बिहार का विश्‍लेषण करती श्रीकांत की ‘बिहार : राज और समाज’

राजबिहार अपने खास तेवर के लिए जाना जाता है। यहां की राजनीतिक प्रखरता के बावजूद यह राज्य विकास के पटरी पर सालों से नहीं आया। यहां राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक सहित अन्य पहलुओं में बहुत कुछ बदलाव देखा जाता रहा है। बावजूद यह वह मुकाम नहीं पा सका जो अन्य राज्यों ने पाया। राजनीतिक इच्छा शक्ति ने इसे पिछड़े राज्यों के अंतिम पायदान पर ला खड़ा किया। बिहार की सत्ता पर काबिज होने वाली पार्टियां भी न्याय नहीं कर पायी। देश के बाहर बिहारी शब्द गाली बनी। बिहार में बीस सालों में बहुत कुछ बदल गया है। सत्ताधारी पार्टी के एकाधिकार के खिलाफ नयी ताकत को जनता ने सत्ता के रंगमंच बैठाया। बिहार में विकास का सवाल उठा। आर्थिक विकास के साथ-साथ बिहार की गरिमा के लिए गोलबंद होने का दौर शुरू हुआ।