गतिरोध में जकड़ा युवाओं का मन कब आजाद होगा!

आज भगत सिंह का बलिदान दिवस है। हर साल की तरह इस बार भी एकाध संगठन के प्रेस नोट से अखबार के किसी कोने में भगत सिंह को श्रद्धांजलि की खबर दिख जाएगी। शहर में कही धूल खाती भगत सिंह की मूर्ति पर माल्यपर्ण होगा। कहीं संगोष्ठी होगी तो भगत सिंह के विचारों की प्रासंगिकता बता कर उनसे प्रेरणा लेने की बात कही जाएगी। फिर सब कुछ पहले जैसे सामान्य हो जाएगा और अगले वर्ष फिर बलिदास दिवस पर यही सिलसिला दोहराया जाएगा।

बाहर से लड़ाई लड़ें बिहार के ईमानदार पत्रकार

संजयजीमेल पर चैट के दौरान पटना के एक विद्यार्थी अभिषेक आनंद से कहा – बिहार के मीडिया के बारे में बतायें। अभिषेक का जवाब था- क्या बताऊँ..पेपर पढ़ना छोड़ दिया कुछ दिनों से ऑनलाइन अखबार पढता हूँ, नीतीश जी भगवान हो गए हैं.. हर सुबह बड़ी बड़ी तस्वीरों से दर्शन होता हैं… और अंदर कहीं भी किसी भी पेज पर अगर कहूं कि सरकार के खिलाफ कोई आलोचना नहीं होती, तो आश्चर्य नहीं… लालू कहां गए पता नहीं। कोई नया विपक्ष कब आएगा पता नहीं, बिना विपक्ष के लोकतंत्र कि कल्पना आप कीजिये… मीडिया और सत्ता, खास कर बिहार में खेल जारी हैं… ऐसा बाहर के लोग ही नहीं, कई बिहारी भी ऐसा ही मानते हैं।