं अलास्का के कारडोवा के जंगल में कैंप लगाए हुए इंतजार कर रहा था, सालमोन मछलियों के व्यावसायिक सीजन आने का। एक बरसाती शाम को जब मैं शहर में घूम रहा था, तब मेरे बगल से एक मानसिक परेशान और बेतरतीब सा आदमी गुजरा जिसकी उम्र चालीस के करीब थी। उसकी बड़ी-बड़ी दाढी और कंधे तक लंबे बाल थे। लंबे बालों को चेहरे पर लटकने से बचाने के लिए उसने उसे पुराने-गंदे नायलन के हेडबैंड से बांध रखा था। एक कंधे पर लदे छह फुट लंबे लकड़ी के भारी टुकड़े के भार से झुकते हुए वह मेरे सामने से तेज कदमों से चला आ रहा था। वह जैसे ही पास आया, मैंने उसका अभिवादन किया और उसने भी बुदबुदाते हुए जबाब दिया। हम उस बारिश की फुहारों के बीच बात करने के लिए रूके। मैंने उससे यह नहीं पूछा कि जंगल में ऐसे अनेक लकड़ी के टुकड़े रहते हुए भी वह यह गीला और भारी टुकड़ा क्यूं ले जा रहा है। कुछ मिनट इधर-उधर की सामान्य बातें करने के बाद हम दोनों अपने-अपने रास्ते पर चल पड़े। लेकिन इस छोटी सी बातचीत से मैंने निष्कर्ष निकाला कि वह आदमी बेहद आत्मकेंद्रित किस्म का था। उसे वहां के स्थानीय लोगों ने हिप्पी कोव का मेयर नाम दिया था। शहर के उत्तर में ज्वारभाटा द्वारा बनाए गए पानी के स्रोत के किनारे पर वह लम्बे बालों वाला आवारा मेयर कुछ सालों से रह रहा था।

कारडोवा के हिप्पी कोव में रहने वाले मेरे जैसे अधिकांश लोग वहां मछलियों के व्यापारिक केंद्र में ऊंचे वेतन की नौकरी पाने की लालसा से रहते थे या वहां काम न मिलने पर सालमोन मछली के पैकिंग फैक्टरी में काम करते थे। लेकिन, मेयर हम सबसे बिल्कुल अलग किस्म का जीव था। मेयर का असली नाम जेने रोजेलिन था। वह सियेटल के अरबपति विक्टर रोजेलिन का बड़ा सौतेला लड़का था और 1957-65 के बीच रहे वाशिंगटन के मशहूर गवर्नर अल्बर्ट रोजेलिन का भतीजा था। जेने रोजेलिन अपनी जवानी में अच्छा एथलीट और पढने में बहुत तेज था। वह बहुत पढता था, उसने योग का अभ्यास किया और मार्शल आर्ट में पारंगत था। वाशिंगटन और सिएटल विश्वविद्यालय में पढते हुए उसने मानवविज्ञान, इतिहास, दर्शनशास्त्र और भाषाशास्त्र का विशद अध्ययन किया, जबकि वह किसी और विषय में डिग्री ले रहा था। उसका मानना था कि उसे ज्ञान पाने के लिए किसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं थी।

सियेटल  को छोड़ने के बाद रोजेलिन  उत्तर की ओर ब्रिटिश कोलम्बिया  के समुद्री किनारे से होते हुए अलास्का चला आया। 1977 में वह कारडोवा आया  और शहर के किनारे के जंगल में मानव विज्ञान पर एक महत्वाकांक्षी प्रयोग करने में अपना जीवन लगा दिया। 1987 में वहां के अखबार डेली न्यूज के रिपोर्टर मैकिने को उसने बताया,”मेरी रुचि यह जानने में है कि क्या आधुनिक तकनीक से आदमी स्वतंत्र हो सकता है कि नहीं?” वह जानना चाहता था कि क्या आज का इंसान अपने पूर्वजों की तरह उस समय का जंगली जीवन जीने में सक्षम था, जब बड़े-बड़े खतरनाक जानवर खुलेआम धरती पर घूमते थे या इंसान अपनी जड़ों इतना दूर आ चुका था कि बिना बारुद, स्टील और सभ्यता के हथियार के बिना नहीं जी सकता था? इस बात को जानने के लिए उस जीनियस ने अपने आपको आधुनिक समाज की हर चीज से दूर कर लिया और अपने आसपास की चीजों से, खुद के द्वारा बनाए गए उन औजारों को सहारे जीने लगा जिसका इस्तेमाल लाखों साल पहले सभ्यता पूर्व मानव किया करता था।

अखबार डेली न्यूज के रिपोर्ट मैकिने ने रोजेलिन के बारे में कहा, “वह मानता था कि सभ्यता और आधुनिकता के विकास के साथ मानव जीवन धीरे-धीरे निम्न स्तर के जीव बनता चला गया और रोजेलिन का लक्ष्य उसी सभ्यता पूर्व प्राकृतिक अवस्था के जीवन को प्राप्त करना था। उसने सभ्यता के हर चरण के जीवन- रोमन काल, लौह-सभ्यता, तांबा सभ्यता-को जीकर खुद पर प्रयोग करना शुरू किया। वह अपने जीवन के अंतिम दिनों पत्थर के औजारों वाले युग में पहुंच गया था।”

रोजेलिन अपने भोजन के रूप में जड़ों, जंगली बेरी, समुद्री पौधों और भाले से शिकार किए गए जानवरों का इस्तेमाल करता था, चीथड़े पहनता था और भयंकर जाड़े को सहन करता था। ऐसा लगता था जैसे उसे इस तरह के कठिन जीवन में आनंद आता था। अपना झोपड़ा भी बिना किसी कुल्हाड़ी या औजार के बनाया था जिसमें कोई खिड़की नहीं थी। रिपोर्टर मैकिने ने उसके बारे में बताया,”वह दिनभर अपना समय लकड़ी के लट्ठ को धारदार पत्थर से चीरने में बिताता था। जैसे अपने ऊपर खुद के द्वारा थोपे गए कठिन जीवन का मेहनत काफी नहीं था उसके लिए, इसलिए जब कोई काम नहीं रहता तो वह जमकर कसरत किया करता था। भारी चीजें उठाता, खूब दौड़ता और प्रायः अपनी पीठ पर भारी पत्थर लादकर चलता रहता। गर्मी के दिनों में भी वह प्रतिदिन अठारह मील की दूरी तय करता था।“

रोजेलिन का यह प्रयोग दस साल से ज्यादा समय तक चलता रहा और एक दिन उसे लगा कि उसके प्रश्न का उत्तर उसे मिल गया था। उसने एक मित्र को पत्र में लिखाः- ‘मैंने अपनी जवानी की शुरूआत इस परिकल्पना से किया था कि पत्थर युग के आदमी की तरह फिर से बना जा सकता था। तीस साल तक मैं अपने जीवन को वैसा बनाने के लिए तैयारी में लगा रहा और प्रयोग करता रहा। मैं ये दावा करना चाहूंगा कि आखिरी दस सालों में मैंने पत्थर युग के जीवन के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक यथार्थ का सही-सही अनुभव किया। उस सत्य अनुभव का सीधे-सीधे सामना करने के बाद मैं ये कह सकता हूं कि आज के इंसान का अपनी जमीन औऱ आधुनिक सभ्यता छोड़कर किसी और जीवन को अपनाना संभव नहीं है।‘

रोजेलिन ने अपने परिकल्पना और प्रयोग में मिली असफलता को शांति  से स्वीकार किया। उनचास  बरस की उम्र में रोजेलिन  ने खुशी-खुशी घोषणा किया कि अब वह अपने पत्थर युग में  जीनेवाले लक्ष्य को छोड़ देगा और आगे वह विश्व में सालों भर प्रतिदिन 18 से 27 मील पैदल आवारगी करते हुए अपना जीवन बिताएगा। लेकिन वह अपना यह ट्रिप शुरू नहीं कर सका। नवंबर 1991 में उसकी लाश झोपड़े में पेट के बल जमीन पर पड़ी मिली, उसके छाती में एक खंजर घुसा हुआ था। जांच के बाद पता चला कि उसने खुद को खंजर मार लिया था। लेकिन सुसाइड नोट नहीं लिखा था। रोजेलिन ने ऐसा कुछ पीछे नहीं छोड़ा था जिससे यह जाना जा सके कि उसने इतने बुरे तरीके से खुद को क्यों मार डाला था। रोजेलिन की मौत और उसके अजीबोगरीब अस्तित्व की कहानी डेली न्यूज अखबार में प्रमुखता से पहले पन्ने पर छापी गई थी।

उसी अखबार  में जॉन वाटरमेन के अपने साहसिक यात्रा के दौरान गायब हो जाने की घटना को कम प्रमुखता मिली थी। 1952 में जन्मे जॉन, वाशिंगटन के उसी क्षेत्र में पला-बढा था जहां का क्रिस मैकेंडलेस था। उसके पिता गे वाटरमेन संगीतज्ञ और स्वतंत्र लेखक के रूप में मशहूर थे, जिन्होंने राष्ट्रपतियों और वाशिंगटन के कई महत्वपूर्ण नेताओं के भाषण लिखे थे। गे वाटरमेन खुद पर्वतारोही (माउंटेनियर) थे और अपने तीनों बेटों को कम उम्र में उसने पहाड़ चढना सिखाया था। जॉन वाटरमेन उनका मझोला बेटा था जो तेरह बरस में पहली बार पहाड़ पर चढा था। वह प्रकृतिप्रेमी था। जब भी उसे मौका मिलता, चट्टान पर चढना शुरू कर देता। उसने पहाड़ चढने का जमकर ट्रेनिंग लिया। वह खूब कसरता करता औऱ हर रोज तेजी से चलते हुए ढाई मील दूर स्कूल जाता था। दोपहर को वापस लौटकर वह दुबारा स्कूल चल देता था। 1969 में जॉन, सोलह बरस में अलास्का के माउंट मैकिनले की ऊंची चोटी चढकर अमेरिकी महाद्वीप में कम उम्र में ये काम कर दिखाने वाला तीसरा शख्स बना था। अगले कुछ सालों तक उसने अलास्का, कनाडा और यूरोप के कई महत्वपूर्ण ऊँचाईयों को छुआ। जब तक वह 1973 में फेयरबैंक के अलास्का विश्वविद्यालय में एडमिशन लेता तब तक उत्तरी अमेरिका में नौजवान पर्वतारोही के रूप में मशहूर हो चुका था।

जॉन मुश्किल  से पांच फीट तीन इंच लंबा था। उसका चेहरा बच्चों जैसा, बदन मजबूत और जिमनास्ट जैसा था। उसे जानने वाले बताते हैं कि वह असामाजिक, आत्मकेंद्रित, अवसादग्रस्त पागल किस्म का बच्चा था जो लोगों से बहुत भद्दा मजाक किया करता था। उसके पर्वतारोही दोस्त जेम्स ब्रेडी ने बताया,”मैं जब पहली बार उससे मिला था तब वह कॉलेज कैंपस में इधर-उधर घूम रहा था, उसके हाथ में एक घटिया किस्म का गिटार था और जो भी सुनता उसे अपने साहसिक यात्रा के बारे में लंबे-लंबे गीत गिटार को बेतरतीब ढंग से बजाते हुए सुनाता। फेयरबैंक शहर, इस तरह के कई उटपटांग किस्म के लोगों को आकर्षित करता है लेकिन जॉन तो फेयरबैंकीय स्तर से कहीं बड़ा पागल था। कई लोगों के सामने ये मुश्किल रहती थी कि सामने आ जाने पर कैसे उससे निबटा जाय।“

जॉन के इस तरह के व्यक्तित्व होने के कई कारण थे। पारिवारिक  सूत्रों के अनुसार, जब वह छोटा था तभी उसके माता-पिता के बीच तलाक हो गया था और दोनों ने जॉन को छोड़ दिया।  पिता उससे कोई मतलब नहीं रखता था, इस वजह से वह टूट गया। तलाक के बाद जब बड़े भाई  को लेकर पिता से मिलने गया  तो पिता ने मिलने से इंकार  कर दिया। दोनों भाई फेयरबैंक में चाचा के पास आकर रहने लगे। एक बार जब जॉन ने पिता के फेयरबैंक में पर्वतारोहन के लिए आने की बात सुनी तो वह काफी खुश हुआ। लेकिन, पिता ने फेयरबैंक आकर भी उससे मिलने की जहमत नहीं उठाई।  जॉन का दिल और टूट गया।

अपने बड़े भाई बिल के साथ जॉन का बहुत ज्यादा भावनात्मक लगाव था। मालगाड़ी पर चढते समय  हुई दुर्घटना में बिल  अपना एक पैर खो चुका था। 1973 में बिल, बड़े ट्रिप पर जाने की बात एक चिट्ठी में लिखकर  अचानक गायब हो गया था।  जब जॉन पहाड़ पर चढना सीख  रहा था उसी दरम्यान उसके आठ नजदीकी दोस्त या तो दुर्घटना में जान गवां बैठे थे या फिर आत्महत्या कर चुके थे। यह सहज ही अनुमान लगाया  जा सकता है कि इन सब दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से जॉन के कच्चे  मानसिक स्थिति पर बहुत बुरा प्रभाव डाला था। मार्च 1978 में जॉन ने अपने सबसे बड़े साहसी पर्वतारोहन की योजना की घोषणा की। माउन्ट हन्टर, जिसपर तीन पर्वतारोही टीम अबतक चढ पाने में असफल रही थी, वह उसपर अकेल चढने जा रहा था। उसके इस साहस के बारे में क्लाईम्बिंग मैगजीन के पत्रकार ग्लेन रैंडाल ने लिखा कि जॉन ने अपने साथियों को बताया था कि वह हवा, बर्फ और मौत की चढाई करने जा रहा था।

माउन्ट  हंटर के मीलों बियाबान में हर तरफ बर्फ जमा था। बर्फ की खड़ी दीवारें ऐसी भुरभुरी थी जैसे कठोर बर्फ पिघलाकर फिर से जमाया गया हो। फिर आगे, कम चौड़े और ढलान वाले छोटे पर्वतों की श्रृंखला थी, जिसे एक-एक करके, पैर फैलाते हुए लंबे-लंबे डग मारते पार करना पड़ा था। बहुत बार तो वह दर्द और अकेलेपन के कारण टूट जाता और बहुत रोता। 81 दिन की बेहद खतरनाक और थका देनेवाली चढ़ाई करने के बाद जॉन 14573 फीट ऊंचे अलास्का के माउन्ट हंटर पहाड़ की चोटी पर जाकर खड़ा हो गया। अगले नौ सप्ताह उसी खतरों से भरे रास्ते से नीचे उतरा। इस तरह 145 दिन जॉन पहाड़ों में बिल्कुल अकेले चलता रहा। जब वह फिर से फेयरबैंक लौटा तो उसका 20 डॉलर में किराए पर लिया गया फ्लैट टूट चुका था और उसे अपना पेट पालने के लिए सिर्फ एक काम मिल पाया- प्लेट धोने का।

फेयरबैंक  के पर्वतारोहियों के छोटे से समूह में उसे इस साहसिक यात्रा के लिए हीरो माना गया। उसने उस चढाई का स्लाईडशो सबको दिखाया जिसके बारे में  याद करते हुए उसके दोस्त  ब्रेडी ने बताया, ”वह बेहद यादगार अनुभव था। उसने अपने सारे विचार और भावनाओं, असफलता और मृत्यु से डर के बारे में हमें इतने सजीवता से बताया कि लग रहा था जैसे कि चढाई के दौरान हम उसके साथ ही चल रहे थे।“

इस ऐतिहासिक काम के महीने बाद जॉन  ने अनुभव किया कि उसे आराम से नहीं बैठना चाहिए। माउंट  हंटर की सफलता ने उसे और उत्साह से भर दिया था। जॉन का दिमाग आगे कुछ और करने की सोचने लगा। ब्रेडी ने उसे याद करते हुए कहा,”जॉन अपनी आत्म-आलोचना किया करता था, हमेंशा खुद को जानने-समझने की कोशिश करता था। वह जुनून से भरा हुआ आदमी था, दीवाना था। वह अपने साथ हमेंशा नोटपैड रखता था। उसमें वह रोज अपने दिन भर किए गए काम के बारे में लंबी-चौड़ी बातें लिखा करता था। एक बार मैं उससे मिलने गया और जैसे ही मिलकर जाने लगा, उसने तुरंत अपना नोटपैड निकाला और हमारे बीच जो भी बातें हुई थीं, उसे लिख डाला। हमने ज्यादा बात नहीं की थी फिर भी उसने इसपर तीन-चार पेज लिख डाला था। वह कहीं पर उन सारे कागजों को ढेर जमा किए हुए था और मुझे लगता है जिसकी महत्ता सिर्फ जॉन समझ सकता था और कोई नहीं।“

जल्दी ही जॉन अपने स्कूल में चुनाव लड़ा, जिसमें स्वच्छंद सेक्स और गहरे नशा वाले ड्रग्स को कानूनी वैधता को उसने मुद्दा बनाकर राजनीतिक अभियान चलाया। हलांकि वह चुनाव हार गया जिसके बारे में उसे छोड़ सबको विश्वास था। जॉन चुप नहीं बैठा रहा। उसने अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने के लिए अभियान चलाने लगा। फीड दी स्टार्विंग( भूखे को भोजन दो) पार्टी के बैनर तले वह चुनाव लड़ गया और उसके घोषणापत्र में पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि इस ग्रह पर कोई भी भूख से ना मरे। अपने चुनाव प्रचार के लिए उसने फिर से जाड़े में देनाली के दक्षिणी पहाड़ के सबसे बड़े ढाल पर कम से कम भोजन साथ में लेकर अकेले चढने की योजना बनाई। इसके लिए खुद को प्रशिक्षित करने के दौरान वह बर्फ से भरे बाथटब में खुद को डूबा लेता था।

जॉन हेलीकॉप्टर से काहिल्तना ग्लेशियर तक पहुंचकर दिसम्बर 1979 में  ऊपर चढना शुरू किया लेकिन  चौदह दिन बाद उसने अपनी यात्रा रोक दी। उसने अपने पायलट को कहा,”मुझे यहां से ले चलो, मैं मरना नहीं चाहता।“ दो महीने बाद उसने दूसरी बार चढने की तैयारी की। लेकिन, देनाली के दक्षिण के एक गांव में, जहां पर्वतारोही अलास्का के पहाड़ों पर चढने से पहले रूकते थे, जॉन के केबिन में आग लगने से उसका सारा सामान और नोटपैडों का ढेर-जिसमें उसकी कविताएं और रोज के जीवन का वर्णन लिखा था और जिसे वह अपने जीवन की कृति मानता था- जलकर खाक हो गया।

जॉन इस नुकसान से काफी आहत हुआ। एक दिन  बाद उसने खुद को एंकरेज मनोचिकित्सालय में भर्ती  करवा लिया लेकिन दो सप्ताह बाद उसने वह जगह छोड़ दिया, जब उसे विश्वास हो गया  कि वहां उसे हमेंशा के लिए बंद रखे जाने की साजिश की जा रही थी। 1981 के जाड़े में उसने फिर से एक बार देनाली के पहाड़ पर अकेले चढना शुरू किया। लेकिन इस बार उसने इस काम के लिए और भी कठिन रास्ता चुना। उसने तय किया कि वह समुद्र के किनारे से 160 मील के कठिन वृताकार रास्ते पर चलते हुए पहाड़ की तलहटी तक पहुंचेगा। उसने फरवरी में चलना शुरू किया लेकिन रूथ ग्लेशियर तक जाते-जाते उसका उत्साह खत्म हो गया, जहां से चोटी तीस मील दूर थी। वह बीच से ही लौट गया। लेकिन, मार्च में फिर से उसने ऊपर चढने के लिए कमर कस लिया और जाने से पहले उसने अपने पायलट दोस्त क्लिफ हडसन से कहा,”हो सकता है कि मैं तुमको दुबारा न देख सकूं।“

अलास्का के पहाड़ों में उस मार्च  में कुछ ज्यादा ही सर्दी  थी। उस महीने के आखिर में  रुथ ग्लेशियर के पास एक पर्वतारोही मग्स स्टम्प की मुलाकात जॉन से हुई। स्टम्प विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही था। जॉन से मिलने के कुछ  दिन बाद वह सिएटल में  मेरे(इस किताब के लेखक) पास आया था और बताया,”जॉन खोया-खोया सा लग रहा था। उसने पागलपन भरी कुछ बातें की। वह देनाली के सर्द पहाड़ पर चढ रहा था लेकिन उसके पास बहुत कम सामान था। उसने एक सस्ता सा गर्म सूट पहन रखा था और उसके पास स्लीपिंग बैग नहीं था। उसके पास खाने के नाम पर कुछ आटा, चीनी और तेल का एक बड़ा गैलन था।

अपने किताब  ब्रेकिंग प्वाइंट में ग्लेन  रैंडाल ने लिखाः-जॉन कई सप्ताह तक रूथ ग्लेशियर के पास शेलडोन पहाड़ के क्षेत्र में एक केबिन में पड़ा रहा। काटे बुल, जो जॉन का दोस्त था और उसी क्षेत्र में चढाई कर रहा था, ने बताया कि जॉन नीचे उतर रहा था और लापरवाह था। उसने अपने पायलट क्लिफ हडसन को वह रेडियो लौटा दिया था जिससे संकट के समय जॉन उसे खबर करता था। उसने हडसन से कहा,”मुझे अब इसकी जरूरत नहीं है।“ जॉन को अंतिम बार 1 अप्रील को रूथ ग्लेशियर के नार्थवेस्ट फॉर्क के पास देखा गया जिससे आगे वह उस रास्ते की ओर से गया जिसमें कई बड़े-बड़े बर्फीले दरार थे। उसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला। ऐसा माना गया कि वह किसी दरार में गिरकर मर गया। नेशनल पार्क सर्विस उसे एक सप्ताह तक खोजती रही लेकिन उसका कहीं नामोनिशान नहीं मिला। कुछ पर्वतारोहियों को शेलडन पहाड़ में जॉन के केबिन में पड़े उसके सामान वाले बैग के ऊपर रखा एक कागज मिला जिसपर लिखा था- मेरा आखिरी सलाम, 13/3/1981, 1-42 पीएम।

क्रिस मैकेंडलेस के साथ हुई घटना की तुलना अलास्का के लोग जॉन वाटरमेन से करने लगे। क्रिस मैकेंडलेस की तुलना एक और शख्स से की गई जिसका नाम था कार्ल मेकन था। कार्ल टेक्सास से फेयरबैंक आया था और उस समय ट्रांस अलास्का पाइपलाईन प्रोजेक्ट में उसे अच्छे वेतन की नौकरी मिली थी। वह मिलनसार लेकिन खोया-खोया सा रहनेवाला आदमी था। 1981 के मार्च में जब जॉन अपनी आखिरी यात्रा पर जा रहा था, उसी समय कार्ल ने एक पायलट को किराया देकर उसे सुदूर कोलीन नदी के पास बने एक झील के पास की झाड़ियों में उतारने को कहा, वह जगह युकोन किले से उत्तर-पूर्व में 75 मील दूर ब्रूक्स पर्वत श्रृंखला के दक्षिणी छोड़ पर था।

पैंतीस  साल के शौकिया फोटोग्राफर कार्ल ने अपने दोस्तों से कहा कि वह जंगली जीवन की तस्वीर लेने के लिए इस ट्रिप पर जा रहा था। उसने 500 फिल्म रोल, .22 और .30 कैलिबर के रायफलें, एक शॉटगन और चौदह सौ पौंड खाने का सामान अपने साथ लेकर वहां गया। उसका उद्देश्य अगस्त तक उसी बियाबान में रहना था। लेकिन, उसने गर्मी के खत्म होने के बाद उसे वहां से निकालकर दुनिया में ले आने के लिए किसी पायलट को पहले से कह के नहीं रखा और इसका परिणाम हुआ कि कार्ल की वहीं मौत हो गई।

कार्ल द्वारा किए गए इतने बड़े गलती के बारे में जानकर नौ महीने तक उसके साथ पाइपलाइन कम्पनी में काम कर चुके फेयरबैंक के नौजवान मार्क स्टोपेल को कोई आश्चर्य़ नहीं हुआ। मार्क ने उसके बारे में कहा,”कार्ल बहुत दोस्ताना, सीधा-सादा सा और हम सबके बीच मशहूर था। हलांकि वह स्मार्ट लगता था, लेकिन वह थोड़ा स्वप्नशील था और दुनिया की वास्तविकता से जरा दूर था। वह रंगीन मिजाज था और जमकर पार्टी में मस्ती करता था। साथ ही वह बहुत जिम्मेदार इंसान था लेकिन कभी-कभी किसी भावावेग में आकर भी कोई काम कर बैठता था जिसमें बहुत साहस की जरूरत होती थी। कार्ल के उस बियाबान से वापस लौटने की पहले से तैयारी, भूल जाने की बात सुनकर मुझे आश्चर्य नहीं हुआ। वैसे भी मैं किसी बात से जल्दी चकित नहीं होता क्योंकि मेरे मित्रों में किसी की हत्या हो गई, कोई डूब कर मर गया तो कोई इसी तरह के किसी दुर्घटना का शिकार हो गया। अलास्का में इस तरह की अजीबोगरीब घटनाएं होती रहती हैं।”

अगस्त के आखिर में जब दिन छोटा होने लगा, ब्रूक्स रेंज के पहाड़ों  में हवा का तीखापन बढने लगा और तब जाकर कार्ल को चिंता होने लगी, जब उसे वहां से बाहर निकालने के लिए कोई पायलट नहीं आया। कार्ल ने डायरी में अपनी गलती स्वीकार करते हुए लिखा,”मैं सोचता हूं कि मुझे यहां आने से पहले दूरदृष्टि के साथ यहां से निकलने के बारे में योजना बनाना चाहिए था। मैं कोई न कोई रास्ता खोज लूंगा।“ कार्ल की यह डायरी, उसके मरने के बाद पांच भागों में फेयरबैंक डेली न्यूज में छापा गया।

सप्ताह  दर सप्ताह कार्ल ने जाड़े  को बढते हुए महसूस किया।  उसका खाना खत्म होने पर था।  कार्ल ने उस वक्त तक अपने बंदूक के दर्जनों गोलियों  को बेकार मानकर झील में  फेंक दिया था। उसने इस बात  पर दुखी होकर डायरी में  लिखा-“मैं दो महीने पहले झील में फेंके गए उन गोलियों के बारे में देर तक सोचता रहा। मेरी जब-जब उन गोलियों के पांच डब्बों पर नजर पड़ती थी तब-तब मुझे लगता था कि मैं मूर्ख था जो इसे ले आया और मैंने उसे झील में फेंक दिया। मुझे क्या पता था कि जाड़े में मुझे भूखे रहने से बचाने में, इन गोलियों की जरूरत शिकार करने में पड़ सकती थी।“

तभी, सितम्बर  की एक सुबह को ऐसा लगा जैसे कि वह इस खतरे से बच जाएगा। कार्ल  अपने बचे-खुचे गोलियों से बत्तख के शिकार में लगा  हुआ था कि तभी वहां की शांति  एक हवाईजहाज की आवाज से टूटी।  जल्दी ही जहाज कार्ल के सर के ऊपर था। पायलट ने दूर से कैंप देखकर थोड़ा  नजदीक से देखने के लिए  जहाज की ऊंचाई को कम करके दो गोलाकार चक्कर लगाया। कार्ल अपने स्लीपिंग बैग  के नारंगी चमकीले कवर को लहराने लगा। लेकिन जहाज में पहिए लगे थे इसलिए वह उन झाड़ियों में नहीं उतर सकता था। जहाज के जाने के बाद कार्ल को यह विश्वास था कि पायलट ने उसे देख लिया था औऱ वहां उतर सकने वाले जहाज को वह जरूर भेजेगा उसे ले जाने के लिए। वह इतना आश्वस्त था कि उसने अपनी डायरी में लिखाः’जब जहाज चला गया तो मैंने तुरंत अपना बैग पैक करने और कैंप समेटने में लग गया।‘

लेकिन उस दिन कार्ल को लेने कोई  प्लेन नहीं आया, अगले दिन  भी नहीं, उसके अगले दिन भी नहीं। कार्ल की नजर जब शिकार करने के लाइसेंस पर पड़ी तब उसे लगा कि कोई जहाज फिर से क्यों नहीं आया। उस लाइसेंस पर, धरती से हाथों के द्वारा ऊपर से गुजरते जहाज को सूचना देने के चित्र छपे थे। कार्ल ने अपनी डायरी में लिखा,’ मुझे याद आया कि जहाज के दूसरे चक्कर के दौरान मैंने मुट्ठी बांधकर अपने दाहिने हाथ को ऊपर उठाकर लहराया। दरअसल यह खुशी का प्रतीक है। दुर्भाग्य से मुझे बाद में पता चला कि एक हाथ हवा में उठाकर लहराना एक युनिवर्सल सिग्नल है जिसका मतलब है ‘सब ठीक है’, मदद की जरूरत नहीं है। दोनों हाथ उठाने के सिग्नल का अर्थ है ‘संकट में हूं, जल्दी मदद भेजो।‘’

कार्ल ने आगे लिखा,’जहाज को दूर उड़ा ले जाने के बाद पायलट एक चक्कर लगाने फिर वापस लौटकर आया और मैंने उसे कोई सिग्नल नहीं दिया। मुझे उस वक्त अपनी पीठ को उस जहाज की ओर कर लेना चाहिए था। हो सकता था कि वे मुझे अंजान जानकर बम से उड़ा देते।‘

सितंबर  के अंत से बर्फ के ढेर जमा  हो रहे थे, झील का पानी जम चुका था। कार्ल का खाना खत्म हो चुका था। कार्ल  ने गुलाब के फलों को जमा  करने और खरगोशों को फंसाने की कोशिश की। झील में  जाकर मरे एक ध्रुवीय हिरण को चीर-फाड़ कर उसका मांस निकाल  कर उसने रख लिया था। अक्टूबर तक कार्ल के शरीर का सारा वसा खत्म हो चुका था और अब लंबे सर्द रातों में उसे खुद को गर्म रखना कठिन हो रहा था। उसने अपनी डायरी में लिखा,’शहर में किसी को तो मेरे बारे में सोचना चाहिए था कि मैं अब तक क्यों नहीं लौटा?’ लेकिन कोई नहीं आया।

कार्ल के दोस्त मार्क स्टोपेल ने उसे याद करते हुए बताया,” यह कार्ल ही सोच सकता था कि उस परिस्थिति में कोई जादू से वहां आकर उसे बचाएगा। वह खूब ट्रक चलाता था और उसे चलाते हुए विचारों में खो जाता था। वहीं बैठे-बैठे उसने ब्रूक्स के पहाड़ों में जाने का सोचा था। इस खोज को उसने काफी गंभीरता से लिया था। वह वहां जाने के लिए योजना बनाता रहता और मुझसे पूछता था कि वहां जाने के लिए कौन-कौन से सामान ले जाने चाहिए। इतनी सावधानी से तैयारी करने के बावजूद उसके कुछ आवारा कल्पनाएं भी थी। जैसे कि कार्ल उन झाड़ियों में अकेले नहीं जाना चाहता था। उसका बहुत बड़ा सपना ये था कि वह किसी सुंदर औरत के साथ जंगल में जाकर रहेगा। वह हमारे साथ काम करने वाली कुछ लड़कियों की तरफ काफी आकर्षित था और उससे बात करने की कोशिश में अपना काफी समय और उर्जा नष्ट करता था-यह भी उसका कल्पनालोक ही था। वहां कुछ भी उसके अनुसार होने की कोई गुंजाईश नहीं थी। मेरा मतलब है कि उस पाइपलाईन कैंप में जहां हम काम करते थे, हर औरत के लिए चालीस लड़के मौजूद थे। लेकिन कार्ल स्वप्नशील आदमी था। वह ब्रूक्स रेंज की ओर जाने तक सोचता रहा कि शायद इनमें से कोई लड़की अपना इरादा बदलकर उसके साथ चल दे। वह लोगों से हमेंशा झूठी आशाएं लगाए रखता था। इसलिए जब वह खतरे में फंसा तो वहां भी उसे वही आशा रही कि कोई अचानक उसके खतरे में होने के बारे में जानेगा और उसे बचाने चला आएगा। लेकिन उसकी कल्पना की दुनिया इतनी दूर थी कि उससे कोई खुद को जोड़ नहीं पाता था।“

जब कार्ल का भोजन खत्म हो गया तब उसने अपनी डायरी में लिखा, “मैं अब ज्यादा चिंतित हो रहा हूं। इमानदारी से कहूं तो अब मुझे डर लगना शुरू हो चुका है।“ वहां का तापमान शून्य से पांच डिग्री फारेनहाइट नीचे चला गया था, जिसके कारण कार्ल के हाथ और पैर की उंगलियों में सर्दी के फफोले निकल आए थे। वह कमजोर हो गया और होश भी कम रहने लगा था। सर्दी ने उसकी सूख रही हड्डियों को और तोड़कर रख दिया। उसने अपनी डायरी में लिखा,’हाथ, नाक और पैर की स्थिति धीरे-धीरे खराब होती जा रही है। नाक पर काफी सूजन और फफोले निकल आए हैं। निश्चित तौर पर धीरे-धीरे बहुत दुखदायी मौत मेरे करीब आ रही है।‘ कार्ल ने एक बार सोचा कि कैंप को छोड़कर युकान फोर्ट की ओर पैदल चला जाय लेकिन फिर उसने सोचा कि वह इतना मजबूत नहीं रह गया था और वहां पहुंचने से पहले ही वह रास्ते में सर्दी और थकान से मर जाएगा।

“मैं इस तरह से नहीं जी सकता” कार्ल ने नवंबर के अंत में अपनी डायरी के आखिर में लिखा, जिसका सौ पन्ना अब तक भर चुका था। “हे ईश्वर, मुझे मेरे पापों और कमजोरियों के लिए क्षमा करना। मेरे परिवार का खयाल रखना। उसके बाद वह अपने टेंट के दीवाल के सहारे पीठ लगाकर लेट गया। अपने रायफल की नाली को अपने सर से लगाया और अंगूठे से ट्रिगर दबा दिया। 2 फरवरी 1982 को अलास्का राज्य के सिपाहियों को उसका कैंप मिला। अंदर झांककर देखा तो उसका कंकालनुमा लाश पत्थर जैसा कठोर हो चुका था।

रोजेलिन, जॉन, कार्ल और मैकेंडलेस के साथ हुई घटनाओं के बीच काफी समानताएं हैं। रोजेलिन और जॉन की तरह मैकेंडलेस खोजी था एवं प्रकृति की कठिन परिस्थितियों के प्रति अव्यावहारिक रोमांचक कल्पनाओं से भरा था। जॉन और कार्ल की तरह उसमें भी कॉमन सेंस का अभाव था। लेकिन जॉन की तरह मैकेंडलेस मानसिक रोगी नहीं था। कार्ल की तरह वह इतना स्वप्नशील नहीं था कि वह सोचता कि उन बियाबान के झाड़ियों में उसे कोई बचाने के लिए प्रकट होगा।

मैकेंडलेस इन सबसे अलग था। हलांकि वह खतरों के प्रति गंभीर नहीं था, अलास्का में रहने के लिए प्रशिक्षित भी नहीं था और मूर्खता की हद तक असावधान था, लेकिन फिर भी उसमें क्षमताएं थी तभी वह 113 दिन तक उस सर्द बियाबान में जिंदा रह सका। ना तो वह पागल था, ना तो असामाजिक। मैकेंडलेस कुछ और था- जिसे आसानी से परिभाषित नहीं किया जा सकता था।

शायद सत्य का खोजी था। मैकेंडलेस के साथ हुई त्रासदी को समझने के लिए दक्षिणी यूटा में हुए इसी तरह की एक घटना के अध्ययन की जरूरत है। 1934 में बीस साल का लड़का अमेरिका के दक्षिणी यूटा की तरफ रेगिस्तान में गया और कभी वापस नहीं लौटा। उसका नाम एवरेट रुस (Everest Ruess) था।

डेविस क्रीक  सालों भर नाले जैसा पतला धारा बना रहता है और कभी-कभी तो वो भी नहीं। फिफ्टीमाइल प्वाइंट  के ऊंचे चट्टानों के दरार से निकलता एक झरना दक्षिणी यूटा(अमेरिका का एक राज्य) के गुलाबी बलुआ पत्थरों के बड़े-बड़े टुकड़ों के बीच से चार मील बहता हुआ 190 मील के दायरे में फैले पावेल झील में जाकर मिल जाता है। इन नदियों के किनारे डेविस गुल्च एक बेहद खूबसूरत घाटी है, जिसकी तलहटी का थोड़ा सा उपजाऊ रेगिस्तानी जमीन इस सूखे पथरीले देश से गुजरने वाले लोगों को जीवन देता है। इसके टेढे-मेंढे दीवारों की भित्तियों पर अतीत के मानवों द्वारा बनाए गए 900 साल पुराने चित्र सजे हैं। इन चित्रों को बनाने वाले अमेरिकन आदिवासी जनजाति केयेंटा अनासाजी, यहां से बहुत पहले चले गए थे और वहां सुरक्षित कोनों में बने उनके पत्थरों के घर अब खंडहर बन चुके थे। उन आदिवासियों के छोड़े गए टूटे-फूटे बर्तन, उन जंग खा रहे टिन के डिब्बों के साथ मिलकर वहीं के बालू में पड़े थे, जो बाद की शताब्दी में उस घाटी में अपने जानवरों को चराने और पानी पिलाने के लिए आने वाले किसानों के द्वारा फेंके गए थे।

डेविस गुल्च  घाटी में नीचे उतरने का मतलब था किसी नए दुनिया में  प्रवेश करना। इस खूबसूरत  और छुपे हुए घाटी में लगभग छह दशक पहले बीस साल का नौजवान एवरेट रुस ने भित्तीचित्रों पर बने आदिम चित्रों के ठीक नीचे अपना छद्म नाम ‘नेमो 1934’ लिखा था, यही नाम उसने उस खंडहरनुमा घर के दरवाजे पर भी लिखा था जिसमें आदिवासी अनाज जमा किया करते थे। एवरेट ने ठीक वही काम किया था जिसे 58 साल बाद क्रिस मैकेंडलेस ने किया, जिसने अपना नाम अलास्का के बियाबान में खड़े बस की दीवार पर लिखा था,’एलेक्जेंडर सुपरट्रैंप’,मई 1992’। अद्भुत बात यह कि घाटी के भित्तिचित्रों पर लिखने वाले आदिम लोगों ने भी शायद इसी तरह के भावना के आवेग में इन पथरीले दीवारों पर रहस्यमय चित्रों को उकेरा होगा।

घाटी में  अपना नाम उकेरने के कुछ  दिन बाद ही एवरेट रुस  गायब हो गया और उसका कहीं कुछ पता नहीं चला। उसके खोज के बड़े-बड़े प्रयासों के बाद भी कोई जानकारी  नहीं मिली कि उसका क्या हुआ। उसे घाटी का रेगिस्तान  निगल गया था। आज साठ साल  बाद भी वह रहस्य बना हुआ  है, कि एवरेट रुस गया कहां?

एवरेट रुस 1914 में कैलिफोर्निया के ऑकलैंड में पैदा हुआ था। उसके पिता क्रिस्टोफर रुस; कवि, दार्शनिक होने के साथ कैलिफोर्निया पेनल सिस्टम में अधिकारी थे। उसकी मां स्टेला, कलाकार मिजाज होने के साथ-साथ बोहेमियन (आवारा) प्रवृति की थी। उसके मां-बाप ऑकलैंड से फ्रेन्सो होते हुए फिर लॉस एंजेल्स पहुंचे और वहां से बॉस्टन के बाद ब्रूकलिन होते हुए न्यू जर्सी से इंडियाना में गए। फिर, वहां से भी निकलकर अखिर में स्थायी रूप से दक्षिणी कैलिफोर्निया में जा बसे। एवरेट उस समय चौदह साल का था।

सोलह साल  की उम्र में एवरेट पहली बार अकेले लम्बे ट्रिप  पर गया, उसने 1930 की पूरी गर्मी  पैदल और लिफ्ट लेकर आवारगी करते हुए योसेमाइट के घाटियों  से गुजरते हुए कारमेल की पहाड़ियों की एक बस्ती में पहुंचा। वहां पर उसने एडवर्ड वेस्टन का दरवाजा खटखटाया। एडवर्ड वेस्टन फोटोग्राफर था और उसने अगले दो महीने तक उस लड़के को पेंटिंग और ब्लॉक प्रिंटिंग का काम करते देखकर खूब उत्साहित किया और अपने स्टूडियो का इस्तेमाल करने की छूट दी।

गर्मी के अंत में एवरेट ने हाईस्कूल डिप्लोमा लेने के लिए घर लौटा, जिसे उसने 1931 में हासिल किया।  एक महीने से भी कम समय बाद  वह फिर से रोड पर था और यूटा, एरिजोना और न्यू मेंक्सिको की घाटियों में आवारगी करता रहा, जो क्रिस मैकेंडलेस के अलास्का जैसा ही रहस्यमय जगह था। उसके बाद वह सिर्फ दो बार मां-बाप से मिलने गया। उसने पढाई बीच ही छोड़ दी जिसके कारण उसके पिता काफी निराश हुए। इसके अलावे उसने एक जाड़ा कुछ पेंटरों के साथ रहते हुए बिताया। फिर उसके बाद वह बाकी जिंदगी बहुत कम पैसों के साथ, धूल भरे रास्तों पर सोते हुए और कभी-कभी दिन भर फाकाकशी करते हुए खुशी-खुशी आवारा जीवन बिताने लगा। वालेस स्टेगनर के शब्दों में,”एवरेट बेहद रुमानी, सौंदर्य प्रेमी और बियाबान की शांति में घूमने वाला आदिम प्रकृति का था।“  18 साल की उम्र में वह जंगल की खाक छानने, पहाड़ों की चोटी पर चढने और सौंदर्य से भरपूर बियाबानों में घूमने के सपने देखा करता था। एवरेट ने जो भी सपना देखा उसे पूरा करने के लिए निकल गया, सालों उन गुमनाम रुमानी जगहों की आवारगी करने के लिए।

जानबूझकर  उसने अपने शरीर को कष्ट दिया ताकि किसी भी परिस्थिति को सहने की क्षमता का उसमें विकास हो सके। जिन बियाबानों की तरफ लोग जाने से मना करते थे वह उसी रास्तों पर जानबूझकर गया। पहाड़ों, घाटियों की आवारगी करते हुए उसने अपने मां-बाप और दोस्तों को लम्बे-लम्बे पत्र लिखे जिसमें उसने समाज और शहरी सभ्यता वाले जीवन की आलोचना की। उसने कई जगहों से ऐसे कई पत्र लिखे। इन पत्रों में एवरेट के प्रकृति से गहरे जुड़ाव और अपनी आवारगी के प्रति दीवानगी का इजहार है। उसने लिखा,”मैं इन बियाबानों में कई खतरनाक अनुभवों से गुजरता रहता हूं और ये सब मुझे बहुत रोमांचित करते हैं। यह मेरे जीने के लिए बेहद जरूरी हैं।“

एवरेट रुस  के पत्र और क्रिस मैकेंडलेस की डायरी और पत्रों में लिखे विचारों में काफी समानता है। एवरेट के पत्रों में लिखे कुछ अंशः-

‘मैं हमेंशा से सोचता रहा हूं कि मैं इसी तरह बियाबानों की अकेली आवारगी भरी जिंदगी जीना चाहता हूं। पगडंडियां मुझे अपनी तरफ खींचती हैं। और, तुम मेरी इस दीवानगी को समझ नहीं सकते। ये अकेली पगडंडियां मेरे लिए बेहतर हैं और मैं कभी अपनी आवारगी नहीं छोड़ूंगा। और जब मेरे मरने का समय आएगा, तो मैं उसके लिए बहुत वीरान और गुमनाम बियबान में चला जाऊंगा।‘

‘प्रकृति का सौंदर्य मेरा जीवन है। मैं शहर में अपने आप को जीवन से कटा हुआ पाता था। वहां मेरे कुछ दोस्त हैं लेकिन उनमें से किसी के अंदर भी मुझे समझने की जरा भी ताकत नहीं थी। इसलिए मैं अकेला उन सबसे दूर चला गया। दुनिया के लोग जिस तरह का जीवन जीते हैं मैं उससे हमेंशा असंतुष्ट रहा। मैंने हमेंशा एक भावपूर्ण और बेहतर जीवन जीना चाहा।‘

‘इस साल अपनी आवारगी में मैंने वैसी जगहों को चुना जिधर साहस की ज्यादा जरूरत थी। और, कितने दिल को छूने वाले खूबसूरत जगहों में गया- दूर तक फैले समतल मैदान, गुमनाम पठारियां, सिंदूरी रेत वाले रेगिस्तान के ऊपर खड़े बड़े-बड़े नीले पहाड़, अनेक घाटियां और इंसानों द्वारा हजारों साल पहले छोड़ दिए चोटियों पर मौजूद झोपड़ें।‘

एवरेट रुस  के इस पत्र के लगभग आधी शताब्दी  बाद क्रिस मैकेंडलेस ने इसी तरह की बात वायन वेस्टरबर्ग को पोस्टकार्ड में लिखाः-

‘मैंने तय किया है कि आवारगी का ये जीवन मैं और जीउंगा। मुक्ति और सौंदर्य के इस रूप को मैं नहीं छोड़ सकता।‘

एवरेट रुस  के विचारों की प्रतिध्वनि क्रिस मैकेंडलेस के उन पत्रों में भी है जो उसने रोनाल्ड फ्रांज को लिखे थे। एवरेट रुस, क्रिस मैकेंडलेस के जैसा ही रुमानी था और दोनों ने ही अपने जीवन की सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। पुरातत्ववेत्ता क्लेबार्न लॉकेट ने 1934 में एक चोटी पर आंसाजी आदिवासियों के घर की खुदाई करते समय एवरेट को अपने यहां रसोईए का काम दिया था। उसने बताया,”एवरेट बेहद लापरवाह तरीके से खतरनाक चोटियों की चढाई करता था।“

इस बात  को एवरेट ने भी बड़े उत्साह से एक पत्र में लिखा,’सैकड़ों बार मैं एकदम सीधी खड़ी चोटियों या ढहते बलुआ पत्थरों पर, पानी या आदिवासियों के घरों की खोज में अपने जीवन को दांव पर लगाकर चढा। दो बार तो जंगली सांढो के हमले से बाल-बाल बचा। इन सब खतरों से बचते हुए मैंने अपनी साहस भरी आवारगी लगातार जारी रखी।‘

उसने अपने आखिरी पत्र में अपने भाई  को लिखाः- ‘मैं जहरीले सांपों और ढहते पहाड़ी ढलानों पर गिरने से कई बार बचा। एक बार तो जंगली मधुमक्खियों ने मुझे डंक मारा। मैं तीन-चार दिनों तक उसके जहर के कारण सो नहीं पाया।‘

एवरेट रुस  भी मैकेंडलेस की तरह शारीरिक परेशानियां से डरता नहीं था, बल्कि जैसे उसका स्वागत करता था। एवरेट ने एक पत्र में अपने दोस्त बिल जैकब को लिखा,”जहरीले फल के असर से छह दिन तक मैं छटपटाता रहा और मेरा दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा था। दो दिन तक तो मुझे होश ही नहीं रहा कि जिंदा था या मर गया। गर्मी में दो दिन तक मेरा शरीर ऐंठता रहा और बैचैनी से करवट बदलता रहा, चींटियां और मक्खियां मेरे शरीर पर मंडराती रहीं, जहर के कारण मेरे चेहरे, बाहें और पीठ पर बड़े-बड़े चकत्ते हो गए। मैं कुछ खा नहीं सका- वहां आसपास कुछ नहीं था सिवाय मेरी पीड़ा के। मेरे साथ ऐसी कई घटनाएं हुई लेकिन मैंने जंगल को नहीं छोड़ा।‘

मैकेंडलेस की तरह ही एवरेट रुस ने आवारगी करने से पहले अपना नया नाम रखा- एक नहीं, कई नाम। 1 मार्च 1931 को उसने अपने परिवार को लिखा,’मैंने अपना नया नाम रख लिया है- लेन रेम्यू। आप सब मेरे नए नाम को स्वीकार करें।‘ दो महीने बाद उसन फिर एक पत्र में लिखा,’मैंने फिर से अपना नाम बदल लिया है- इवर्ट रूलेन। पिछले नाम को सुनकर सबको अजीब लगता था और वह नाम फ्रेंच(फ्रांस का) जैसा लगता था।‘ और फिर अगस्त में उसने अपना पुराना नाम एवरेट रुस को अपना लिया, अगले तीन साल तक वह खुद को इसी नाम से बुलाता रहा। डेविस गुल्च घाटी में घुसने के बाद उसने अपना नाम ‘नेमो’ रख लिया जिसका मतलब था, ‘कोई नहीं’। उसने अपने नए नाम को घाटी के भित्तियों के नर्म चट्टानों पर दो बार खोद-खोद कर लिखा। उसके बाद गायब हो गया। उस समय वह बीस साल का था।

अंतिम पत्र उसने 11 नवंबर 1934 को अपने मां-बाप और भाई को डेविस गुल्च घाटी से 50 मील उत्तर के एक जगह एस्केलेंटे से लिखा कि वह एक-दो महीने तक कोई संवाद नहीं कर पाएगा। उसने भाई को पत्र में लिखाः- ‘मैं सोचता हूं, जब फिर से लौट के सभ्यता वाली दुनिया में लौट के जाऊंगा, वह समय जल्दी नहीं आनेवाला है। मैं प्रकृति के बियाबानों में आवारगी करते हुए थका नहीं हूं। मुझे प्रकृति का सौंदर्य और अपने घुमक्कड़ जीवन में हमेंशा से दीवानगी की हद तक आनंद आता रहा है। मुझे मोटरकार के बदले घोड़े की सवारी करना, छत के बदले चमकते सितारों से भरा आसमान, हाइवे के बदले कोई अजनबी और कठिन पगडंडी जो किसी अंजानी जगह ले जाती हो और शहरों के असंतुष्ट माहौल के बदले बियाबान की गहरी शान्ति पसंद है। मैं ऐसा महसूस करता हूं जैसे मैं इसी तरह के वातावरण में जीने वाला आदमी हूं। क्या अब भी तुम यहां जीने की मेरी ईच्छा की आलोचना करोगे? मैं जिस अद्भुत सौंदर्य से घिरा रहता हूं, मेरे लिए इतना ही काफी है। मैं तुम्हारी तरह रूटीन में बंधी वही रोज की एक जैसी जिंदगी जीने के लिए बाध्य नहीं हो सकता। मैं कभी भी कहीं पर स्थायी रूप से नहीं रह पाउंगा। मैं जीवन की गहराई में जाकर बहुत कुछ जान चुका हूं और मैं तुम्हारे जैसे निरर्थक जीवन में वापस नहीं लौट सकता।‘

उस चिट्ठी लिखने के आठ दिन बाद एवरेट  को रास्ते में दो चरवाहे मिले, जिसके कैंप में उसने दो रातें बिताईं। ये दोनों  चरवाहे अंतिम लोग थे जिन्होंने  उसे आखिरी बार जिंदा  देखा था। एवरेट के एस्केलेंटे छोड़ने के तीन महीने बाद, उसके मां-बाप के पास वह सारी चिट्ठियां वापस लौट आयी  जिसे उन्होंने एवरेट को एरिजोना  के पते पर लिखा था जहां एवरेट  काफी लंबे समय तक रूका था।  मां-बाप ने चिंतित होकर एस्केलेंटे के अधिकारियों से संपर्क किया और मार्च 1935 में एक खोजी दल एवरेट को खोजने रवाना किया गया। खोज उन चरवाहों के कैंप से शुरू की गई जहां एवरेट को आखिरी बार देखा गया था। आसपास के क्षेत्रों में खोजने पर डेविड गुल्च घाटी के तलहटी में एवरेट के दोनों गधे मिल गए, जो वहां की झाड़ियों में चर रहे थे। वहां से थोड़ा नीचे की तरफ जाने पर एक कैंप मिला, जिसमें सुबूत मिले कि एवरेट यहां रूका था। उसके पास में ही आदिवासियों द्वारा हजारों साल पहले छोड़े गए एक अनाज भंडारघर के दरवाजे के पत्थरों पर खुदा हुआ था, ‘नेमो 1934’। वहीं पर आदिवासियों के टूटे-फूटे बर्तनों को एक चट्टान पर सजाकर रखा गया था। और नीचे जाने पर तीन महीने बाद खोजी दल ने घाटी के एक दीवार पर फिर वही नाम लिखा पाया, जिसके आसपास आदिवासियों द्वारा बनाए गए रहस्यमय चित्र थे। सिवाय एवरेट के दोनों गधों के एवरेट रुस का कोई भी सामान कहीं नहीं मिला।

सबने ये सोचा कि एवरेट रुस, घाटी की दीवारों पर चढने के दौरान  गिर कर मर गया। उस घाटी की अधिकांश ढलानों पर चढने के रास्ते में चिकनी भुरभुरी  किस्म की चट्टानें थी और इन खतरनाक रास्तों पर एवरेट  के चढने के शौक को देखते  हुए वहां से गिरकर मरने की बात विश्वसनीय लग रही  थी। लेकिन आसपास और दूर  की ढलानों में खोजने के बाद कहीं किसी मानव के अवशेष  का निशान नहीं मिला।

लेकिन ध्यान  देने वाली बात ये थी कि गुल्च  घाटी से आगे एवरेट अपने भारी-भरकम सामानों को बिना गधों पर लादे आगे कैसे जा सकता था? इसलिए इस रहस्यमय परिस्थिति में खोजकर्ताओं के द्वारा  उसकी मौत के बारे में एक दूसरा अनुमान लगाया गया- उस घाटी में घूमनेवाले चोरों के गिरोह ने एवरेट रुस को मारकर या तो उसकी लाश को जमीन में गाड़ दिया या फिर कोलोराडो नदी में फेंक दिया और वे उसका सामान चुराकर ले गए। लेकिन इस अनुमान को साबित करने वाला कोई भी सुबूत नहीं मिला।

एवरेट के अपना नाम ‘नेमो’ रख लेने की बात का राज खोलते हुए उसके पिता ने कहा कि उनका बेटा जूल्स वेर्ने की किताब ‘ट्वेंटी थाउजेंड लीग्स अंडर दी सी’ पढा करता था जिसके हीरो का नाम कैप्टन नेमो था, जो साफ दिलवाला था और जिसने दुनिया की सभ्यता वाले जीवन को छोड़कर, धरती से सारा रिश्ता तोड़ लिय़ा था। एवरेट रुस के जीवनीकार डब्ल्यू एल रुसो उसके पिता की बातों से सहमति जताते हैं और कहते हैं,”उसका संगठित समाज से नाता तोड़ लेना, दुनिया के सुखों को छोड़ देना और घाटी में जाकर अपना नाम नेमो रख लेना इस बात की ओर संकेत करता है कि वह अपनी पहचान जूल्स वर्ने की किताब के नायक से करता था।“

एवरेट रुस  का कैप्टन नेमो से प्यार के प्रकट होने के बाद, उसकी मौत  के रहस्यों की खोज करनेवाले के इस अनुमान को बल मिला कि गुल्च  घाटी छोड़ने के बाद एवरेट  नए पहचान के साथ कहीं किसी कोने में गुमनामी की जिंदगी जी रहा था।

एक साल  पहले एरिजोना के किंगमेन के एक गैस स्टेशन पर मेरी(जॉन क्राउकर) बात वहां एक कर्मचारी से हुई जो बड़े विश्वास से कह रहा था कि वह 1960 के आखिर तक एवरेट रुस को जानता था जो नवाजो(अमेरिकन आदिवासी) इंडियन रिजर्वेशन के एक सुदूर बस्ती में रहता था। उस कर्मचारी के दोस्त के अनुसार, एवरेट ने वहीं एक नवाजो आदिवासी औरत से शादी कर लिया था और उसका एक बच्चा भी था। लेकिन, एवरेट के बारे में इस तरह की सूचनाएं कितने सही हैं, कहना मुश्किल है।

केन स्लेट  ने एवरेट रुस के मौत के रहस्य को खोजने में काफी समय बिताया। केन को यह विश्वास है कि एवरेट 1934 से 1935 के बीच में मरा था और कैसे मरा था, इसका राज वह जानता है। 65 साल का केन स्लेट पेशे से रिवर गाईड(नदियों की सैर करानेवाला) था और स्वभाव से गुस्सैल था। स्लेट उस क्षेत्र में चालीस साल से रह रहा था और एवरेट के बड़े भाई वाल्डो को साथ लेकर उस हर जगह की उसने खाक छानी थी जहां एवरेट गया था; उन सभी लोगों से उसने बातें की थी जो एवरेट से रास्ते में मिले थे।

स्लेट ने बताया,” वाल्डो सोचता था कि एवरेट की हत्या हुई थी लेकिन मैं ऐसा नहीं सोचता। जिन लोगों पर हत्या करने का संदेह था, मैंने उनकी बस्ती के कई लोगों से बात की। मैं नहीं सोचता वे हत्यारे थे लेकिन कौन जानता है, ऐसा हो भी सकता था। छुपकर कौन क्या करता है, इस बारे में कोई कुछ नहीं कह सकता। कुछ लोगों का मानना है कि एवरेट घाटी के ढलान से गिरकर मर गया। हां, यह भी सही हो सकता है क्योंकि ऐसा इस देश में होता रहता है। लेकिन मैं नहीं सोचता कि ऐसा हुआ होगा। मेरा मानना है कि एवरेट की मौत नदी में डूबने से हुई।“

एक साल  पहले गुल्च घाटी से नीचे जाते समय केन स्लेट ने करीब चालीस मील पूरब में सेनजुआन  नदी के पास आदिवासियों के अनाज रखनेवाले घर के दरवाजे पर नेमो लिखा देखा। स्लेट  का अनुमान था कि यह नाम डेविस  घाटी के छोड़ने के बहुत दिन  बाद नहीं लिखा गया था।  स्लेट ने आगे कहा,” अपने गधों को उसने वहीं छोड़ दिया और सामानों को कहीं किसी गुफा में छिपा दिया। उसके बाद वह उपन्यास का पात्र कैप्टन नेमो बन गया। नवाजो रिजर्वेशन में उसके कई आदिवासी मित्र थे। इसलिए मैं सोचता हूं कि वह यहां से उधर की ओर चला। नवाजो के लिए जाने के लिए कोलोराडो नदी को पार कर एक पहाड़ी रास्ते से गुल्च घाटी पार करते हुए सैन जुआन नदी तक जाना पड़ता है। एवरेट उसी सैनजुआन नदी को पार करने की कोशिश करते समय डूबकर मर गया। ऐसा मैं सोचता हूं। अगर एवरेट नदी पारकर उस पार जिंदा पहुंच गया होता और नवाजो में रहता तो उसके लिए अपनी पहचान छुपाकर ज्यादा दिन रहना संभव नहीं था। एवरेट वहां के लोगों के बीच ज्यादा दिन तक टिक कर नहीं जी पाता। वह अकेला रहनेवाला आदमी था। एवरेट मेंर स्वभाव जैसा ही था और लगता है कि मैकेंडलेस भी उसी स्वभाव का था। हम किसी का साथ पसंद करते हैं लेकिन लोगों के साथ ज्यादा दिन तक टिककर नहीं रह सकते। इसलिए हम वहां से भाग निकलते हैं और कुछ दिन बाद फिर वापस लौटकर, फिर उस नर्क से निकल आते हैं। यही काम एवरेट भी कर रहा था। एवरेट कुछ अलग किस्म का था। उसने और मैकेंडलेस ने कम से कम अपने सपनों का पीछा तो किया। वही उनको महान बनाता है। उन्होने जो किया, वह बहुत कम लोग कर पाते हैं।“

एवरेट रुस  और क्रिस मैकेंडलेस के जीवन को समझने के लिए उनके कामों और विचारों को गहराई से देखने की जरूरत है। आइसलैंड के दक्षिणी-पश्चिमी किनारे पर एक द्वीप है-पापोस। उत्तरी अटलांटिक से गरजकर आनेवाली तेज हवाओं के चोट को झेलते वृक्षविहीन और चट्टानों से भरे इस द्वीप का नाम यहां पहले-पहल बसने वाले उन आइरिस साधुओं के नाम पर पड़ा जो पापर कहे जाते थे और जो इस जगह को छोड़कर जा चुके थे। मैं(जॉन क्राउकर) गर्मी के एक दोपहर को उन पथरीले चबुतरों के अवशेषों पर टहल रहा था जहां हजारों साल पहले कभी उन साधुओं ने अपना घर बनाया था।

ये साधु आयरलैंड के पश्चिमी किनारे की ओर से नावों से, आइसलैंड के इस पापोस द्वीप पर पांचवीं शताब्दी की शुरूआत में आ गए थे। आयरलैंड से साधुओं का यह समूह अपने छोटे नावों में विश्व के सबसे खतरनाक समंदर में चल पड़ा था, बिना ये जाने कि आगे उन्हें कौन सा जगह मिलेगा या मिलेगा भी कि नहीं। इसी तरह इन साधुओं ने जान दांव पर लगाया और कई बार उसे खो भी दिया- ऐसा करने का उद्देश्य ना तो पैसों की खोज थी और ना ही नाम की और ना ही उन साधुओं को किसी की जमीन पर कब्जा करना था। आर्कटिक के महान खोजी और नोबेल पुरस्कार विजेता फ्रित्जोफ नानसेन ने बताया,”ये सभी समुद्री यात्राएं शान्त जगहों की तलाश में की गई थी, जहां ये साधु शान्ति से रह सकते थे, दुनिया के शोर-गुल और लालच से दूर।“

आइसलैंड के समुद्री किनारे पर, जहां साधू रह रहे थे, नवीं शताब्दी  में नार्वे के कुछ लोग  चले आए। साधुओं ने उनको देखकर सोचा कि अब उस जगह  पर भीड़ हो रही थी, हलांकि अभी तक वहां के बड़े क्षेत्र  पर कोई भी नहीं बसा था।  सभी साधु अपनी नावों पर सवार हुए और समुद्र में  नाव खेते हुए  ग्रीनलैंड  की ओर चल पड़े। खतरनाक लहरों  वाले उस समंदर में वे इधर-उधर  जाते रहे, उसके पीछे उनके आत्मा  के शांति से जीने की भूख  थी। आत्मा की शांति की इतनी खतरनाक और जान से भी ज्यादा प्यारी तीव्र प्यास, आधुनिक भोगवादी जीवन की कल्पना से भी बाहर की बात है। इन साधुओं के जीवन को जानने के बाद, उनके साहस की पराकाष्ठा और अपनी इच्छा को पाने की दीवानगी की कहानी किसी पर भी गहरा प्रभाव छोड़ती है। इन साधुओं के जीवन से एवरेट रुस और क्रिस मैकेंडलेस के जीवन को समझने में मदद मिलती है।

एंकरेज, 12 सितंबर- पिछले रविवार, अलास्का  के सुदूर बियाबान के एक कैंप में घायल अवस्था में  वहां से नहीं निकल पाने के कारण एक आवारे युवक की मौत हो गई। वह कौन है, अभी पता  नहीं चला है। लेकिन, उसके पास से मिले डायरी और दो नोट से एक दर्दनाक कहानी  का पता चलता है, जिसमें युवक के जिंदा रहने के अथक और निराशाजनक कोशिशें दर्ज हैं। डायरी से पता चलता है कि यह युवक अमेरिकन है और इसकी उम्र 20 से 30 के बीच है। शायद, वह झरने में गिरने से घायल हो गया था और कैंप में तीन महीने से फंसा था। उसने वहां शिकार या जंगली जड़ों को खाकर जान बचाने की कोशिश की, लेकिन वह कमजोर होने से नहीं बच सका। उसने जो दो नोट लिखे हैं, उनमें से एक को वह छोड़ जाता था, जब वह आसपास के क्षेत्रों में भोजन की तलाश में जाता, जिसमें लिखा था कि कोई उसकी मदद करे। दूसरे नोट में उसने दुनिया को अलविदा कहा था।

फेयरबैंक  में हुए पोस्टमार्टम  के रिपोर्ट में कहा गया  है उसकी मौत जुलाई के अंत  में भूख से हुई है। उसके पास मिले नोट में एक नाम  लिखा है, जो विश्वास किया जाता है कि उसी का है। लेकिन, उसकी पहचान के बारे में अभी पुख्ता सुबूत नहीं मिलने के कारण उस नाम को अभी गुप्त रखा जा रहा है। (न्यूयार्क टाईम्स, सितम्बर 13, 1992)

न्यूयार्क टाईम्स में ये खबर छपने से एक सप्ताह पहले से अलास्का  पुलिस उस युवक के असली पहचान  की खोज कर रही थी। मैकेंडलेस जब मरा तो उसके बदन पर एक नीले रंग का शर्ट था। उसकी लाश के साथ मिले रहस्यमयी डायरी के अधिकांश पन्नों में वनस्पतियों से जुड़े गहरे निरीक्षण को लिखा गया था, जिससे यह अनुमान लगाया गया कि मैकेंडलेस जीवविज्ञानी था। लेकिन इस अनुमान से उस लाश के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं चला। न्यूयार्क टाइम्स में छपने के तीन दिन पहले 10 सितम्बर को उस आवारे के मरने की यह खबर एंकरेज डेली न्यूज के मुख्य पृष्ठ पर छप चुका था। जब जिम गिलियन, जिसने एलेक्स को स्टेम्पेड ट्रेल तक छोड़ा था, की नजर उस खबर पर पड़ी, जिसमें एक मैप भी छपा था जिसके अनुसार यह लाश स्टेम्पेड ट्रेल के पास मिला था, तो उसके रोएं-रोएं में सिहरन सी दौड़ गई। उसके मन में एलेक्स की याद अब भी ताजा थी, जो उसके द्वारा दिये गए जूते को अपने जूतों के ऊपर से पहनकर उसकी नजर के सामने से उस स्टेम्पेड ट्रेल की पगडंडी पकड़कर गया था।

गिलियन  ने याद करते हुए बताया,”अखबार में छपी थोड़ी सी सूचना से ऐसा लग रहा था कि यह एलेक्स ही था। मैंने अलास्का पुलिस को बुलाया और कहा कि मैंने इस लड़के को लिफ्ट दिया था।“

“क्या तुम विश्वास के साथ ऐसा कह सकते हो? पिछले एक घंटे में तुम ऐसे छठे आदमी हो जिसने दावा किया है कि इस युवक को जानते हो” अलास्का पुलिस के एक जवान रोजर इलिस ने पूछा। गिलियन ने उसे विश्वास दिलाने की बहुत कोशिश की, लेकिन रोजर हिल को विश्वास नहीं हो पा रहा था। गिलियन ने तब ऐसे कई ऐसे सामानों के नाम बताए जिसका जिक्र अखबार में नहीं था लेकिन जो लाश के पास पाया गया था। तभी रोजर ने नोटिस किया कि उसकी डायरी में पहले पन्ने पर लिखा था,” फेयरबैंक को अलविदा, गिलियन के साथ बैठा, आगे शुभ हो।“ तब तक पुलिस को उस आवारे के पास मिली फिल्म रोल के फोटो से उसकी खुद अपनी खींची गई कई तस्वीरें मिल चुकी थी।

गिलियन  ने बताया,” जब पुलिस वो तस्वीरें मेरे पास लेकर आयी तब तो कोई संदेह ही नहीं रह गया कि वह एलेक्स ही था।“ मैकेंडलेस ने गिलियन को बताया था कि वह साउथ डाकोटा का रहनेवाला था इसलिए पुलिस ने आगे उस युवक के सगे-संबंधी की खोज शुरू कर दी। उसके बाद रेडियो बुलेटिन पर उस गुमनाम मैकेंडलेस के मरने की सूचना प्रसारित की जाने लगी जिसका घर साउथ डाकोटा बताया जा रहा था। कार्थेज, जहां वायन वेस्टरबर्ग के साथ मैकेंडलेस रुका था, साउथ डाकोटा से बीस मील दूर पर बसा एक छोटा शहर था। पुलिस ने सोचा कि उसने युवक के घरवालों को खोज निकाला था लेकिन यह आशा झूठी साबित हुई।

मैकेंडलेस ने बसंत में वेस्टरबर्ग को फेयरबैंक से पत्र लिखने के बाद उसके बाद फिर संपर्क नहीं किया था। 13 सितम्बर को जब मोंटाना के खेतों से काम समेटकर अपने आदमियों के साथ कार्थेज लौट रहा था तो जेम्सटाउन के पास उसके ट्रक में लगा रेडियो बज उठा,”वायन, मैं बॉब बोल रहा हूं।“

“हां, बॉब, बताओ वायन बोल रहा हूं।“

“जल्दी से समाचार सुनो, पॉल हार्वे क्या कह रहा है। वह किसी लड़के के बारे में बता रहा है जो अलास्का में भूख से मर गया। पुलिस नहीं जानती, वह कौन है। लग रहा कि वह एलेक्स है।“

वेस्टरबर्ग  ने समाचार सुना तो उसमें दी गई सूचना से उसे भी दुख के साथ अंदेशा हुआ कि वह एलेक्स ही था। जैसे ही दुखी वेस्टरबर्ग कार्थेज पहुंचा, तुरंत उसने अलास्का पुलिस को फोन कर कहा कि वह मैकेंडलेस को जानता था। तब तक देश भर के मीडिया में उस लड़के के मरने और उसके डायरी आदि के बारे बहुत कुछ प्रसारित हो चुका था। उसके बाद से पुलिस के पास अनेकों कॉल आ चुके थे जिसमें लोग दावा कर रहे थे कि वह उस लड़के से परिचित थे। इस कारण वेस्टरबर्ग के फोन को भी पुलिस गंभीरता से नहीं ले रही थी।

पुलिस ने वेस्टरबर्ग से कहा कि अब तक 150 कॉल आ चुके थे जिसमें एलेक्स को किसी ऩे अपना बेटा बताया तो किसी ने दोस्त, भाई या और कुछ। तब वेस्टरबर्ग ने कहा,”  मैं झूठ नहीं कह रहा। मेरे पास मैकेंडलेस काम कर चुका है और मेरे पास उसका सोशल सिक्युरिटी नंबर मौजूद है।“

वेस्टरबर्ग  को बहुत खोजने पर मैकेंडलेस द्वारा भरे गए दो फार्म मिले। पहले फार्म में उसने झूठी सूचनाएं दी थीं। लेकिन दूसरा फार्म, जिसे उसने अलास्का जाने से दो सप्ताह पहले 30 मार्च 1992 को भरा था, उसमें सही-सही सूचना दी थी। उसमें उसका नाम क्रिस्टोफर जे मैकेंडलेस और सोशल सिक्यूरिटी नंबर- 228-31-6704- लिखा था। वेस्टरबर्ग ने फिर अलास्का पुलिस को फोन किया और इस बार पुलिस ने उसे गंभीरता से लिया।

मैकेंडलेस द्वारा लिखा गया सोशल सिक्यूरिटी नंबर सही निकला। उससे पता चला कि उसका घर उत्तरी वर्जीनिया में था। अलास्का पुलिस ने वर्जीनिया के अधिकारियों को इस बात की सूचना दी। उसके बाद वहां फोन डायरेक्टरी में मैकेंडलेस के फोन नंबर की खोज शुरू हुई। तब तक मैकेंडलेस के मां-बाप उस जगह को छोड़कर मैरीलैंड में जा बसे थे और वर्जीनिया का उनका फोन नंबर नहीं था। लेकिन मैकेंडलेस का बड़ा भाई अन्नाडेल में रह रहा था जिसका नंबर डायरेक्टरी में मौजूद था। 17 सितम्बर को सैम मैकेंडलेस के पास फेयरफैक्स शहर से एक पुलिस जासूस अधिकारी का फोन आया।

सैम मैकेंडलेस, क्रिस से नौ साल बड़ा था और वह भी वाशिंगटन पोस्ट अखबार में किसी आवारा के मरने के लेख को पढ़ चुका था। “मैंने उस लेख को पढ़ा तब दिमाग में दूर तक ऐसा कोई खयाल नहीं आया कि वह क्रिस हो सकता था। मुझे वो पढकर लगा था कि ओह कितनी बड़ी त्रासदी है और उस लड़के के परिवार के बारे में सोचकर भी परेशान हुआ था। कितनी दुखद कहानी थी।“

सैम क्रिस  का सौतेला भाई था जो अपने मां के पास कैलिफोर्निया और कोलोराडो में पला-बढा  था। वह 1987 में जब वर्जीनिया  आया तब तक क्रिस पढाई के लिए अटलांटा जा चुका था।  इसलिए वह अपने भाई से अच्छी  तरह परिचित नहीं था। जब जासूस अधिकारी ने सैम  से फोन पर क्रिस के बारे में बात की तब सैम को लगा,”मुझे विश्वास हो चला था कि वह क्रिस ही था। मैं जानता था कि वह अकेले ही अलास्का गया था।“

जासूस के कहने पर सैम मैकेंडलेस फेयरफैक्स पुलिस विभाग गया जहां अधिकारी ने उसे उस आवारे के पास से मिली तस्वीरें दिखाई, जिसे फेयरबैंक से फैक्स किया गया था। सैम ने उस घटना को याद करते हुए कहा, ”लाश की तस्वीर सिर की तरफ से खींची गयी थी। उसके लंबे बाल, बड़ी दाढ़ी और बदन कंकालनुमा था। मैकेंडलेस तो छोटे बाल रखता था और वह क्लीन-शेव्ड रहता था। फिर भी, निस्संदेह वह क्रिस ही था। मैं तुरंत घर वापस लौटा, अपनी पत्नी मिशेल को साथ लेकर अपने पिता और मैकेंडलेस की मां बिली के पास मैरीलैंड चल पड़ा। मुझे सूझ नहीं रहा था कि मैं ये सब बातें उनको कैसे बता पाउंगा। आप किसी को कैसे कहेंगे कि उनका बच्चा मर चुका है?”

अमेरिका के भोगवादी जीवन से ऊबे क्रिस्टोफर ने खुद को जानने के लिए आवारगी का रास्ता चुना। सारे पैसे दानकर, परिचय-पत्र फेंककर और परिवार को बिना कुछ बताए उसने गुमनामी-घुमक्कड़ी का जीवन जीना शुरू किया। दो साल बाद वह अलास्का के निर्जन इलाके में जाकर रहना शुरू कर दिया। वहां जीवन की विपरीत परिस्थितियों से लड़ते हुए जीवन की खोज जारी रखी। वह ऐसा क्यों बना… अलास्का में उसके साथ क्या हुआ.. यह सब-कुछ जॉन क्राउकर नाम के पत्रकार ने बहुत शोध के बाद अपने किताब ‘Into the wild’ में लिखा। सीन पेन ने इसी नाम से एक बेहतरीन फिल्म बनाई जो विश्व के सौ महान सिनेमा में गिनी जाती है। Into the wild’ का हिंदी में अनुवाद कर रहे हैं युवा पत्रकार राजीव कुमार सिंह। इसका पहला, दूसरा, तीसरा और चौथा पार्ट आप लोग पढ़ चुके हैं। ये था पांचवां पार्ट। राजीव ने इस उपन्यास का अनुवाद करके पत्रकारिता क्षेत्र में दस्तक दी है। उनके अनुवाद में कई कमियां-गल्तियां हैं, ऐसा उनका कहना है। पर इसे एक युवा पत्रकार का शुरुआती गंभीर प्रयास मानते हुए कमियों की अनदेखा की जाए, ऐसा वह अनुरोध करते हैं। राजीव की इच्छा है कि उनके परिचय में लिखा जाए- एक बेरोजगार पत्रकार जिसे एक अदद नौकरी की तलाश है। राजीव से संपर्क rajeevsinghemail@gmail.com के जरिए किया जा सकता है। -एडिटर, भड़ास4मीडिया

भोगवादी जीवन से उबे आदमी की आवारगी (भाग चार)

मैकेंडलेस का कैमरा जब काम करने लायक नहीं रहा तो तस्वीर खींचने का काम तो बंद हुआ ही, उसने अपनी डायरी लिखनी भी बंद कर दी। फिर अलास्का पहुंचने पर ही उसने फिर से लिखना शुरू किया। इसलिए मई 1992 में लास वेगास छोड़ने के बाद वह कहां-कहां गया, इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।

 

जेन को लिखे गए उसकी चिट्ठी से पता चलता है कि जुलाई और अगस्त में उसने ऑरेगान के समुद्री किनारे की तरफ, संभवतः एस्टोरिया के क्षेत्र में डेरा डाला था, जिसके बारे में उसने शिकायत भरे लहजे में लिखा था कि वहां का कुहरा और बारिश कभी-कभी उसके लिए असहनीय हो जाता था। सितम्बर में कैलिफोर्निया के यूएस हाइवे 101 की तरफ आवारगी करने के बाद क्रिस फिर रेगिस्तान की ओर मुड़ गया। और, अक्टूबर के शुरुआत में वह एरिजोना के बुलहेड सिटी पहुंच चुका था। सड़कों  के किनारे बने मकानों की कतारों और कई हिस्सों में बंटे बेतरतीब बस्तियों वाला बुलहेड सिटी कोलोराडो नदी के आठ से नौ मील के दायरे में बसा था। बुलहेड सिटी की सबसे खास बात थी यहां का फोर लेन मोहेव वेली हाइवे, जिसपर गैस स्टेशन, फास्ट फूड की दुकानें, वीडियो शॉप, ऑटो पार्ट की दुकानें और टूरिस्टों को आकर्षित करने वाली चीजों का बाजार था। जिस शहर में अमेरिकियों को फंसाने के लिए बुर्जुआ चीजों का जाल बिछा हुआ हो उस बुलहेड सिटी में ऐसा कुछ नहीं दिखता था जो थोरो और टॉल्सटॉय के विचारों को माननेवाले मैकेंडलेस को आकर्षित करे। लेकिन, उसको बुलहेड से गहरा लगाव था। हो सकता है कि यह लगाव उन फुटपाथजीवियों से प्रेम के कारण था, जो यहां की सामुदायिक पार्क से कैम्पग्राउंड तक भरे पड़े थे या फिर उसे इस शहर को घेरने वाली रेगिस्तानी लैंडस्केप से प्यार हो गया था। कारण जो भी हो, मैकेंडलेस जब एक बार इस शहर में आया तो फिर दो महीने तक यहीं का होकर रह गया। जबसे उसने अटलांटा छोड़ा था और जब तक वह अलास्का नहीं पहुंचा था, इस बीच में संभवतः बुलहेड सिटी में सबसे ज्यादा दिन रुका था।

अक्टूबर में मैकेंडलेस ने वेस्टरबर्ग को एक चिट्ठी लिखी, जिसमें उसने बुलहेड के बारे में लिखाः “जाड़ा बिताने के लिए यह सबसे बेहतरीन जगह है और संभवतः मैं अपनी आवारगी छोड़कर कुछ बेहतर करने के लिए यहीं बस जाऊंगा। देखता हूं कि बसंत आने पर क्या होता है क्योंकि मेरे पांव उस मौसम में ही आवारगी करने के लिए बेचैन होते हैं।“ जब वह ये सब बातें लिख रहा था तब फुल टाईम जॉब कर रहा था, मैकडोनाल्ड के स्टोर में। कुछ कमाने के लिए वह बेमन से अब सांसारिक जीवन जी रहा था, यहां तक कि उसने वहां के लोकल बैंक में एकाउंट भी खुलवाया था। मैकडोनाल्ड में नौकरी के लिए आवेदन करते समय उसने अपना असली नाम क्रिस मैकेंडलेस लिखा था और अपना असली सोशल सिक्युरिटी नंबर दिया था। उसके मां-बाप को उसके बारे में आसानी से पता लग सकता था लेकिन उनके प्राईवेट इन्वेस्टीगेटर पीटर को ये बात कभी नहीं मालूम हो सकी।

दो साल  बाद उसी मैकडोनाल्ड के कर्मचारियों से क्रिस मैकेंडलेस के बारे में पूछने पर वे उसके बारे में कुछ ज्यादा याद नहीं कर पाये। असिस्टेंट मैनेजर जार्ज ड्रेसजन ने याद करते हुए कहा, “एक चीज मुझे उसके मोजे के बारे में याद आ रहा है। वह हमेंशा बिना किसी मोजे के जूते पहनता था। लेकिन हमारे मैकडोनाल्ड में कर्मचारियों को जूते और मौजे पहनना अनिवार्य है इसलिए क्रिस को भी पहनना पड़ता था। जैसे ही शिफ्ट खत्म होता था तो सबसे पहले वह अपने मोजे उतारकर फेंक देता था। वह एक अच्छा और मेहनती लड़का था। विश्वास करने लायक।”

दूसरी असिस्टेंट मैनेजर लोरी जार्जा उसके बारे में कुछ दूसरा ख्याल रखती थी। “मुझे आश्चर्य लग रहा था कि उसे यहां कैसे रख लिया गया। वह सबकुछ करता था लेकिन बहुत धीमी गति से। जब ग्राहकों की लंच टाईम में भीड़ लगी रहती थी तब भी वह उसी धीमी रफ्तार से काम करता था। उससे कितना भी कहो, लेकिन उसपर कोई असर नहीं पड़ता था। काउंटर पर कस्टमरों की लाईन लग जाती थी और मैं उसे क्यूं जल्दी करने कह रही हूं, उसे समझ में ही नहीं आता था। ऐसा लगता था जैसे अपनी दुनिया में गुम रहता था। लेकिन उसपे भरोसा किया जा सकता था और वह रोज काम पर आता था, इसलिए कभी उसे यहां से निकाला नहीं गया। उसे पैसे भी कम दिए जाते थे। उससे काम करवाना काफी कठिन था। काम के बाद मैंने उसे कभी नहीं देखा कि वह किसी से बात करता हो या और कुछ करता हो। वह हमेशा पेड़ और प्रकृति की बातें करता था जिससे हमें लगता था कि उसका कुछ स्क्रू ढीला हो गया था। जब उसने मैकडोनाल्ड छोड़ा तो शायद मेरी वजह से। जब उसने काम शुरू किया था तो उसके पास रहने के लिए घर नहीं था। जब काम पर आता था तो उसके बदन से बदबू आती थी। मुझे कहा गया कि मैं उसे नहाने के लिए कहूं। मैंने जब उसे नहाने के लिए कहा तब से ही हम दोनों के रिश्ते बिगड़ गए। अन्य कर्मचारी भी उसे मजाक बनाते हुए उसे साबुन का ऑफर करने लगे। इन बातों से वह गुस्सा होता था लेकिन कभी दिखाता नहीं था। तीन सप्ताह बाद वह चुपचाप यहां से चला गया।”

मैकेंडलेस ने यह सबसे छिपाया था कि उसके पास कुछ खास सामान नहीं था। उसने सबसे कहा था कि वह लौघलिन नदी के आसपास कहीं रहता था। जब किसी ने उसे घर तक छोड़ना चाहा तो वह बहाना बनाकर विनम्रता से मना कर देता था। वास्तव में वह शहर के छोड़ पर रेगिस्तान में कैंप डाले हुए था। उसके बाद उसने एक मोबाईल होम में रहना शुरू कर दिया। मोबाईल होम में उसे शरण कैसे मिली, इस बारे में उसने जेन को एक चिट्ठी में लिखा।

“एक सुबह मैं जब शेविंग कर रहा था तब एक बूढा मेरे पास आया। मुझसे पूछा कि क्या मैं बाहर सोता हूं, मैंने हां कहा। उसने कहा कि वह एक पुराने ट्रेलर में सोता है। अगर मैं चाहूं तो वहीं बगल के एक दूसरे ट्रेलर में सो सकता हूं लेकिन एक समस्या है कि वह ट्रेलर किसी और का है। इसलिए उसने मुझे हमेशा मालिक की नजर से बचने की बात कही। मुझे उसका प्रस्ताव अच्छा लगा। ट्रेलर अंदर से बेहतर दिख रहा था। साफ सुथरा होने के साथ इसमें पर्याप्त जगह है और कुछ बिजली के स़ॉकेट भी काम करते हैं। इसमें एक ही खराबी है और वह है यह बूढ़ा जो मुझे पागल लगता है और इसके साथ रहना कभी-कभी काफी कठिन हो जाता है।“

वह बूढा चार्ली अभी भी वहीं रहता था। उसी छोटे पुराने से जंग खा रहे ट्रेलर में। उससे जुड़ा हुआ वह बड़ा सा ट्रेलर था जिसमें मैकेंडलेस सोता था। पश्चिम में दूर तक नंगे पहाड़ दिख रहे थे। एक फोर्ड टोरिनो वहीं गंदे यार्ड में पड़ा था जिसके ईंजन से कोई पौधा निकलता दिख रहा था। बगल की झाड़ी से पेशाब का दुर्गंध यहां तक फैला था। अपनी याद्दाश्त को टटोलते हुए चार्ली चिल्ला उठा, “क्रिस, क्रिस, अच्छा वो, हां, हां, याद आ गया वो।“ चार्ली, स्वीटशर्ट और खाकी पैंट में शरीर से कमजोर और नर्वस लग रहा था। उसने याद करते हुए कहा कि मैकेंडलेस वहां एक महीने तक रुका था।

“बहुत अच्छा था वो, बहुत बेहतर इंसान”, चार्ली बोला। “अपने आसपास ज्यादा लोगों को पसंद नहीं करता था। अच्छा था, लेकिन मुझे लगता था कि उसके अंदर बहुत सारी मानसिक उलझनें थी। वह हमेंशा अलास्का के जैक लंडन को पढ़ता रहता था। ज्यादा नहीं बोलता था। मूडी था। किसी बात की परवाह नहीं थी उसे। बच्चों की तरह कुछ न कुछ खोजता रहता था। मैं भी कभी वैसा ही था लेकिन जल्द ही मुझे समझ में आ गया कि मैं क्या खोज रहा हूः पैसा! हा हा! वह हमेंशा अलास्का जाने की बातें किया करता था। शायद उसके लिए, जिसे वह खोज रहा था। जब वह यहां से गया तो वह क्रिसमस के आसपास का समय था। उसने मुझे 50 बक और सिगरेट का पैकेट दिया।”

नवंबर के आखिर में मैकेंडलेस ने जेन को कैलिफोर्निया के इंपेरियल वैली के एक छोटे से शहर निलांद के पते पर पोस्टकार्ड लिखा। “बहुत दिनों के बाद उसने हमें ये पोस्टकार्ड लिखा था जिसपर मैकेंडलेस ने अपना पता भी लिखा था। इसलिए हमने तुरंत उसे जबाब दिया कि हम उससे मिलने अगले सप्ताह बुलहेड आ रहे हैं, जो निलांद से नजदीक ही था।“ जेन ने याद करते हुए कहा।

जेन की चिट्ठी पाकर मैकेंडलेस बहुत रोमांचित हुआ। “ मैं तुम दोनों को जिंदा और सुखी पाकर बेहद खुश हूं। इतने खूबसूरत क्रिसमस कार्ड का शुक्रिया। यह मेरे लिए बहुत सुखद है। मैं यह सुनकर रोमांचित हो रहा हूं कि कि तुमलोग मुझसे मिलने आ रहे हो। हमेंशा तुम्हारा स्वागत है। डेढ साल बाद तुमलोगों से मिलने का मौका फिर से मिलेगा“ 9 दिसम्बर 1991 को चिट्ठी में उसने लिखा। उसने चिट्ठी में बुलहेड सिटी के उस ट्रेलर तक पहुंचने का नक्शा खींच दिया। चार दिन बाद, चिट्ठी मिलते ही जेन और बॉब ने उससे मिलने की तैयारी करनी शुरू कर दी। दोनों उसे खोजते हुए ट्रेलर तक पहुंच गए और गाड़ी के पीछे एलेक्स के बैग को उनलोगों ने पहचान लिया। जेन ने बताया, “ हमारे साथ हमारा कुतिया सुन्नी भी गयी था जिसने हमसे पहले ही एलेक्स को सूंघ लिया। मुझे आश्चर्य हुआ कि उसे अभी तक एलेक्स याद था। उसे देखते ही वह पागल सी हो गई।”

मैकेंडलेस ने जेन से कहा कि वह बुलहेड शहर से उब चुका है और अपने साथ काम करने वाले नकली इंसानों से भी उब चुका है इसलिए इस शहर को वह जल्दी छोड़ देगा। जेन और बॉब  निलांद से तीन मील दूर ऐसी जगह रहते थे जिसे लोग स्लैब कहते थे। स्लैब पहले एक नौसेनिक एअर बेस था जिसे वहां से हटाया जा चुका था और अब वहां पर कंक्रीट का मकान रेगिस्तान में चारों तरफ बिखरा था। नवंबर की सर्दियों में देश भर से पांच हजार से ज्यादा कई तरह के आवारे आकर यहां की धूप में डेरा जमाते थे। निलांद स्लैब उनलोगों के लिए मौसमी राजधानी की तरह था, जो समाज में उपेक्षित, उबे हुए, बेरोजगार और जलावतन थे। हर उम्र के लोग यहां आते थे। जब मैकेंडलेस यहां आया तो वहां रेगिस्तान में एक बड़ा बाजार लगा था। एक जगह जेन कुछ फोल्डिंग टेबल्स और सेकेंड हैंड सामान लेकर बैठी थी। मैकेंडलेस भी उसके सेकेंड हैंड किताबों के ढेर का दुकानदार बनकर बैठ गया। जेन उस पल को याद करते हुए बोली,” उसने मेरी बहुत सहायता की। जब मैं कहीं जाती थी तो वह टेबल के पास बैठता था। उसने किताबों को कैटेगराईज किया और बहुत सारी किताबें बेची। एलेक्स को क्लासिक का बहुत ज्यादा ज्ञान था। जैक लंडन की किताबों से उसे खास लगाव था। जो भी दुकान पर आता उससे वो कहता कि जैक लंडन की किताब ‘कॉल ऑफ दी वाईल्ड’ जरूर पढना चाहिए।”

मैकेंडलेस बचपन से ही जैक लंडन की किताबों से प्यार करता था। उसके पूंजीवादी समाज की भर्त्सना के साथ, आदिम जीवन के सौंदर्यबोध ने मैकेंडलेस के अंदर जुनून भर दिया था। जैक लंडन के अलास्का के वर्णन से मोहित मैकेंडलेस उसके किताबों को बार-बार पढ़ता था। वह भूल चुका था कि ये सब साहित्य में रची गई कल्पना है, जिसका संबंध जैक लंडन की रुमानी फैंटेसी से ज्यादा है, जबकि आर्कटिक क्षेत्र के जीवन की हकीकत कुछ और है। मैकेंडलेस ने इस तथ्य को भी नजरअंदाज कर दिया था कि जैक ने सिर्फ एक जाड़ा, अलास्का में बिताया था। जैंक लंडन शराबी था और उसकी खुद की जिंदगी की हकीकत उसके किताबों में लिखी आदर्शों से कोसों दूर थी।

निलांद स्लैब में एक सत्रह बरस की लड़की भी रहने आयी थी जिसका नाम ट्रेसी था। वह मैकेंडलेस से प्यार करने लगी थी। जेन उस वाकये को याद करते हुए बोली, ”वह बहुत सुंदर और अच्छी थी और उसके मां-बाप की गाड़ी हमसे चार गाड़ी बाद लगी थी। बेचारी ट्रेसी ने एलेक्स के साथ निराश कर देने वाला इश्क करना शुरू किय़ा। हमेंशा वह एलेक्स को एकटक देखती रहती। मुझे वो कहती रहती एलेक्स को वो उसके साथ घूमने जाने को कहे। एलेक्स उसके साथ अच्छे से पेश आता था। लेकिन उसे छोटी बच्ची समझता था। ट्रेसी अपना टूटा दिल लेकर रह गई। हलांकि एलेक्स ने ट्रेसी के प्यार पर कोई ध्यान नहीं दिया लेकिन ऐसा नहीं था कि वह तन्हा रहता था। वह अपने आसपास के लोगों से खूब बातें करता था लगभग सात दर्जन लोगों को उसने दोस्त बनाया था। वह तन्हाई चाहता था लेकिन उसकी प्रवृति साधुओं जैसी नहीं थी। वह सबसे मिलता-जुलता था।

”जेन ने कहा कि मैकेंडलेस उसके साथ हमेशा हंसता-खेलता रहता था। “उसे मुझे परेशान करने में मजा आता था। जब मैं कपड़ा सूखने के लिए रस्सी पर टांगने जाती थी तो मेरे कपड़ों में वह पेपर पिन लगा देता था। वह बच्चे की तरह मुझसे खेलता रहता था। वह मेरे पिल्लों को लांड्री बास्केट में रख देता था और पिल्ले चिल्लाते-चिल्लाते उस बास्केट से उछलकर निकलने की कोशिश करते थे। मैं जब परेशान होकर मैकेंडलेस पर चिल्लाती थी तब जाकर वह रूकता था। उसके बाद पिल्ले उसके आसपास मंडराते थे और उसे खोजते रहते थे। एलेक्स जानवरों से भी घुल-मिल जाता था।”

एक दिन मैकेंडलेस किताब की दुकान पर बैठा था कि कोई जेन को एक गिटार दे गया, बेच देने के लिए। “एलेक्स उसे उठाकर बजाते हुए गाने लगा और उसे सुनने के लिए भीड़ जुट गई। उसकी आवाज बहुत सुंदर थी। तब तक मैं ये बात नहीं जानती थी“, जेन ने कहा।

मैकेंडलेस हमेंशा सबसे अलास्का जाने की बात किया करता था। वह रोज सुबह कसरत किया करता था। बॉब से हमेंशा देहातों में जिंदा रहने के तौर-तरीके पर लम्बी-चौड़ी बातें किया करता था। जेन बोली,”मैं सोचती थी कि एलेक्स का दिमाग खराब हो गया था, जब वह अलास्का की बर्फीली वादियों में जाकर कुछ दिन बिताने की बात करता था। एलेक्स ने अपने मां-बाप के बारे में कभी नहीं बताया। मैं पूछती थी कि तुम जो कर रहे हो, उसके बारे में तुम्हारे मां-बाप या परिवार में और किसी को मालूम है कि नहीं। वह जबाव नहीं देता था। वह मुझपे गुस्सा हो जाता था और कहता था कि मैं उसकी मां बनने की कोशिश ना करूं। बॉब उधर से कहता कि एलेक्स को अकेला छोड़ दो। वह आदमी हो चुका है, अब बच्चा नहीं रहा। लेकिन मैं उससे पूछती रहती थी और वह बातचीत का विषय बदलने की कोशिशें करता रहता था। मैं चाहती थी कि उसका कोई देखभाल करने वाला हो, अभी तो मैं उसकी देखभाल कर रही थी।“

“मैकेंडलेस एक बार टेलीविजन पर फुटबाल मैच देख रहा था और मैंने देखा कि वह अमेरिकन आदिवासी खिलाड़ियों का पक्ष ले रहा है। मैंने उससे पूछा कि “क्या तुम ईसा के जन्म से भी पहले का आदमी हो?” तो उसने कहा कि “हां, मैं हूं“। और यही आदिमता उसके मनस में बसी रहती थी।“

एक दिन  मैकेंडलेस ने कहा कि अब उसके जाने का वक्त आ चुका है। उसने कहा कि वह निलांद से पचास मील पश्चिम, साल्टन सिटी जाएगा। मैकडोनाल्ड वालों से उसे पेमेंट भी लेना था। जेन ने उसे वहां तक गाड़ी से छोड़ देने की बात कही जिसे मैकेंडलेस ने स्वीकार किया लेकिन जब जेन ने उसे कुछ पैसे देने की कोशिश की तो वह गुस्सा हो गया। जेन ने उससे कहा था,”इस दुनिया में जीने के लिए पैसे की जरूरत पड़ती है।“ लेकिन उसने जेन की एक न सुनी। जेन ने उससे कहा,” तो फिर ये चाकू रख लो। इसे तुम आसानी से अलास्का ले जा सकते हो और जब कभी पैसे की जरूरत पड़े तो उसे बेच कर कुछ पैसा पा सकता हो।“

बहुत बहस करने के बाद जेन, मैकेंडलेस को कुछ सामान स्वीकार करवाने में सफल रही जिसमें कुछ लम्बे अंडरवियर और गर्म कपड़े थे, जिसके बारे में जेन का सोचना था कि उसे अलास्का के सर्दी में इन सब चीजों की जरूरत पड़ सकती थी। “उसने मुझे खुश करने के लिए ये सब स्वीकार कर लिया था लेकिन जब वह चला गया तो हमने इन सब कपड़ों को अपने गाड़ी में पड़ा पाया। एलेक्स बहुत अच्छा था, लेकिन कभी-कभी मुझे पागल सा कर देता था।“

जेन कह रही थी, “मैकेंडलेस अपने आप में सबसे अलग सा था। मैं सोचती थी कि अंत में सुरक्षित वापस लौट आएगा। क्योंकि वह बुद्धिमान था। उसने मैक्सिको तक की यात्रा डोंगी से कर डाली थी। वह माल ढोने वाले ट्रेनों में बैठकर सफर कर लेता था। वह अपने लिए अकेला ही काफी था। इसलिए मैं सोचती थी कि अलास्का से भी वह ठीक-ठाक लौटेगा।“

किसी ने तब तक अपने अंदर के जीनियस को नहीं पहचाना, जब तक उसके जीनियसनेस ने उसे भटकाव के रास्ते पर नहीं डाला। हां, भटकने का परिणाम ये जरूर होता है कि शरीर कमजोर हो जाता है, फिर भी इस पर कोई दुख नहीं व्यक्त कर सकता क्योंकि जिंदगी उस पल अपने उच्च अस्तित्व को तलाशती रहती है। अगर दिन और रात ऐसे हों, जिसका आप हमेशा खुशी से स्वागत करें, जीवन फूलों की खुशबू बिखेरे, इसमें तारों की जगमगाहट हो- तो यही जीवन अमर और सफल है।

जीवन की इस बड़ी सफलता के प्रशंसक नहीं मिलते क्योंकि उसके अस्तित्व पर सबको संदेह होता है। लेकिन वही उच्च अस्तित्व मेरे लिए परम सत्य है और वही रोज मेरे जीवन की प्राप्ति भी। मेरी ये प्राप्ति उतनी ही रहस्य भरी है जितनी कि सुबह और शाम की रौशनी का सौंदर्य। अपने लिए ब्रह्मांड से कुछ लेता हूं, जैसे इंद्रधनुष का कोई टुकड़ा अपने दामन से पकड़ता हूं। (हेनरी डेविड थोरो की किताब लाइफ इन दी वुड्स से उद्धृत। मैकेंडलेस के पास मिली इस किताब में ये पंक्तियां चिह्नित की गई थीं)।

4 जनवरी, 1993 को इस किताब (Into the wild) के लेखक को एक अंजाने की चिट्ठी मिली जिसमें टेढे- मेढे अक्षरों में कुछ लिखा था, जिसकी लिखावट बताती थी कि चिट्ठी का लेखक शायद कोई बूढा है। चिट्ठी में ये लिखा थाः-

‘मैं उस मैगजीन की कॉपी चाहता हूं जिसमें एक नौजवान के अलास्का में मरने की स्टोरी छपी है। मैंने मार्च 1992 को एलेक्स को साल्टन सिटी से ग्रांड जंक्शन तक छोड़ा था। उसने कहा था कि वह संपर्क में रहेगा। उसने अंतिम चिट्ठी मुझे अप्रील 1992 में लिखी थी। जब तक हमारे साथ रहा तब तक उसने अपने कैमरे से अपनी और मेरी तस्वीरें ली थी। अगर आपके पास उस मैगजीन की कॉपी है तो मुझे भेज दीजिए, पैसे मैं भेज दूंगा….रोनाल्ड फ्रांज।’

जिस स्टोरी के बारे में रोनाल्ड फ्रांज ने लिखा था, वह आउटसाइड मैगजीन के जनवरी 1993 वाले अंक में छपा था। मैकेंडलेस अपनी आवारगी के रास्ते में जिस-जिस से मिला था उसपर ना भूलने लायक प्रभाव छोड़ा था। उनमें से कुछ लोगों ने तो उसके साथ सिर्फ चंद दिन बिताए थे। मैकेंडलेस से सबसे ज्यादा प्रभावित होना वाला शख्स था रोनाल्ड फ्रांज, अस्सी बरस का बूढा जिसने उसे जनवरी 1992 को रास्ते में अपने ट्रक में पहली बार लिफ्ट दिया था।

निलांद  में जेन से विदा लेने के बाद मैकेंडलेस साल्टन सिटी पहुंचा और वहां के रेगिस्तान में अपना कैंप लगा दिया। पूरब में साल्टन सी था, जो शांत और छोटा सा समंदर था, जिसकी सतह समुद्री सतह से 200 फीट ऊपर थी। यह समंदर 1905 में इंजीनयरिंग की एक बड़ी गलती से बना था। कोलोराडो नदी से इंपेरियल वेली घाटी के खेतों की सिंचाई के लिए एक नहर निकाली गई थी। नदी में आयी बाढ का सारा पानी नहर में बहकर साल्टन सिंक(बहुत बड़ा गहरा क्षेत्र) में जमा होने लगा। दो साल तक जमा हो रहे पानी के बाढ ने वहां के सारे खेतों और बस्तियों को डूबा दिया और चार सौ मील के दायरे में रेगिस्तान को समंदर में बदल दिया।

कैलिफोर्निया  के पाम स्प्रिंग्स से, हरे-भरे पेड़ों के बीच से होकर जाते रास्ते पर पचास मील दूर साल्टन सी के पश्चिमी किनारे की जमीन पर रियल स्टेट वालों की नजर गई। टूरिस्टों के लिए आरामदेह रिसोर्टों को बनाने के साथ, बाजार सहित और सारी चीजें वहां बनाने की प्लानिंग की गई। लेकिन काम अधूरा ही रहा। अब वहां पर जो भी खंडहरनुमा चीजें बची थी, उसे भी रेगिस्तान धीरे-धीरे अपने में फिर से समाता जा रहा था। वहां की सड़कों पर पेंड़ों की टूटी टहनियां हवाओं में इधर-उधर घूमती रहती थी । किनारे से एक कतार में लगे ‘फॉर सेल (बिकाऊ है)’ का साइनबोर्ड सूरज की गरमी से मिटता जा रहा था और खाली पड़े बिल्डिंगों का रंग भी उख़ड़ता जा रहा था। ‘साल्टन सी रियल्टी एंड डेवलपमेंट’ के दफ्तर के ऊपर ‘बंद’ लिखी तख्ती टंगी थी। इस पूरे क्षेत्र में पसरे सन्नाटे को सिर्फ हवा के झोंके की आवाज तोड़ते थे। साल्टन सी के किनारे से दूर जाती जमीन उंची उठती चली जाती थी और ‘अंजा बोरेगो’ के विशाल, बंजर और सूखे रेगिस्तान में बदल जाती थी। इसके शुरुआती निचले हिस्से में यह उजाड़ बस्ती थी, जिसे एक बरसाती नदी काटती थी। यहीं से थोड़ी ऊंचाई की ओर जाने पर, सूरज की रोशनी के सामने वाले हिस्से पर इंडिगो और बारह फुट ऊंची ओक्टिलो की झाड़ियां थी। मैकेंडलेस यहीं बालू पर झाड़ियों के नीचे एक प्लास्टिक के नीचे सोता था। जब भी उसे जरूरत पड़ती, वह वहां से चार मील दूर पैदल या लिफ्ट लेकर शहर जाता था और चावल खरीदकर, एक प्लास्टिक जग में पानी भरकर फिर वापस लौट आता था। जनवरी के बीच में एक गुरुवार को वह जग में पानी भरकर वापस लौट रहा था कि एक बूढे आदमी, रोनाल्ड फ्रांज ने उसे अपनी गाड़ी में बिठा लिया।

“तुम्हारा कैंप कहां है?” फ्रांज खोज-बीन करने लगा।

“ओह माय गॉड गर्म झरने के बाद”, मैकेंडलेस ने जबाब दिया।

“मैं इस इलाके में छह साल से रह रहा हूं। मैंने तो कभी ऐसी जगह का नाम नहीं सुना। मुझे वहां ले चलो।“

बोरेगो रेगिस्तान से साल्टन के रास्ते से होते हुए मैकेंडलेस ने बायीं ओर रेगिस्तान में गाड़ी को मोड़ने के लिए कहा। वहां से नीचे की तरफ एक मील आगे चलने के बाद अजीब सा कैंप लगा था, जहां लगभग दो सौ लोग सर्दी बिताने आए हुए थे। उनमें से कुछ लोग वहां नंगे घूम रहे थे। वहां बीच में एक गर्म पानी का कुंआ था। जिससे दो पाईप के द्वारा पानी लाकर पत्थरों से घिरे छोटे-छोटे गड्ढे भरकर तालाब बनाए गए थे, जिससे गर्म पानी का भाप उठ रहा था। यही था ओह माय गॉड गर्म झरना।

मैकेंडलेस उस गर्म झरने के पास नहीं रहता था। उससे भी दो मील आगे उसका कैंप था। फ्रांज, एलेक्स से कुछ बात करते हुए उसको कैंप तक छोड़कर वापस शहर लौटा, जहां वह एक मकान में अकेले रहता था। फ्रांज ने अपनी जिंदगी का अधिकांश हिस्सा आर्मी में रहते हुए शंघाई और ओकिनावा में बिताया था। 1957 की पहली जनवरी की शाम को उसकी बीबी और इकलौते बच्चे की मौत एक शराबी के गाड़ी से कुचलकर हो गई, उस वक्त वह देश से बाहर था। फ्रांज का बेटा अगले जून तक मेडिकल ग्रेजुएशन पूरा करने वाला था। फ्रांज ने इस दुख में अपने आपको ह्विस्की में डूबो दिया। छह महीने बाद वह खुद को संभालने और शराब छोड़ने में कामयाब रहा। लेकिन वह कभी भी इस दुख से उबर नहीं पाया। सालों बाद उसने अपने अकेलेपन से मुक्ति पाने के लिए बच्चों को गोद लेना शुरू कर दिया। अब तक उसने चौदह बच्चे गोद लिए थे जिसमें से एक फिलाडेल्फिया में और एक जापान में मेडिसीन पढ़ रहे थे।

जब फ्रांज मैकेंडलेस से मिला तो उसकी वही अतृप्त पिता की भावना जग गई। वह इस नौजवान को अपने दिलोदिमाग से नहीं निकाल पाया। लड़के ने अपना नाम एलेक्स बताया था और सरनेम बताने से इंकार किया था। उसने अपना घर वेस्ट वर्जीनिया बताया था। वह विनम्र था। फ्रांज को वह दिखने से ही तेज लड़का लगता था। उसने सोचा कि वह इतना अच्छा होते हुए भी इस झरने के पास इन न्यूडिस्टों, शराबियों और नशेड़ियों के बीच क्यूं जी रहा है? रविवार को चर्च में प्रार्थना करने के बाद फ्रांज ने तय किया कि एलेक्स से बात कर पूछेगा कि वह ऐसा जीवन क्यूं जी रहा है। उसने सोचा कि एलेक्स को वह समझाएगा कि वह पढे़, नौकरी करे और जीवन का कुछ सदुपयोग करे। जब फ्रांज, मैकेंडलेस के कैंप पहुंचा और वहां उसे सुधारने के लहजे में बोलना शुरू किया तो मैकेंडलेस ने उसे बीच में रोक दिया।

“सुनो, मिस्टर फ्रांज, तुमको मेरी चिन्ता करने की जरूरत नहीं है। मैंने कॉलेज की पढ़ाई की है। मैं बेघर नहीं हूं। मैं यह जीवन अपनी मर्जी से जी रहा हूं।“ इसके तुरंत बाद एलेक्स अपनी आवाज की कड़वाहट खत्म कर फ्रांज के साथ गर्मजोशी से बोलना शुरू किया। दोनों बहुत देर तक बातें करते रहे। जैसे ही दिन बीता, वे दोनों पाम स्प्रिंग्स की तरफ फ्रांज की ट्रक से गए। वहां एक रेस्टूरेंट में खाना खाया। फिर ट्रामवे से सैन जा सिन्टो की चोटी पर दोनों पहुंचे। अगले कुछ सप्ताह तक मैकेंडलेस और फ्रांज ने एक दूसरे के साथ काफी समय बिताया। एलेक्स अपना कपड़ा साफ करने और मांस पकाकर खाने के लिए अक्सर फ्रांज के यहां आया करता था। उसने फ्रांज को यह बता दिया कि वह बसंत तक यहां रुकेगा, फिर उसके बाद अपने सबसे बड़े साहसिक, अलास्का यात्रा पर निकलेगा। उसके बाद एलेक्स ने अस्सी साल के बूढे़ को लेक्चर देते हुए उसको सुस्त से अस्तित्व से निकलकर सड़क की जिंदगी जीने की सलाह दे डाली। उसने फ्रांज से अपना सारा सामान बेच देने और एपार्टमेंट छोड़ देने को कहा। फ्रांज उस लड़के का साथ पाकर बहुत प्रसन्न था।

फ्रांज चमड़े की चीजें बनाने के काम में मास्टर था। उसने एलेक्स को अपनी कला का रहस्य बताया और सिखाया। पहले काम के रुप में मैकेंडलेस ने अपना लेदर बेल्ट बनाया जिसके ऊपर उसने अपने आवारगी किए हुए जगहों को दर्शाया। बेल्ट के बांयी छोर पर एलेक्स लिखा, उसके बाद ‘सीजेएम’ यानि क्रिस्टोफर जॉनसन मैकेंडलेस। गाय के चमड़े से बने उस बेल्ट पर एक ‘नो यू टर्न’ का चिह्न, कार को डूबोती हुई बाढ और कड़कती हुई बिजली, लिफ्ट के लिए उठा अंगूठा, एक चील, सियरा नेवाडा, प्रशांत महासागर में तैरता सालमोन, प्रशांत के किनारे से गए हाइवे से आरेगॉन से वाशिंगटन, पहाड़ें, मोंटाना के गेंहू के मैदान, साउथ डाकोटा, वेस्टरबर्ग का कार्थेज में घर, कोलोराडो नदी, कैलिफोर्निया की खाड़ी, टेंट के किनारे पड़ी डोंगी, लास वेगास, मोरो बे, एस्टोरिया दर्शाया और बेल्ट के दूसरे छोर पर बक्कल के पास लिखा, एन(N) यानि शायद नार्थ। अपने पीछे मैकेंडलेस द्वारा छोड़ा गया यह बेल्ट रचनात्मकता और कला के अद्भुत नमूना है।

फ्रांज मैकेंडलेस से बहुत प्यार करने लगा था। “वह स्मार्ट बच्चा था।“फ्रांज ने दुखी स्वर में कहा। इतना कहते हुए फ्रांज अपने दोनों पैरों के बीच पड़े रेत के टुकड़े की ओर देखने लगा। उसने बोलना बन्द कर दिया। अपने कमर के सहारे किसी तरह झुककर वह अपने पैंट के निचले हिस्से के धूल को झाड़ने लगा। उसके झुकने से पुरानी हड्डियां के जोड़ के कड़कने की आवाज, शांत माहौल में गूंज गया। कुछ मिनट बाद फ्रांज ने फिर से बोलना शुरू किया। आकाश की तऱफ आंखे छोटी कर देखते हुए फ्रांज उस लड़के साथ बिताए गए पलों को याद करना शुरू किया। फ्रांज ने कहा कि कभी-कभी मैकेंडलेस का चेहरा, गुस्से से काला होने लगता था और वह मां-बाप, नेताओं और अमेरिकी समाज की मानसिकता की आलोचना करता था। लड़का उसे छोड़कर चला न जाय, इसलिए फ्रांज बस चुपचाप सुनता रहता था और उसे बोलने देता था। फरवरी में एक दिन सुबह अचानक मैकेंडलेस ने सैन डियागो जाने की घोषणा कर दी और कहा कि वह अलास्का ट्रिप के लिए कुछ पैसे कमाना चाहता था।

“तुमको सैन डियागो जाने की जरूरत नहीं है।“फ्रांज विरोध करते हुए बोला। “तुमको जितने पैसे चाहिए, मुझसे ले लो।“

“नहीं मैं सैन डियागो जाऊंगा और मैं सोमवार को जा रहा हूं।“

“ठीक है, तो मैं तुमको वहां तक छोड़ दूंगा।”

“बेकार की बातें मत करो।“ मैकेंडलेस फ्रांज के प्रस्ताव से सहमत नहीं था।

“मुझे उधर कहीं जाना है। चमड़े के सप्लाई के सिलसिले में।“ फ्रांज ने बहाना बनाते हुए कहा।

यह सुनते ही मैकेंडलेस ने अपने व्यवहार के लिए माफी मांगी। उसके बाद वह कैंप गया और अपना सारा सामान फ्रांज के अपार्टमेंट में ले आया। मैकेंडलेस अब अपना बैग आगे नहीं ढोना चाहता था। फ्रांज की गाड़ी से वह पहाड़ों को पार करते हुए समुद्री किनारे तक आया। फ्रांज ने उसे सैन डियागो के पास उतारा, तब बारिश हो रही थी। “मेरे लिए यह काफी कठिन काम था। उसके जाने से मैं काफी दुखी था।“ फ्रांज बोला।

19 फरवरी  को मैकेंडलेस ने फ्रांज को फोन किया, उसके 81वें जन्मदिन की बधाई देने के लिए। मैकेंडलेस को यह तारीख याद रही क्योंकि खुद उसका जन्मदिन सात दिन पहले पड़ता था। 12 फरवरी को वह चौबीस साल का हो चुका था। इस बातचीत के दौरान मैकेंडलेस ने स्वीकार किया कि उसे सैन डियागो में काम खोजने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

28 फरवरी  को उसने जेन को चिट्टी  में लिखाः- ‘हेलो जेन, पिछले सप्ताह सैन डियागो की गलियों में भटक रहा था। पहले दिन तो बहुत बारिश हुई। नौकरी नहीं मिल पा रही। इसलिए मैं उत्तर की तरफ कल जा रहा हूं। 1 मई से पहले मैं अलास्का जाने की योजना बना चुका हूं। लेकिन मुझे कपड़े खरीदने के लिए कुछ पैसों की जरूरत है। हो सकता है कि मैं साउथ डाकोटा में अपने एक दोस्त के पास लौट जाऊं और वहीं काम करूं। अभी कहां जाऊंगा, मालूम नहीं। जहां जाऊंगा, वहां पहुंचकर पत्र लिखूंगा। आशा करता हूं कि वहां तुम सब ठीक से होगे। एलेक्स।

5 मार्च को मैकेंडलेस ने एक दूसरा पत्र जेन को लिखा और एक पत्र फ्रांज को भी। जेन को उसने लिखाः- ‘सिएटल में हूं। आवारा हूं यहां पर। रेल से सफर करता हूं। लेकिन रेल से सफर करने के कुछ नुकसान हैं। पहला तो ये कि शरीर धूल से भर जाता है। दूसरा, रास्ते में ट्रेन गार्डों से उलझना पड़ता है। कल मैं एक मालगाड़ी में बैठा जा रहा था। जब लगभग 10 बजे मुझे टार्च की तेज रौशनी में एक गार्ड ने पकड़ लिया। उसने कहा, “यहां से जाओ वरना जान से मार दूंगा।“ मैंने देखा कि उसके हाथ में रिवाल्वर था। उसने मेरी तलाशी ली। उसके बाद फिर गुर्राया, ”इस ट्रेन के आसपास मत दिखना वरना जान से जाओगे। जाओ, रास्ता नापो।“ कितना पागल था वह। मैं हंसा और उसी ट्रेन पर पांच मिनट बाद फिर से चढ गया और ऑकलैंड पहुंच गया। मैं पत्र लिखता रहूंगा। एलेक्स।‘

एक सप्ताह बाद फ्रांज का फोन बजा। “आपरेटर का फोन था।“ फ्रांज ने बताया। “ उसने कहा कि क्या वह किसी एलेक्स नाम के लड़के से बात करना चाहेगा। जब मैंने एलेक्स की आवाज सुनी तो वह बारिश के मौसम में सूरज की रौशनी की तरह था।“

“मुझे लेने आओगे।“ मैकेंडलेस ने पूछा।

“हां, कहां हो सिएटल में।“

“रॉन”, मैकेंडलेस हंसा,” मैं सिएटल में नहीं हूं। कैलिफोर्निया में हूं। तुम्हारे सड़क पर।“

नौकरी नहीं मिल पाने के कारण मैकेंडलेस कई मालगाड़ियों की सवारी करते हुए फिर से रेगिस्तान में पहुंचा था। कैलिफोर्निया के कॉल्टन में उसे एक गार्ड ने फिर पकड़ लिया और जेल में डाल दिया। जेल से छूटने पर वह पाम स्प्रिंग के दक्षिण में पहुंचकर फ्रांज को फोन किया था। जैसे ही मैकेंडलेस ने फोन रखा, फ्रांज उसे लेने निकल पड़ा।

“हम दोनों सिजलर गए और वहां मैंने उसे स्टिक और लोबस्टर खिलाया। उसके बाद हम साल्टन सिटी लौट आए।“ फ्रांज ने याद किया। मैकेंडलेस ने कहा कि वह सिर्फ एक दिन रुकेगा। अपना कपड़ा साफ करेगा और अपना बैग पैक करेगा। वायन वेस्टरबर्ग ने उसे कार्थेज काम करने के लिए बुलाया था और मैकेंडलेस वहां पहुंचने के लिए बेसब्र था। 11 मार्च, 1992, बुधवार का दिन था वह।

फ्रांज  ने मैकेंडलेस से कहा कि उसे वह ज्यादा से ज्यादा कैलिफोर्निया के ग्रांड जंक्शन तक छोड़ देगा क्योंकि फिर उसे लौटकर सोमवार को साल्टन सिटी में एक जरूरी आदमी से मिलना था। मैकेंडलेस के स्वीकार करने पर फ्रांज ने राहत की सांस ली। जाने से पहले फ्रांज ने उसे एक बड़ा सा चाकू, एक फर कोट और अलास्का के लिए कुछ जरूरी सामान दिया। ट्रक से गुरुवार को साल्टन सिटी से दोनों चले। बुलहेड सिटी में रूककर मैकेंडलेस ने बैंक में अपना खाता बंद करवाया और फिर दोनों चार्ली के ट्रेलर तक गए, जहां मैकेंडलेस ने अपनी कुछ किताबें, सामान और फोटोफाईल रखा था। मैकेंडलेस उसके बाद फ्रांज को लंच के लिए लौघलिन के गोल्डेन नगेट कैसिनो ले गया जहां एक वेट्रेस ने उसे पहचान लिया,”एलेक्स, एलेक्स! तुम फिर वापस आ गए।“

फ्रांज  ने इस ट्रिप से पहले एक वीडियो कैमरा खरीदा था, जिससे  वह रास्ते भर दृश्यों की फिल्में  बनाता गया। जब भी फ्रांज उसकी तरफ कैमरा करता, मैकेंडलेस नीचे की तरफ झुक जाता, फिर भी कुछ दृश्य उसके भी फ्रांज के कैमरा में कैद हो ही गए। इसी तरह के एक फूटेज में मैकेंडलेस बर्फ के ढेर पर ख़ड़ा था और कह रहा था, “चलो, ऱॉन”। वह फिर कुछ देर बाद वीडियो कैमरा का विरोध करते हुए कहता था,”आगे और भी बहुत कुछ है, रॉन।“ जीन्स और गर्म स्वेटर पहने हुए मैकेंडलेस सांवला, मजबूत और स्वस्थ लग रहा था। फ्रांज ने कहा कि यह यादगार ट्रिप था। “कभी हम बिना बोले घंटो ड्राईव करते रहते। जब वह सो रहा होता तब भी मैं खुश रहता ये सोचकर कि वो मेरे आसपास तो है।“

रास्ते  में फ्रांज ने मैकेंडलेस से अपने दिल की एक खास मुराद कही, “ मेरी मां, अपने मां-बाप की इकलौती संतान थी। मेरे पिता भी अपने मां-बाप के इकलौते थे। मैं भी उनका इकलौता बेटा था। मेरे इकलौते बेटे की मौत हो चुकी है। अब मैं इस वंश में अकेला रह गया हूं। अगर मैं भी मरा तो मेरा परिवार खत्म हो जाएगा। एलेक्स अगर मैं तुमको गोद लूं तो तुम मेरे पोते कहलाओगे।“

मैकेंडलेस उसके इस प्रस्ताव से विचलित हो उठा। और उसने मामले को टालने के लिए कहा, ”रॉन, अलास्का से मैं लौटता हूं, फिर इस विषय पर बात होगी।“

14 मार्च को ग्रांड जंक्शन के इंटरस्टेट 70 के किनारे एलेक्स को उतारकर फ्रांज दक्षिणी कैलिफोर्ऩिया लौट आया। मैकेंडलेस फिर से उत्तर की तरफ जाते हुए रोमांचित था और वह इस बात से खुश था कि एक बार फिर उसने मानवीय रिश्तों के खतरों से खुद को बचाने में सफलता हासिल की, जो अपने साथ कई भावनात्मक बोझ लिए हुए आती थी। वह अपने परिवार के कैद से फरार हो गया। उसके बाद उसने जेन, बॉब और वायन वेस्टरबर्ग को भी खुद से कुछ दूर रखने में सफलता पायी और उसके बाद तुरंत किसी को छोड़कर चल देना ताकि उससे किसी को अपेक्षा ना रहे। और अब रॉन, फ्रांज की भी जिंदगी से भी बिना किसी दर्द के बाहर निकल आया था।

फ्रांज  मैकेंडलेस के साथ क्यूं इतना दिल लगा बैठा था, इस बारे में कोई बस अनुमान लगा सकता है। लेकिन फ्रांज का उससे प्रेम सच्चा, पवित्र और काफी इंटेंस था। फ्रांज काफी सालों से अकेला रह रहा था। उसके पास न तो परिवार था और न ही कोई दोस्त। अनुशासित और स्वतंत्र फ्रांज इस उम्र में भी अच्छी तरह से जी रहा था। जब मैकेंडलेस उसकी जिंदगी में आया तो उसने इस बूढे आदमी के जीवनशैली के विचारों को चुनौती दिया। फ्रांज मैकेंडलेस के विचारों से प्रभावित हुआ लेकिन इसके साथ ही उसे यह भी महसूस हुआ कि वह कितना अकेला था। उस बूढे के मन के खालीपन को एलेक्स ने आकर भर दिया। जब वह वहां से अचानक जाने लगा तो उसके इस अचानक उठाए गए कदम से फ्रांज का दिल बुरी तरह से आहत हुआ।

अपैल में साउथ डाकोटा से फ्रांज के पास मैकेंडलेस की एक लम्बी चिट्ठी आई, जिसमें लिखा थाः-‘हेलो रॉन,! एलेक्स लिख रहा हूं। मैं यहां साउथ डाकोटा के कार्थेज में दो सप्ताह से हूं। ग्रांड जंक्शन से चलकर तीन दिनों में मैं यहां पहुचा था। आशा करता हूं कि तुम साल्टन सिटी बिना किसी समस्या के पहुंच गए होगे। मैं यहां काम करके खुश हूं। सब ठीक चल रहा है। मौसम ज्यादा खराब नहीं रहता, कभी कभी तो आश्चर्यजनक रुप से बढिया रहता है। दक्षिण कैलिफोर्निया में तो अभी काफी गर्मी पड़ रही होगी। मुझे आश्चर्य होगा अगर तुम बाहर निकलने की फुर्सत पाओगे और गर्म झरने के पास जाकर देखोगे कि कितने आदमी 20 मार्च को वहां पर इंद्रधनुष देखने के लिए जमा हो रहे हैं। ऐसा लगता कि वहां खूब मस्ती होगी लेकिन मैं नहीं सोचता कि तुम ऐसे लोगों को अच्छी तरह समझ पाओगे। मैं साउथ डाकोटा में ज्यादा दिन नहीं रहने जा रहा। मेरा मित्र वेस्टरबर्ग चाहता है कि मैं मई तक यहीं ग्रीन एलीवेटर पर काम करूं और उसके बाद पूरी गर्मी उसके साथ दूसरी जगह जाकर यही काम करूं। लेकिन मेरी आत्मा तो पूरी तरह से अलास्का जाने के लिए बेचैन है।

मैं 15 अप्रैल से पहले यहां से निकल जाऊंगा। मुझे नीचे लिखे पते पर पत्र लिखना। रॉन, तुमने जो मेरी इतनी सहायता की, हमदोनों ने जो समय साथ गुजारा, उसने मुझे बहुत सुख दिया। मैं आशा करता हूं कि मुझसे अलग होकर तुम बहुत ज्यादा दुखी नहीं होगे। हो सकता है कि हम दोनों को एक दूसरे से फिर से मिलने में बहुत वक्त लग जाय। लेकिन इस अलास्का यात्रा के बाद तुम मेरी आवाज जरूर सुनोगे। मैं फिर से तुमको ये सलाह देना चाहूंगा कि अपने जीवन में पूरी तरह परिवर्तन लाओ, और उन चीजों के बारे में मजबूती के साथ सोचना शुरू कर दो जिसे तुमने पहले करने का कभी नहीं सोचा या उसे करने से हिचकते रहे। इतने सारे लोग दुखी जीवन जीते हुए भी अपने दुख को कम करने के लिए कोई कदम नहीं उठा पाते क्योंकि वह सोचते हैं कि एक सुरक्षित जीवन, परम्परा के अनुसार जीने से उन्हें शान्ति मिलेगी और वह उसी में जीने के लिए अभिशप्त रहते हैं। लेकिन सच तो ये है कि एक साहसी आत्मा के लिए सुरक्षित जीवन से ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला चीज और दुनिया में कुछ नहीं है। मानव का जीवन साहस, जुनून के साथ आवारगी करने के लिए बना है। जीवन में आनंद नये अनुभवों से टकराने से मिलता है इसलिए अनंत आनन्द के जरूरी है कि जीवन के आकाश का क्षितिज हमेंशा बदलता रहे, जिस पर हर दिन हो एक नये सूरज का उदय। इसलिए रॉन अगर जीवन से कुछ और पाना चाहते हो अपने सुरक्षित जीवन के एकालाप से बाहर निकल आओ, अव्यवस्थित और आवारगी का जीवन शुरू करो, जो तुमको पहले पहल पागलपन सा लग सकता है। लेकिन जैसे ही तुम्हें इसकी आदत लग जाएगी, तब तुम इसके अर्थ और अमिट सौंदर्य का आनंद देखोगे। इसलिए रॉन, साल्टन सिटी से निकलकर रोड की जिंदगी जीना शुरू करो।

मैं गारंटी देता हूं कि तुम बहुत खुश होगे। लेकिन मुझे डर है कि तुम मेरी बात नहीं मानोगे। तुम सोचते हो कि मैं जिद्दी हूं लेकिन रॉन तुम मुझसे ज्यादा जिद्दी हो। तुम्र्हारे पास बहुत अच्छा मौका है कि तुम धरती के सबसे सुंदर दृश्य, ग्रांड कैनयोन, को जाकर करीब से देखो, जिसे हर अमेरिकन को जीवन में कम से कम एक बार देखना चाहिए। कुछ कारणों से, जो मेरी समझ से बाहर है, तुम और कुछ करना नहीं चाहते सिवाय जल्दी से जल्दी घर जाने के, उसी परिस्थिति में फिर से, जिसे तुम रोज-रोज देखते हो। मुझे डर है कि तुम इसी तरह भविष्य में भी जीते रहोगे और खुदा ने जो खूबसूरती इस धरती पर बिखेरी है, उसे खोजने में विफल रहोगे। एक जगह सेटल होकर मत रहो। आवारगी करो, आदिम मानव बन जाओ, हर दिन एक नया क्षितिज तलाशो। तुम अभी बहुत दिन जिंदा रहोगे, रॉन! और यह बड़े अफसोस की बात होगी अगर तुमने अपने जीवन को बदलने के अवसर गवां दिए या नये अनुभवों को नहीं खोज पाए तो। तुम गलत होगे अगर सोचोगे कि आनंद मानवीय रिश्तों से पाया जा सकता है। ईश्वर ने तो आनंद हर जगह बिखेरा है। यह हर चीज में और हर जगह है, जिसे हम अनुभव कर सकते हैं। इसे पाने के लिए बस करना ये है कि जो आदतन हम जीते रहते हैं उसे छोड़कर उससे अलग अव्यवस्थित किस्म का जीवन जीना शुरू करें। मेरा कहना ये है इस तरह की नयी खुशी की रौशनी पाने के लिए तुमको ना तो मेरी जरूरत है और ना ही किसी और की। वह खुशी बाहर तुम्हारा इंतजार कर रहा है, बस बाहर निकलो और उसे पकड़ लो। जो आदमी तुमको बाहर नहीं निकलने दे रहा, वह तुम खुद हो, तुम्हारी नये परिस्थितियों में ना जीने की जिद है।

रॉन, अपने गाड़ी पर कैंप लगाने लायक सामान लादकर साल्टन सिटी से बाहर निकलो और देखो पश्चिमी  अमेरिका की तरफ जाकर कि खुदा ने कितनी खूबसूरती रची है। तुम चीजों को देखोगे, लोगों से मिलोगे, काफी कुछ सीखोगे। और यह सब तुम कम से कम खर्च में करना। होटल में मत रूकना, अपना खाना खुद बनाना। जितना कम खर्च करोगे उतना ही आनंद पाओगे। मैं आशा करता हूं कि जब तुमसे मिलूंगा तो तुम बिल्कुल नए रूप में मिलोगे, तुम्हारे पास साहस के बहुत सारे अनुभव होंगे। सारे संकोच खत्म कर दो और बहाने बनाने बंद कर दो। बाहर निकलो और ये काम करना शुरू करो। तुम बहुत खुशी पाओगे।

अपना खयाल रखना, रॉन

नीचे लिखे पते पर पत्र लिखनाः-

एलेक्स  मैकेंडलेस

मेडिसन, SD 57042

आश्चर्यजनक  रूप से, उस अस्सी साल के बूढे ने चौबीस साल के आवारा  बच्चे की सलाह को दिल से मानना शुरू कर दिया। फ्रांज ने फर्नीचर और अधिकांश  सामान को स्टोर में रख दिया। कैंपिंग के लिए  एक बेड और अन्य जरूरत के सामान उठाकर वह चल पड़ा। उसने अपना अपार्टमेंट छोड़ दिया और रेगिस्तान में जाकर कैंप लगा लिया, उसी के पास जहां मैकेंडलेस रूका था।

उसी गर्म झरने के पास फ्रांज ने मैकेंडलेस की जगह को अपना लिया। उसने कुछ पत्थर को जमाकर अपनी गाड़ी के लिए पार्किंग क्षेत्र बना लिया। उसने आसपास इंडिगो की झाड़ियां और पौधे लगा दिए ताकि लैंडस्केप सुंदर हो सके। उसके बाद वह रेगिस्तान में रहते हुए अपने दोस्त का इंतजार करने लगा।

रोनाल्ड फ्रांज (उसका असली नाम कुछ  और था। उसने लेखक से अनुरोध किया था कि उसके असली नाम  का उपयोग नहीं किया जाय। इसलिए  लेखक ने उसे यह नाम दिय़ा है।) उम्र के नौवें दशक में होने के बावजूद दिखने से मजबूत लगता था, जो दो दिल के दौरे को झेल गया था। छह फीट लंबा, मोटी बाहें और चौड़ी छाती वाला यह बूढा जब खड़ा होता था तो एकदम सीधा, बिना कांधे को झुकाए हुए।

जब रेगिस्तान  के उस कैंप में लेखक उससे मिलने पहुंचा तो उस वक्त वह एक पुरानी जींस और उजली टी शर्ट, अपने द्वारा बनाया हुआ एक सुंदर सजावट वाला चमड़े का बैल्ट, उजले मौजे और एक पुराना सा जूता पहने था। भौंह के इर्द-गिर्द बनी झुर्रियां और नाक पर उभरी नसों, जो खूबसूरती से गढे गए टैटू की तरह लगते थे, से सिर्फ उस बूढे की उम्र का पता चलता था। मैकेंडलेस के मरने के एक साल पूरे हो चले थे।

फ्रांज  को लेखक ने अपना परिचय दिया और उसे विश्वास दिलाने के लिए उसे कुछ फोटो दिखाए  जिसमें उसने पिछली गर्मी में किए गए अलास्का यात्रा की अपनी तस्वीरें दिखाईं जिस दौरान उसने मैकेंडलेस के स्टेम्पेड ट्रेल की यात्रा की खोजबीन की थी। उसमें लैंडस्केप चित्र, ट्रेल, झाड़ियों के चित्र, दूर पहाड़ों और सुषाना नदी के चित्र। फ्रांज उन तस्वीरों को देखता रहा। लेखक तस्वीरों के बारे में बताता जा रहा था और फ्रांज कभी-कभी अपने सिर को समझने की मुद्रा में हिला रहा था। वह उन सबको देखकर खुश था। जैसे ही उस बस की तस्वीरें उसके सामने आयीं, उसकी नजर थोड़ी सख्त हो गई। जैसे-जैसे मैकेंडलेस के सामानों की तस्वीरें उसके नजर से गुजरने लगी, उसकी आंखे नम होने लगी। उसको एहसास होने लगा कि वह कितना दुखदायी चीज देख रहा है और आगे और किसी तस्वीर को देखे बिना उसने फोटो एलबम को अपने आगे से हटा दिया। अपने आपके शांत करने के लिए फ्रांज टहलने लगा।

फ्रांज  अब मैकेंडलेस वाले जगह पर नहीं रहता था। उस जगह तक जाने वाली सड़क को बाढ बहा ले गई थी और अब वह बोरेगो बंजरपट्टी की तरफ बीस मील पीछे चला आया था और कॉटनवुड पेड़ों के पास के एकांत में अपना कैंप लगा लिया था। ओह माय गॉड गर्म झरना को भी अब इंपेरियल वेली हेल्थ कमीशन के आदेश पर बुल़डोजर के द्वारा नष्ट कर उसे कंक्रीट से भर दिया गया था। कमीशन के अधिकारियों का कहना था कि उस झरने को इसलिए नष्ट कर दिया क्योंकि वहां नहानेवालों को गंभीर बिमारी होने का खतरा था। लेकिन साल्टन सिटी स्टोर के एक क्लर्क का कहना था कि उस झरने को इसलिए खत्म कर दिया क्योंकि वह बहुत सारे हिप्पियों और आवारा किस्म के लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करता था।

मैकेंडलेस के जाने के आठ महीने बाद तक फ्रैंज वहीं कैंप में रहा जहां से वह एलेक्स के आने की राह देखा करता था। 1992 के आखिरी सप्ताह में उसने साल्टन सिटी से लौटते समय दो आवारों को अपने गाड़ी में बिठाया। फ्रांज ने याद करते हुए कहा,” उनमें से एक मिसिसीपी से और दूसरा नेटिव अमेरिकन था। गर्म झरने के पास से गुजरते हुए मैंने उसे एलेक्स और अलास्का जाने के बारे में बताया।“

अचानक उनमें से एक बोला,”क्या उसका नाम एलेक्स मैकेंडलेस था।“

“हां, बिल्कुल ठीक, क्या तुम उससे मिले हो”

“मुझे तुमसे ये कहना अच्छा नहीं लगा रहा है मिस्टर कि तुम्हारा दोस्त अब इस दुनिया में नहीं है। वह अलास्का के बर्फ में जमकर मर गया। विश्वास ना हो तो आउटसाइड मैगजीन पढ लो।“

फ्रांज  सहसा इस बात पर भरोसा नहीं कर पाया और उसने उससे लंबी पूछताछ की। जो भी उस आवारे ने बताया, सब सही था। फ्रांज को लगा कि कुछ बहुत ही गलत हो गया। अब, मैकेंडलेस कभी वापस नहीं लौटेगा। फ्रांज ने वाकये को याद करते हुए कहा,” जब एलेक्स वहां से जा रहा था तो उसने गॉड से प्रार्थना किया था कि यह बच्चा बहुत खास है, इसकी रक्षा करना। लेकिन गॉड ने एलेक्स को मरने दिया। 26 दिसम्बर को जब मैंने ये जाना, तब गॉड को मानना छोड़ दिया। मैंने चर्च की अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और नास्तिक हो गया। मैंने फैसला लिया कि जो गॉड एलेक्स जैसे बच्चे को इतनी बुरी तरह से मरने के लिए छोड़ सकता है, मैं उसमें विश्वास नहीं कर सकता।“

“जब मैंने उन आवारों को रास्ते पर उतारा, उसके बाद फिर वापस लौटकर, स्टोर से एक बोतल ह्विस्की खरीदी। रेगिस्तान में बैठकर मैं उसे पूरा पी गया। मुझे पीने की आदत नहीं थी इसलिए मैं बीमार हो गया। मैंने सोचा कि इस बिमारी से मर जाऊं तो अच्छा रहेगा लेकिन मैं नहीं मरा। जिंदा बचा रहा, बीमार और कमजोर।“

अमेरिका के भोगवादी जीवन से ऊबे क्रिस्टोफर ने खुद को जानने के लिए आवारगी का रास्ता चुना। सारे पैसे दानकर, परिचय-पत्र फेंककर और परिवार को बिना कुछ बताए उसने गुमनामी-घुमक्कड़ी का जीवन जीना शुरू किया। दो साल बाद वह अलास्का के निर्जन इलाके में जाकर रहना शुरू कर दिया। वहां जीवन की विपरीत परिस्थितियों से लड़ते हुए जीवन की खोज जारी रखी। वह ऐसा क्यों बना… अलास्का में उसके साथ क्या हुआ.. यह सब-कुछ जॉन क्राउकर नाम के पत्रकार ने बहुत शोध के बाद अपने किताब ‘Into the wild’ में लिखा। सीन पेन ने इसी नाम से एक बेहतरीन फिल्म बनाई जो विश्व के सौ महान सिनेमा में गिनी जाती है। Into the wild’ का हिंदी में अनुवाद कर रहे हैं युवा पत्रकार राजीव कुमार सिंह। इसका पहला, दूसरा और तीसरा पार्ट आप लोग पढ़ चुके हैं। ये था चौथा पार्ट। राजीव ने इस उपन्यास का अनुवाद करके पत्रकारिता क्षेत्र में दस्तक दी है। उनके अनुवाद में कई कमियां-गल्तियां हैं, ऐसा उनका कहना है। पर इसे एक युवा पत्रकार का शुरुआती गंभीर प्रयास मानते हुए कमियों की अनदेखा की जाए, ऐसा वह अनुरोध करते हैं। राजीव की इच्छा है कि उनके परिचय में लिखा जाए- एक बेरोजगार पत्रकार जिसे एक अदद नौकरी की तलाश है। राजीव से संपर्क rajeevsinghemail@gmail.com के जरिए किया जा सकता है। -एडिटर, भड़ास4मीडिया