अतुलजी की मौत को झुठला देने की कोशिश कर रहे हैं

अतुलजी के साथ काम करने का मौका अमर उजाला की कानपुर यूनिट खुलने के दौरान मिला। मैं भी लॉचिंग टीम में था। उस वक्त यूनिट खोलने की तैयारी जोरों पर थी। तब स्थानीय सम्पादक के तौर पर आदरणीय अच्युतानंद जी पर जिम्मेदारी थी। पहले से किये वायदे के मुताबिक 14 फरवरी 92 को अतुलजी कानपुर पहुंचे और मुझे बुलाकर अच्युताजी से मुलाकात कराई। अखबार मालिक होने के बावजूद अतुलजी ने उनसे कहा कि ये सुनीत हैं और अपने साथ जुड़ना चाहते हैं। बस दूसरे दिन से मैं भी लांचिंग टीम में शामिल हो गया।