भगत सिंह, राजदेव और सुखबीर की याद में दीया जरूर जलाएं!

आप भी चौंक गये होंगे ये पढ़कर “भगत सिंह, राजदेव और सुखबीर की याद में कल अपनी छत पर एक दीया जरूर जलाएं” और सोच रहे होंगे कि कहीं मैं अपने आपको बड़ा लेखक तो नहीं समझने लगा हूं और फिर आपके दिमाग में सवाल आया होगा कि शहीद भगत सिंह तो ठीक है, लेकिन राजदेव और सुखबीर कब शहीद हो गये पता ही नहीं चला. दरअसल राजदेव और सुखबीर को मेरे एक दोस्त ने शहीद कर दिया है.

अब मेरी रिक्‍वेस्‍ट सदा पेंडिंग ही रहेगी!

जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार आलोक तोमर जी अब हमारे बीच नहीं रहे, कल होली के दिन वो हमें अलविदा कह गये. ये जानकर बहुत दुःख हुआ. जिस दिन सारा देश होली के रंग में डूबा हुआ था, उस दिन आलोक तोमर जी कैंसर से लड़ाई लड़ रहे थे. कैंसर से ये उनकी लड़ाई तक़रीबन चार-पांच महीने से कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी. आलोक तोमर जी भी कहा हार मानने वाले थे, कई बार कैंसर उन्हें हॉस्‍पीटल तक खींच लाया, लेकिन हर बार वो कैंसर को मात देकर घर लौट आया करते थे, लेकिन इस बार…यकीन नही होता, पर मौत एक सच्चाई है.