अखिलेंद्र प्रताप सिंह की प्रेस कांफ्रेंस और दिनकर कपूर से मुलाकात

Yashwant Singh : प्रेस क्लब आफ इंडिया में आज दिनकर कपूर से मुलाकात हुई. हम दोनों इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान एक साथ सीपीआईएमएल (लिबरेशन) के होलटाइमर बने. फिर अलग-अलग मोर्चों पर काम करने के लिए अलग-अलग इलाकों की ओर रवाना किए गए. बाद में मैं तो जाने कब पार्टी से कार्यमुक्त होकर मीडिया वाला फिर भड़ास वाला बन गया लेकिन दिनकर भाई ने रास्ता नहीं बदला, हां पार्टी बदल ली. सीपीआईएमएल (लिबरेशन) में जब एक बड़ी फूट हुई तो अखिलेंद्र, लालबहादुर आदि के साथ दिनकर ने भी अलग रास्ता चुना और आजकल ये सभी लोग आईपीएफ यानि आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के बैनर तले कार्यरत हैं.

दिनकर से मुलाकात बहुत दिनों बाद हुई. मौका था प्रेस क्लब आफ इंडिया में कामरेड अखिलेंद्र के प्रेस कांफ्रेंस का. जनलोकपाल के दायरे में कारपोरेट घरानों को भी लाने की मांग को लेकर अखिलेंद्र आज से जंतर मंतर पर दस दिनी उपवास पर बैठ रहे हैं. इसी को लेकर उन्होंने अपनी बात प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से पत्रकारों के साथ शेयर की. दिनकर ने प्रेस रिलीज बनाने से लेकर पत्रकारों को बांटने तक का पूरा काम संभाल रखा था. दिनकर आज भी सोनभद्र के गरीबों-मजदूरों के बीच काम करते हैं और उनके हक के लिए उन्हें संगठित करते हैं व लड़ते हैं. दिनकर भी हम सभी की तरह आईएएस बनने का सपना लेकर इलाहाबाद पढ़ने गए थे लेकिन हो गए कामरेड. दिनकर इलाहाबाद पढ़ने आने से पहले जौनपुर के एक कालेज के छात्रसंघ के निर्वाचित अध्यक्ष थे.

प्रेस क्लब आफ इंडिया में यशवंत सिंह और दिनकर कपूर


प्रेस कांफ्रेंस करते दीपक मलिक, अखिलेंद्र प्रताप सिंह, आनंद स्वरूप वर्मा और एडवोकेट चौहान.


दिनकर कपूर की उर्जा, जोश, साहस को देखकर मैं काफी प्रभावित रहता था. आज मेरा मन दिनकर के प्रति ज्यादा सम्मान से भर गया क्योंकि ऐसे दौर में जब हर कोई अपने आराम और अपने स्वार्थ के लिए जी रहा है, दिनकर जैसे लोग खुद की बजाय समाज और देश की बेहतरी के लिए पूरा जीवन लगाए हैं.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढाई करते हुए सीपीआईएमएल (लिबरेशन) के स्टूडेंट विंग आइसा यानि आल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन में कार्यरत रहे मेरे समकालीन कई छात्र नेताओं, कल्चरल एक्टिविस्टों से आज प्रेस क्लब में मुलाकात हुई. इनमें से ज्यादातर पत्रकार हैं या इसी मीडिया के इर्दगिर्द के दायरों में हैं. अफजल, महेंद्र, अरविंद, दिनकर को देखकर इलाहाबाद के दिन ताजा हो गए. गोपाल राय भी अपने साथ उन दिनों हुआ करते थे. रंजन श्रीवास्तव भी थे. ढेर सारे साथियों के नामों-कामों की चर्चा चली. कुल मिलाकर प्रेस क्लब आफ इंडिया ने काफी पुरानी यादों को सहेजने का मौका दिया.

दिनकर ने अखिलेंद्र के दस दिनी धरने के संबंध में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को लेकर हिंदी और अंग्रेजी में जो प्रेस रिलीज जारी किया, वह इस प्रकार है….

आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह की नई दिल्ली प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता का प्रेस नोट…  

कारपोरेट घरानों को लोकपाल के दायरे में लाए बिना लोकपाल अथवा कथित जनलोकपाल कानून कमजोर, इससे महा घोटालों पर रोक नामुमकिन… 

  • काम के मौलिक अधिकार, साम्प्रदायिक हिंसा निरोधक बिल पारित कराने, कारपोरेट द्वारा कृषि योग्य भूमि की खरीद पर रोक समेत जनमुद्दों पर 7 फरवरी से दस दिवसीय उपवास का ऐलान…
  • प्रकाश करात, एबी वर्धन, न्यायमूर्ति राजेन्द्र सच्चर, वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नय्यर समेत जनांदोलन के प्रतिनिधि होंगे शामिल…

नई दिल्ली, 6 फरवरी 2014 : कारपोरेट घरानों को लोकपाल कानून के दायरे में लाए बिना भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल अथवा कथित जनलोकपाल कानून कमजोर और अपर्याप्त है, ऐसे कमजोर कानून से देश में हो रहे महाघोटालों पर रोक लगना असम्भव है। आज प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कारपोरेट घरानों व एनजीओं को लोकपाल के दायरे में लाने के लिए जंतर-मंतर पर 7 फरवरी को अपराहन 1 बजे से दस दिवसीय उपवास करने का ऐलान किया। इसके बारें में जानकारी देते हुए अखिलेन्द्र ने बताया कि इस उपवास कार्यक्रम को देश की तमाम लोकतांत्रिक, प्रगतिशील व इंसाफपसंद ताकतों का समर्थन हासिल है और पहले दिन सीपीआई (एम) के महासचिव का0 प्रकाश करात, सीपीआई के पूर्व महासचिव का0 ए0 बी0 वर्धन, न्यायमूर्ति राजेन्द्र सच्चर, वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नय्यर और सोशलिस्ट पार्टी के महासचिव डा0 प्रेम सिंह समेत जनांदोलन के प्रतिनिधि इसमें शरीक होंगे।  इस उपवास में उ0 प्र0, बिहार, झारखण्ड़, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखण्ड़, महाराष्ट्र, तमिलनाडू, कर्नाटक समेत विभिन्न राज्यों से प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।  

उन्होंने कहा कि कारपोरेट घरानों ने पूरे राजनीतिक तंत्र को भ्रष्ट कर दिया है। राजनीतिक व नौकरशाही तंत्र से गठजोड़ कायम कर वह हमारे प्राकृतिक संसाधनों व सरकारी खजाने समेत बहुमूल्य राष्ट्रीय सम्पदा की लूट में लिप्त है। सच तो यह है कि यही कारपोरेट घराने देश में भ्रष्टाचार की गंगोत्री है लेकिन इन्हें लोकपाल के दायरे में नहीं रखा गया है। इसी तरह फोर्ड फांउडेशन जैसी साम्राज्यवादी एजेंसियों के फंड से संचालित एनजीओ हमारे राष्ट्रीय जीवन में भ्रष्टाचार के खतरनाक स्रोत हैं। उनकी बढ़ती घुसपैठ के हमारे स्वंतत्र नीति निर्णयों तथा सुरक्षा के लिए गम्भीर निहितार्थ हैं। लेकिन एनजीओ कारोबार भी लोकपाल के दायरे के बाहर है।

उन्होंने बताया कि इसके साथ ही रोजगार के अधिकार को नीति निर्देशक तत्व की जगह संविधान के मूल अधिकार में शामिल करने, साम्प्रदायिक हिंसा निरोधक बिल को संसद से पारित कराने, कृषि योग्य भूमि के कारपोरेट खरीद पर रोक लगाने, कृषि लागत मूल्य आयोग को वैधानिक दर्जा देने, राष्ट्रीय भूमि उपयोग नीति व सर्वागीण जनपक्षीय खनन नीति बनाने, कारपोरेट पर टैक्स बढ़ाने, शिक्षा-स्वास्थ्य-कृषि समेत जनहित के मदों पर खर्च बढ़ाने, राष्ट्रीय वेतन नीति बनाने, महंगाई रोकने के लिए वायदा कारोबार पर रोक लगाने, ठेका व दिहाड़ी श्रमिकों को नियमित करने, अति पिछड़ों, पिछड़े-दलित मुसलमानों, आदिवासियों के सामाजिक न्याय के अधिकार, हिफाजत, इंसाफ, जम्हूरियत और कानून का राज स्थापित करने समेत आम नागरिक की जिदंगी के लिए महत्वपूर्ण सवालों को उपवास के माध्यम से उठाया जायेगा।

उन्होंने कहा कि बैगर जनपक्षिय नीतियों को लागू किए और लोकतंत्रिक अधिकारों व सामाजिक न्याय की गारंटी के सुशासन की बात महज दिखावा है। आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट एक रेडिकल तथा समावेशी जन एजेण्ड़ा पर तमाम जनतांत्रिक ताकतों को एकताबद्ध करने वाला व्याप्क राजनीतिक मंच है। हम अपने पदाधिकारियों में पचास फीसदी महिलाओं और कुल मिलाकर पच्चहत्तर फीसदी दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों व अल्पसंख्यकों समेत समाज के वंचित तबकों को नेतृत्वकारी पदों पर लाने की सागंठनिक दिशा पर काम कर रहे है ताकि सही मायने में एक लोकतांत्रिक समाज का निर्माण हो सके। इसी के तहत प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और जनांदोलनों में सक्रिय डा0 सुलभा ब्रहमे को आइपीएफ का राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व आइजी व दलित चितंक एस आर दारापुरी और प्रो0 निहालुद्दीन अहमद को राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया है। हमारे इस आंदोलन को भारत सरकार के पूर्व वित व वाणिज्य सचिव एसपी शुक्ला, पूर्व सचिव के0 बी0 सक्सेना, पीएस कृष्णनन, प्रख्यात अर्थशास्त्री अमित भादुड़ी का समर्थन हासिल है। पत्रकार वार्ता में अर्थशास्त्री डा0 जया मेहता भी उपस्थित रही।                                                                  

द्वारा जारी
दिनकर कपूर
सदस्य
राष्ट्रीय संयोजन समिति
आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ)


Press Note issued in the press conferenceaddressed by Akhilendra Pratap Singh, National Convener, All India Peoples Front at Press club, New Delhi…

Without bringingCorporate Houses within the ambit of Lokpal, the Lokpal Act or so-called JanLokpal Act is hollow, incapable to stop mega-scams

  • Declaration of10-day long fast from Feb. 7 at Jantar -Mantar on peoples issues includingFundamental Right to Work, passage of Anti-Communal Violence Bill, banningpurchase of Agricultural land by Corporate Houses
  • Prakash Karat,AB Bardhan, Justice Rajendra Sachhar, Seniorjournalist Kuldip Nayar, Senior leaders of Socialist Party and leaders of otherpeoples movements will join the programme

New Delhi, Feb. 6, 2014: Without bringing corporate houses within the ambit ofLokpal Act, the anti-corruption Lokpal Act or so-called Jan Lokpal Act isweak and inadequate. Such weak Act can never stop megascams in the country.Akhilendra Pratap Singh, National Convener, All India Peoples Front, declaredin a press conference at Press Club to sit on fast on Feb. 7 for 10 days atJantar Mantar demanding to bring corporate houses and NGOs under the ambit ofLokpal Act. Briefing about his fast, Mr. Singh said that his initiative issupported by various progressive, democratic and justice-loving forces. On thefirst day, CPI(M) General Secretary Com. Prakash Karat, veteran CPI leader Com.AB Bardhan, JusticeRajendra Sachhar, Senior journalist Kuldip Nayar, Socialist Party GeneralSecretary Dr. Prem Singh and leaders of other peoples movements will join thefast programme. Representatives from UP, Bihar, Jharkhand, Haryana, Delhi,Maharashtra, Tamilnadu, Karnataka and other parts of the country willparticipate in the programme.

He alleged that the corporate houses havecorrupted the entire polity of the country. In collusion with corruptpoliticians and bureaucrats, the corporates are busy looting our preciousnational wealth including our natural resources and the public exchequer. Infact, these corporate houses are the fountain-source of corruption in thecountry. Yet, they are not in the ambit of Lokpal. Similarly, the NGOs fundedby Ford Foundation like imperialist agencies are dangerous source of corruptionin our national life. Their increasing infiltration has serious implicationsfor our sovereign policy decision making as well as security. However theentire NGO business, too, is out of the ambit of Lokpal.

He said that the vital issues of common man`slife like inclusion ofRight to work in Fundamental Rights of theConstitution instead of Directive Principles, passage of anti-Communal violenceBill in the Parliament, banning corporate purchase of agricultural land,constitutional status to Agricultural Costs and Prices Commission, Nationalland-use policy and comprehensive pro-people mining policy, steeper taxes oncorporate houses and enhancing public expenditure on people`s welfare includingeducation, health and agriculture, formulation of National Wage policy, banningfutures trading to check rising prices, regularisation of contract and dailywage workers, ensuring social justice for extremely backward classes,backward-dalit Muslims, tribals, ensuringsafety and security, justice anddemocracy as well asrule of law will be raised prominently through thefast.

He asserted that without implementingpro-people policies and ensuring democratic rights as well as social justice,all talk of good-governance is merely an eyewash. All India Peoples Front is abroad political platform uniting various democratic forces on a radical andinclusive peoples agenda. Our organisational orientation is to bring among ouroffice-bearers, 50% women and all in all 75% leadership from deprived sectionsincluding dalits, tribals, backwards and minorities so that a truly democraticsociety is built. Dr. Sulabha Brahme, renowned economist and activist is ourNational President while SR Darapuri, dalit thinker and ex- IG Police as wellas Prof. Nihaluddin Ahmad are our National Spokespersons. Our movement enjoyssupport from SP Shukla, ex- Finance Secretary,Government of India; KB Saxenaand PS Krishnan, Ex-Secretaries, Government of India; renowned economistAmit Bhaduri. Economist Dr. Jaya Mehta was also present in the pressconference.

Dinkar Kapoor

Member

NationalConvening Committee

AIPF


भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. संपर्क: yashwant@bhadas4media.com

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