सुधीर अग्रवाल को पत्र लिखकर की इस्तीफे की पेशकश

दैनिक भास्‍कर, अलवर में पिछले पांच सालों से कार्यरत सुरेश शर्मा ने अपने मैनेजिंग डाइरेक्‍टर सुधीर अग्रवाल को पत्र लिखा है. पत्र में उन्‍होंने अलवार एडिशन में चल रही गतिविधियां एवं अपनी परेशानियों का जिक्र किया है. उन्‍होंने अलवर के कार्यकारी संपादक डा. प्रदीप भटनागर द्वारा प्रताडि़त किए जाने का आरोप लगाते हुए अपने इस्‍तीफे की पेशकश की है. उन्‍हों ने कहा है कि अगर संभव हो तो इस पत्र को ही उनका इस्‍तीफा समझा जाए.

नीचे सुरेश शर्मा द्वारा सुधीर अग्रवाल को लिखा गया पत्र.


सुधीर अग्रवाल

मैनेजिंग डायरेक्टर,

दैनिक भास्कर समूह।

पत्र लिखने का सबब : अलवर क‍े संपादक डॉ. भटनागर द्वारा दी जा रही प्रताडऩा के क्रम में। अब तक कई छोड़ भागे। गलत हरकतों से संस्थान की इज्जत दांव पर।

आदरणीय भाई साहब,

मुझे दर्द असहनीय और वृहद होने के सबब आपके समय की कीमत का भान होने के बावजूद आपको तुच्छ बात के लिए कष्ट देना पड़ रहा है। मेरी व्यथा है कि मैं दैनिक भास्कर के अलवर संस्करण में 23 दिसंबर 2006 को उप संपादक के रूप में जुड़ा। इससे पूर्व दैनिक अरुण प्रभा में सह संपादक के रूप में डेढ़ दशक तक कार्यरत रहा। जहां मैं कंप्यूटर तकनीक से बिल्कुल अनभिज्ञ था। दैनिक भास्कर से जुडऩे पर मुझे पेन लेस न्यूज चलाने का अवसर मिला। चूंकि मैंने स्टेनो और टाइप की थी। अत: त्वरित पकड़ बनाने में कतई परेशानी नहीं हुई। इसके बाद तत्कालीन संपादक आदरणीय श्री प्रदीप द्विवेदी जी ने क्रमश: धौलपुर और भरतपुर जिलों का प्रभार सौंपकर वहां से आने वाले समाचार संपादित कर ऑपरेटर्स से पेज लगवाने की जिम्मेदारी दी। इसके बाद उनका तबादला जयपुर हो गया और श्री श्याम शर्मा नए संपादक आए। उन्होंने स्टॉफ की स्टडी के बाद मुझे अलवर जिले का प्रभार सौंपा। जिसे भाई प्रदीप यादव और पुष्पेश शर्मा के सहयोग से मैंने बखूबी निभाया।

इसके बाद विश्व स्तरीय मंदी के दौरान भास्कर में ऑपरेटर पद समाप्त कर सब एडिटर्स को क्वार्क में पेज मेकिंग सिखाई गई और ऑपरेटर्स को सब एडिटर बनाया गया। बहुत अच्छा प्रयोग रहा। तभी से नियमित जिले के समाचार चलाकर एक पेज जिला और एक सिटी स्वयं बनाने की जिम्मेदारी मिली। जो बखूबी निभाई। तदुपरांत मैट्रिक्स का दौर आया और उसमें भी सफल रहे। लेकिन अब आए विश्व स्तरीय तकनीक इन डिजाइन के प्रति हम अति उत्साहित थे। परिणाम स्वरूप विश्वास नहीं होने के बावजूद खरे उतरे और गत 4 सितंबर से अब तक दो पेज लगाए। शुरुआती दौर था तो ट्रेंड ऑपरेटर्स की मदद भी ली, लेकिन उत्साह अधिक था कि अब हम इस तकनीक से जुडक़र बहुत आगे हो जाएंगे। हमारी परफॉर्मेंस भी कामयाब रही।

भाई साहब आप इस परिवार के मुखिया हैं। आपको यह बताना कष्टप्रद है कि जब से इस संस्करण में हिसार (हरियाणा) से माननीय डॉ. प्रदीप भटनागर कार्यकारी संपादक साहब आए हैं। तभी से भास्कर के एडिटोरियल की कर्णधार (ग्रास रुट) अतिनिराश है। कारण उनका, पक्षपातपूर्ण रवैया, अधीनस्थों को प्रताडऩा और पद के अनुरूप व्यावहारिक ज्ञान का अभाव। एक ओर दैनिक भास्कर जहां एक अप्रशिक्षित या अर्द्धप्रशिक्षित संपादकीय सहयोगी की भर्ती कर उसे प्रशिक्षित करने में वर्षों से जाया करता है। वहीं मुझे कहते हुए खेद है कि डॉ. प्रदीप भटनागर साहब ने भाई यशवंत अग्रवाल मोबाइल नंबर 09829058811, भाई प्रदीप यादव मोबाइल नंबर 09672971502 और अब मुझे त्यागपत्र नहीं देने पर बर्खास्त करने की चेतावनी दी है। यशवंत जी और प्रदीप जी भास्कर से ही जुड़े रहने की तमन्ना रखते थे, लेकिन उन्हें अपनी इज्जत बचाने के लिए त्यागपत्र देना पड़ा।

इसी तरह मदर एडिशन पर वर्षों से सफलतापूर्वक कार्य कर रहे भाई गीतेश शर्मा मोबाइल नंबर 07891341144 जो कि किसी भी परिस्थिति में एडिशन समय पर निकालने का माद्दा रखते थे। उन्हें सब एडिटर के पद पर नियुक्त करने की बधाई देने के बावजूद ऐसी परिस्थितियां पैदा कर दी गई कि उन्हें भी विवश होकर त्यागपत्र देना पड़ा। ये अलग बात है कि अब वे भास्कर से दो गुने वेतन पर लेकिन छोटे अखबार में अलवर से बाहर सेवारत हैं। उन दोनों की जगह डॉ. साहब इलाहबाद और बिहार से उनसे करीब दो गुना सीटीसी पर अरुणाभ मिश्रा व सौरभ सिंह को लाए। जिनमें से अरुणाभ मिश्रा भी प्रताडऩा नहीं झेलने के कारण त्यागपत्र देकर जा चुके हैं। अब मेरे साथ भी यही हो रहा है। त्यागपत्र नहीं देने पर बर्खास्त करने की चेतावनी दी गई है। 13 सितंबर को मुझे रात के साढ़े आठ बजे के करीब अपने चेंबर में बुलाकर यह चेतावनी दी गई। जिससे मुझे डिप्रेशन में उन्हें त्यागपत्र का आश्वासन देकर कार्यालय छोडक़र बीच में ही आना पड़ा।

मेरी उम्र 48 वर्ष और पत्रकारिता का अनुभव 20 वर्ष है। दैनिक भास्कर से मेरा इमोशनल जुड़ाव है। शेष समय भी इसी संस्थान में देने की इच्छा थी। लेकिन मन भर आया है कि कैसे लिखूं त्याग पत्र। मेरी परिस्थितियां मुझे अलवर रहकर ही कार्य करने को विवश कर रही हैं। मेरे ऊपर 88 वर्षीय माताजी, दो बेटे 10 व 9 वर्ष तथा पत्नी सहित एक भांजे का भी भार है। मैं भलिभांति जानता हूं कि दैनिक भास्कर में मैने गत पांच वर्ष में जो सीखा उसकी बदौलत मुझे भास्कर में मिलने वाले वेतन से डेढ़ से दो गुणा तक पगार दूसरे किसी अखबार में मिल जाएगी, लेकिन उसके लिए संभव है मुझे इस विपरित परिस्थितिवश घर छोडऩा पड़े और एक-दो महीने का समय लग जाए। इसके अलावा जो उत्साह भास्कर से जुड़ाव का था वह क्षीण हो जाएगा और एक अर्से बाद नॉर्मल हो पाएंगे।

श्रीमान जी से निवेदन है कि मुझे उचित न्याय यदि नहीं भी दिला पाएं तो मेरे स्वाभिमान की रक्षा करते हुए इसे त्याग पत्र पूर्व एक माह के नोटिस की मान्यता प्रदान कर वांछित लाभ-परिलाभ दिलाने की अवश्य कृपा करें। या इसे ही त्यागपत्र समझें। मान्यवर

उचित न्याय की अपेक्षा सहित।

विशेष :- भाईसाहब मुझको तो वे हटा देंगे लेकिन आपसे एक अनुरोध हैं कि संस्थान की छवि बचाने के लिए डॉ. भटनागर के निवास स्थान के आस-पास जांच कराएं। वहां क्या हो रहा है, पूरी स्कीम एक की, महिलाएं क्या बातें करती हैं? किस बारे में करती हैं और भास्कर किस तरह कोसा जाता है। इस व्यक्ति ने हद की सीमा पार कर दी है।

प्रार्थी

सुरेश शर्मा

उपसंपादक

दैनिक भास्कर, अलवर

मो. 09672940542

Email : suresh.sharma@raj.bhaskarnet.com