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टीवी टुडे का लाभ 63 फीसदी घटा, टीवी18 और एनडीटीवी को करोड़ों का घाटा

: जी न्‍यूज को 10 करोड़ का फायदा : महात्मा गांधी ने पूंजीपतियों को जनता के धन का ट्रस्टी होने की बात कही थी। मार्क्स-एंगेल्स ने भी पूंजी के स्वामित्व को व्यापक आधार देने की वकालत की थी। लिस्टेड कंपनियां शेयर बाजार के जरिए इसी स्वामित्व का विस्तार करती हैं। लेकिन एक तो हमारे लचर कानून, दूसरे कंपनी के मामलों में आम शेयरधारकों की निष्क्रियता के चलते भारतीय प्रवर्तक जनधन के ट्रस्टी के बजाय उसकी निजी लूटखसोट में व्यस्त हैं। इसे ठीक करने के लिए जरूरी है कि हम शेयरों के बढ़ने-गिरने जितना ही वास्ता इस बात से रखें कि कंपनी सही तरीके चल रही है या नहीं। कंपनी सही चलेगी तो शेयर अपने-आप ही बढ़ेंगे क्योंकि शेयर और कुछ नहीं, बस कंपनी की काया की छाया ही तो हैं।

: जी न्‍यूज को 10 करोड़ का फायदा : महात्मा गांधी ने पूंजीपतियों को जनता के धन का ट्रस्टी होने की बात कही थी। मार्क्स-एंगेल्स ने भी पूंजी के स्वामित्व को व्यापक आधार देने की वकालत की थी। लिस्टेड कंपनियां शेयर बाजार के जरिए इसी स्वामित्व का विस्तार करती हैं। लेकिन एक तो हमारे लचर कानून, दूसरे कंपनी के मामलों में आम शेयरधारकों की निष्क्रियता के चलते भारतीय प्रवर्तक जनधन के ट्रस्टी के बजाय उसकी निजी लूटखसोट में व्यस्त हैं। इसे ठीक करने के लिए जरूरी है कि हम शेयरों के बढ़ने-गिरने जितना ही वास्ता इस बात से रखें कि कंपनी सही तरीके चल रही है या नहीं। कंपनी सही चलेगी तो शेयर अपने-आप ही बढ़ेंगे क्योंकि शेयर और कुछ नहीं, बस कंपनी की काया की छाया ही तो हैं।

हमें कंपनियों के धंधे को समझने की जरूरत है। इसी कड़ी में आज हम यह समझने की कोशिश करते हैं कि देश भर में किसी भी अखबार से ज्यादा देखे जानेवाले न्यूज़ चैनलों को चलानेवाली कंपनियां आखिर घाटे में क्यों चल रही है। ऐसी सभी प्रमुख कंपनियों के दिसंबर तिमाही के नतीजे पिछले हफ्ते आए हैं। चालू वित्त वर्ष 2011-12 की तीसरी तिमाही में ‘सबसे तेज चैनल’ की मालिक कंपनी टीवी टुडे नेटवर्क की कमाई 5.89 फीसदी घटकर 78.68 करोड़ और शुद्ध लाभ 62.63 फीसदी घटकर 3.55 करोड़ रुपए पर आ गया है। इससे पहले की दो तिमाहियों में तो कंपनी को लाभ नहीं, घाटा हुआ था।

सीएनबीसी टीवी18 से लेकर आवाज़ व कलर्स जैसे चैनलों और मनीकंट्रोल व कमोडिटी कंट्रोल जैसी साइटों की मालिक कंपनी नेटवर्क18 की कमाई तो दिसबर तिमाही में 136.69 फीसदी बढ़कर 25.87 करोड़ रुपए हो गई है, लेकिन इस पर उसे 15.65 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। इसी समूह की अन्य कंपनी टीवी18 ब्रॉडकास्ट को दिसंबर तिमाही में आय के 115.54 फीसदी बढ़ जाने के बावजूद 13.76 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है।

टेलिविजन न्यूज़ की दुनिया में निष्पक्षता व प्रोफेशनल नजरिये के लिए अपना सिक्का जमा चुके प्रणय रॉय की कंपनी एनडीटीवी का हाल काफी खराब चल रहा है। बीते वित्त वर्ष 2010-11 में इसे 355.29 करोड़ रुपए की आय पर 98.63 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। अकेले मार्च 2011 की तिमाही का घाटा 23.18 करोड़ रुपए का था। इसके बाद चालू वित्त वर्ष 2011-12 की जून तिमाही में कंपनी को 9.81 करोड़ रुपए और सितंबर तिमाही में 10.69 करोड़ रुपए का घाटा हो चुका है। अजीब बात है कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता की वकालत करनेवाली इस कंपनी ने दिसंबर तिमाही के नतीजों को 9 फरवरी को अंतिम रूप दिए जाने के बाद भी न तो स्टॉक एक्सचेंजों और न ही अपनी वेबसाइट पर उजागर किया है।

खैर, दिसंबर 2011 की तिमाही में कंपनी 110.57 करोड़ रुपए की कमाई पर 2.39 करोड़ रुपए का घाटा उठाया है। अच्छी बात यह है कि उसका घाटा काफी कम हो गया है क्योंकि साल भर पहले दिसंबर 2010 की तिमाही में उसे 96.67 करोड़ रुपए की आय पर 17.08 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। घाटा कम होने का ही असर है कि शुक्रवार, 10 फरवरी को उसका चार रुपए अंकित मूल्य का शेयर एनएसई (कोड – NDTV) में 3.16 फीसदी बढ़कर 47.30 रुपए और बीएसई (कोड – 532529) में 4.20 फीसदी बढ़कर 47.15 रुपए पर बंद हुआ है।

कंपनी के आईपीओ में चार रुपए अंकित मूल्य के यही शेयर अप्रैल 2004 में 70 रुपए पर जारी किए गए थे। उस वक्त एनडीटीवी इंडिया में एक आउटपुट एडिटर होने के नाते मुझे भी कर्मचारी कोटे से शेयर ऑफर किए गए थे। लेकिन मैंने कंपनी के फंडामेंटल्स को देखते हुए इसे बहुत महंगा बताकर नहीं लिया था। अब करीब आठ सालों में अपनी पूंजी के घटकर आधा रह जाने से कंपनी के कर्मचारी ही नहीं, निवेशक भी जरूर रो रहे हैं। अभी तो हालत यह है कि उसका शेयर ट्रेड फॉर ट्रेड की श्रेणी में डला हुआ है, जहां तरलता एकदम सूख जाती है।

टेलिविजन न्यूज़ के धंधे एकमात्र फायदा कमानेवाली कंपनी है ज़ी न्यूज़। उसने बीते साल 2010-11 में 243.10 करोड़ रुपए की आय पर 9.78 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था। चालू वित्त 2011-12 में जून की तिमाही में उसका शुद्ध लाभ 91.95 फीसदी घट गया था। लेकिन सितंबर में यह 1940 फीसदी (19.40 गुना) बढ़ गया। दिसंबर तिमाही में उसकी आय 7.17 फीसदी बढ़कर 69.62 करोड़ रुपए हो गई है तो शुद्ध लाभ 112.40 फीसदी बढ़कर 8.39 करोड़ रुपए हो गया है। यह अलग बात है कि इसका एक रुपए अंकित मूल्य का शेयर 20 दिसंबर 2011 को 8.65 रुपए की तलहटी पकड़ने के बाद फिलहाल 11-12 रुपए के आसपास डोल रहा है। शुक्रवार, 10 फरवरी 2012 को यह बीएसई (कोड – 532794) में 11.14 रुपए और एनएसई (कोड – ZEENEWS) में 11.15 रुपए पर बंद हुआ है।

आखिर सबसे घाटे और ज़ी न्यूज़ के मुनाफे का कारण क्या है? इकलौता और सबसे अहम कारण यह है कि ज़ी के पास वितरण का अपना केबल व डीटीएच नेटवर्क है। आप कहेंगे कि सन टीवी के पास भी तो अपना केबल व वितरण नेटवर्क है। फिर दिसंबर तिमाही में उसकी आय 29 फीसदी और शुद्ध लाभ 25 फीसदी क्यों गिर गया? तो, इसका जवाब है कि यह डीएमके नेता दयानिधि मारन के बड़े भाई कलानिधि मारन की कंपनी है और तमिलनाडु में उनकी विरोधी जयललिता की सरकार है।

टीवी18 ग्रुप से विदा ले रहे उसके सीईओ हरेश चावला ने कुछ महीने पहले एक इंटरव्यू में बड़े पते की बात कही थी। उनका कहना था, “यह पूरा उद्योग ही विसंगति का शिकार है। अगर आप कैरिज फीस घटा दें तो हम दरअसल काफी मुनाफा कमा रहे हैं। एनालॉग केबल ने कैरिज फीस का चक्कर पैदा किया है। यह विकृति पिछले पांच सालों में उद्योग पर बहुत भारी पड़ी है। आप इस विकृति को हटा दें तो पाएंगे कि टेलिविजन बिजनेस आज के बाजार में सबसे ज्यादा मुनाफे वाला बिजनेस है। न्यूज चैनलों की लागत का बड़ा हिस्सा कैरिज फीस के रूप में चला जाता है। अन्यथा वे बेहद लाभप्रद हैं।”

लेखक अनिल रघुराज वरिष्‍ठ आर्थिक पत्रकार हैं. उनका यह लेख अर्थकाम से साभार लेकर प्रकाशित किया गया है.

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