अजब-गजब पत्रकारिता : नोएडा में पंजाब केसरी के दो-दो कार्यालय, दो-दो ब्‍यूरोचीफ

अपने अखबार में नैतिकता को लेकर लम्‍बी-लम्‍बी भाषणबाजी करने वाले अश्‍वनी कुमार के अखबार में ही सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. बड़ा अजीब अखबार है पंजाब केसरी. अक्‍सर इसके ब्‍यूरोचीफ बदलते रहते हैं तो एक ही प्रेस कांफ्रेंस में पंजाब केसरी के कई पत्रकार पहुंच जाते हैं. आयोजक चकरा जाता है कि असली कौन है और नकली कौन है. किसे रोके किसे भगाए. कोई नियम कानून न होने से गुटबाजी हावी हो जाती है. ऐसा ही मामला पंजाब केसरी, नोएडा में है.

यहां अखबार के कथित तौर पर दो-दो ब्‍यूरोचीफ हैं और दो-दो ऑफिस भी. अब इनमें कौन असली है और कौन नकली कौन पता लगाएगा. जहां विज्ञप्ति जाती है छप जाती है. एक ऑफिस को कंस्‍ट्रक्‍शन की वजह से बंद कर दिया गया है तो वो खानाबदोश स्‍टाइल में स‍ंचालित हो रहा है. फिलहाल दोनों गुट एक दूसरे को निपटाने में लगे हुए हैं परन्‍तु प्रबंधन इस मामले में कोई कार्रवाई करने की बजाय मामले को यथास्थिति छोड़ दिया है. दोनों ब्‍यूरो आफिस दिल्‍ली और जालंधर एडिशन की बात करके संचालित हो रहे हैं.

खबर के अनुसार सेक्‍टर-22 में स्थित आफिस के ब्‍यूरोचीफ अभिमन्‍यु पाण्‍डेय हैं तो सेक्‍टर 15 में मौजूद ऑफिस की ब्‍यूरोचीफ प्राची तनेजा हैं. खबर है कि सेक्‍टर 22 का ऑफिस बंद कर दिया गया है और इसका संचालन विश्‍व गुरु अखबार के कार्यालय से किया जा रहा है. हालांकि ब्‍यूरोचीफ अभिमन्‍यु का कहना है कि इसे बंद नहीं किया गया है बल्कि कंस्‍ट्रक्‍शन की चल रहा है. कुछ लोग जानबूझकर इसके बंद होने की अफवाह फैला रहे हैं. साथ ही विश्‍व गुरु के कार्यालय में ब्‍यूरो संचालन की बात भी गलत है.

दूसरी तरफ सेक्‍टर पन्‍द्रह में संचालित हो रहे ऑफिस की ब्‍यूरोचीफ प्राची तनेजा हैं. इस ब्‍यूरो के साथ धीरेंद्र अवाना, पवन यादव, दीपक राय काम कर रहे हैं. इन लोगों को काफी समय से सेलरी भी नहीं मिली है. इस पक्ष का कहना है कि प्रबंधन के रवैये के चलते इस तरह की स्थिति पैदा हुई है. प्रबंधन जानबूझकर एक दूसरे को लड़ना चाहता है. वैसे बताया जा रहा है कि जिस तरह की स्थिति बनी हुई है, उससे परेशान पत्रकार अब पंजाब केसरी छोड़ने वाले हैं.

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