यशवंत भाई नमस्कार. कुरुक्षेत्र की धरती पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पत्रकारिता संस्थान के तत्वावधान में इन दिनों अंतराराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव चल रहा है. बड़े दुख की बात है कि इस उत्सव को इतना बड़ा नाम देकर पत्रकार तैयार करने वाला संस्थान जनता को धोखा दे रहा है. अंतरराष्ट्रीय की बात तो बहुत दूर है, इसमें राष्ट्रीय स्तर की भी कोई जानी-मानी हस्ती नहीं पहुंची है. पांच दिन चलने वाले इस समारोह का समापन शनिवार को होगा.
जो कार्यक्रम के आयोजक और कर्ताधर्ता बन रहे हैं वो महाशय विश्वविद्यालय का कोई अध्यापक या कर्मचारी नहीं बल्कि खुद को फिल्म जगत का बड़ा समीक्षक बताते हैं. हकीकत ये है कि वो शख्स सिर्फ और सिर्फ कई साल तक एक हिंदी अखबार के पत्रकार रहे हैं, इससे ज्यादा कुछ नहीं. ये वही महाशय हैं जो विश्वविद्यालय से पैसा लेकर फिल्मी दुनिया के लोगों को कार्यक्रम में बुलाने में मध्यस्थ का काम करनते हैं. चंद बहुत कम जाने हुए फिल्म निर्देशक, जिन्होंने टेली फिल्म से आगे काम नहीं किया है, को बुलाकर पत्रकारिता के विद्यार्थियों को ठगने का काम कर रहे हैं.
मैं भी कार्यक्रम में भाग लेने वाला एक विद्यार्थी रहा हूं. जब देखा कि इतने बड़े स्तर पर धोखा हो रहा है तो सोचा कि आपके भड़ास के माध्यम से अपनी बात रखता हूं. बहुत बड़ा सवाल है कि कुछ लोग फिल्म महोत्सव करने के नाम पर पूरे देश को धोखा दे रहे हैं. और यहां अमिताभ बच्चन जैसे बड़े कलाकारों को भी नकली समीक्षक बेकार कलाकार बता रहे हैं. कोई पूछने वाला नहीं है. एक बात और कार्यक्रम के नाम पर दलाली करने वाले शख्स ने तो पिछले दिनों हरियाणा के यमुनानगर जैसे शहर में भी इसी स्तर के फिल्म महोत्सव का धोखा भरा आयोजन किया है.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





