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राष्‍ट्रीय सहारा, लखनऊ के 20 साल पूरे, केक काटकर मनाई खुशियां

: सुब्रत राय का लिखित संदेश पढ़ा गया : सहारा इंडिया परिवार के प्रबंध कार्यकर्ता एवं चेयरमैन सहाराश्री सुब्रत रॉय सहारा ने कहा है कि मीडिया को सकारात्मक दृष्टिकोण पैदा करना चाहिए. सहारा इंडिया परिवार के प्रबंध कार्यकर्ता एवं चेयरमैन सहाराश्री सुब्रत रॉय सहारा ने कहा है कि मीडिया का कार्य महज सूचना देना नहीं होना चाहिए बल्कि अपने दर्शकों और पाठकों को राष्ट्र और समाज के प्रति जागरूक करते हुए उनमें सकारात्मक दृष्टिकोण पैदा करना चाहिए.

: सुब्रत राय का लिखित संदेश पढ़ा गया : सहारा इंडिया परिवार के प्रबंध कार्यकर्ता एवं चेयरमैन सहाराश्री सुब्रत रॉय सहारा ने कहा है कि मीडिया को सकारात्मक दृष्टिकोण पैदा करना चाहिए. सहारा इंडिया परिवार के प्रबंध कार्यकर्ता एवं चेयरमैन सहाराश्री सुब्रत रॉय सहारा ने कहा है कि मीडिया का कार्य महज सूचना देना नहीं होना चाहिए बल्कि अपने दर्शकों और पाठकों को राष्ट्र और समाज के प्रति जागरूक करते हुए उनमें सकारात्मक दृष्टिकोण पैदा करना चाहिए.

यह बात उन्होंने राष्ट्रीय सहारा लखनऊ की 20वीं वषर्गांठ के मौके पर आयोजित समारोह में राष्ट्रीय सहारा कर्तव्ययोगियों को भेजे अपने संदेश में कही. सहाराश्री ने कहा कि सहारा इंडिया परिवार का मीडिया समूह राष्ट्रहित को सर्वोच्च मानते हुए अपनी भूमिका तय करता रहा है. उन्होंने राष्ट्रीय सहारा लखनऊ द्वारा इस दायित्व के सफल निर्वहन के लिए समस्त कर्तव्ययोगियों को आशीर्वाद प्रेषित किया. मुख्य अभिभावक सहाराश्री सुब्रत रॉय सहारा के संदेश को पढ़ते हुए उप प्रबंध कार्यकर्ता ओपी श्रीवास्तव ने कहा कि स्वस्थ एवं सकारात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए समाचार पत्रों को तथ्यपरक और पाठकों की जिज्ञासा को शांत करने वाली सामग्री प्रस्तुत करनी चाहिए. इससे सकारात्मक पत्रकारिता को बल मिलता है.

सहारा इंडिया टावर के भव्य ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में श्री श्रीवास्तव ने कहा कि नयी दिल्ली और उसके बाद लखनऊ से प्रकाशन के साथ हम अपनी विकास यात्रा में सात प्रकाशन केन्द्रों के साथ 50 संस्करणों की मंजिल पूरी कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि किसी खबर या न्यूज सोर्स को छोटा नहीं समझना चाहिए. कभी-कभी ये खबरें बहुत बड़ी हो जाती हैं. हमें अपनी सोच का विस्तार करना जरूरी है. उन्होंने सहाराश्री के सूत्र वाक्य का जिक्र करते हुए कहा कि छोटी-छोटी बातों का अगर हम ध्यान रखें तो बड़ी-बड़ी बातें अपने आप ठीक हो जाती हैं.

इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि गलतियां या भूल सभी से होती हैं लेकिन गलतियों का अहसास करना और उनसे सीखना बड़ी बात है. हमें भूल सुधार में कभी भी पीछे नहीं रहना चाहिए. उन्होंने राष्ट्रीय सहारा के प्रारम्भिक दौर के संस्मरणों को भी सहारा कर्तव्ययोगियों के साथ बांटा और अपेक्षा की कि सभी पूरे उत्साह के साथ अखबार की तरक्की में जुटेंगे जैसा कि वर्ष 1992 में जुटे थे और राष्ट्रीय सहारा को सौ दिनों में नम्बर वन की श्रेणी में ला खड़ा किया था.

राष्ट्रीय सहारा की 20वीं वषर्गांठ पर केक कटिंग सेरेमनी पर सहारा इंडिया परिवार के वरिष्ठ सदस्य आरएस दुबे, विवेक सहाय, करुणेश अवस्थी, पवन कपूर, रि. कर्नल बीपीएस तुलसी, सहारा इंडिया मीडिया के हेड स्वतंत्र मिश्र, समूह सम्पादक रणविजय सिंह, सम्पादक एसएनबी विजय राय, प्रशासनिक प्रमुख टीबी श्रीवास्तव, लखनऊ के यूनिट हेड राजेन्द्र द्विवेदी, लखनऊ के स्थानीय सम्पादक मनोज तोमर, गोरखपुर के यूनिट हेड पीयूष बंका, सम्पादकीय प्रमुख मनोज तिवारी, कानपुर के स्थानीय सम्पादक नवोदित, पटना के स्थानीय सम्पादक हरीश पाठक, उर्दू लखनऊ संस्करण के प्रभारी कलाम खान के अतिरिक्त सहारा इंडिया मीडिया लखनऊ के सभी कर्तव्ययोगी भी उपस्थित थे. साभार : समय

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