अंबिकानंद सहाय, जगमोहन शर्मा और वैशाली चौधरी के बारे में सूचनाएं

ईटीवी का हिमाचल रीजनल चैनल जल्द आ रहा है. चैनल ने हिमाचल प्रदेश की कमान जगमोहन शर्मा के हाथों सौंपी है. जगमोहन शर्मा पिछले लगभग 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम कर रहे हैं. इससे पहले वे श्रीन्यूज के प्रदेश प्रमुख भी रह चुके हैं. साथ की कई अन्य चैनलों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. दैनिक जागरण और रेडियो के लिए भी काम कर चुके हैं.

ये भी सूचना है कि ईटीवी हिमाचल हरियाणा चैनल का एडिटर शशि भूषण को बनाया गया है. शशि भूषण पंजाब केसरी, दैनिक भास्कर आदि जगहों पर काम कर चुके हैं.

एक अन्य जानकारी के मुताबिक वैशाली चौधरी ने दिया DAY & NIGHT से इस्तीफ़ा. हरियाणा और हिमाचल के क्षेत्रीय चैनल DAY & NIGHT  की माली हालत से तंग आकर चैनल की प्रमुख एंकर वैशाली चौधरी ने इस्तीफ़ा दे दिया है. चैनल प्रमुख अतुल ने वैशाली से गुज़ारिश की कि वे चैनल ना छोड़ें. मगर वैशाली ने अपना फैसला नहीं बदला. पिछले लगभग 20 महीनों से चैनल ने किसी भी स्टींगर को पैसे नही दिए हैं. अच्छा स्टाफ चैनल से जा चुका है. चैनल किसी तरह चुनाव निकालना चाहता है. उसके बाद चैनल के मालिक चैनल चलाने के मूड में नहीं हैं.

बड़े पत्रकार अंबिकानंद सहाय के बारे में खबर है कि आजाद न्यूज चैनल को बंद कराकर मध्य प्रदेश लौट गए हैं. वे चैनल के न्यूज डायरेक्टर थे. अंबिकानंद सहाय ने चैनल को तब तक अलविदा नहीं कहा जब तक कि चैनल बंद नहीं हो गया. ये चैनल महज काला धन छिपाने और राजनीतिक रसूख पैदा करने के इरादे से लाया गया था. चैनल संचालन में पेशेवराना रवैये का नितांत अभाव रहा. चैनल को बड़े व धूर्त पत्रकारों ने जमकर लूटा. आजाद न्यूज चैनल पत्रकारों के जबर्दस्त शोषण और श्रम कानूनों के उल्लंघन को लेकर बहुत विवादित और बदनाम रहा. चैनल के मालिक वालिया और उनकी बेटी तानिया पत्रकारों से गुलामों जैसा बर्ताव कर रहे थे. उन दिनों तब अंबिकानंद सहाय ने अपनी पत्रकारीय निष्ठा और नैतिकता को ताक पर रखकर दमकते और चमकते नोटों के लिए वालिया की काली करतूतों का चुपचाप और मुस्कराते हुए साथ दिया. आज जब आजाद न्यूज चैनल के नोएडा ऑफिस में बड़ा ताला लटक रहा है, कुछ पत्रकार अब भी अपनी सैलरी और बकाया राशि पाने की बाट जोह रहे हैं, तो ऐसे समय में पत्रकारों को उनका हक दिलाने के बजाय बताया जा रहा है कि अंबिकानंद सहाय मध्यप्रदेश चले गए हैं.  बताया जा रहा है कि सहाय जी ने आजाद पर ताला लगते देख खुद के लिए एक नई नौकरी तलाश ली और मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से छपने वाले किसी अखबार के मालिक को फांस लिया.  अंबिकानंद सहाय के अमानवीय आचरण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वर्गीय रवीन्द्र शाह जैसे पत्रकार का बकाया भी आजाद न्यूज ने अभी तक उनके परिवार को नहीं सौंपा है. वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र शाह ने आजाद न्यूज के बाद आउटलुक पत्रिका ज्वाइन कर ली थी. अमानवीयता की हद देखिए कि शाह जी के असामयिक निधन के साल भर बीत जाने के बाद भी उनका एक लाख रुपये से ज्यादा का बकाया आजाद न्यूज ने उनके परिवार को नहीं लौटाया. ऐसे में, अंबिकानंद जैसे लोगों को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता. दरअसल, अंबिकानंद सहाय का पूरा जीवन ही पत्रकारिता की साख को बट्टा लगाने और पत्रकारीय मूल्यों को गिरवी रख कर मालिकों और धनाढ्यों की चापलूसी, चाकरी करने की गवाही देता है. लखनऊ में टाइम्स ऑफ इंडिया का स्थानीय संपादक रहते हुए उनकी करतूतों का उल्लेख वरिष्ठ पत्रकार और उपन्यासकार दयानंद पांडेय ने अपनी किताब  ‘मीडिया तो अब काले धन की गोद में’ किया है. ‘यह मीडिया है कि भस्मासुर है?’ शीर्षक लेख में अंबिकानंद सहाय के बिकाऊ रवैये को रेखांकित करते हुए दयानंद लिखते हैं, “2 जून 1995 को लखनऊ में मुलायम सिंह ने सुबह-सुबह जिस तरह अपने गुंडों को मायावती पर हमले के लिए भेजा था, मुख्यमंत्री रहते हुए भी, वह तो अश्लील था ही, अपने पत्रकारों ने उससे भी ज़्यादा अश्लीलता बरती। पी.टी.आई ने इतनी बड़ी घटना को सिर्फ़ दो टेक में निपटा दिया तो टाइम्स आफ़ इंडिया ने शार्ट डी.सी. अंडरप्ले कर के दिया। बाद में इसके कारणों की पड़ताल की तब के जनसत्ता के संवाददाता हेमंत शर्मा ने। तो पाया कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पी.टी.आई के ब्यूरो चीफ़ खान और टाइम्स के तत्कालीन रेज़ीडेंट एडीटर अंबिकानंद सहाय ने मुलायम शासनकाल में विवेकाधीन कोष से लाखों रुपए खाए हुए थे। तमाम और पत्रकारों ने भी लाखों रुपए खाए थे। और वो जो कहते हैं कि राजा का बाजा बजा! तो भैय्या लोगों ने राजा का बाजा बजाया। आज भी बजा रहे हैं। खैर, हेमंत शर्मा ने जब इस बाबत खबर लिखी तो टाइम्स आफ़ इंडिया के तत्कालीन रेज़ीडेंट एडीटर अंबिकानंद सहाय ने हेमंत को नौकरी ले लेने की धमकी दी। पर न हेमंत बदले न बाजा बजाने वाले। आज भी बजा रहे हैं। बस राजा बदलते रहते हैं, भैय्या लोग बाजा बजाते रहते हैं।” दयानंद पांडेय का ये लेख उनके ब्‍लॉग सरोकारनामा पर भी उपलब्ध है। अंबिकानंद सहाय पर मुलायम सिंह यादव और एन डी तिवारी के शासनकाल में जनता के मुद्दों और सरोकार को धता बताकर अखबार को इन नेताओं की दासी बना देने के भी आरोप लगे। बताया जाता है कि सरोकार से समझौता करने के लिए अंबिकानंद को इन नेताओं ने लाखों की जमीन कौड़ियों के मोल भेंट कर दिए।

भड़ास तक सूचनाएं bhadas4media@gmail.com के जरिए पहुंचा सकते हैं.

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