पत्रकार नहीं क्‍लर्क बनाने की साजिश

माखनलाल विवि छोड़े हुए करीब सात साल हो गए हैं और इस बीच केवल एक बार ही पूर्व छात्र की हैसियत से विवि कैम्पस में जाने का मौका मिला। करीब चार साल पहले मैं और संदीप विवि के नए परिसर में गए। बहुत खुशी हुई जब देखा कि हमें जो चीजें नहीं मिल पाईं वो हमारे बाद आने वाले छात्रों को मिल रही हैं। करीब सात-आठ साल से पेशेवर व अन्य जिम्मेदारियों के चलते पुरानी चीजें गौण होती गईं, लेकिन जब कभी भी वहां का कोई छात्र टकराता है सारी यादें एक झटके में ताजा हो जाया करती हैं।