जब भी बेरोजगार होता आलोकजी के पास जाता

वरिष्ठ पत्रकार आलोक तोमर जी के पंचतत्व में विलीन होने के बाद तय कर चुका था कि मैं कुछ नही लिखूंगा। क्योंकि जिस जिंदादिल आलोकजी से मिला था, उन्हें काल ने असमय अपने पास बुला लिया। मगर उनके साथ बिताए क्षणों को बांटना भी जरूरी समझा ताकि अपना मन हल्का हो सके।