अगर दोषी पाए जाएं तो सुब्रत राय को जेल भेजो : राम जेठमलानी

सहारा ग्रुप की तरफ से जाने माने वकील राम जेठमलानी ने सुप्रीम कोर्ट से इस बात की जांच कराने की अपील की है कि उसने प्रीमैच्योर रिडेंप्शन पर इन्वेस्टर्स को कितना पेमेंट किया है. जेठमलानी ने कहा कि अगर कंपनी की इस मामले में बड़ी गलती पाई जाती है, तो कोर्ट उनके डायरेक्टर्स और फाउंडर सुब्रत रॉय को जेल भेज दे. सोमवार को सहारा, उसके डायरेक्टर्स और रॉय के खिलाफ मार्केट्स रेग्युलेटर सेबी की अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान कंपनी के सीनियर वकील राम जेठमलानी ने जस्टिस के एस राधाकृष्णन और जस्टिस जे एस खेहर की दो जज की बेंच से कहा, 'इस बात की समुचित जांच कराएं कि हमने इन्वेस्टर्स को कितना पैसा चुकाया। अगर हम गलत साबित होते हैं, मैं गुनाह कबूल कर लूंगा। फिर हमें जेल भेज दें।'

उन्होंने कहा, 'कोर्ट के आदेश का मकसद यह नहीं हो सकता कि निवेशक किसी गलती की कीमत चुकाएं।' उन्होंने यह बात इन्वेस्टर्स कहने पर पेमेंट करने के कंपनी के फैसले को सही ठहराते हुए कही। उन्होंने यह साबित करने के लिए सैट और लोअर कोर्ट के सामने पेश किए गए कई डॉक्यूमेंट्स दिखाए कि कंपनी ने सही में ये रिडेम्पशन किए। जेठमलानी ने कहा, 'यह कहना गलत होगा कि सहारा ने रिडेम्पशन किए जाने के बारे में कभी सैट/कोर्ट को सूचित नहीं किया।' उन्होंने 14 सितंबर 2011 को सैट के सामने सहारा की तरफ से पेश किए गए हलफनामों और 15 जून 2012 को सहारा की तरफ से दिए गए बयान का हवाला देते हुए यह बात कही। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से पूर्व जज बी एन अग्रवाल को अर्धन्यायिक अधिकार दिए जाने की अपील की जिनको इन्वेस्टर्स के वेरिफिकेशन प्रोसेस की निगरानी करने और उनका पैसा लौटाने का काम दिया गया है। उन्होंने कहा, किसी ने अभी तक हमारे पेमेंट को वेरिफाई नहीं किया है।'

उन्होंने सेबी पर इन्वेस्टर्स से रिलेटेड डॉक्यूमेंट्स एक्सेप्ट नहीं करके कंपनी को कोर्ट के आदेश का पालन करने से रोकने का आरोप लगाया है। सीनियर वकील सोमवार को अदालत की कार्रवाई खत्म होने तक अपनी दलील पूरी नहीं कर पाए थे। वह 2 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई पर सहारा के खिलाफ अवमानना की किसी भी कार्रवाई के खिलाफ अपनी दलील जारी रखेंगे। सेबी ने सहारा की कंपनियों के दो स्कीमों के निवेशकों को पेमेंट देने के लिए 24,000 करोड़ रुपए सौंपे जाने के कोर्ट के 31 अगस्त 2012 के आदेश को जानबूझ कर नहीं मानने का आरोप लगाते हुए सहारा के खिलाफ अदालत की अवमानना का मुकदमा चलाने की मांग की थी। सहारा की दोनों कंपनियों ने सेबी को दरकिनार करके फंड जुटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में कंपनियों की फंड जुटाने की कवायद को गलत ठहराया और सेबी के जरिए इन्वेस्टर्स का पैसा लौटाने का आदेश जारी किया। कंपनी को 15 फीसदी ब्याज के साथ डिपॉजिट लौटाने के लिए कहा गया।

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