वेब मीडिया चौकस न रहा तो सुखराम की तरह ए राजा भी बच निकलेगा

शेषजीटेलीकाम घोटाले ने सुखराम युग की याद ताज़ा कर दी. उस बार भी करीब 37 दिन तक बीजेपी ने संसद की कार्यवाही नहीं चलने दिया था. पीवी नरसिम्हाराव प्रधानमंत्री थे और सुखराम ने हिमाचल फ्यूचरिस्टिक नाम की किसी कंपनी को नाजायज़ लाभ पहुंचा कर हेराफेरी की थी. बाद में वही सुखराम बीजेपी के आदरणीय सदस्य बन गए थे. आज भी जब बीजेपी के नेताओं की पत्रकार वार्ताओं में सुखराम शब्द का ज़िक्र आता है, वे खिसिया जाते हैं. लगता है कि मौजूदा टेलीकाम घोटाले के बाद भी बीजेपी का वही हाल होने वाला है. क्योंकि 1999 से लेकर 2004 तक बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार की आँखों के तारे रहे रतन टाटा ने बीजेपी की पोल खोलने का काम शुरू कर दिया है.