अध्यात्म भी अंधविश्वास ही है, बस कान-हाथ घुमाकर पकड़ने से ज़्यादा कुछ नहीं

Jitendra Naruka : अध्यात्म, ध्यान, अपनी अंतरात्मा में ईश्वर खोजना या शांति खोजना सब अंधविश्वास के ही रूप हैं.. अक्सर कुछ तर्क को स्थान देने वाले लोग ये कहकर अपने आप को उसी अंधविश्वास मे लीन कर लेते हैं, 99% सवालों को जानने वाला मनुष्य 1% सवाल जो नहीं जानता उनकी खोज मे या यों कहें अपने वश से बाहर के दुखों पर पार पाने को हमेशा ग़लत तरीके के असफल प्रयास मे उलझ जाते हैं या उलझा दिए जाते हैं, हम अपनी अंतरात्मा मे जब ईश्वर या शांति या उपाय ढूंढते हैं, सिवाय अंधकार और गहराने के कुछ प्रकाश या जवाब नहीं मिलता अंदर खोजने को कुछ है ही नहीं कम से कम ईश्वर, सवालों का जवाब, दुखों का अंत तो कदापि नहीं…

मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि किसी ने कितना भी वक्त अंदर झाँकने या तथाकथित आध्यात्म मे बिगाड़ा हो उसे कुछ नहीं मिला ना मिलेगा… आत्मा जैसी कोई चीज़ है ही नहीं जो अंदर कुछ मिलेगा, बल्कि भटकाव ही होगा, दुनिया से कटने और अपने लिए खोजने के स्वार्थी स्वभाव में बढ़ोतरी के अलावा… हमारे शरीर मे सिर्फ़ दिमाग़ है जो कुछ जान सकता, महसूस करता है, अच्छे बुरे विचारों का सॅंचय करता है.. दिल का सोचने से बस इतना सा रिश्ता है कि कुछ ज़रूरी कारण से वो भावों के साथ अधिक कम धड़कना ज़रूर कर सकता है.. महसूस नहीं… जो मिलेगा बाहरी जगत से, निरन्तर अध्यन से हमारे आसपास वैज्ञानिक दृष्टि कोण से सीखने से…

आपको अंदर जाना है तो कुछ यों जाइए… शरीर- मांस पेशियाँ- उत्तक – कोशिका- कोशिका केंद्र- गुण सूत्र- जींस- और उनसे जीव का निर्धारण, अब उस जीव में जान कहां से आई, उस हर जीव में जो चाहे हाथी हो एक कोशिका से ही बनता है उसमें आगे चलकर धड़कन कब डल गयी, उस सवाल को अनसुलझा छोड़ दो, उसका जवाब मिलेगा तो इस रास्ते से अंदर जाने पर ही मिलेगा, जीन और उससे जीव निर्धारण तक इसी रास्ते से मालूम चला और भविष्य मे आगे चलेगा या हो सकता है कभी सबकुछ ना सुलझे…. लेकिन उस अंतरात्मा के रास्ते तो 1 इंच ना खिसके ना खिसकोगे क्योंकि अध्यात्म, अंधविश्वास ही है.. बस कान हाथ घूमाकर पकड़ने से ज़्यादा कुछ नहीं……

    Samar Bhattacharjee AP SE SAHAMAT HUN.
 
    Jitendra Naruka धन्यवाद Samar Bhattacharjee जी
 
    Anmol Rock बुल्कुल सही है

    Mahesh Nagda पूर्णत: सहमत कामरेड
 
    Jitendra Naruka धन्यवाद Anmol Rock जी, साथी Mahesh Nagda जी
 
    Ajay Neelam Shukla Hum aapse 50% sahmat hai.adhatm apni jagah aur andhviswas apni jagah.jab tak vigyan aur adhyatm sath sath nahi aate tab tak satya samne aane vala nahi hai.bina vigyan ke adhyatm adhura hai aur bina adhyatm ke vigyan vinash ka karan hee hai.
   
    Jitendra Naruka आप सहमत असहमत होने का हक़ रखते हैं, पर अंदर कुछ मिला ना मिलेगा… सब अनुभव बाहर उपलब्ध जानकारियों पर आगे बढ़ने से ही मिलेगा और आध्यात्म का विज्ञान से कोई रिस्ता नहीं
   
    Neha Yadav आध्यात्म मेरे मन मे महादेव Serial देखकर जागता है पर घर से बाहर निकलते ही भूखे गरीब लाचार बच्चे देखकर तुरंत गायब भी हो जाता है

    Jitendra Naruka चीर परिचित अंदाज वाली नेहा जी पेपर कैसा रहा
    
    Samar Bhattacharjee SAMAJ BABASTHA KAISE KAISE BADLA,ADIMSAMAJ SE LEKAR ABTAK .BHAGWAN KAB AYA ,KAISE AYA,KEYO AYA ISKA ALOCHANA HONA CHAHIYE.

    Neha Yadav बहुत बढिया

    Jitendra Naruka बधाई

    Jitendra Naruka प्रकाश है तो अंधकार है।
    सफेद है तो काला है।
    सत्य है तो झूठ है।
    निर्मल है तो कठोर है।
    प्रेम है तो नफरत है।
    सीधा है तो उल्टा है।
    न्याय है तो अन्याय है ।
    समझदारी है तो मुर्खता है।
    बुद्धिमता है तो पागल पन है।
    और सिर्फ इंसान ही बुद्धि मान है इसलिए पागल पन विद्यमान है।
    इंसान मे ही समझदारी है इसलिए मुर्खता भी उसी पर हावी है।
    और ईश्वर बुद्धिमान मनुष्य की मुर्खता मात्र है। धर्म पागलपन है।
    ……..न.रुका

    Rai Prahlad Pareek ब्रह्म और आत्मा का तो अविष्कार ही ठगी की निरंतरता के लिए किया गया था ।

    Jitendra Naruka ईश्वर मनुष्य का डर है, और धर्म बुद्डीमान मनुष्य की खुरापात है, हांकने की लोगों को
 
    Jitendra Naruka बिल्कुल Rai Prahlad Pareek साहब आपसे सहमत

    Sushil Gulia GURU JEE AATMA HOTI H OR आध्यात्म BHI… M N SAKSAAT AANKHO S DEKHA H…See Translation

    Jitendra Naruka चेले जी आप तो बने ही मेरी ही वाट लगाने को

    Sushil Gulia GURU JEE KABHI AATMA S MILNA HO TO HUM S CONTACT KERNA… MUFT M MILWA DEGE AAPKO TO .. KOI CHARGE NHI

    Jitendra Naruka हा हा हा

    Sushil Gulia GURU JEE Y KTU STAY H … M N FACE KIYA H .. JAB M 14 SAAL KA THA TAB

    Jitendra Naruka सुनाओ, हारना तो गुरु को ही है, स्टेटस हटा लूँगा आप कहोगे तो

    Sushil Gulia HAAAAAAAAAAAA… NA GURU JEE NA.. BUT M N JO KHA WO MERE SATH BITA H

    Sushil Gulia AB GURU JEE GHAR JANA H .. KAL AAP S TARK VITERK KREGE

    Jitendra Naruka चलिए कल तक हार टली मेरी हा हा हा

    Rambilas Sharma Ye sab kuchh jo hme dikhai deta h.sansar kis se bna h.usi ko isver .God.rab ….kha h .uske siva koi nhi. Sab matko m ek hi pani h.bas matke alg alg h .per hai ek hi miti k…. Sab usi ek ka vistar h.hum m hamara kuchh bhi to nhi bas vhi h.

    Jitendra Naruka कहा गया सब तुक्का, जिसके साक्ष्य हैं बस वो ही सत्य
 
    Adesh Dixit बहुत उम्दा नरुका जी। ….
 
    Jitendra Naruka धन्यवाद Adesh Dixit जी

    Renu Jain sirji jb kisi me bhut aata h to wo hmare samne nhi aata……hanuman ji aate h wo bhi samne nhi aate…..chamtkar hota h wo bhi samne nhi hota…….sapno me bhagwan hamare nhi aate…..jo bhi kutch hota h …hmesha third person ke sath……..esi se smjh jana chahiye ki ye sb paglpan h

    Jitendra Naruka बिलकुल रेनू जी मान लिया मैंने इश्वर पा भी लिया अथक अध्यात्म से तो… क्या मिला जो मिला मुझे मिला मै उससे किसी से मिलवा नहीं सकता क्योंकि आज तक तो किसी ने मिलाया नहीं, तो भी सबकुछ स्वयम हीत के लिए हुआ मैंने दुनिया को क्या दिया… बस इसी तरह उलझते रहो आज तक किसीको नहीं मिला सिर्फ इश्वर के होने की बात की है साक्ष्य किसी ने नहीं दिए।

    Adesh Dixit इश्वर के नाम पर ठगना, अन्धविश्वास, पाखंड जैसी हरकत की जा सकती हैं। क्यूंकि जो ये सब करता है उसे मालूम है की इश्वर है ही नही तो फिर डर काहे का।See Translation

    Jitendra Naruka बिलकुल ऐसे लोग ही धर्म से दूर हैं लूट मचाये हैं जो धर्म का गाना गाते हैं ठेकेदार हैं

    Adesh Dixit यही लोग फिर धर्म की आड़ में फासीवाद फैलाते हैं।

    Gulshan Kumar Ajmani sharab se chhhutkaara to mil sakata hai kintu is dharam aur adhyatma se koi bacha nahin sakata. Vaise yeh adhyatma vale to sabse jyada bhautik vastuaon, shareerik anand aur dhan daulkta ke pher men rahate hain. udaharan ke liye asha raam bapu.

    Rambilas Sharma Sansar .chand tare surj….yha tak ki ek miti ka kan kese bna.kis se bna .kiya apne ap apne ap kuchh nhi hota.sab per kis ka kantrol h……usi ko nature kha h .usi ko rab .isver.god.kha h.me jesa apne ander kuchh bhi nhi…….
    Sabdo me is bat ko koi kah nhi ska …nank.kbeer.rvidas.pipa.namdev.budh.mahaver.rhim.freed ……kiya ye sab juth bolte h.hum sab sache h.bina sbut k………. Mahsus kro.koi to h apne ander jisko hum me kahte h…galti ho gai ho to maf krna sir g.

    Jitendra Naruka बिना साक्ष्य के किसी भी बात को इश्वर मान लेना, जवाब नहीं मिला तो चमत्कार, चमत्कार तो आप और मै दूर बैठे बात कर रहे है ये भी है लेकिन विज्ञानं का, जिसका जवाब नहीं मिले उसे ईश्वरीय मान लेना कहाँ की समझदारी और मान भी लिया तो क्या तीर मार लेंगे मिला ना मिलेगा इश्वर किसी को।

    Rambilas Sharma Kis adar per hum kah sakte hai ki nature .ya rab nhi h.ye sab jo dikhata h.ya hum sab nature hi h

    Jitendra Naruka आप रब और प्रकृती को मिलाओ नहीं, आधार सिर्फ साक्ष्य हैं आज तक इश्वर को कोई प्रस्तुत नहीं कर पाया, प्रकृती अपने आप संचालित है सांप को आप नागराज मानो पूजो लेकिन वो बहुत कमजोर जानवर जो भाग कर शिकार नाही कर सकता अपने लजीज मांस को बचाने के लिए स्वत जहर से सुसज्जित हो गया प्रकृती के जीवो के विकाश के डार्विन के सिद्धांत से।

    Jitendra Naruka अगर आप मुझसे हल चाहते हैं तो असम्भव है। बस मै आपको दावे के साथ कह सकता हूँ की इश्वर ढूंढना खुद को भटकाना मात्र है। आप जितना खोजोगे उलझोगे, अच्छा ये ही है जो है उसी आधार पर जीवन जियें उसे और नजदीक से जानने को, आभास के पीछे ना भागें। समाधान कभी नहीं मिलेगा उस रास्ते पर जो सिर्फ कल्पना है। समाधान विज्ञानं ही देगा, इश्वर है भी तो विज्ञानं ही खोजेगा आप ऐसा मान सकते हैं।

जितेंद्र नरुका के फेसबुक वॉल से.

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