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केबल ऑपरेटरों की 26 फीसदी हिस्‍सेदारी खरीदने की तैयारी में रिलायंस

देश की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) प्रमुख मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों समेत केबल ऑपरेटरों की कम से कम 26 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की योजना बना रही है। ग्राहकों तक 4जी ब्रॉडबैंड सेवाओं की पहुंच आसान बनाने के तहत कंपनी यह कदम उठा रही है। दो स्वतंत्र सूत्रों के मुताबिक आरआईएल ने इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए डेन नेटवर्क्‍स, डिजिकेबल नेटवर्क्‍स, हैथवे केबल, हिंदुजा प्रवर्तित इंडसइंड मीडिया ऐंड कम्युनिकेशंस लि. (इन केबल) और कई अन्य मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों संपर्क किया है। साथ ही कंपनी की ओर से क्षेत्रीय बाजार में अच्छी पैठ रखने वाले छोटे ऑपरेटरों के साथ भी संपर्क किया गया है। मौजूदा समय में देश भर में 6,000 से ज्यादा केबल ऑपरेटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

देश की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) प्रमुख मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों समेत केबल ऑपरेटरों की कम से कम 26 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की योजना बना रही है। ग्राहकों तक 4जी ब्रॉडबैंड सेवाओं की पहुंच आसान बनाने के तहत कंपनी यह कदम उठा रही है। दो स्वतंत्र सूत्रों के मुताबिक आरआईएल ने इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए डेन नेटवर्क्‍स, डिजिकेबल नेटवर्क्‍स, हैथवे केबल, हिंदुजा प्रवर्तित इंडसइंड मीडिया ऐंड कम्युनिकेशंस लि. (इन केबल) और कई अन्य मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों संपर्क किया है। साथ ही कंपनी की ओर से क्षेत्रीय बाजार में अच्छी पैठ रखने वाले छोटे ऑपरेटरों के साथ भी संपर्क किया गया है। मौजूदा समय में देश भर में 6,000 से ज्यादा केबल ऑपरेटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

इससे पहले आरआईएल ने मीडिया समूह टीवी18 की दो प्रमुख कंपनियों में राइट इश्यू के जरिये निवेश करने का निर्णय किया था। इस कदम से आरआईएल की अपनी 4जी ब्रॉडबैंड इंटरनेट उद्यम के लिए सामग्र्री की उपलब्धता आसान हो सकेगी। आरआईएल ने पिछले साल महेंद्र नाहटा की इन्फोटेल ब्रॉडबैंड सर्विसेज लिमिटेड में 95 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। कंपनी के पास देश भर में ब्रॉडबैंड वायरलेस सेवाएं मुहैया कराने के लिए 4जी स्पेक्ट्रम उपलब्ध है। अपनी योजना का खुलासा करते हुए आरआईएल के प्रवक्ता ने कहा कि इन्फोटेल देश भर में किफायती और बेहतर वायरलेस ब्रॉडबैंड और ब्रॉडबैंड आधारित डिजिटल सेवाएं मुहैया कराने की कोशिश में जुटी है। इसके तहत इन्फोटेल खुद की परिसंपत्तियों के अलावा साझेदार नेटवर्क मॉडल पर काम कर रही है। कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि इन्फोटेल इस क्षेत्र के प्रमुख ऑपरेटरों के साथ साझेदारी के लिए बातचीत कर रही है, जो ग्राहकों और साझेदारों दोनों के लिए फायदे का सौदा होगा। हालांकि आरआईएल ने यह बताने से इनकार कर दिया कि उसकी किन कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है।

मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों और केबल ऑपरेटरों ने भी आरआईएल के साथ किसी तरह की बातचीत के बारे में टिप्पणी करने से मना कर दिया। डेन नेटवर्क्‍स के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक समीर मनचंदा, इंडसइंड मीडिया के प्रबंध निदेशक रवि मनसुखानी और हैथवे केबल के सीईओ के जयरामन तथा डाटाकॉम ने इस मसले पर टिप्पणी से इनकार किया। सरकार ने महानगरों के लिए 2012 में और देश भर में 2014 तक केबल डिजिटलाइजेशन की समय सीमा तय की है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए केबल ऑपरेटरों और मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों को करीब 25,000 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। डेन नेटवर्क्‍स ने अगले तीन साल में 1,500 करोड़ रुपये निवेश की योजना बनाई है वहीं हैथवे ने कहा कि वह पहले चरण में केबल डिजिटलाइजेशन पर करीब 500 से 600 करोड़ रुपये खर्च करेगी। विश्लेषकों के अनुसार ज्यादातर मल्टी सिस्टम ऑपरेटर डिजिटलाइजेशन के लिए फंड जुटाने की तैयारी कर रहे हैं, जिनमें हिस्सेदारी बेचने की योजना भी शामिल है। केपीएमजी की रिपोर्ट के मुताबिक 2010 तक देश भर के 10.3 करोड़ घरों में केबल कनेक्शन उपलब्ध थे। इनमें से 6.8 करोड़ घरों में एनालॉग केबल जबकि 2.8 करोड़ घरों में डीटीएच और 50 लाख घरों में डिजिटल केबल थे।

आरआईएल 4जी सेवाएं देने की योजना बना रही है, जिसके लिए कंपनी डाटा और सामग्री के लिए मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों के साथ साझेदारी की संभावना तलाश रही है। अगर कंपनी इस योजना में सफल रहती है तो उसकी तकनीक की पहुंच व्यापक स्तर पर हो सकेगी। इस सेवा के शुरू होने के बाद ज्यादातर घरों में टेलीविजन से लेकर टैबलेट उपकरणों तक इंटरनेट की पहुंच आसान होगी। अन्स्र्ट ऐंड यंग में मीडिया एवं मनोरंजन प्रमुख (यूरोप, इंडिया और पश्चिम एशिया व अफ्रीका) फारूक बलसारा ने कहा कि पहुंच बढ़ाने के लिए आरआईएल मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों के साथ साझेदारी की संभावना तलाश रही है। आरआईएल की योजना शुरुआती चरण में देश के 100 शहरों में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के जरिए जुडऩा है। केबल ऑपरेटर और मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों के पास देश भर में पहले से ही करीब 1 लाख किलोमीटर तक फाइबर नेटवर्क है, जिसका लाभ आरआईएल उठाना चाहती है। हालांकि मुकेश अंबानी को केबल, प्रसारण और डीटीएच कंपनियों में क्रॉस होल्डिंग को लेकर नियामकीय मसलों से भी रूबरू होना पड़ सकता है क्योंकि इनमें से प्रत्येक में 20 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी नहीं हो सकती है। साभार : बीएस

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